Friday, 4 December 2015

केजरीवाल का तोहफा : दिल्ली विधायकों की सेलरी 235000



संदीप कुमार मिश्र : अच्छे दिन...अच्छे दिन...अच्छे दिन.......किसके आए..? जानते हैं दोस्तों...नहीं तो जान लिजिए..देश के अच्छे दिन आए ना आए लेकिन दिल्ली के विधायक जी के अच्छे दिन आ गए।जी हां अरविंद केजरीवाल जी ने दिल्ली के विधायको की सेलरी तकरीबन तीन गुना बढ़ाने का प्रस्ताव विधान सभा में पास किया है।अब लगता है कि मौज है गुरु नेतागीरी में।बस नेता जी अरविंद केजरीवाल जैसा हो।क्योंकि इमानदारी का तमगा उन्हीं के पास है।

दरअसल राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने विधायकों के वेतन में भारी बढ़ोतरी वाले बिल को विधानसभा में पास किया है।विधानसभा में पास होने के बाद इस बिल को अब केंद्र सरकार के पास वाया उपराज्यपाल के माध्यम से भेजा पास जाएगा ।वेतन बढ़ोतरी बिल को केंद्र सरकार अगर मंजूरी दे देती है तो विधायक जी का वेतन और भत्ता कुल मिलाकर 2,35000 रुपया हो जाएगा जो अभी 88000 रुपये है। कई महिनों से विधायक वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे।जिसके लिए शानदार दलिलें दी जा रही थी कि लोगों को चाय पिलानी पड़ती है,वहीं  बिजली और टेलीफोन बिल भी ज्यादा आता है। विधानसभा क्षेत्र में शादीयों में भ जाना पड़ता है,और उपहार भी देना पड़ता है।आपको बता दे कि दिल्ली के विधायकों का वेतन बढ़ने के बाद मासिक वेतन जो पहले 12 हज़ार था वो अब बढ़कर 50 हज़ार हो जाएगा। वहीं विधानसभा में उपस्थित रहने के लिए जहां प्रतिदिन 1000 रुपये मिलते थे वो अब बढ़कर 2000 रुपये  हो जाएगा। सूसे मजे की बात है कि यात्रा भत्ता जो पहले 50 हज़ार था,उसे अब बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की पैरवी की गई है ।
इतना ही नहीं अब तो विधायक जी विदेश दौरा भी जमकर कर सकेंगे।साथ ही विधायकों को लैपटॉप, मोबाइल, प्रिंटर आदि के लिए पूरे कार्यकाल में एक लाख रुपया, अपने विधानसभा क्षेत्र में ऑफिस किराए पर लेने के लिए 25 हज़ार रुपया महीना, ऑफिस स्टाफ के वेतन के लिए 70 हज़ार रुपया महीने की बात कही गई है।दिल्ली में विधायकों के बढ़े बिल में यात्रा भत्ता भी 6 हज़ार से बढ़ाकर 30 हज़ार रुपये कर दिया गया है और टेलीफोन बिल जो पहले 8 हज़ार था उसे अब 10 हज़ार कर दिया गया है। अब तो दोस्तों दिल्ली के विधायक जी छोटी गाड़ी नहीं बल्कि बड़ी गाड़ियों में दौरा करते नजर आएंगे।क्योंकि गाड़ी खरीदने के लिए 4 लाख रुपये की जगह अब 12 लाख रुपये का लोन दिए जाने की सिफारिश नए बिल में की गई है।

अब साब महंगाई की मार तो विधायक जी पर भी है ना और ये बात केजरीवाल साब जानते हैं,भई परिवार उनका भी है...दाल और प्याज की जरुरत तो उन्हें भी है ना।लोगों की मदद करना,आपिस का खर्चा,चाय पानी,आदि...आदि..आदि।अब भ्रस्टातार को दूर करने के लिए सेलरी तो च्छी चाहिए ही...क्यों..? फिर भी जनाब सवाल तो उठेंगे ही कि आकिर इतनी सेलरी बढ़ानी जरुरी थी क्या ?  सबसे बड़ा सवाल तो इसी बात पर उठेंगे कि गाड़ी खरीदने आप जी ने चार लाख की बजाय 12 लाख तक लोन की बढ़ोतरी की सिफारिश की है।अरे भई जरुरी है बड़ी क्या..? छोटी गाड़ी से भी तो काम चल सकता है। भुल गए क्या जनाब उन दिनो को जब आप कुछ और ही कहा करते थे।दिल्ली की जनता को सब याद है अरविंद केजरीवाल जी कि जब आप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए रामलीला मैदान मेट्रो से गए थे तो एक बार ये चर्चा होने लगी थी कि आप ना तो सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करेंगे ना ही बंगला और ना ही अन्य सरकारी सुविधाएं।लेकिन साब आप तो आम आदमी है सो आम आदमी पार्टी के विधायक को महंगी गाड़ी की जरूरत क्यों आन पड़ी ?साब अचंभा तो तब होता है कि आपने  विधायकों की यात्रा के लिए 200000 रुपया की सिफारिश की।सवाल तो उठेंगे ही,कि ऐसी कौन सी यात्रा करनी है जो 2 लाख से कम में नहीं होगी...।

दोस्तों आपको सन 2012 की अरविंद केजरीवाल साब की एक बात याद दिलाना चाहता हूं जब जनलोकपाल नहीं पास हो पाया था तो केजरीवाल साब बहुत दुखी थे और कहा था कि राजनेताओं की आनाकानी से 44 सालों में लोकपाल नहीं पास हो पाया लेकिन अगर वेतन में बढ़ोतरी की बात होगी तो पांच मिनट में सर्वसम्मति बन जाएगी। दोस्तों ये बातें अरविंद केजरीवाल साब ने किसी जमाने में कही थी जब सत्ता नहीं थी।उनकी आम आदमी वाली छवी पर सवाल यह उठता है कि इस प्रकार का डबल स्टैण्डर्ड क्यों?

अंतत: दोस्तों समय ने ऐसी करवट ली कि केजरीवाल साब खांटी राजनेता बन गए।अब तो ऐसा लगने लगा है कि कोई भी बात कह कर मुकरने के वो एक्स्पर्ट हो गए हैं। तभी तो जहां वो दूसरी पार्टीयों पर जनलोकपाल बिल पेश ना करने का आरोप मढ़ते थे और सेलरी पर सर्वसम्मति की बात करते थे,वही जनाब अरविंद केजरीवाल जी ने जनलोकपाल बिल सिर्फ पेश किया जो अभी पास भी नहीं हुआ है, उससे पहले ही मात्र पांच मिनट में ही वेतन बढ़ोतरी का बिल विधानसभा में पास कर दिया।मुख्यमंत्री जी जनता तो पूछेगी ही...क्योंकि असल आम आदमी तो वही है,और आपने जिस मतलब से जनलोकपाल का सहारा लिया था मतलब नेता बनने का...अब वो मसकद तो पूरा हो ही गया ना..।।अब कहना गलत नहीं होगा कि मौज है गुरु नेतागीरी में...।