Tuesday, 1 December 2015

जनलोकपाल बिल या महा-जोकपाल बिल...?


संदीप कुमार मिश्र :  दोस्तों जरा अतीत में चलते हैं और उन दिनो को याद करते हैं,जब देश के हर यूवा की जुबान पर पर वन्दे मातरम और भारत माता की जय का उदघोष देश के कोने कोने में सुनाई पड़ रहा था।जन जन में आसा उम्मीद की लहर दौड़ पड़ी थी,कि अंग्रेजों से आजादी मिले तो छह दशक से भी ज्यादा का वक्त बीत गया लेकिन एक आजादी और चाहिए थी,जिसके लिए जनमानस आज सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठा रहा है।अतीत की वो लड़ाई थी भ्रस्टाचार के खिलाफ,महंगाई के खिलाफ,घूसखोरी के खिलाफ,दलाली के खिलाफ,हक की लड़ाई के लिए,स्वाभिमान पाने के लिए।जी हां दोस्तों ये लड़ाई थी जनलोकपाल के लिए...।

इस लड़ाई का शुभारंभ किया था अन्ना हजारे ने..जो जनलोकपाल की अलख जगाते गए और कारवां आगे बढ़ता गया...आपको याद होगा कि जिस प्रकार 1857 की आजादी का पहला शंखनाद हुआ और मंगल पाण्डे की अगुवाई में देश के अन्य हिस्सों के साथ ही मेरठ छावनी से दिल्ली चलो की आवाज उठी थी...ठीक कुछ ऐसा ही कुछ हुआ जब एक सशक्त जनलोकपाल की मांग को लेकर यूपीए की गलत नीतियो के खिलाफ लोग सड़क पर उतरे र देस की राजधानी दिल्ली आंदोलनकारियों से भर गयी।तमाम विश्लेषकों ने तो यहां तक कह दिया कि अन्ना की अगुवाई में किया जा रहा ये आंदोलन इतिहास में ले जाने को मजबूर करता है,क्योंकि गांधी जी जिस प्रकार अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का सहारा लेकर आंदोलन करते थे,कुछ ऐसा ही नजारा दिल्ली की सड़कों पर देखने को मिल रहा था।

अब इस आंदोलन में अनेको लोग जुड़े...कुछ नेक नियती से तो कुछ स्वार्थ से,जिसका परिणाम निकला की आंदोलन के समय जनलोकपाल तो नहीं आया लेकिन एक शानदार राजनीतिक पार्टी का उदय अवश्य हो गया।बड़े ही कम समय में पार्टी ही नहीं बनी दिल्ली की सत्ता पर काबीज भी हो गई।उम्मीद ही नहीं जनता को विश्वास भी था कि नई पार्टी जनलोकपाल के मुद्दे को लेकर सत्ता पर काबीज हुई है तो ये जनलोकपाल जरुर आएगा।पार्टी तो आप समझ ही गए होंगे...जी हां आप...यानि आम आदमी पार्टी....अरविंद केजरिवाल की पार्टी...।अब साब मैं इमानदार,मेरी पार्टी इमानदार,मेरे लोग इमानदार का नारा देने वाले अरविंद केजरिवाल की पार्टी से कुछ ऐसे लोग पार्टी से निकल गए जो पार्टी के संस्थापक थे,और जनलोकपाल का वास्तविक रुप रेका तैयार किए थे,निस्चित तौर पर प्रशांत भूषण जी,योगेंद्र यादव,आनंद कुमार जैसे प्रकांड बुद्धीजिवियों के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता।लेकिन आप जानते हैं कि इनके साथ आम आदमी पार्टी में क्या हुआ।

अब जबकि दिल्ली के इतिहास में अरविंद केजरिवाल की पार्टी आप ने इतिहास रच कर प्रचंड जनादेश हासिल किया तो जनलोकपाल विधान सभा में लेकर आई...विपक्ष तो शुन्य ही था लेकिन कभी पार्टी के खास रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जो एक साल पहले तक जनलोकपाल पर सहयोगी की भूमिका में थे वो अब विरोधी हो गए हैं।आप जानते हैं कि पहले ये चेहरे कांग्रेस और बीजेपी का विरोध करते थे लेकिन घर फूटा तो विरोध आपस में ही घर से सड़कों पर आ गया।

दरअसल योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और विधायक पंकज पुष्कर जनलोकपाल एक्ट 2015 का विरोध दिल्ली विधानसभा के बाहर करते हुए कहा कि ये बिल जनलोकपाल नही बल्कि महा-जोकपाल बिल है।स्वराज अभियान के प्रशांत भूषण का कहना है था कि दिसंबर 2013 में केंद्र का लोकपाल आया था, तब अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि इससे मंत्री तो क्या चूहा भी जेल नहीं जाएगा।लेकिन अब केजरीवाल ने जनता के साथ धोखा किया है।इतना ही नहीं प्रशांत भूषण ने तो अरविंद केजरीवाल को खुले मंच पर जनलोकपाल को लेकर बहस की चुनौती भी दी। क्योंकि भूषण का कहना था कि जनलोकपाल बिल का मसौदा विधानसभा में रखे जाने से पहले उसे आप की वेबसाइट पर नहीं डाला गया और ना ही लोगों से सुझाव मांगे गए।

लेकिन दोस्तों अतिउत्साह में आकर आम आदमी पार्टी के समर्थक विधान सभा में ढोल पीटते नजर आए। लेकिन विपक्ष ने जो सवाल उठाए उन पर भी गौर करना लाजमी है,जैसे कि आम आदमी पार्टी जो कानून बनाएगी उसमें पारदर्शीता बरतेगी।जनलोकपाल के ड्राफ्ट को वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला गया।क्यों सीधे विधानसभा में रखा गया ? सवाल उठता है कि क्या जनलोकपाल लोकसेवकों के साथ ही मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों की भी जांच करेगा..?

मतलब साफ है कि जब प्रशांत भूषण ने दिल्ली सरकार के जनलोकपाल विधेयक को महा- जोकपालकहा तो बौखलाई आम आदमी पार्टी (आप) ने शांति भूषण और प्रशांत भूषण को भाजपा में शामिल हो जाने की सलाह दे दी। वहीं आप ने ये दावा किया कि यह विधेयक दिल्ली में आप की सत्ता के पहले दौर यानि 49 दिनों के दौर में पेश किए गए विधेयक के समान ही है।

अंतत: दिल्ली की राजनीति में आप पार्टी का आगमन जनलोकपाल को लेकर ही हुआ था,आम आदमी के हक की लड़ाई के लिए हुआ था,लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी  सत्ता पाते ही आम से खास हो गए।अब तो मोटर,बंगला सब कुछ चाहिए जो किसी जमाने में अछुत हुआ करता था।खैर समय की मांग और जनता की जरुरत है कि जनलोकपाल पूरी इमानदारी से पास हो और वही पास हो जिसकी वजह से आम आदमी पार्टी पैदा हुई।