Wednesday, 23 December 2015

पीएम नरेंद्र मोदी रुस रवाना,एक और विदेश यात्रा


संदीप कुमार मिश्र : सोलहवीं लोकसभा के छठे सत्र का समापन हो गया।सियासत में खुब गर्मी रही।सड़क से लेकर संसद तक जमकर हंगामा देखने को मिला।खैर देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रूस की यात्रा पर रवाना हो गए।अपने दो दिन की यात्रा पर गए पीएम मोदी मास्को में 16वें भारत-रूस सालाना शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से पीएम मोदी को आज रात एक निजी रात्रिभोज भी दिया जाएगा। सालाना शिखर सम्मेलन का शुभारंभ 24 दिसंबर यानी कल होना है।आपको बता दें कि दोनों देशों के मुखिया क्रेमलिन में भारत और रूस की कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉस्को के एक्सपो सेंटर में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।पीएम मोदी के इस दौरे में अनेकों द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। जिसमें व्यापार से जुड़े कई समझौते शामिल हैं। पीएम के रूस यात्रा में ना सिर्फ बड़े रक्षा सौदे होने उम्मीद जताई जा रही है बल्कि इस दौरे से मेक इन इंडिया योजना को भी बल मिलेगा।ऐसा इसलिए कि ज्यादातर रक्षा सौदे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारतीय कंपनियों के साथ भारत में ही हथियारों के निर्माण के लिए हो सकते हैं।जिससे बारत के विकास यात्रा को गति मिलेगी।

अपने रुस यात्रा पर जाने से पहले जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो रूस और भारत के बीच संबंधों के हो रहे विकास से बहुत खुश हैं,जिसके लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन संबंधों के विकास में खास भूमिका निभाई है।ये बातें अपने रूस दौरे से पहले वहां की समाचार एजेंसी तास को दिए इंटरव्यू में कही है। इस इंटरव्यू में मोदी जी का कहना था कि 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद से ही भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी बनी हुई है, एक दूसरे पर नायाब आपसी विश्वास और एकजुटता जिसकी विशेषताएं हैं।रूस ने भारत के औद्योगीकरण और अंतरिक्ष सहित कई अन्य क्षेत्रों में प्रगति के लिए योगदान दिया है। मैं हमारे मौजूदा संबंधों से बहुत खुश हूं। रूस दुनिया का पहला देश है जिसके साथ हमने रणनीतिक साझेदारी के बारे में एक औपचारिक समझौता किया था जो बाद में सामरिक साझेदारी पर एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त समझौता बन गया। मैं भविष्य में भी विकास के स्पष्ट संकेत देख सकता हूं। विज्ञापन और प्रौद्योगिकी, रक्षा प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा और कई अन्य क्षेत्रों में रूस की उपलब्धियां विशाल भारतीय बाजार, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अपनी युवा आबादी की जरूरतों के लिए पूरक बन रही हैं।सैन्य-तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में हमारे "क्रेता-विक्रेता" के पारंपरिक संबंध साझेदारों वाले रिश्तों में बदल गए हैं। अब हम ब्रह्मोस मिसाइलों, लाइसेंस के आधार पर एसयू-30 एमकेआई विमानों और टी-90 वर्ग के टैंकों का उत्पादन भारत में करते हैं। हम "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम के ढांचे में भी सैन्य उपकरणों और उनके घटकों का भारत में संयुक्त रूप से उत्पादन करते हैं।

अंतत: कहना गलत नहीं होगा कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री एक के बाद एक लगातार विदेशी दौरे कर रहे हैं,उससे देश में विकास की रफ्तार को बल तो मिलेगा ही साथ ही विदेश नीति मजबुत होगी।खैर देश का विकास जरुरी तो है ही,लेकिन उतना ही जरुरी है कि देस के अंदर भी हो रही हलचलों पर विशेष ध्यान दिया जाए,जो भ्रस्टाचार के रुप में है,गरीबी के रुप में है,जिसपर इमानदारी और सुशासन का गाढ़ा रंग लगाने की जरुरत है। जिससे कि 125 करोड़ के भारत को ये यकिन हो सके कि जिन कंधों पर उन्होने देश की जिम्मेदारी दी है..वो गर्व से कह सकते हैं कि उनका जननायक,प्रधानसेवक कोई और नहीं नरेंद्र मोदी जी है।जिसपर देश गर्व करता है।