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Thursday, 20 May 2021

COVID-19 के पॉज़ीटिव मरीज़ों में Black Fungal Infection|क्यों मरीज़ों को गंवानी पड़ रही हैं आंखें ? जाने

 


संदीप कुमार मिश्र- कोरोना की दूसरी लहर का बढ़ता प्रकोप।जान बच गयी तो गंवानी पड़ रही आँखें। ब्लैक फंगल संक्रमण का बढ़ रहा खतरा।  दरअसल हमारे देश में चल रही कोरोना वायरस की ख़तरनाक दूसरी लहर से लोग जूझ ही रहे थे कि अब ब्लैक फंगल संक्रमण का ख़तरा भी दस्तक देने लगा है ।क्योंकि कोविड-19 पॉज़ीटिव मरीज़ों में ब्लैक फंगल संक्रमण के मामले बड़ी तेजी से बढते नजर आ रहे हैं ।

ब्लैक फंगल कितना खतरनाक है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि आंखों के सर्जन जो म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगल संक्रमण के मामलों का इलाज कर रहे हैं, उन्हें अपने मरीज़ों की जान बचाने के लिए उनकी आंखे निकालने जैसा मुश्किल फैसला करना पड़ रहा है। ज़्यादातर मामलों में एक आंख निकालना काफी होता है, लेकिन कई ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिसमें दोनो आँखे भी निकालनी पड़ रही है। डाक्टरों का कहना है कि ये संक्रमण तब और गंभीर बन जाता है, जब शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ किया जाता है।

डाक्टरों का कहना है कि "यह इन्फेक्शन ज्यादातर डायबिटीज मरीजों और जिनकी इम्युनिटी कमज़ोर रहती है, उनमें हो रहा है। जब किसी डायबिटीज़ के मरीज़ को कोरोना होता है, तो उसे एक स्टेरॉइड दिया जाता है, जो इम्युनिटी को कमज़ोर करता है और शुगर लेवल को बढ़ाता है। इसमें वे लोग शामिल हैं जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं या वे जो स्टेरॉयड दवाएं लेते हैं।क्योंकि इससे कीटाणुओं और बीमारी से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है।

Black fungal infection के शुरुआती लक्षण

ऐसे में डाक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षण  जैसे ही नजर आए जल्द से जल्द इलाज शुरू कर देना चाहिए।इसके लक्षणों की बात करें तो दांत में दर्द, आंखों में सूजन, साइनसाइटिस, लटकी हुई पलकें, दोहरी दृष्टि, आंखों की रोशनी कमज़ोर होना, चेहरे के एक तरफ दर्द होना, नाक की त्वचा का काला या गहरे रंग का होना, दांतों का ढीला होना और सीने में दर्द होना है। असहनीय दर्द मतलब पता ही नहीं चलता कि दर्द कहां हो रहा है। सीटी स्कैन के बाद भी पता ना चले कि दर्द कहां हो रहा है।यह मुख्य रूप से कोविड-19 से रिकवर हुए लोगों पर अटैक कर रहा है।

Black fungal infection covid-19 से ठीक होने के बाद ही क्यों होता है

दरअसल covid-19 patient को ऑक्सीजन की कमी होने पर जब ऑक्सीजन दी जाती है तो उस  ऑक्सीजन को हाइड्रेट करने के लिए उसमें पानी डाला जाता है और अगर यह पानी इनफेक्टेड होगा। जैसे- मटके का पानी, नदी का पानी, कुएं का पानी तो यह फंगल इन्फेक्शन नाक के थ्रू बॉडी मे enter हो जाता है और फिर ब्लड क्लॉट, पैरालिसिस जैसी गंभीर समस्या के रूप में सामने आता है।

Black fungal infection से बचने के लिए क्या करें

हाइजीन मेंटेन करें

कंस्ट्रक्टर में हमेशा RO का पानी ही use करें।

आरो के पानी को भी गर्म करके oxygen को हाइड्रेट करने के लिए यूज करें।

अगर diabetic patient हैं तो sugar लेवल हमेशा कंट्रोल में रखें।

बिल्कुल भी देरी ना करें और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें।



Black fungus खतरनाक क्यों है

यह एक बहुत ही रेयर लेकिन जानलेवा इंफेक्शन है।

डायबिटीज या मधुमेह के रोगियों को यह विशेष रूप से प्रभावित करता है।

Steroids और antibiotics  का अधिक उपयोग इस फंगल इंफेक्शन के लिए ट्रिगर का काम करता है, यानी इंफेक्शन को बढ़ा देता है।

ऐसे में दोस्तों इस फंगल इंफेक्शन से बहुत सावधान रहने की जरुरत है।इसके लक्षण जैसे ही नज़र आए वैसे ही डाक्टर से संपर्क करें ।

#where does black fungus attack 

Monday, 17 May 2021

Covid19 घर का वैद्य : जानिए कोरोना काल में कैसे रखें फेफड़ों को मजबूत

 


संदीप कुमार मिश्र: वैश्विक महामारी कोरोना की चपेट में पूरा विश्व है ऐसे में हमारा देश भारत कैसे अछूता रह सकता था।खासकर कोरोना की दूसरी लहर में।दरअसल हमारे देश भारत में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर की वजह से बड़ी संख्या में लोग इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं।जिसका सीधा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ रहा है। फेफड़ों पर इस वायरस के अटैक की वजह से लोग संक्रमित हो रहे हैं और फिर फिर ये वायरस हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाकर जानलेवा साबित हो रहा है।

ऐसे में यदि हमें इस कोरोना वायरस से लड़ना है, तो हमारे फेफड़ों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। तो चलिए जानते एक घरेलू उपाय जो बनाए हमारे फेफडे को मजबूत-

हल्दी की मदद से अपने फेफड़ों को बनाए मजबूत

हमें अपने फेफड़ों को मजबूत करने के लिए अपने खानपान पर तो विशेष ध्यान देना ही होगा साथ ही हमें धूम्रपान से दूर  भी रहना चाहिए और अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो इससे दूरी बनानी पड़ेगी। इसके अलावा आप हल्दी से जुड़ा एक आयुर्वेदिक उपाय भी अपना सकते हैं, जो आपके फेफड़ों को मजबूत करने में आपकी मदद कर सकता है।

आयुर्वेदिक लेप बनाने के लिए क्या सामग्री

आधा चम्मच कच्ची हल्दी या पाउडर, पांच से छह कली लहसुन की, थोड़ा अदरक और आधा प्याज

आपकी रसोई में उपलब्ध इन सामग्री से अब तैयार करना है एक लेप जिसके लिए करना ये है कि हल्दी, अदरक, प्याज और लहसुन को ग्राइंड कर लें और इसका गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसके बाद इस पेस्ट को अच्छी तरह से अपनी चेस्ट यानी छाती पर लगा लें। इसके बाद आपको एक कॉटन के कपड़े को अच्छे से लपेट लेना है।

आयुर्वेदिक लेप के फायदे

इस लेप को लगाने से आपको कई फायदे मिल सकते हैं। इसमें फेफड़ों में बड़ी-बड़ी गांठों को कम करने में मदद मिलेगी, निमोनिया से राहत मिलेगी, फेफड़ों के अंदर जमे कफ को हटाने में मदद करता है और साथ ही ये हमारे फेफड़ों को मजबूत करने में भी मदद करता है।

इस प्रकार से आप इस लेप का प्रयोग कर कोरोना से अपना अपनो का बचाव कर सकते हैं।घर में रहें,मास्क का प्रयोग करें और कोविड प्रोटोकाल का पालन करें।

 

 

DRDO ने बनाई कोरोना की देशी दवा | एंटी कोविड ड्रग 2DG लॉन्च| जाने इस दवा के बारे में सब कुछ

 



संदीप कुमार मिश्र: वैश्विक महामारी कोरोना से निजात पाने के लिए DRDO ने लांच की देसी दवा एंटी कोरोना ड्रग 2DG । इतना ही नहीं इसके इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी भी मिल गई है।आपको बता दें कि ये दवा एक पाउडर के रूप में होगी और इसे सबसे पहले दिल्ली के DRDO कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिया जाएगा।

जून में सभी जगह उपलब्ध होगी : DRDO

ये दवा कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिकाओं पर सीधा काम करेगी।जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम काम करने लगेगा और कोविड मरीज जल्दी ठीक हो जाएंगे। इसे मरीज के वजन और डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन के आधार पर कम से कम 5-7 दिन सुबह-शाम 2 डोज लेनी होगी। एंटी कोविड दवा पर DRDO प्रमुख जी. सतीश रेड्डी का कहना है कि फिलहाल इस दवा का उत्पादन सप्ताह में 10,000 के आस पास होगा।जिसे AIIMS, AFMS और DRDO अस्पतालों में दिया जाएगा। अन्य राज्यों की बात करें तो अगले चरण में यानी जून के पहले हफ्ते से सभी जगहों पर 2DG दवा उपलब्ध करवा दी जाएगी।

DRDO ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज के साथ मिलकर बनाया

जीवन रक्षक इस दवा को DRDO के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस (INMAS) ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज के साथ मिलकर बनाया है। क्लिनिकल रिसर्च के दौरान 2-डीजी दवा के 5.85 ग्राम के पाउच तैयार किए गए। इसके एक-एक पाउच सुबह-शाम पानी में घोलकर मरीजों को दिए गए। जिसका परिणाम बड़ा ही सकारात्मक आया।क्योंकि जिन मरीजों को भी ये दवा दी गई, उनमें तेजी से रिकवरी देखने को मिली। इसी आधार पर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी ।


देश के
27 अस्पतालों में हुआ 2DG का ट्रायल

2DG दवा की बात करें तो सबसे पहले DRDO ने देशभर के जिन 27 अस्पतालों में इस दवा का आखिरी ट्रायल किया था जिसके पाजिटिव रिस्पांश के बाद ही इसे मंजूरी दी गई।

डॉक्टर्स की सलाह पर ही दी जाएगी 2DG

यहां ये जानना भी आपके लिए जरुरी है कि इस दवा को फिलहाल अस्पतालों में डॉक्टर की सलाह पर ही दिया जाएगा। अभी इसकी सिर्फ इमरजेंसी यूज की मंजूरी दी गई है। जब तक इस दवा को सामान्य इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिलती है, तब तक इसका बाजार में आना संभव नहीं है।लेकिन एक बात तो तय है कि निराशा भरे इस माहौल में 2DG दवा आशा की एक किरण लेकर आया है।

Saturday, 15 May 2021

खरी खोटी: दोष आपका नहीं साहेब,हमारे गाँवों में तो विकास पैदा होने से पहले ही दम तोड़ देता है...!

काश ! सत्ता की नज़र समय से हमारे गाँवों पर भी पड़ी होती...तो आज (वैश्विक महामारी के इस दौर में..)की जो दशा और दुर्दशा देखने को मिल रही है वैसी ना होती...शायद की ऐसा कोई गाँव होगा जहां हफ्त़े दस दिन में 12-15 या इससे ज्यादा लोगों की मौत ना हुई हो...उम्र रहते काल के गाल में समा रहे लोग...और भोले भाले इतने की बस ये कह कर संतोष कर जाते हैं कि ए बाबू बड़ा पुन्नी कईले रहलें बस दूई दाईं सांसी उल्टा चलल आ चली गईलें...तनिको तकलीफ नाई दिहलें केहु के…”

किसी और की नहीं मेरे अपने गाँव और आसपास के गाँवों के बारे में बताउं तो एक दो नीम हकीम खतरे जान वाले बंगाली डाक्टर (जो बबासीर,भगन्दर और शर्तिया इलाज के स्पेशलिस्ट अपने बोर्ड पर लिखते हैं और फिजिसियन सर्जन सब होते हैं)  के अलावा,मेडिकल स्टोर वाले भैया जी के भरोसे ग्रामीण अंचल के लोगों का जीवन डग्गामार चल रहा है...आज भी सीधे साधे गाँव के लोगों का जीवन भगवान भरोसे है और और अंतिम यात्रा भी उन्हीं के भरोसे है....


विकास की आँधी और तुफान जैसे नारे वारे....सरकारी योजनाएँ और विकास की गति...सांसद और विधायक निधि...ग्राम प्रधानो की पंचवर्षीय योजनाएं जैसे तमाम फंड या तो चौराहा छाप (एक तरह से देसी गाली ) बनकर रह गए हैं या तो शहरों में कोठी,जमीन,गाड़ी,रायफल,पिस्टल में नज़र आ रहे हैं या आते रहे हैं...इतिहास साक्षी है कि जब भी ऐसी आपदा विपदा आती है तो सांसद और विधायक मरणासन्न अवस्था में होते हैं...और जब सब ठीक हो जाता है तो सड़कों पर इनका काफिला देखते ही बनता है...जैसे ये पद इनकी बपंसत हो....खैर ये तकदीर के सांड होते हैं... हराम का,जनता की गाड़ी कमाई का उपभोग करते हैं पांच वर्ष.. उसके बाद हार भी गए तो क्या फर्क पड़ता है...इतना तो कमा ही लेते हैं कि आने वाली कई पूस्तें बैठ कर खाएं...

लेकिन हमारे गाँव वालों का क्या...उनका क्या दोष...उऩका क्या कसूर...?

 गलती आपकी नहीं मेरे सत्तानसीन आकाओं...ये परिपाटी तो कई दशकों से चली आ रही है और आप तो उसी का निर्वहन कर रहे हैं....कुछ कम या ज्यादा हो सकता है....लेकिन हमारे गाँव कोसो दूर हैं आपकी चकाचौंध और फौरेब से....एक तरह से ठीक भी है...शायद तभी वो तुम्हारा पेट भी भर रहे हैं....नहीं तो तुम्हारे तो मूंह पर लात मार देनी चाहिए जैसे तुमने उनके जीवन के साथ किया है और निरंतर कर रहे हो....तुम हत्यारे हो उन मासूमों का जिनका कसूर बस इतना है कि वो अपने गाँव में खुश रहना चाहते हैं...

नहीं तो सत्ता से चाहिए क्या...? एक अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था (मूल रुप से) बस...! आप कहते हैं कि सवाल ना करे कोई आपसे....अरे भाई कैसे ना करे कोई सवाल....सवाल तो पूछेंगे ही,मसलन----

- आज़ादी के इतने दशकों बाद भी क्या प्रत्येक गाँवों में एक सामुदायिक केंद्र नहीं हो सकता था...दोषी कौन ?

- क्या हमारे गाँव के लोगों की जान इतनी सस्ती है कि एक दर्द निवारक गोली भी उन्हें समय से नसीब ना हो...दोषी कौन ?

-क्या किसी हारी बिमारी में शहर तक जाने के लिए एक एम्बुलेंस का हक तक नहीं उन्हें...दोषी कौन ?

- गाँव के गाँव कोरोना पीड़ित हो रहे हैं...दोषी कौन ?

- वैश्विक महामारी या किसी भी दैविक आपदा से गाँवो को उबारने की कोई व्यवस्था क्यों नहीं...दोषी कौन ?

 - लगातार जो मौते हो रही हैं उनका जिम्मेदार कौन ?

ना जाने ऐसे कितने सवाल हर एक भोलेभाले जनमानस में मन में है...लेकिन वो पूछें तो किससे...किससे लगाएं गुहार... कौन सुनेगा...प्रधान सेवक.....मुख्यमंत्री.....सांसद....विधायक....प्रधान....या कोई और...?...आखिर कौन...?

अफसोस तो होगा ही ना साहेब...जब सुनने में आएगा कि आक्सीजन ना मिल पाने के कारण मर गए... एक सवा करोड़ रुपये में जहां एक आक्सीजन प्लांट बड़े आसानी से लग जाता है...जहां हर जिले में दो दो,चार चार प्लांट लग सकते थे.... वहां व्यवस्था के नाम पर आपका रोना और आरोप लगाना नज़र आया और दूसरी तरफ मासूम भोले भाले लोगों का दहाड़े मार कर अपने अपनो के लिए रोना...चीखना और चिल्लाना नज़र आया.... जिसे देखकर आपका तो पता नहीं लेकिन हमारे जैसे करोड़ों भारतीयों का कलेजा फट गया...

और हर कोई ये सोचने पर विवश हो गया कि मेरे साथ यदि ऐसा हो गया तो मेरे बच्चों को कौन देखेगा....उन्हें कौन संभालेगा...मेरे रहते तो किसी तरह से दो वक्त की रोटी चल रही थी...मेरे बाद क्या होगा....हे भगवान...सब को कुशल रखो....ऐसे सवालों से चाहे प्रत्यक्ष या फिर अप्रत्यक्ष आपको सामना तो करना ही पड़ेगा....

माना कि आपसे पहले वाले बहुत बड़े वाले.....थे.....लेकिन आप भी तो प्रतिस्पर्धा उन्हीं से कर रहे हैं.... (नहीं तो हर सवाल पर उन्हीं का उदाहरण नहीं देते)

हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे गाँव वालों को बस बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर दें.... और ये तभी संभव हो पाएगा जब आपके सिपहसालार आपको सही रिपोर्ट दें....वरना चाटूकारिता में ही तो देश मेरा बर्बाद हुआ....

और हां मेरे प्यारे ग्रामवासीयों एक निवेदन,प्रार्थना विनती आप से भी है....कुछ दिनों की बात है...थोड़ा नेवता खाने में कम जोर दें....चौराहे पर जाने से बचें...शादी ब्याह में भीड़ कम करे...मास्क का प्रयोग करें एक दूसरे से बात करने में दूरी बनाए रखें... क्योंकि आप स्वस्थ और सुरक्षित हैं तभी उन्नति और आनंद है नहीं तो सरकारों का क्या भरोसा..... हर बार तो बदलकर देखा आपने..... हासिल क्या हुआ आप जानते ही हैं..... ~!

-सादर

हम गाँव वाले      

Monday, 9 March 2020

होली पर बन रहा शुभ संयोग,499 वर्ष बाद मकर में शनि और धनु राशि में गुरु।जानिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त



संदीप कुमार मिश्र- क्या आप जानते हैं कि होली इस बार क्यों है बेहद खास ? दरअसल ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्व में वर्ष 1521 के बाद 2020 में 9 मार्च को गुरु अपनी धनु राशि में और मकर राशि में शनि ग्रह रहेंगे।इसी शुभ संयोग के कारण होली जनसामान्य के लिए मंगलदायक रहेगा। यानी 499 वर्ष पूर्व होली के दिन दोनों ग्रहों के अपनी-अपनी राशियों में होने के कारण इस प्रकार कासंयोग बना था।

सबसे अच्छी बात ये है कि होलिका दहन के समय इस वर्ष भद्राकाल की कोई बाधा नहीं रहेगी। फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर करीब डेढ़ बजे ही खत्म हो जाएगा। इस तरह शाम को प्रदोष काल में यानी शाम 6:30 से 7:20 तक किया जा सकेगा। वहीं पूर्णिमा तिथि रात 11 बजे तक रहेगी।

9 मार्च 2020 को होगा होलिका दहन, जानिए होलिका दहन की विधि
होली पर 9 मार्च को सोमवार व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र होने के चलते ध्वज योग रहेगा, जो सभी राशियों के जातकों को यश-कीर्ति और मनोवांछित फल देने वाला होगा।वहीं दूसरी तरफ सोमवार को पूर्णिमा तिथि होने के कारण चंद्रमा का अत्यधिक प्रभाव रहेगा।हम जानते हैं कि सोमवार को चंद्रमा का दिन माना गया है। होली पर स्वराशि स्थित गुरु की दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी, जिससे गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा।
इसलिए तिथि-नक्षत्र और ग्रहों की विशेष स्थिति में होलिका दहन पर मानव शरीर से रोग, शोक और दोष का नाश होगा और  शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। होली पर शुक्र मेष राशि, मंगल और केतु धनु, राहु मिथुन, सूर्य और बुध कुंभ और चंद्र सिंह राशि में रहेगा। ग्रहों के इन योगों में होली आने से यह शुभ फल देने वाली रहेगी।
होलिका पूजन मुहूर्त
भद्रा अवधि में शुभ योग : सुबह 10.16 से 10.31 बजे तक
भद्रा पश्चात लाभामृत योग : दोपहर 1.13 से शाम 6.00 बजे तक।
होलिका दहन मुहूर्त
कुल अवधि : शाम 6.22 से रात 11.18 बजे तक।
शुभ मुहूर्त : शाम 6.22 से रात 8.52 बजे तक।
प्रदोष काल विशेष मंगल मंगल मुहूर्त : शाम 6.22 से शाम 7.10 बजे तक।
इस वर्ष होलिका दहन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र सिंह राशि में होगा। सायं 6:44 से रात्रि 9:02 तक का समय होलिका दहन के लिए सर्वोत्तम है।

किसानों के लिए भी शुभ
इस बार पूर्णिमा सोमवार को पड़ रही है। गुरु और शनि इस बार सूर्य के नक्षत्र में उतराषाढ़ा में रहेंगे। पूर्णिमा सोमवार को पड़ने के कारण पूर्वा पर्व नक्षत्र के बाद उत्तरा पर्व नक्षत्र है। इसमें होलिका पड़ने से कार्य क्षेत्र में वृद्धि की उपलब्धि होगी, साथ ही सोम्य योग होने के कारण किसानों के लिए होली अच्छी रहेगी।


Friday, 28 February 2020

जब संयम रखते हुए उस लाचार मां ने अपने बेटे संयम को चौथी मंजिल से नीचे फेंका...!


दिल्ली दंगे का गुनहगार कौन...?
संदीप कुमार मिश्र- ये दर्द और खौफ कि इंतहा नही तो और क्या है...कि 10 साल के मासूम संयम का उसके इलाके में हुए विभत्स दृश्य को देखकर उसका भी संयम टूट गया...बड़े ही मासूमियत से संयम कहता है कि जिस शहर में सीएम,पीएम खुद रहते हैं वहां भी अगर हम सुरक्षित नहीं हैं तो फिर कहां सुरक्षित रहेंगे....

जब दंगाईयों और इंसानियत के दुश्मनो का हुजूम उसके घर की तरफ बढ़ा तब वो स्कूल से लौटा ही था और अपने छोटे भाई के साथ किसी भी अनहोनी से बेखबर खेल रहा था...तभी उसे अपने मोहल्ले में हंगामें का शोर सुनाई देता है....जब उसने बाहर का नजारा देखा तो इंसान रुपी राक्षसों का हुजूम सड़को पर उत्पात मचा रहा था...जिनकी आवाज पहले दूर से सुनाई दे रही थी वो धीरे-धीरे घर के बाहर ही दस्तक देने लगे...

देखते ही देखते दंगाईयों ने पत्थरों की बरसात कर दी...घरों की खिड़कियों के शीशे टूटने लगे...हर तरफ पत्थर ही पत्थर....धू-धू कर जलती गाड़ियों को देखकर मासूम संयम का संयम भी डोल गया....घर से सामने पागल भीड़ और पहली मंजिल पर जान बचाने की कशमकश में पूरा परिवार...
ना ना ये कोई फिल्म की कहानी नहीं ये हकिकत है दिल्ली की...जहां इंसानियत के दुश्मनो ने जमकर उत्पात मचाया...रक्तपात किया...और दिल्ली के माथे पर एक बदनुमा दाग लगा दिया...
कमरे में कैद संयम की दादी,मां,बाप और छोटा भाई कुछ समझ पाते तभी पीछे गली से कुछ लोग आवाज लगाने लगे कि बच्चों को नीचे फेंको...हम पकड़ लेंगे....वो किसी फरिश्ते से कम नहीं थे...वो लोग थे मोहल्ले के भले मानस...जो ये जानते थे कि घर के आगे का माहौल कैसा है, जहां हजारों की तादाद में दंगाईयों ने नरसंहार शुरु कर दिया है...आखिरकार दिल पर पत्थर रखकर उस मां ने अपने बच्चों को पहली मंजिल से नीचे फेंकना शुरु कर दिया...और नीचे खड़े उन फरिस्तों नें बच्चों और परिवार को बचाना शुरु कर दिया...

अब जब माहौल शांत हो गया तब भी संयम डरते हुए कहता है मुझे अभी भी बहुत डर लगता है कि कहीं फिर से वो लोग ना आ जाएं...

जरा कल्पना कीजिए कि अपनी आंखों के सामने वो मंजर देखना कैसा रहा होगा...जब गुंडो, दंगाईयों ने गाड़ियां ऐसे जला दी जैसे ये कोई सामान्य सी बात हो...दूर दूर तक पूलिस का कहीं अता पता नहीं....ऐसे में कोई सुरक्षा की गुहार लगाता भी तो किससे....

संयम की दादी कहती हैं कि भला हो निगम पार्षद प्रमोद गुप्ता का...जो गली के पीछे खड़े होकर जोर-जोर से आवाज लगाकर कहने लगे कि आंटी जी बच्चों को नीचे फेंको,हम पकड़ लेंगे...कुछ नहीं होगा...और आखिरकार जान बच गई....संयम के पिताजी कहते हैं कि पुलिस वालों से जब सुरक्षा की गुहार लगाई तो वो खुद ही अपनी लाचारी जताते हुए कहने लगे कि हम क्या करें भाई साब,हमें गोली चलाने के आर्डर नहीं है,हम तो खुद ही जान बचा रहे हैं...तभी वो डीएसपी की गाड़ी दिखाते हैं जो जलकर खाक हो गई थी....और कहते हैं कि बताइए ऐसे हालात में हम किससे अपनी जान की सलामती की गुहार लगाते....  

इस दंगे में उनका पूरा घर झुलस गया,गाड़ियां जला दी गई...जिस घर में पिछले 35 साल से ये परिवार रह रहा था...कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि इस तरह से अपना घर छोड़कर भागना पड़ेगा....जब दंगा शांत हुआ तो संयम के मां बाप ने कहा कि अब घर चलते हैं...मां की बात सुनकर संयम ने कहा कि हमें नहीं जाना है...डर लगता है...बड़े समझाने के बाद संयम घर तो लौटता है लेकिन क्या उसके मन मस्तिष्क में से ये विभत्स मंजर इतनी आसानी से निकल पाएगा....!

कहते हैं समय हर घाव भर देता है....उम्मीद करनी चाहिए कि यमुना विहार में एक बार फिर रौनक लौटेगी और संयम ही नहीं यहां के सभी बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौट आएगी....

इस दंगे में किसको क्या मिला वो तो पता नहीं लेकिन जिसने खोया है अपने अपनो को...उनसे जाकर कोई पूछे तो उनका कहना यही होगा कि अब तो इंसानियत से भरोसा उठ गया है साब...!


Wednesday, 26 February 2020

बूरी नजरों के साये में दिल्ली और दिलवाले…!



धू-धू कर जलती गाड़ियां...धूंओं का उठता गुब्बार....हर तरफ हंगामें और शोर की आवाजें...पत्थरों से पटी सड़कें....अनगिनत घायलों के चीख और कराह से भरे पड़े अस्पताल....और मातम में बदलती अनगिनत परिवारों की खुशियां...घरों में कैद हो चुके लोग...और भी ना जाने ऐसे कितने वाक्या... जिसे जितना कम जाने उतनी ही दिल की गती सामान्य रहेगी....नहीं तो ना जाने कब जान से हाथ धो देना पड़े...कमजोर दिल के वो लोग...या फिर जिन्होने अमन पसंद इस शहर को देखा है वो तो इसे कतई ना देखें....और जो घरों में कैद हो गए हैं उनके बारे में तो यही कहेंगे कि हालात जब तक सामान्य ना हो तब तक उनका कैद रहना ही बेहतर है...ये भयावह नजारे किसी खाड़ी देश के नहीं है...ये देश की राजधानी दिल्ली है...जिसकी फिजाओं में फिलहाल अमन की पतंगो पर रोक लगा दी गई है क्योंकि गोलियों का शोर जो बढ़ गया है....अब तो दिलवालों की दिल्ली कहना बेमानी सा लगने लगा है...क्योंकि अब यहां खून ही खून का प्यासा बन बैठा है...

सियासत के हमारे शौकिनयहां आरोप प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त हैं...शौकिन इसलिए क्योंकि सियासत में मुद्दों की कद्र होती है और मुद्दे केंद्रित होते हैं आवाम पर....लेकिन ना जाने क्यूं हम भटक गए... आखिर यही तो वो दिल्ली तब भी थी जब हमें ना तो पूजा से कोई आपत्ति थी और ना ही अजान से....ईद और दिवाली भी तो साथ साथ ही मिलकर मनाते थे....ना जाने ऐसा क्या हो गया कि हम एक दूसरे के ही खून के प्यासे बन बैठे....

शायद कुछ लोग भ्रम पाल बैठे हैं कि हिंसा ही समस्या का समाधान है....अफसोस कि वो समझ नहीं पा रहे हैं कि हिंसा तो पतन की ओर ले जाती है....और अहिंसा शांति का मार्ग बनाती है...इसलिए अफवाहों से बचें और इंसानियत को तवज्जों देकर अमन शांति कायम करने का प्रयास करें...
#SaveDelhi#StopViolance




  

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...