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Tuesday, 16 October 2018

48 साल के युवा राहुल गांधी की विगत कुछ वर्षों की शानदार उपलब्धियां



संदीप कुमार मिश्र: इस देश के 48 साल के युवा नेता राहुल गांधी जी ने देश के युवाओं के नेतृत्व का बीड़ा उठाया है।यकिनन राहुल जी ने अब तय कर लिया है कि कुछ कर के मानेगे।जिसकी शुरुआत उन्होने कश्मीर से कुछ साल पहले ही कर दी थी।परिणाम आपके सामने है।कश्मीर के युवा नेता कहे जाने वाले उमर अब्दुल्ला का राहुल जी ने बाकायदे राजनीतिक करियर खत्म कर दिया।उसके बाद यूपी को ये साथ पसंद है कहते हुए अखिलेश यादव को हम साथ साथ हैं कहकर लेकर आगे बढ़े।
परिणाम क्या निकला कि एक वास्तविक युवा नेता का करियर खत्म कर दिया।फिर राहुल बाबा दौड़ते हुए गुजरात पहुंचे,जहां राजनीति में उभर रहे तीन युवा नेता अल्पेश,जिग्नेश और हार्दिक इन तीनो का करियर खत्म करने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं।
ऐसे में जिस भी युवा नेता को राजनीति में टाइम पास के लिए आना है वो राहुल जी के साथ आएँ और मौके का लाभ उठाएं क्योंकि 2019 आने वाला है।देश में चुनावी सरगर्मी बढ़ चुकी है।जनेउ,धोती से लेकर रोली, मोली,और माला प्रयाप्त मात्रा में राहुल जी लेकर चल रहे हैं साथ ही कई ट्रक टोपी और पगड़ी भी मंगवा लिये हैं।समयानुसार बदलने के जो काम आएँगे।इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी।

Monday, 15 October 2018

जीवित्पुत्रिका व्रत( जीतिया,जिउतिया) की क्या है कथा और महत्व ?





विकास गोयल: हमारे सनातन हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत और त्यौहारों को मनाने का विशेष महत्व, उद्देश्य होता है।क्योंकि हमारे सभी तीज त्योहार सामाजिक कल्याण के साथ ही व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े होते है ।ऐसा ही एक त्योहार संतान की रक्षा के लिए माताएं रखती हैं जीतिया व्रत का कहा जाता है। आश्विन मास की कृष्ण अष्टमी तिथि को माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, सेहत और दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं।इस व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं। कुछ क्षेत्रों में यह व्रत जिउतिया व्रत भी कहा जाता है।

आइये जानते हैं क्या है जीवित्पुत्रिका व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार जीतिया व्रत का संबंध महाभारत से माना जाता है।कहते हैं कि अपने पिता की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिये अश्वत्थामा पांडवों के वंश का नाश करने के अवसर ढूंढता रहता था । ऐसे में एक दिन अवसर पाकर अश्वत्थामा पांडव समझकर सोए हुए द्रौपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी। जिसका बदला लेने के लिए अर्जुन ने अश्वत्थामा को बंदी बना लिया और उससे उसकी दिव्य मणि छीन ली।जिससे अश्वत्थामा का क्रोध और बढ़ गया और उसने उत्तरा की गर्भस्थ संतान पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिसे रोक पाना किसी के लिए भी असंभव था।

ऐसे में भगवान श्री कृष्ण ने अपने समस्त पुण्यों का फल उत्तरा को समर्पित किया। जिससे उत्तरा के गर्भ में मृत संतान को जीवन मिल पाया। मृत्योपरांत जीवनदान मिलने के कारण ही इस संतान को जीवित्पुत्रिका कहा गया।आपको बता दें कि यह संतान कोई और नहीं बल्कि राजा परीक्षित ही थे।तभी से आश्विन अष्टमी को जीवित्पुत्रिका (जीतिया, जिउतिया) व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।
ऐसी और भी कई कथाएं हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है।जिनका मूल उद्धेश्य संतान के लिए माताओं का वात्यल्य है कि मां कैसे अपनी संतान के लिए निरंतन उन्नति और तरक्की का मार्ग प्रशस्त करने लिए ईश्वर से कामना और प्रार्थना करती हैं।

Wednesday, 10 October 2018

गुजरात किसी के बाप का नहीं सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों का है



संदीप कुमार मिश्र: गुजराती इस बात को भली भांति जानता है कि अप्रवासियों का क्या महत्व है,क्योंकि विश्व के तमाम हिस्सों में गुजराती काम धंधे के लिए अप्रवासी के रुप में रह रहे हैं । काम करना और करवाना ये गुजराती बहुत ही अच्छे तरीके से जानता है।इसलिए गुजरात से किसी गैर गुजराती को पलायन के लिए मजबूर किया जाए और खासकर उस कामगार बिरादरी को जिनसे अर्थव्यवस्था और गुजरात संबृद्ध होता है।ऐसा कतई नहीं हो सकता।

मतलब साफ है राजनीति।सत्ता की छटपटाहट क्या होती है ये बात देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस से बेहतर कौन जान सकता है।सत्ता पाने की यही तड़प देश को एक फिर एक ऐसी आग में झोंकने का काम करने की दिशा में आगे बढ़ रही जैसे 1984 में देश झेल चुका है,इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है।एक बार फिर कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

फूट डालो राज करो की नीति पर एक बार फिर काम शुरु हो चुका है और इसके खिलाड़ी और माता पिता कौन रहे हैं देश भलीभांति जानता है।नहीं तो क्या कारण है कि गुजरात जैसे शानदार,शांतिप्रिय राज्य में ऐसी घटना हो जहां से खुद गुजरातीयों का भारी भरकम नुकसान हो।

मेरे परिवार के और मेरे तमाम रिश्तेदार गुजरात में बड़े ही शान से रहते हैं।शानदार काम करते हैं और यहां तक कहते हैं कि भई यहां से तो घर लौटना अब मुश्किल है क्योंकि काम धंधे और रोजगार के लिए गुजरात से बढ़िया देश ही नही विश्व में कोई जगह नहीं है।अहमदाबाद रह रहे मेरे एक भाई ने कहा कि ये सब जो हो रहा है वो कांग्रेस प्रायोजित है,वहीं वापी में रहने वाले एक बड़े भाई ने स्पस्ट कहा कि ये सिवाय राजनीति के कुछ नहीं और यही कांग्रेस की DNA है वरना क्या कारण है कि जो इतने सालों में नही हुआ वो अचानक हो रहा है।एक अन्य बड़े बुद्धिजीवि भले मानुस ने यहां तक कह दिया कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है,संभव है कि 2019 आते-आते कांग्रेस देश के गली-गली में बैमनष्यता का भाव पैदा कर देगी।।

नहीं तो क्या कारण है है कि कांग्रेस का पाला हुआ गुर्गा विधायक अल्पेश ठाकोर खुलेआम बिहारी कामगारों और यूपी के कामगारों को धमकी देता है कि एक हफ्ते में गुजरात छोड़कर चले जाओ नहीं तो घर से निकालकर मारेंगे ।उसे मालुम नहीं कि उत्तर भारतीय अपने पर आ गए तो तुम्हें तुम्हारी जमी पर ही ऐसे उखाड़ देंगे जैसे देस भर से कांग्रेस को उखाड़ कर फेंक दिए।अफसोस तो तब और होता है जब कांग्रेस के तथाकथित युवा अध्यक्ष श्रीमान राहुल गांधी जी अल्पेश ठाकोर को बर्खास्त करने की बजाय बिहार का प्रभारी बना दिया।मतलब साफ है कि एक तरफ भगाओ और दूसरी तरफ सहलाकर सहानुभूति पाओ और सत्ता हासिल करो।शर्म आनी चाहिए ऐसी राजनीति पर।

खैर बीजेपी भी इससे अछूती नहीं हैं। नहीं तो क्या कारण है कि गुजरात की सरकार अल्पेश ठाकोर और ठाकोर सेना के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं करते।अल्पेश ठाकोर क्यों अभी तक सलाखों के पीछे नहीं हैं।आखिर देश को बांटने वाले ऐसे खुलेआम कैसे घूम रहे हैं औऱ नफरत का बीज बो रहे हैं।
कान खोलकर सुन लें वो लोग जो देश को बांटने का काम कर रहे हैं कि हिन्दुस्तान सवा सौ करोड़ भारतीयों लोगों का है,किसी अल्पेश ठाकोर के बाप का नहीं है,हम इस देश के किसी भी हिस्से में स्वतंत्र रुप से डंके की चोट पर रहेंगे।किसी की हिम्मत नहीं है कि कोई रोक दे।क्योंकि ये देश संविधान से चलेगा किसी की गुंडई से नहीं।    
       

Saturday, 6 October 2018

शारदीय नवरात्रि 2018:मां दुर्गा के सिद्ध नवार्ण मंत्र से होगी आपकी सभी मनोकामना पूरी, जाने कैसे ?



संदीप कुमार मिश्र: मां दुर्गा की आराधना साधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र।कहते हैं कि शारदीय नवरात्र जनसामान्य को मनोवांछित फल देने वाला है।ऐसे में आईए जानते हैं कि माता शेरावाली के एक ऐसे अचूक मंत्र के बारे में जो आपकी सर्वमनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है।
माता शेरावाली की नवरात्रि में साधना करने वाले साधक को नित्य नवार्ण मंत्र का जाप 3 माला अवश्य करना चाहिए।
=:नवार्ण मंत्र:=
'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'
कहते हैं कि नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध मां दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। ग्रहों दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में शक्ति की आराधना की जाती है और इन ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवार्ण मंत्र किसी संजिवनी से कम नहीं है।

आइए जानते हैं मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र और उनसे संचालित ग्रह  
1 नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ऐं है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध मां दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्र' को की जाती है।
 
2 दूसरा अक्षर ह्रीं है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध मां दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को की जाती है।

3 तीसरा अक्षर क्लीं है, चौथा अक्षर चा, पांचवां अक्षर मुं, छठा अक्षर डा, सातवां अक्षर यै, आठवां अक्षर वि तथा नौवा अक्षर चै है। जो क्रमशः मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु तथा केतु ग्रहों को नियंत्रित करता है।  

इन अक्षरों से संबंधित दुर्गा की शक्तियां क्रमशः चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री हैं, जिनकी आराधना क्रमश: तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, आठवें तथा नौवें नवरात्रि को की जाती है। 

इस नवार्ण मंत्र के तीन देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं तथा इसकी तीन देवियां महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती हैं,मां दुर्गा की यह नौ शक्तियां साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों की प्राप्ति में सहायक होती हैं।
  
हम सब जानते हैं कि नवरात्रि का पर्व नौ शक्ति रुपी देवियों के पूजा के लिए है। यह सभी देवी रूप अपने आप में अतुल्य शक्ति और भक्ति के भंडार है।इस चराचर जगत में अच्छाई के लिए माँ का कल्याणकारी रूप सिद्धिदात्री , महागौरी आदि है, और इसी के साथ संसार में उत्पन्न हो रही बुराई के लिए माँ कालरात्रि , चन्द्रघंटा रूप धारण कर लेती है।


अब जाने वे बीज मंत्र जो इन नौ देवियों को प्रसन्न करते है।
नौ देवीयों का पृथक बीज मंत्र

1. शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:
2. ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
3. चन्द्रघंटा : ऐं श्रीं शक्तयै नम:
4. कूष्मांडा ऐं ह्री देव्यै नम:
5. स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
6. कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
7. कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:
8. महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
9. सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

।।जय माता दी।।


शारदीय नवरात्रि :जाने कैसे करें घट स्थापना,क्या है पूजा विधि और क्या है अखंड ज्योति का महत्व



संदीप कुमार मिश्र: जगत जननी मां जगदम्बा की आराधना का पावन पर्व नवरात्र।वर्ष भर में पड़ने वाले चारो नवरात्रों में दो तो गुप्त नवरात्र होते है।लेकिन दो जनसामान्य कै लिए बेहद खास होते हैं।चैत्र और शारदीय नवरात्र।इस बार शारदीय नवरात्र का प्रारंभ 10 अक्टूबर से होने जा रहा है।नवरात्र में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है

शारदीय नवरात्रि 2018:मां दुर्गा के सिद्ध नवार्ण मंत्र से होगी आपकी सभी मनोकामना पूरी, जाने कैसे ? https://sandeepaspmishra.blogspot.com/2018/10/2018_6.html

।।आईए जानते हैं नवरात्र में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजन समय क्या है।।
शारदीय नवरात्रि प्रारंभ- 10 अक्टूबर 2018, दिन-बुधवार
कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना मुहूर्त = 06:22 से 07:25 तक।
मुहूर्त की अवधि = 01 घंटा 02 मिनट।

।।कलश स्थापना और पूजन के लिए आवश्यक सामग्री।।
मिट्टी का पात्र और जौ के 11 या 21 दाने
शुद्ध साफ की हुई मिट्टी जिसमें कंकड़ पत्थर ना हो
शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी, सोना, चांदी, तांबा या पीतल का कलश
( कलश स्थापना में लोहे या स्टिल का कलश वर्जित है )
मोली (रक्षा सूत्र), अशोक या आम के 5 पत्ते कलश को ढकने के लिए, मिट्टी का ढक्कन,  साबुत चावल, एक पानी वाला नारियल
पूजा में काम आने वाली सुपारी,कलश में रखने के लिए सिक्के
लाल कपड़ा या चुनरी,मिठाई,लाल गुलाब के फूलो की माला और फल
कलश स्थापना,पूजन विधि
कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को साफ करें फिर एक लकड़ी के आसन पर लाल कपड़ा बिछाएं और उसपर थोड़े चावल ऋद्धि सिद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश को याद करते हुए रखें। इसके बाद कलश को स्थापित करें और उसमें मिट्टी भर के और पानी डाल कर उसमे जौ बो दें। क्रमश: कलश पर रोली से स्वास्तिक और ॐ बनाकर कलश के मुख पर मोली से रक्षा सूत्र बांधें । कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रख दें और फिर कलश के मुख को ढक्कन से ढक दें और फिर ढक्कन को चावल से भर दें।लाला चुनरी में लपेटकर रक्षा सूत्र से बांधा हुआ नारियल भी पास में रख दें। इस नारियल को कलश के ढक्कन के उपर रखे और सभी देवी देवताओं का सच्चे मन से हाथ जोड़कर आवाहन करें। अंत में दीपक जलाकर कलश की पूजा करें और कलश पर फल-फूल,मिठाइयां चढ़ा दें।इस प्रकार से कलश स्थापना संपन्न करे।एक बात का अवश्य ध्यान रखें कि नवरात्र के नौ दिनो तक इस कलश की पूजा अवश्य करें और माता की प्रेम सहित सपरिवार आरती करें।

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नवरात्र में अखंड ज्योत का महत्व
नवरात्र में कलश स्थापना के साथ ही अखंड ज्योत अवश्य जलाना चाहिए जो नौ दिनो तक जलती रहे।कहते हैं कि अखंड ज्योत को जलाने से घर में हमेशा शक्ति स्वरुपा मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है।एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए अखंड ज्योत जलाने वाले को,कहते हैं कि जिन घरों में अखंड ज्योत जले उस घर के सदस्यों को जमीन पर ही सोना चाहिए।

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अंतत: माता शेरावाली तो भाव की भूखी है आप सप्रेम पूरी श्रद्धा से माता की पूजा अर्चना करें मां तो इसी से प्रसन्न हो जाती है।हम कामना करते हैं कि शारपदीय नवरात्र में जगत जननी मां जगदम्बा की विशेष कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।।जय माता दी।।


शारदीय नवरात्रि 2018:मां दुर्गा के सिद्ध नवार्ण मंत्र से होगी आपकी सभी मनोकामना पूरी, जाने कैसे ? https://sandeepaspmishra.blogspot.com/2018/10/2018_6.html
 

Friday, 5 October 2018

MP में पंजे की पकड़ से दूर हाथी! MP गजब है !


संदीप कुमार मिश्र: कहते हैं कि राजनीति के अखाड़े में कब कौन सा दांव फिट बैठ जाए कोई नहीं जानता।बैठ जाए तो सत्ता, ना बैठे तो कर ही क्या सकते हैं...क्यों...अब शिव के राज मध्य प्रदेश को ही ले लिजिए,कहां तो राहुल गांधी आस लगाए बैठे कि मायावती की मायावी हाथी उन्हें एमपी में सत्ता सुख दिलाएगी, लेकिन कांग्रेस के रणनीतिकारों को बीएसपी ने ऐसा झटका दिया कि दिल के अरमा भरभरा के बह गए।मान मनउवल तो खुब हुई लेकिन कांग्रेस की एक ना चली और मायावी हाथी ने अपना रास्ता अलग अख्तियार कर लिया।
दरअसल मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता बीएसपी को बहुत ज्यादा भाव देने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कांग्रेस आलाकमान के कहने पर बातचीत की कोशिश की गई। कांग्रेस के होश तब फाख्ता हो गए, जब गठबंधन की चर्चाओं को फैलाने से पहले ही मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया कि उनकी पार्टी का कांग्रेस से गठबंधन नहीं होगा...और फिर क्या होना था आप समझ ही सकते हैं।सत्ता सुख के अकाल से जूझ रही कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
कांग्रेस की कोशिशें परवान चढ़ती उससे पहले ही मायावती ने अपने 22 कैंडिडेट्स के नामों का ऐलान कर दिया।फिर क्या था मध्य प्रदेश में गठबंधन की उम्मीद खत्म।इतना ही नहीं मायावती ने कांग्रेस के जले पर तब और नमक रगड़ने का काम कर दिया जब उन्होंने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कांग्रेस के खिलाफ अपनी जमकर भड़ास निकाली।
इन सब के पीछे की अब वजह बताई जा रही है कि 2013 में जिन सीटों पर बीएसपी को महज कुछ वोट ही मिले थे, वे सीटें भी सुश्री बहन जी को चाहिए थी,जिसके लिए कांग्रेस के स्थानिय नेता तैयार दिखाई नहीं दे रहे थे।कहां तो राहुल गांधी सोच रहे थे कि MP में हाथी की सवारी करके 2019 में दिल्ली दरबार में दस्तक देंगे...कहां तो माया के चक्कर में फंसकर रणनीति के मामले में फिलहाल शिव राज से मात खा बैठे।
कैसे ना कांग्रेस के अरमा आंसूओं में बहते।अब आप ही बताईए एक तो बहन जी ने गठबंधन नहीं किया दूसरे पहले से ही आपसी कलह से जूझ रही MP कांग्रेस में और झगड़ा लगा गई।बहन जी ने दिग्गी राजा यानी दिग्विजय सिंह को दोषी भी ठहरा दिया जिससे कांग्रेस आपस में ही लड़ती रहे।और तो और मायावती ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया था कि एमपी के साथ ही राजस्थान में भी कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा।छत्तीसगढ़ में पहले ही बीएसपी सुप्रीमो ने कांग्रेस के पूर्व दुलारे अजीत जोगी के साथ गठबंधन कर ही लिया था।वहां भी कांग्रेस की दाल नहीं गली ।

अब इस पूरी बकवास का लूब्बे लूबाब निकला क्या ? राहुल गांधी मध्य प्रदेश में करेंगे क्या ? तीन-तीन तो सीएम कैंडिडेट हैं उनके पास,और कोई किसी के कम नहीं।अब सिंहासन तो एक है और बैठने वाले तीन...ये तो बड़ी नाइंसाफी है....तो क्या MP कि फिर एक बार शिव....................?अब खाली जगह आप भरिये....।MP गजब है!

Thursday, 4 October 2018

चैम्पियंस ऑफ द अर्थ नरेंद्र मोदी ।CHAMPIONS OF THE EARTH MODI ।देश का बढ...

भारत का बडा विश्व में डंका 'चैम्पियंस ऑफ द अर्थ' बने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
संदीप कुमार मिश्र: देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र संघ के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान 'चैम्पियंस ऑफ द अर्थ' से सम्मानित किया गया है।मोदी जी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय पीएम हैं।इस अवार्ड की खास बात यह है कि पीएम को इस अवॉर्ड से सम्मानित करने के लिए यूएन महासचिव एंतोनियो गुतारेस स्वयं भारत आए।
पीएम मोदी ने इस अवॉर्ड के लिए यूएन और सवा सौ करोड़ भारतीय जनता के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की सवा सौ करोड़ जनता का है जो पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसने प्रकृति में परमात्मा को देखा है।

जाने नरेंद्र मोदी जी के संबोधन की 5 बड़ी बातें-
 क्लाइमेट, कैलेमिटी और कल्चर-पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु (क्लाइमेट), आपदा (कैलेमिटी) और हमारी संस्कृति (कल्चर) के बीच सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी संस्कृति में जलवायु को लेकर चिंता, उसे बेहतर बनाए रखने की कोशिश शामिल नहीं होगी तब तक आपदाओं से बच पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति संवेदना हजारों साल से हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहा है। जिसे विश्व ने आज स्वीकार कर लिया है।पीएम ने कहा कि ये संवेदना है जो हमारे जीवन का हिस्सा है. हम पेड़-पौधों की पूजा करते हैं, मौसम-ऋतुओं को वृत और त्योहार के रूप में मनाते हैं, लोरियों-लोककथाओं में प्रकृति से रिश्ते की बात करते हैं।
क्लाइमेट जस्टिस है जरूरी- पीएम मोदी ने कहा कि क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) की चुनौती से निपटने के लिए क्लाइमेट जस्टिस बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना हम विकास के अवसरों का हाथ थामकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उनकी सरकार की सबसे बड़ी सफलता यह है कि लोगों के व्यवहार और उनकी सोच में बदलाव आया है।

देश में चल रही है बदलाव की बयार- पीएम ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सबसे तेज़ गति से शहरीकरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में शहरी जीवन को स्मार्ट और सस्टेनेबल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे को इको फ्रेंडली बनाया जा रहा है, उनके साथ-साथ ग्रीन कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। मेट्रो जैसे नेटवर्क्स को सोलर एनर्जी से जोड़ा जा रहा है और फॉसिल फ्यूल पर रेलवे की निर्भरता को तेजी से कम करने की दिशा में काम किया जा रहा है।पीएम ने कहा कि आज भारत में हर जगह पानी और ऊर्जा बचाने की मुहिम चल रही है। हर स्तर पर तकनीक को प्रमोट किया जा रहा है।
आदिवासी, किसान, मछुआरों का सम्मान- पीएम ने कहा कि यह सम्मान जंगलों में बसे आदिवासियों का सम्मान है जो अपनी जिंदगी से ज्यादा प्यार जंगलों से करते हैं। उन मछुआरों का सम्मान है जो समुद्र से उतना ही लेते हैं जितना उनके लिए जरूरी है। उन किसानों का सम्मान है जो ऋतुचक्र के हिसाब ही अपनी जिंदगी जीते हैं।
रीयूज-रिसाइकल करने वाली महिला का सम्मान- पर्यावरण संरक्षण में एक आम गृहिणी की भूमिका पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान हर उस नारी का सम्मान है जो सदियों से रीयूज और रिसाइकल की प्रक्रिया का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय नारी पौधे में परमात्मा का रूप देखती है, तुलसी की पत्तियां भी गिनकर तोड़ती है और चींटी को अन्न देने को पुण्य मानती है।

 #Narendra Modi#united nations#Champions of the Earth award#UN Secretary General Antonio Guterres#Champions of the Earth Award for 2018# Leadership#

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...