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Saturday, 28 November 2015

आइडिया ऑफ इंडिया: लोकसभा में नमो संदेश


संदीप कुमार मिश्र: लोकसभा का शीतकालीन सत्र और संविधान पर चर्चा,बहुमुखी प्रतिभा के धनी और प्रखर वक्ता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को अपने आइडिया आफ इंडिया से अवगत करवाया।आखिर क्या है उनका आइडिया आप इंडिया।लोकसभा में धारा प्रवाह बोलते हुए प्रधानमंत्री जी ने संस्कृत श्लोकों की झड़ी लगा दी।अब इस आइडिया आफ इंडिया की चर्चा तो की ही जाएगी लेकिन उससे पहले जान लेते हैं कि आइडिया आफ इंडिया का सरल अर्थ क्या है-
आइडिया ऑफ इंडिया
सत्यमेव जयते
सत्य की हमेशा जीत होती है

आइडिया ऑफ इंडिया
अहिंसा परमो धर्म:
अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है

आइडिया ऑफ इंडिया
एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति
ईश्वर एक हैं लोग उन्हें अलग-अलग नाम से पुकारते हैं,

आइडिया ऑफ इंडिया
पौधे मे भी परमात्मा होते हैं
आइडिया ऑफ इंडिया
वसुधैव कुटुम्बकम
पूरी वसुधा यानी पूरा संसार एक परिवार की तरह है

आइडिया ऑफ इंडिया
सर्व धर्म समभाव
सभी पंथ जाती, आदि को समान भाव से ही देखे

आइडिया ऑफ इंडिया
अप्प दीपो भव
अपना प्रकाश स्वयं बनो

आइडिया ऑफ इंडिया
तेन त्यक्तेन भुंजीथा
यानी त्याग भाव से संसार में रहना चाहिए

आइडिया ऑफ इंडिया
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया.
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्
सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें
और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े

आइडिया ऑफ इंडिया
न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम्.
कामये दुःखतप्तानां प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्
न तो राज्य की कामना करता हूं, न स्वर्ग की और न ही मोक्ष की, बस यही कामना है कि दुःखी प्राणियों के कष्ट दूर कर सकूं

आइडिया ऑफ इंडिया
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड परायी जाणे रे.
पर दुःखे उपकार करे तो ये मन अभिमान न आणे रे
वैष्णव वो व्यक्ति है जो दूसरों की पीड़ा को अपना दर्द समझता हो

आइडिया ऑफ इंडिया
जन सेवा ही प्रभु सेवा
गरीब की सेवा ईश्वर की सेवा के समान है

आइडिया ऑफ इंडिया
ॐ सहना भवतु, सहनो भुनक्तु सहवीर्यं करवावहै!
 तेजस्वीनावधीतामस्तु माविद्विषावहै ॐ शांति शांति शांति !!
ईश्वर हमारा रक्षण करे - हम सब मिलकर सुख भोगें - एक दूसरे के लाभ के लिए कोशिश करें -हम सबका जीवन तेज से भर जाय - परस्पर कोई द्वेष या ईर्ष्या न हो

आइडिया ऑफ इंडिया
नर करनी करे तो नारायण हो जाए
अर्थात मानव यदि कर्म करे तो ईश्वर बन सकता है

आइडिया ऑफ इंडिया
नारी तू नारायणी
नारी तुम ईश्वर के समान हो

आइडिया ऑफ इंडिया
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता
जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का निवास होता है

आइडिया ऑफ इंडिया
आनो भद्रा कृत्वा यान्तु विश्वतः
ऋग्वेद के इस मंत्र का अर्थ है कि किसी भी सदविचार को अपनी तरफ
किसी भी दिशा से आने दें

आइडिया ऑफ इंडिया
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

जन्मभूमि मां के समान है जो स्वर्ग से भी सुन्दर है।


अक्सर आइडिया ऑफ इंडिया बहस होती रही है,जिसे समझाने में प्रधानमंत्री जी ने संस्कृत श्लोकों के माध्यम से बखुबी समझाया।तो दोस्तों ये जो शानदार आइडिया आपने पढ़ा,ये देश के प्रधानमंत्री का आइडिया है।कहना गलत नहीं होगा कि नमो वाणी जब शुरु होती होती है भारत जैसे मुल्क की सम्मानीत आवाम नमो वाणी के माध्यम में अपना भविष्य संवारने लगती हैं। सही भी है कि जो शब्दों के माध्यम से प्रकट हो और उसपर अमल भी हो तो देश को आगे बढ़ने से,सम्पन्न बनने से संसार की कोई ताकत नहीं रोक सकती।
लेकिन क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 18 महीनो में देश के विकास की जो रुप रेखा खींची उससे देस विकास के रास्ते पर आगे बढ़ पाया है...? क्योंकि सबसे ज्याद लोग त्रस्त हैं तो महंगाई से।अब दाल को ही लें तो महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है।अब साब दाल तो जरुरू है ना, प्रधानमंत्री जी को दाल पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।बीते समय में जिस प्रकार से देश में लगातार एक के बाद एक घटनाएं हुई और प्रधानमंत्री की चुप्पी जारी रही उससे कई सवाल खड़े होने लगे थे,कभी अवार्ड वापसी तो कभी कोई और नया मुद्दा।विपक्ष के साथ ही आदमी सोचने पर मजबूर हो गया था कि आकिर प्रधानमंत्री जी इन मुद्दों पर कुछ बोलते क्यूं नहीं।क्योंकि लोकतंत्र में संवाद बने रहना चाहिए। 

अब देखना होगा कि दिल्ली और फिर बिहार की हार के बाद प्रधानमंत्री जी का लोकसभा में दिया गया शानदार भाषण पार्टी के नेताओं पर कितना प्रभाव डालता है,क्योंकि निश्चिततौर पर जिस प्रकार से सरकार के नुमाइंदे भाषणबाजी पिछले दिनों करते रहे हैं वो आइडिया आफ इंडिया नहीं हो सकता। एक बेहतर और सार्थक पहल करते हुए प्रधानमंत्री जी ने करीब 18 महीने के बाद विपक्ष के नेता सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रीत किया। अक्सर देखा गया है कि राजनीति की लड़ाई में खास और अहम मुद्दे छुट जाते हैं, जिसकी वजह से खामखां देश को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। 

अंतत: देश को सही दशा और दिशा प्रदान करनी है तो देश के विकास के लिए सबको साथ मिलकर काम करना होगा।उसके लिए जरुरी है कि सरकार और विपक्ष के बीच जिस प्रकार के भी मतभेद हों उसे बातचीत के जरिए दूर किया जाय। और सर्वसम्मति से आइडिया आफ इंडिया के लिए काम किया जाएं नही सबका साथ सबका विकास,एक भारत श्रेष्ठ भारत और इंडिया फर्स्ट की बात सिर्फ चुनावी जुमला भर बन कर रह जाएगा...।।



Thursday, 26 November 2015

26/11: दर्द के वो सात साल


काश खत्म हो जाता आतंकवाद,
हर तरफ बहती अमन और सूकुन की फिजा,
ना रहता कोई रंज-ओ-गम,
क्योंकि लहू का रंग तो सबका लाल ही है।
संदीप कुमार मिश्र : लेकिन क्या करें साब 26/11की वो काली रात आज भी एक ऐसे नासूर की तरह सालती रहती है।दर्द के वो सात साल याद आते ही शरीर में एक सिहरन सी उठती है और याद आता वो मंजर,गोलियों की आवाजें,चिख पुकार,धुओं का गुव्वार,भागते दौड़ते लोग...काश ऐसा ना हुआ होता।

दरअसल 26 नवंबर 2008 की वो भयावह काली रात,जब अचानक माया नगरी मुंबई शहर गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज से दहल उठा। नापाक इरादों के साथ मानवता के दुश्मन उन क्रुर हमलावरों ने मुंबई के पांच सितारा होटलों,रेलवे स्टेशन के साथ ही मुंबई के एक यहूदी केंद्र को निशाना अपना निशाना बनाया।किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतना बड़ा आतंकी हमला देश की आर्थिक राजधानी पर हो सकता है।

मुंबई के लियोपोल्ड कैफे के साथ ही छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से शुरू हुआ आतंक का नंगा नाच  होटल ताजमहल में जाकर समाप्त हुआ।आतंकीयों के नापाक मंसूबे को खत्म करने के लिए हमारे देश वीर जवानो को तकरीबन 60 घंटे से भी ज्यादा का समय लगा और सबसे बड़े इस (26/11) आतंकी हमले में 160 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

कौन भूल सकता है होटल ताजमहल का वो मंजर...जब होटल ताजमहल के गुंबद में लगी आग, और वो आसमान की ओर बढ़ता धुएं का गुब्बार...सात साल बाद भी देश के दिलोदिमाग में वो दृश्य आज भी ताजा हैं। 100 साल से भी ज्यादा समय से अपने शानदार वजूद को कायम किए हुए गेटवे ऑफ इंडिया के पास खड़ी पुरानी इमारत को कब्जे में लेकर आतंकवादियों ने उसे आग के हवाले कर दिया। विदेशी पर्यटकों में खासा लोकप्रियता लिए मुंबई की आन-बान और शान कहे जाने वाला होटल ताजमहल धुधु कर जल रहा था और आतंकीयों का नंगा नाच चल रहा था । बड़ी शानो शौकत से पर्यटक होटल ताजमहल से समुद्र का बेहद खूबसूरत और विहंगम नजारा देता करते थे..लेकिन इस धटना ने सबको सकते में डाल दिया था।

जिस वक्त होटल में आतंकियों ने डेरा डाला उस वक्त होटल के पास खुब चहलपहल थी और सरकारी आंकड़ो के अनुसार तकरीबन 31 लोगों को होटल ताजमहल में अपनी जान गंवानी पड़ी थी,और इस पूरे आपरेशन में होटल ताजमहल में चार आतंकवादियों को मार गिराया गया था।
देश के व्यापारिक तबके के बीच खासा लोकप्रिय ओबेरॉय होटल में भी आतंकवादी जिस समय गोला-बारूद लेकर पहुंचे थे उस समय होटल में साढे तीन सौ से भी ज्यादा लोग मौजूद थे। आतंकियों ने यहां भी खूब तांडव मचाया,कईयों को बंधक बनाया और जब तक राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के जवानों ने दोनों हमलावरों को मार गिराया,उससे पहले ही आतंकीयों ने 32 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी।

आतंकवादी ये जानते थे कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनल देश के सबसे व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक है जहां आतंकियों ने खूनी खेल को सबसे खौफनाक तरिके से अंजाम दिया।जिस वक्त आतंकियों ने यहां हमला किया उस वक्त स्टेशन पर बड़ी संख्या में रेल यात्री मौजूद थे।स्टेशन पर हुई गोलीबारी में आतंकवादी अजमल आमिर कसाब और इस्माइल खान शामिल थे। दोनों आतंकियों ने यहां अंधाधुंध गोलियां चलाईं और  छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में 58 लोगों की मौत हुई। लेकिन अजमल आमिर कसाब पकड़ा गया और उसे फांसी दी गई।

दूसरी तरफ चार हमलावरों ने एक पुलिस वैन को ही अगवा कर लिया और उसके बाद लगातार गोलीबारी करते हुए कामा अस्पताल में भी घुस गए। इसी कामा अस्पताल के बाहर ही मुठभेड़ में आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे, मुंबई पुलिस के अशोक काम्टे और विजय सालस्कर आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।

विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय लियोपोल्ड कैफे को भी अपना निशाना बनाया।कैफे में बैठे लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही दो गुटों में आए आतंकियो ने 10 लोगो की जान ले ली थी । आतंकवादियों ने शहर के नरीमन हाउस को भी निशाना बनाया। यहां अक्सर यहूदी पर्यटक ठहरते थे। नरीमन हाउस में पहुंचने के लिए एनएसजी कमांडो को हेलिकॉप्टर की मदद से बगल वाली इमारत में उतरना पड़ा। एनएसजी ने आतंकीयों को तो मार गिराया लेकिन किसी भी बंधक को नहीं बचाया नहीं जा सका और सात निर्दोष लोगों की मौत हो गई।

अंतत: आतंकवाद मानवता के नाम पर कलंक है, इसपर पूर्णविराम लगना बेहद जरुरी है,नही तो मानवता तार-तार होती रहेगी।खून बहते रहेंगे,धरती अपने लाल के रंग से लाल होती रहेगी और आतंकियों के आका धर्म मजहब की दुहाई देकर आतंकवाद फैलाते रहेंगे। आखिर कब तक 9/11…26/11…13/11 जैसी घटनाएं होती रहेंगी..? अब बहुत हो चुका।

 26/11 में शहीद हुए शहीदों को शत-शत नमन व श्रद्धांजलि 




Wednesday, 25 November 2015

आमिर खान जी देश प्रेम सिर्फ रील लाईफ में...!

संदीप कुमार मिश्र:  क्या आमिर बाबू आप भी ना..कैसी बात कर दी।क्या तकलीफ हो गयी थी साब आप को।फिल्मे नहीं मिल रही थी या अपनी किसी फिल्म का प्रमोशन करना था या सियासत करने का मन करने लगा था,या फिर वास्तव में ही इरान,इराक,सीरिया,अफगानिस्तान या फिर कोई और देश पसंद आने लगा था...तो चले जाते।और भी स्टार तो जाकर बसे हैं विदेशों में, आप भी जाते कौन रोक रहा था । लेकिन ये कहकर कि आप की किरण ने कहा कि अब उसे डर लगता है भारत में, तो साब बात कुछ हजम नहीं हुई।आप जानते हैं आमिर साब इस देश में करोड़ों की तादाद में आमिर खान पड़े हुए हैं कोई नहीं जानता उन्हें।लेकिन आप को सब जानते हैं,क्योंकि इस देश ने आपको आमिर खान बनाया है।जितनी शिद्दत से आपकी फिल्म को मुसलमान भाई देखता है उतनी ही शिद्दत से हिन्दू भी।साब इस देश में करोड़ो,अरबों कमाकर आप ये कहो कि ये देश असहिष्णु है..तो गलत बात है ना।
अरे हां याद आया,जब आप मोदी को अमेरिका का वीजा ना मिले,इसका समर्थन कर रहे थे तो देश आपके लिए सहिष्णु था। लेकिन मोदी जी को देश की सम्मानित जनता ने देश की बागड़ोर थमा थी तो देश असहिष्णु हो गया और आपकी किरण को तो यहां डर भी लगने लगा है।आप कहीं और जाकर बसने की सोचने लगे हो।बुरा मत माना जनाब लेकिन ये आपके किसी फिल्म की कहानी नहीं है,ये असल जींदगी के फलसफे हैं जहां आपके तारे जमी पर होने चाहिए।

कितना अफसोस होता है कि आपको मिस्टर परफेक्सनिस्ट कहा जाता है,क्योंकि आप थ्री इडियट, लगान,सरफरोस,कयामत से कयामत तक के स्टार जो हो, आपकी pk भी देखते हैं इस देश के लोग,जिसमें आपने क्या दिखाया है,वो तो आप जानते ही हैं,तब भी देश असहिष्णु नहीं लगा आपको,क्योंकि कमाई आपकी जोरों पर जो थी, लेकिन वहीं मैमोरी लास गजनी भी हो ये हमारा प्यारा देश और यहां के लोग भूल जाते हैं।क्योंकि आप तो कुछ भी बोल सकते हो,भूल सकते हो।अब साब आपकी दंगल को आने में तो अभी समय था,लेकिन आपने देश में पहले ही दंगल करवा दिया।भला हो आपका लेकिन क्या अब भी आप यही कहोगे कि देश में सहिष्णुता नहीं है...आमिर खान साब ये देश आपको बेहद संवेदनशील और संजिदा कलाकार मानता है,इस देश के लोग आपको बहुत बहुत प्यार करते हैं।
यहां तक की आपके लिए जीने मरने तक की कसमें खाते हैं।लेकिन शायद ये देश और यहां के लोग ये भूल जाते हैं कि जितने संजिदा और समर्पीत आप पर्दे पर अभिनय करते हुए दिखते हैं, शायद रीयल लाईफ में आप और आप जैसे बड़े लोग वैसे होते नहीं हैं। आप और आपकी धर्मपत्नी किरण जी तो उस श्रेणी में हैं जिनके पास मान सम्मान और धन दौलत सब कुछ है।अब तो आपने देश की आम जनता की उस समझ और विश्वास को भी तोड़ दिया कि आप वास्तव में समझदार कलाकार हैं क्योंकि सत्यमेव जयते में आपने ये सिद्ध किया था कि देश की आम जनता की समस्याओं से आपका सरोकार है,आप उनके दर्द को महसूस करते हैं, लेकिन अब लगता है कि स्क्रप्टि राइटर की जुबान ही आप बोल सकते हैं।नहीं तो क्या जरुरत थी भला तब...जब आप जैसे धन संपन्न लोग ज्याद गरमी पड़ने पर विदेश चले जाते हैं,शहर में बिजली चली जाए तो किसी बड़े होटल में ठहर जाते हैं और बाढ़ की आशंका होने मात्र से दूसरे शहर की शरण ले लेते हैं।आपको लगता है कि जरुरत थी इस तरह के बयानबाजी की..? क्या सत्यमेव जयते कह देने भर से काम चल जाएगा या सचमुच में देशहित के लिए काम करना पड़ेगा।उस तबके तक पहुंचना पड़ेगा जहां की बुनियादी जरुरत सिर्फ और सिर्फ रोटी कपड़ा और मकान है।
अब देखिए साब राजनीति तो होगी ही,हमारे नेतागण को भी आपकी तरह ही दुकानदारी चलानी है ना,और अपने ऐतिहासिक पराजय का भी बदला लेना है,सो आप ने बोला और नेता जी और हम ही इमानदार हैं जी,बाकी सब बेईमान है जी....जैसे नेताओं ने लपक लिया...क्योंकि उन्हें तो जात धर्म की ही सियासत करनी है....और जब विपक्ष बोलेगा तो पक्ष भी बोलेगा,सो बयानबीरों की फौज सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों पर बहस करने लगी..हां ये अलग बात है कि टीआरपी की गंदी दौड़ में मुद्दा आप हैं ना की देस का वो गरीब तबका जो भुको मरता है लेकिन न्यूज चैनलों का कैमरा उस तबके तक नहीं पहुंच पाता है...क्योंकि उन्हें भी तो मसाला चाहिए... और वो मसाला आप जैसे लोग थाली में सजाकर परोसते हैं।
अंतत: हमारे देश में अभिव्यक्ति की आजादी है,हम कुछ भी बोलने के लिए स्वतंत्र तभी तक हैं,जब तक देश के सम्मान को आघात ना पहुंचे,औरों ने भी विरोध किया,जनाब आमिर साब आप भी करते लेकिन ये कहना निहायत गलत है कि आप की किरण ने कहा कि कहीं और जाकर रहें,यहां डर लगता है...खैर ये आपका देश है और हमेशा रहेगा और इतना कहने भर देने से आप पर उंगली नहीं उठाई जा सकती...हो जाता है कभी कभी...इन्सान भावनाओं में बहकर कहता है कुछ और कह जाता है कुछ...एक बात और ये देश शांति प्रिय था है और रहेगा...सियासतें बदलती रहती है...लेकिन लोग वही रहते हैं..आप भी थोड़ा धैर्य रखे,संवेनशील बने..क्योंकि ये रील नहीं रीयल लाइफ है।।।




दोस्तों इस लेख में आपको जो गलत लगे वो मेरे लिए है,और जो अच्छा लगे वो आपके लिए...एक शेर और सवाशेर के साथ अपने कीबोर्ड को आराम देता हुं......


आसान नहीं इस दुनिया में,ख्वाबों के सहारे जी सकना।
संगीन हकिकत है दुनिया,ये कोई सुनहरा ख्वाब नहीं।।


Tuesday, 24 November 2015

गले ही तो मिले थे साब,हम भी तो नेता ही हैं...।


संदीप कुमार मिश्र: अरे भाई गले मिलने से तो प्रेम बढ़ता है,संबंध मजबूत होते हैं,भेदभाव खत्म होता है।फिर ना जाने क्यूं खामखां लोग पड़ गए हैं लालू यादव और अरविंद केजरीवाल साब के पीछे।अरे भाई एक शिष्टाचार है गले मिलना।कहते हैं दिल मिले ना मिले हाथ मिलाते रहीए।और यही अरविंद जी ने किया।भई एक मंच पर जहां देस के सभी सहिष्णु नेता जी इक्ट्ठा होंगे तो गलबहींया तो होंगे ही ना।

दरअसल बिहार में नीतीश कुमार यानि सुशासन बाबू के शपथ ग्रहण समारोह में अरविन्द केजरीवाल का जाना और बीच मंच से लालू यादव से हाथ मिलाने हुए गले लगना आज केजरीवाल साब को महंगा पड़ गया।ऐसा इसलिए हुआ कि लगातार सुचिता की बात करने वाले अरविंद बाबू स्वच्छ राजनीति की बात करके सियासत में आए थे,लेकिन हम भूल गए थे कि अब वो भी राजनीतिक शख्सियत हैं और दिल्ली के सीएम हैं,भई उनकी भी महत्वकांक्षा है,कि दिल्ली की सियासत से आगे निकलकर देश की सियासत करें। लेकिन भईया विपक्ष का क्या करें,कोई मुद्दा ही नहीं छोड़ता सियासत करने का, अब हंगामा बढ़ा तो आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में लालू से गले मिलकर विरोध से जूझ रहे दिल्ली के सीएम ने इस मुद्दे पर भी अपना पक्ष साफ करने की कोशिश की।

अब बात निकली ती तो दुर तलक जाएगी ही सो अरविंद बाबू के गुरु अन्ना हजारे ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि,-अच्छा है कि मैं अलग हो गया वरना लोगो आज केजरीवाल की तरह मेरे ऊपर भी ऊंगली उठाते।
अब राजनीति का क्या करें साब कि कुछ तो लोग कहेंगे,हां आपने सफाई तो जरुर दी कि आप वंशवाद का विरोध करते हैं और लालू यादव से आपका कोई सम्बंध नहीं है लेकिन बात फिर भी वहीं आकर अटक जाती है कि विपक्ष तो मुद्दा बनाएगा ही ना।

दोस्तों अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि, 'मैं बिहार गया था। नीतीश जी अच्छे आदमी हैं। जनता ने ही मुझे उनके अच्छे कामों के बारे में बताया है। हमने वहां बीजेपी के खिलाफ काम किया और महागठबंधन का समर्थन किया। नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण में मैं मंच पर था। लालू ने ही जबर्दस्ती मेरा हाथ पकड़कर उठा दिया और मुझे गले भी लगाया।' वाह रे साब आप इतने कमजोर निकले कि लालू जी ने आपको खिंचकर गले लगा लिया।


अब साब केजरीवाल जी आप लाख सफाई दें लेकिन आपने जिस बीजेपी के अश्वमेध घोड़े को दिल्ली में रोका था तो वो कहां ये मौका हाथ से जाने देती सो उसने लालू यादव से गले मिलते हुए आप का शानदार पोस्टर छापकर दिल्ली में लगा दिया और आपका मजाक उड़ाया।इतना ही नहीं पोस्टर पर लिखा गया कि- कहां गई केजरीवाल की सुचिता, दरअसल, दिल्ली के अशोका रोड पर लगे बीजेपी के एक पोस्टर में लालू और केजरीवाल को गले मिलते दिखाया गया और इसमें लिखा गया है कि 'अन्ना कल की बात हैं... अब लालू जी का साथ है'

अंतत: राजनीति तो होगी,अवसर कोई नहीं छोड़ेगा,क्योंकि सियासत में अब यही होगा,जो हो रहा है,लेकिन इससे उपर उठकर सोचने की जरुरत है,जिससे जनहीत हो।


इमरान देश को तुम पर गर्व है

कुछ ऐसा करके दिखा कि,लोग तुझे याद रखें,
कल खेल में हम हों ना हों,गर्दिश में तारे रहेंगे सदा।


संदीप कुमार मिश्र: ये चंद पंक्तियां जीवन की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती हैं,जिससे हमें जीवन के संघर्ष पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।ये चंद लाइने अलवर के इमरान पर खुब जंचती है।भई डंचे भी क्यों ना,अरे कहीं आप भूल तो नहीं गए इमरान को।भई ये वही इमरान भाई हैं जिनकी नाम देस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विदेसी सरजमी पर हजारों की तादाद में बड़े गर्व से जो लिया था।मोदी जी को इमरान का नाम लेने में फक्र महसुस हो रहा था और होना भी चाहिए था,क्योंकि इमरान है ही इतने कमाल के।

चलिए जानने की कोसिस करते है इमरान की दिलचस्प कहानी कि आकिर इमरान रातों रात देस के रियल सुपर स्टार कैसे हो गए।दरअसल राजस्थान का एक छोटा-सा जिला है अलवर। और अलवर के ही खारडा गांव में इमरान का जन्म हुआ था।जिनके परिवार में उनके अलावा चार भाई और तीन बहने हैं।इमरान के पिता सुलेमान जी विशुद्ध रुप  किसान थे। आपको जानकर जरा भी हैरानी नहीं होगी कि इमरान के करीबी सभी दोस्त फौज में हैं।

मेरा मानना ही आप संकल्प ले लें और उसे करने की ठान लें तो मंजील नजर आने लगती है। कुछ ऐसा ही हुआ इमरान के पिता सुलेमान के साथ,जिन्होनें अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इमरान की प्रारंभिक शिक्षा तो गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुई।लेकिन उनके गांव खारडा में पांचवीं कक्षा के बाद स्कूल नहीं था।जिसकी वजह से पृथ्वीपुरा गांव के स्कूल में इमरान ने दाखिला लिया और 10वीं तक की पढ़ाई की।

बड़ी दिलचस्प है दोस्तों इमरान की कहानी।इमरान के गांव में बिजली नहीं थी बावजूद इसके पढ़ाई में हमेशा वो पहले पायदान पर रहे,यही वजह थी कि दसवीं में 82 फीसदी और 12वीं में 79 फीसदी अंकों के साथ इमरान जिला टॉप कर गए। इमरान की इंजीनियर बनना चाहत एसी ती कि उनके शिक्षकों को भी हमेशा लगता था कि इमरान आईआईटी प्रवेश परीक्षा में बैठे, तो बड़े ही आसानी से सफल हो जाएगा।लेकिन समय का पहिया घूमा और 12वीं पास करते ही इमरान का निकाह कर दिया गया । ये वो वक्त था जब इमरान मात्र 17 वर्ष के थे। खैर ऐसा कहा जाता कि समय,परिस्थिति और काल का दास होता है इन्सान।जैसा कि इमरान के साथ भी हुआ।सपने अधूरे रह गए इमरान के लेकिन हौंसलो की उडान अभा बाकी थी सो दो साल का टीचिंग कोर्स करने के बाद इमरान गणित के टीचर बन गये।जींदगी की गाड़ी चल रही थी लेकिन कुछ करने का जो ख्वाब इमरान ने बुन रखा था कहीं ना कहीं वो चैन से सोने नही दे रहा था।खैर इमरान का छोटा भाई जिसने साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी वो गुडगांव चला गया,जिसके बाद घर पर पड़े छोटे भाई के कंप्यूटर पर पर शौकिया तौर पर इमरान ने वीडियो गेम खेलना शुरु किया।सात ही गूगल अध्ययन के माध्यम से एक वेबसाईट जीकेटाक बनाई,जिसका इतना व्यापक प्रभाव छात्रों पर पड़ा कि 60-70 हजार हिट्स रोज मिलने लगे।इस दौरान एक बड़ी ही दिलचस्प घटना इमरान से घटी।दरअसल इमरान की वेबसाईट पर उनका फोन नंबर और पता भी दिया हुआ था सो एक दिन डीएम साहब का संदेश मिला, जिसमे दफ्तर में आकर मिलने की बात कही गई थी।इस बात से इमरान घबरा गए और सोचने लगे कि आखिर डीएम साब नें क्यों बुलाया है ?खैर डरे- सहमे इमरान डीएम के सामने पहुंचे जहां डीएम के कंप्यूटर पर उनकी वेबसाइट खुली हुई थी।डीएम साब ने कहा कि कैसे मान लूं कि यह वेबसाइट तुमने बनाई है?जिसके बाद इमरान ने एडमिन राइट दिखाए,जिसके बाद डीएम को यकीन हुआ।

इमरान को डीएम साहब ने ही सलाह दी कि वो छात्रों के लिए ऐप बनाएं,लेकिन समस्या थी कि इमरान पहले कोई ऐप नहीं बनाये थे। लेकिन घर आकर गूगल पर ऐप के बारे में जानकारी इकट्ठी की और छोटे भाई की इंजीनियरिंग की किताबों की मदद ली और बना डाले कई ऐप। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इमरान ने कभी भी कंप्यूटर ट्रेनिंग नहीं ली।बावजूद इसके इमरान अब तक 52 ऐप बना चुके हैं।इमरान की निष्ठा और समर्पण के क्या कहने कि उन्होने सारे ऐप छात्रों को समर्पित कर दिए।यही वजह थी कि अलवर के जिला प्रशासन ने उन्हें शिक्षा से संबंधित एकता प्रोजेक्ट से जोड़ा दिया।

समय का चक्र घूमा और इमरान की ख्याति एक गांव,शहर,नगर होते हुए राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय तक पहुंची और उन्हें दिल्ली बुलाया गया।जब बड़े बड़े आला अधिकारियों ने उनके बनाए ऐप देखे, तो उनके होश उड़ गए कि एक साधारण टीचर, जिसका आईटी क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं, ऐसे ऐप भी बना सकता है। लेकिन इमरान की महानता देखिए कि इमरान ने कभी इन ऐप्स से कमाई करने के बारे में सोचा तक नहीं। उनका मानना है कि- हर काम पैसे के लिए नहीं किया जाता। स्कूल से जितनी तनख्वाह मिलती है, उससे परिवार का पालन-पोषण आसानी से हो जाता है। मेरे लिए बड़ी बात यह है कि मेरे ऐप से छात्रों को फायदा हो रहा है।

अंतत:इमरान कहते हैं कि मैं गांव में पला-बढ़ा हूं, इसलिए अच्छी तरह से जानता हूं कि गांव और कस्बों में रहने वाले बच्चे ऐप खरीदकर पढ़ाई नहीं कर सकते, इसीलिए मैंने फ्री में ऐप जारी किए। यह किसी पर एहसान नहीं है। वहीं इमरान ने प्राइमरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और एनसीईआरटी के लिए ऐप बनाए हैं। उनके ऐप को 30 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। फिलहाल वह बालगुरु सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं। इस ऐप की मदद से टीचर को यह पता चल सकेगा कि उनका छात्र किस विषय में कमजोर है और किस विषय में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।धन्य हैं वो मां जिसने इमरान जैसी प्रतिभा को जन्म दिया।जिनके ज्ञान और खोज से देश का यूवा लाभान्वित हो रहा है।धन्य है भारत भूमि जहां इमरान जैसे गुदड़ी के लाख रहते हैं जिन्हे सिर्फ एक अवसर की तलाश है।



वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...