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Monday, 4 January 2016

पाकिस्तान से शराफत की उम्मीद, बेमानी है साब...इतिहास गवाह है



संदीप कुमार मिश्र:  बार-बार उम्मीद करना,वो भी ऐसे मुल्क से जिसका ना तो कोई इमान हो ना ही कोई धर्म।जिसका मानवता से सरोकार कम,और इन्सानियत के दुश्मन के रुप में ज्यादा हो।ऐसा ही मुल्क है हमारा पड़ोसी पाकिस्तान।जिसे हम चाहकर भी नहीं बदल सकते।

पंजाब के पठानकोट वायुसेना बेस पर यूनाइटेड जेहाद काउंसिल (UJC) ने हमला किया।आपको बता दें कि आतंकी संगठनो का ये एक समुह है, जिसने हमले की जिम्मेदारी ली है।जैसा कि पहले अंदेशा लगाया जा रहा था कि जैश ए मोहम्मद के आतंकवादियों के हमला किया है।लेकिन इस हमले ने ने एक बार फिर भारत पाकिस्तान के बीच बन रहे रिश्तो में कड़वाहट तो जरुर पैदा कर दी है।जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर में रुक कर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई और नवासी के निकाह में शामिल होकर दुनिया को चौंका दिया था। एक बार तो ऐसा लगा कि दोनों देशो के संबंधो में अच्छे दिन की आस बढ़ गयी थी।

लेकिन पठानकोट में हुए आतंकी हमले ने ये बता दिया कि नापाक पड़ोसी से रिश्ते तब तक  नहीं बेहतर हो सकते जब तक पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार,अपनी सेना और कुख्यात खुफिया विभाग ISI आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करती।तब तक भारत से संबंधों में बेहतरी की उम्मीद करना बेमानी ही होगी क्योंकि इतिहास तो यही कहता है।

अब बात 1999 में हुए कारगिल युद्ध की हो,या फिर 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों की हो, या 2008 के अहमदाबाद और सूरत में हुए आतंकी हमले की हो , जयपुर, बैंगलौर, दिल्ली, 26/11 मुंबई, जर्मन बेकरी (पुणे), झावेरी बाज़ार, गुरदासपुर, उधमपुर, नियंत्रण रेखा पर गोली बारीकी हो।इन आतंकियों के रिश्ते और तार तो पाकिस्तान से ही जुड़े हैं।कितने सबूत दिए गए,जिंदा और मुर्दा,प्रमाणित भी किया गया,लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।

हाफिज़ सईद से लेकर मसूद अज़हर,दाउद इब्राहिम ऐसे ना जाने कितने दरिंदे बेखौफ होकर पाक की नापाक सरजमीं पर रह रहे हैं।जिसपर एक नहीं एक हाजार सबूत देने के बाद भी पाकिस्तान खामोश बैठा है।

दोस्तों आपको याद होगा लोकसभा चुनाव से पहले का अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी का वो बयान।जिसमें उन्होने कहा था कि,गोलीबारी के बीच बातचीत सुनाई नहीं देती। वो पाकिस्तान को भली भांति समझते हैं और इसीलिए पाकिस्तान समझ जाए कि आतंकवाद नहीं चल सकता।यकिनन देश की सत्ता पर काबिज होने के बाद पीएम ने इस बात के साफ संकेत भी दिए।आपको याद होगा जब पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की थी तो भारत ने न केवल नियंत्रण रेखा पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी इंट का जवाब पत्थर से दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान हिल गया और नियंत्रण रेखा शांत हुई।ये संदेश था कि अब गोली का जवाब गोली से ही देंगे।वरना शांती बनाए रखने में सहयोग दो।

लेकिन अपनी हरकतों से बाज ना आने वाला पाकिस्तान और उसके पाले हुए आतंकवादियों नें  हमले तेज कर दिए।जिसके बाद  गुरदासपुर, उधमपुर, उत्तर कश्मीर के शहरो और कस्बो पर आतंकी हमले हुए।जिसमें कई सेना के जवान शहीद हुए।बावजूद इसके भारत की तरफ से पाकिस्तान को कोई करारा जवाब नहीं दिया गया।

इतना ही नहीं पाक की खुफिया एजेंसी ISI लगातार महिलाओं के जरिए हमारी सेना की जानकारी लेने की कोशिश कर रही है। आतंकवादी एक के बाद एक कई हमले कर रहे हैं और हम सिर्फ कड़ी कार्यवाही,मुंहतोड़ जवाब देने की बात कर रहे हैं।

दरअसल मुंहतोड़ जवाब का मतलब क्या है ? इस बात में कोई शक नहीं कि भारत युद्ध नहीं चाहता और पाकिस्तान युद्ध करने में सक्षम नहीं है।आपको ये भी बता दें कि पाकिस्तान की सेना अपने पश्चिमी सीमा पर आतंकियों से लड़ रही है। पाकिस्तान के पास अभी हथियारो की, गोला बारूद की कमी भी है। उसके विमान और युद्धपोत, युद्ध के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं है। जिसकी वजह से कहीं ना कहीं आतंकियो के द्वारा भारत में दहशतगर्दी फैलाना पाकिस्तान की कारगर रणनीति हो सकती है।क्योंकि पाकिस्तान खुद से ज्यादा हमारी ताकत और साहस को जानता है।हमारे जवानो के सामने उसके हौंसले पस्त हो जाते हैं,तभी तो छद्म युद्ध का सहारा लेकर आकंतियों को भारत में भेजता है पाक।

इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता,और हमें मान भी लेना चाहिए कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी(ISI)और सेना हमें अपना दुश्मन मानती है औ मानती आयी है।ऐसे में मित्रता की बात जरुर नवाज शरीफ करते हैं,शांती चाहते हैं लेकिन उनकी सेना हर संभव यही प्रयास करती है कि दोनो देशों के संबंध मधुर ना हो पाएं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक यूं ही हमारे जवान शहीद होते रहेंगे,यूं ही हम मातम मनाते रहेंगे।क्या कोई कारगर और ठोस रणनीति नहीं बन सकती जिससे आतंकियों को समुल रुप से नष्य किया जा सके।क्या अब ऐसा नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी को ये तय करना जरुरी हो गया है कि उन्हे पाकिस्तान से मधुर संबंध रखने है या फिर सुरक्षित भारत को।

ये उम्मीद भी हम पीएम मोदी से ही कर सकते हैं क्योंकि उनमें निर्णय लेने की क्षमता है।नहीं चाहिए किसी दूसरे देश की वाहवाही हमे।हमें तो अपना सुरक्षित भारत चाहिए।जिसके लिए पाकिस्तान को स्पस्ट और दो टूक कहना होगा कि ठोस सबूतो के आधार पर या तो पाकिस्तान कार्रवाई करे या फिर दोस्ती का दिखावा छोड़ दे।क्योंकि भारत अब आतंकवाद बर्दास्त नहीं करेगा।


अंतत: दोस्तों अब तो हमें एक बात जरुर समझ लेनी चाहिए कि पाकिस्तानी सेना और ISI भारत को अपना दुश्मन मानती हैं और रहेंगी।पाकिस्तानी सेना बार-बार पीठ में खंजर भोंक रही है। इसलिए आतंक के खिलाफ कदम भारत को ही उठाने होंगे और ये कार्य हर सूरतेहाल करना ही होगा,मानवता की रक्षा के लिए।

बर्थडे स्पेशल : निरुपा राय हिन्दी सिनेमा की सफल मां

संदीप कुमार मिश्र: माया नगरी यानी हिन्दी सिनेमा में मां की भूमिका बेहद खास रही है,तमाम ऐसी फिल्में सिनेमा के पर्दे पर मां पर आधारित रही है।ऐसे में मां की भूमिका की जब भी चर्चा होगी तो एक नाम आपके जहन में जरुर आ जाएगा।जी हां ठीक समझे आप, निरूपा राय को ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने किरदारों से मां के चरित्र को नया आयाम दिया,सिनेमाई पर्दे पर सजीव कर दिया ।
निरूपा राय जिनका मूल नाम कोकिला है,उनका जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के बलसाड में एक मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था । उनके पिता रेलवे कर्मचारी थे। निरूपा राय ने चौथी तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उनका विवाह मुंबई में कार्यरत राशनिंग विभाग के कर्मचारी कमल राय से हो गयी और शादी के बाद निरूपा राय मुंबई आ गई। उन्हीं दिनों निर्माता और निर्देशक बी.एम.व्यास अपनी नई फिल्म रनकदेवी के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे।जिसके लिए अखबार में कलाकारों की आवश्यकता का विज्ञापन निकला था।
दोस्तों निरूपा राय के पति फिल्मों के बेहद शौकीन थे, और अभिनेता बनना चाहते थे।खैर,विज्ञापन देखने के बाद कमल राय अपनी पत्नी को लेकर बी.एम.व्यास से मिलने गए और अभिनेता बनने की पेशकश की, लेकिन बी.एम.व्यास ने साफ कह दिया कि उनका व्यक्तित्व अभिनेता के लायक नहीं है, लेकिन यदि वह चाहे तो उनकी पत्नी को फिल्म में अभिनेत्री के रूप में काम मिल सकता है।

जिसके बाद फिल्म रनकदेवी में निरूपा राय 150 रुपए माह पर काम करने लगी।लेकिन बाद में उन्हें इस फिल्म से अलग कर दिया गया। निरूपा राय ने अपने सिने करियर की शुरूआत 1946 में प्रदर्शित गुजराती फिल्म गुणसुंदरी से की। वर्ष 1949 में प्रदर्शित फिल्म हमारी मंजिल से उन्होंने हिंदी फिल्म की ओर भी रुख कर लिया। ओ.पी.दत्ता के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके नायक की भूमिका प्रेम अदीब ने निभाई। उसी वर्ष उन्हे जयराज के साथ फिल्म गरीबी में काम करने का अवसर मिला। इन फिल्मों की सफलता के बाद निरुपा जी फिल्म जगत में अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गई।
दोस्तों वर्ष 1951 में निरूपा राय की एक और बेहद खास फिल्म हर हर महादेव प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में उन्होंने देवी पार्वती की भूमिका निभाई। फिल्म की सफलता के बाद वह दर्शकों के बीच देवी के रूप में प्रसिद्ध हो गई। इसी दौरान उन्होंने फिल्म वीर भीमसेन में द्रौपदी का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। पचास और साठ के दशक में निरूपा राय ने जिन फिल्मों में काम किया, उनमें अधिकतर फिल्मों की कहानी धार्मिक और भक्तिभावना से परिपूर्ण थी। हालांकि वर्ष 1951 में प्रदर्शित फिल्म सिंदबाद द सेलर में निरूपा राय ने नकारात्मक चरित्र भी निभाया।
लेकिन निरुपा जी की साल 1953 में प्रदर्शित फिल्म दो बीघा जमीन निरूपा राय के सिने करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। विमल राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वह एक किसान की पत्नी की भूमिका में दिखाई दी। फिल्म में बलराज साहनी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। बेहतरीन अभिनय से सजी इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई।
वो डायलाग तो आपको याद ही होगा कि,जाओ, पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे बाप से साइन लिया था....याद है न सलीम-जावेद के ये चोटदार संवाद जिसने अमिताभ बच्चन को अपने करियर में एक नई ऊंचाई बक्षी थी? मगर उन लेखकों का कमाल ये था कि अमिताभ की मां के रूप में सामने खडी निरूपा राय को भी उतने ही सशक्त संवाद दिये थे। निरूपा जी जवाब में कहतीं हैं कि, “वो आदमी कौन था, जिसने तुम्हारे हाथ पे लिख दिया था कि तुम्हारा बाप चोर है? कोई नहीं... मगर तु तो मेरा अपना बेटा था... मेरा अपना खुन?... तुने अपनी मां के माथे पे ये कैसे लिख दिया कि उसका बेटा एक चोर है?” हिन्दी सिनेमा के इतिहास में रचे गए मां-बेटे के सबसे बेहतरिन द्दश्यों में से एक उस सीन का अंत जिस अंदाज में निरूपा जी करतीं हैं, वो कौन भुला होगा? “बडा सौदागर बन गया है, बेटा.... मगर तु अभी इतना अमीर नहीं हुआ कि अपनी मां को खरीद सके!।इस फिल्म (दीवार) में निरुपा राय का बेहतरीन और सशक्त अभिनय दर्शकों को देखने को मिला था।


अंतत: चार बार फिल्मफेयर अवार्ड पाने वाली अपने जमाने की मशहूर अदाकारा थी निरुपा जी।आज उनके जन्म दिन पर बस यूं ही उनकी याद आ गयी,सोचा आपके साथ शेयर करुं।क्योंकि मां की भूमिका क्या होती है हमारे जीवन में हम सब जानते हैं,जींदगी अधूरी सी लगती है मां के बिना। पर्दे पर ही सही,निरुपा राय जी ने मां के जिस सजीव चरित्र को पर्दे पर उतारा है,वो अविस्मरणीय है।  



Sunday, 3 January 2016

मियां नवाज़ पहले खत्म करें आतंकवाद फिर बने शरीफ



संदीप कुमार मिश्र: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक हुई पाकिस्तान यात्रा को अभी कुछ ही दिन हुए थे कि आतंकीयों की शगणगाह पाकिस्तान की सरजमी से आये आतंकीयों ने पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला कर दिया।और एक बार फिर ये साबीत कर दिया कि वार्ता और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते हैं।पाक की नियत को देखकर ना जाने क्यूं ऐसा लगने लगा है कि पीएम मोदी की पाकिस्तान यात्रा के बाद पठानकोट हमला उसी प्रकार है जैसे अटल जी द्वारा लाहौर बस यात्रा के बाद कारगिल।

दरअसल किसी ने कल्पना भी नहीं कि थी कि अफगानिस्तान से भारत आने की बजाय पीएम मोदी नवाज को जन्मदिन पर बदाई देने के लिए आतंक की सरजमीं पाक भी जा सकते हैं।लेकिन ऐसा हुआ,क्योंकि हमारी कोशिश और प्रयास शांति और अमन बहाल करने की है।तभी तो पीएम मोदी की यात्रा से विश्वास बढ़ने की आस जग गई।ऐसा भी लगा कि पाकिस्तान की सरकार वार्ता तो चाहती है,जिससे लोकतंत्र पर आम नागरिक का विश्वास बढ़ सके।लेकिन मानवता के दुश्मनों को दो देशों के मुखिया की बातचीत रास नहीं आयी। तभी तो इस यात्रा के फौरन बाद हाफिज सईद का ज़हरीला बयान सामने आया कि मोदी कि ये यात्रा कैसे हो सकती है? हापिज का कहना था कि पीएम मोदी की यात्रा से पाकिस्तान की जनता का दिल दुखा है और मोदी के इस स्वागत पर मियां नवाज शरीफ को आवाम को जवाब देना चाहिए।

अपने बयान में हाफिज सईद काबुल और बांग्लादेश में पीएम मोदी के बयानों का जिक्र भी करता दिखाई दिया।यानि किसी के लिए भी ये समझना आसान है कि हाफिज आतंक फैलाने के साथ ही हमारे देश और पीएम मोदी की सियासी यात्राओं और बयानों पर भी बड़े ही बारीकि से नजर रख रहा है।किसी भी मुल्क के लिए इससे बड़ी विड़ंबना और क्या हो सकती है कि  वहां की सरकार सत्ता में रहते हुए भी कठपुतली की तरह काम करे।लाचार और बेबस नजर आए।जैसा की हमारे पड़ोसी मुल्क में होता आया है।मजे कि बात तो ये है कि नवाज शरीफ चाहकर भी तो राहिल शरीफ और हाफिज सईद की जकड़न से नहीं निकल पा रहे हैं।इससे बड़ा दुर्भाग्य पाकिस्तान के लिए और क्या हो सकता है।

हमारे देश में कयास में पहले से ही लगाये जा रहे थे कि पीएम मोदी की पाकिस्तान यात्रा के बाद कोई आतंकी हमला देश में हो ताज्जुब की बात नहीं है।इस नजरीये से देश में अलर्ट भी था और खुफिया एजेंसियों के इनपुट भी।

लेकिन कांग्रेस ने आरोप लगाया इस इनपुट के बावजूद हमला रोकने में नाकाम क्‍यों हुए? जिस पर गृहमंत्री का जवाब भी कहीं ना कहीं वाजिब दिखाई पड़ता है कि जितनी तैयारी से ये आतंकी आए थे, ऐसा लगा किसी बड़े हमले की साजिश थी। लेकिन सेना और सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी ने इस बड़े हमले को नाकाम कर दिया।वहीं पाकिस्तान के विशेषज्ञों ने एक बार फिर सबूत का रोना रोया।वहीं पठानकोट हमले की पड़ताल की गई तो एक बार फिर आतंकियों द्वारा पूर्व एसपी से छीनी गई कार से मिले कागजात ने ये साफ किया कि पठानकोट हमला आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का काम है।पठानकोट में जिस शख्स को आतंकियों ने बंधक बनाया उसके मोबाइल से पाकिस्तान चार कॉल किए।जिससे एक बात तो साफ गई कि आतंकी  पाकिस्तानी ही थे।

ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि पाकिस्तान इस बात को कब कूबुल करेगा कि आतंकी उसी की जमीन का इस्तेमाल करते हैं।जबकि इस बात को सिर्फ हमारा देश ही नही कहता बल्कि विश्व के सभी देश इस बात को मान चुके हैं कि पाकिस्तान की जमीन ही आतंक की पनाहगार है और बिना किसी डर और भय के पाक में हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी, मसूद अजहर जैसे खतरनाक आतंकी खुलेआम इस जमीन पर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं।ऐसे में क्या अब पाकिस्तान की सत्ता पर काबीज जनाब नवाज शरीफ साब वास्तव में आतंकियों और सेना के खिलाफ खड़े होकर विश्व पटल पर सकारात्मकता का परिचय देंगे या फिर एक बार तख्तापलट झेल चुके मिंया नवाज साब आंख पर पट्टी बांधकर इसी प्रकार शरीफ बने रहेंगे।

पाकिस्तान को इस बात को मानना होगा कि आतंक का सबसे बड़ा पनाहगार होता है उसका समर्थन।पाकिस्तान को अपनी छवी सुधारनी है तो आतंक के खिलाफ लड़ने के लिए पहले उसे इस बात को खुलकर स्वीकार करना होगा कि ये आतंकी संगठन उसकी जमीन पर ही पल रहे हैं।जिसका सहयोग वहां की सेना ही कर रही है,जिसपर हर हाल में लगाम लगाना ही होगा।वहीं आतंक के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए हाफिज और लखवी जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में नवाज शरीफ को भारत का हर हाल में सहयोग करना चाहिए।

अंतत: एक बात तो स्पस्ट है कि नवाज शरीफ ने जिस गर्मजोशी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया उसने उम्मीदें बढ़ गई थी और हैं भी। लेकिन यदि नवाज साब पठानकोट हमले के बाद कोई कड़ा रुख नहीं दिखाते हैं तो ये या तो उनके डर को दिखाएगा या उनके दोहरे चेहरे को और फिर शरीफ बने रहना उनके लिए बहुत मुश्किल होगा।



Saturday, 2 January 2016

केरल में बन रहा ‘जटायु पार्क’: त्रेतायुग की याद दिलाता अद्भूत पार्क



संदीप कुमार मिश्र : भारत भूमि पर अनेकानेक ऋषी मुनियों ने अवतार लिया,जिन्होंने पुराणों वेदों की रचना की,ग्रंथों की रचना की।आज उन्हीं पौराणिक मान्यताओं को साथ लेकर समाज आगे बढ़ रहा है।इसे आप कल्पना कहें या मिथकीय कहानियां,लेकिन समाज और मानवता को एक सुत्र में बांधकर आगे बढ़ानो का कार्य तो बखुबी करते हैं हमारे धर्म ग्रंथ और पौराणिक मान्यताएं। हमें एक अद्भूत और अलौकिक शक्ति का एहसास कराती हैं हमारी मान्यताएं और ग्रंथ।


दरअसल ये बाते हम इसलिए कर रहे हैं कि अयोध्या, मथुरा जैसे कई ऐसे स्थान हमारे देश में हैं, जिनका सीधा संबंध भगवान राम और कृष्ण के साथ ही अनेकों देवी देवताओं से है।हम सब जानते हैं कि भगवान विष्णु ने इस धरा धाम पर जितने भी अवतार लिए उन सभी में विशेष तौर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की लीला और अपनी मुरली की धुन पर सभी को मंत्रमुग्ध कर देने वाले भगवान कृष्ण के भक्तों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।

मित्रों ये बात हम सब जानते हैं कि त्रेतायूग में भगवान राम ने इस धरती पर धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए अवतार लिया था।रामायण में ऐसा कहा गया है कि राक्षस राज रावण जिसने माता सीता को हरने का दुस्साहस किया था और उसकी यही गलती उसके अंत का कारण बनी थी।खैर जब रावण माता सीता का हरण कर उसे अपने पुष्पक विमान में जबरन बैठाकर ले जा रहा था तो मार्ग में जटायु नामक पक्षी ने उसे रोकने का भरसक प्रयास किया, लेकिन अफसोस वह अपने प्राण गंवाकर भी माता सीता को नहीं बचा पाया ।


दरअसल रामायण के उसी पात्र जटायु से प्रेरित केरल में जटायु नेचर पार्कका निर्माण किया जा रहा है।जी हां इस रॉक थीम नेचर पार्क के दरवाजे आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए इसी नव वर्ष 2016 में खोल दिए जाएंगे।जिसे देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं होगा पर्यकों के लिए।

जैसा कि आप तस्वीरों (उपर)में भी देख पा रहे हैं कि इस पार्क में किस प्रकार पहाड़ी के ऊपर जटायु पक्षी की एक अतिविशाल प्रतिमा बनई गई है।आपको बता दें कि जटायु की ये अद्भूत प्रतिमा समूची दुनिया में पक्षियों पर बनी सबसे बड़ी प्रतिमा है।जो कि 200 फीट बड़ी, 150 फीट चौड़ी और 70 फीट ऊंची है। इस प्रतिमा के भीतर ही एक म्यूजियम के साथ ही  एक 6डी थियेटर और कई टेक्निकल अजूबे भी मौजूद हैं।जिसे देखना किसी के लिए भी रोमांच से कम नहीं होगा।

जहां गिरे थे जटायु वहीं प्रतिमा की स्थापना
रामायण में ऐसा कहा गया है कि जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें अपने साथ ले जा रहा था। तब जटायु ने उसे रोकने का प्रयास किया था, इसी दौरान रावण ने अपने चंद्रहास खड़ग से जटायु पर वार कर उसके एक पंख को काट दिया था। जटायु का यह पंख केरल के तिरुअंनतपुरम से करीब 50 किलोमीटर दूरी पर गिरा था। यही वो स्थान है जहां जटायु गिरा था।इस पार्क के भीतर एक बड़ा सा चट्टान भी विद्यमान है।यह पत्थर उस अद्भुत और अजूबे दृश्य का गवाह माना जाता है।


साथियों कहना गलत नहीं होगा कि इस पार्क के शुरु होने के बाद केरल में पर्यटन को खुब बढ़ावा मिलेगा।क्योंकि इस पार्क के पहले फेज़ में एक ऐडवेंचर ज़ोन होगा, इस तीन किलोमीटर के त्रिज्या वाले पार्क में 20 से अधिक खेल होंगे, जिसमें पेंट बॉल, लेजर टैग, तीरंदाजी, राइफल शूटिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, बोल्डरिंग, एटीवीस् और रैपलिंग, इसके अलावा यहां के बेज़ोड़ नज़ारों के साथ ही इस पार्क में अत्यंत आधुनिक केबल कार की भी सुविधा है। साथ ही यहां केरल के प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सा की भी सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी।


आपको बता दें कि इस जटायु पार्क प्रोजेक्ट के पहले चरण में 100 करोड़ रुपये लग चुके हैं, और आने वाले समय में यह पार्क दुबई पर्यटन से साझेदारी में भी कई प्रोजेक्टों पर काम करेगा।


अंतत: निश्चिततौर पर इस पार्क के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही पर्यटन और दर्शन का आनंद भी लोग उठा सकेंगे। 


विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, जिसकी बढ़ती है हर साल उंचाई !



संदीप कुमार मिश्र : भगवान आशुतोष की महिमा अपरंपार है।भोलेनाथ किस किस रुप में अपने भक्तों पर अपनी कृपा बाए रखते हैं ये तो वही जानते हैं।लेकिन भोले की एक महिमा को हम आपको जरुर बता सकते हैं।दरअसल भले की महिमा ही है कि विश्व का एक ऐसा अद्भूत प्राकृतिक शिवलिंग हमारे देश में है,जिसकी उंचाई हर वर्ष बढ़ती रहती है।जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।


दोस्तों मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद नया प्रदेश बना छत्तीसगढ़।जहां की राजधानी से मात्र 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है,जिला-गरियाबंद।और जिला मुख्यालय से सिर्फ 3 कि.मी. की दूरी पर है ग्राम मरौदा ।जहां के जंगलों में है अद्भूत प्राकृतिक शिवलिंग।जिसे हम भूतेश्वर महादेव के नाम से जानते हैं।



इस प्राचिन शिवलिंग को संपुर्ण संसार में इसलिए जाना जाता कि इसकी ऊंचाई हर वर्, बढ़ जाती है।इतना ही इस शिवलिंग को अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है।वहीं इस शिवलिंग को भकुर्रा महादेवभी कहते हैं। यहां पूजापाठ करने वाले स्थानीय पंडितों और मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि हर महाशिवरात्रि को इस शिवलिंग की ऊंचाई और मोटाई मापी जाती है।जबकि सदस्यों का स्पस्ट कहना था कि हर साल यह शिवलिंग तकरिबन एक इंच से पौन इंच तक बढ़ जाती है।



इस शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि सैकडो वर्ष पहले जमीदारी प्रथा के समय पारागांव निवासी शोभासिंह जमींदार की यहां पर खेती थी। जमींदार शोभा सिंह जब शाम को अपने खेत मे घुमने जाते थे। एक दिन उन्हें खेत के पास एक विशेष आकृति नुमा टीले से सांड के हुंकारने (चिल्लानें) एवं शेर के दहाडनें की आवाज सुनाई दी। अनेक बार इस आवाज को सुनने के बाद शोभासिंह ने इस बात अपने गांव वालों को बताया।गांव वालों ने भी शाम को इस प्रकार की आवाजे अनेक बार सुनी,जिसके बाद आवाज करने वाले सांड और शेर की खोज होने लगी।लेकिन जब खोज से कुछ भी हासिल नहीं हुआ तब लोगों की आस्था इस टीले के प्रति लोगो की श्रद्वा बढने लगी और लोग इस टीले को शिवलिंग के रूप में मानने लगे। इस बारे में पारा गावं के लोग बताते है कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। लेकिन धीरे-धीरे इसकी उंचाई और गोलाई बढती गई। जो अब भी निरंतर जारी है। इस शिवलिंग में प्रकृति प्रदत जललहरी भी दिखाई देती है। जो धीरे धीरे जमीन के उपर आती जा रही है।इसे प्रकृति का चमत्कार और महादेव की महिमा नहीं तो और क्या कहेंगे।


दोस्तों भूतेश्वर महादेव की ऊंचाई का विवरण आज से नहीं बल्कि सन 1952 में प्रकाशित कल्याण तीर्थाक जो गीताप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित होती है,उसके पृष्ठ क्रमांक 408 पर भी मिलता है।जहां इसकी ऊंचाई 35 फीट और व्यास 150 फीट उल्लिखित है। सन 1978 में इसकी ऊंचाई 40 फीट बताई गई थी। वहीं सन 1987 में इसकी ऊंचाई 55 फीट और 1994 में फिर से थेडोलाइट मशीन से नाप करने पर 62 फीट और उसका व्यास 290 फीट मिला।वर्तमान में इस शिवलिंग की ऊंचाई 80 फीट बताई जा रही है, जो कि इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रुप में दर्ज करती है। भूतेश्वर महादेव के शिवलिंग पर एक हल्की सी दरार भी है, जिसकी वजह से कई लोग इसे अर्धनारीश्वर का स्वरूप भी मानते हैं।अब इस मंदिर परिसर में छोटे-छोटे कई मंदिर भी बना दिए गए हैं।



अंतत: धन्य हैं भगवान आशुतोष और धन्य है उनकी महिमा।आदि काल से भगवान की महिमा और उनका आभास हमें आस्था से तो जोड़ता ही आ रहा है साथ ही हमारे विश्वास को और भी मजबूत बना रहा है।

तुलसी मानस मंदिर : जहां की हर दीवार पर सजी हैं मानस की चौपाईयां



संदीप कुमार मिश्र : हमारा देश आस्थाओं का देश है,सनातन संस्कृति का देश है।जहां के कण-कण में ईश्वर का वास कहा जाता है,वो देश है भारत।दोस्तों श्रीरामचरितमानस जो एक पवित्र ग्रंथ है।गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस में प्रभु श्रीराम के संपुर्ण जीवन का बड़ा ही सजीव वर्णन किया गया है।मानस का अध्ययन कर हम अपने जीवन में मानवीय मुल्यों को समझते हैं और आत्मसात करते हैं।


दरअसल ये बात हम इसलिए कह रहे हैं कि बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी कैण्ट रेलवे स्टेशन से मात्र 7 कि.मी. की दूरी पर स्थित दुर्गाकुण्ड के पास एक बड़ा ही मनोरम मंदिर का निर्माण किया गया है।जिसका नाम है तुलसी मानस मंदिर। इस मंदिर की सबसे खास बात जो है वो ये कि इस मंदिर की सभी दीवारों पर श्रीरामचरितमानस के अनमोल चौपाईयों और दोहे अंकित हैं।


 काशी के जिस स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया गया है,उस जगह के संबंध में कहा जाता है कि कभी इसी स्थान पर गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज ने श्रीरामचरितमानस की रचना की थी।इसी परिकल्पना के आधार पर यहां बने मंदिर का नाम तुलसी मानस मंदिर रखा गया।आपको इस मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही सुमधुर स्वर में संगीतमय श्रीरामचरितमानस संकीर्तन सुनने को मिल जाएगा।जिससे मन भक्ति भाव से भर जाता है।


दोस्तों काशी के स्थानीय लोगों का कहना है कि,किसी समय यहां एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था। सन 1964 में कलकत्ता के एक व्यापारी सेठ रतनलाल सुरेका ने सफेद संगमरमर से एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया, जिसका उद्घाटन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किया था।


इस अद्भूत और सुंदर मन्दिर के बीच में मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीरामजी, माता सीताजी, लक्ष्मणजी और हनुमानजी की नयनाभिराम प्रतिमाएं सुशोभित हैं।ये प्रतिमाएं चलायमान हैं। साथ ही यहां एक ओर माता अन्नपूर्णा और शिवजी तथा दूसरी तरफ भगवान सत्यनारायण का मन्दिर भी है। इस मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्वचालित श्रीराम और कृष्णलीला प्रदर्शित की गई है। इसी मंजिल पर तुलसीदासजी की प्रतिमा भी विराजमान है। काशी के भीड़-भाड़ भरे अन्य मंदिरों से अलग इस मंदिर का शांत वातावरण बरबस ही लोगों को अपनी और खींच लेता है। तुलसी मानस मंदिर में सुबह शाम श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। वहीं सावन के पवित्र महीने में तो यहां दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है।धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो,प्राणियों में सद्भावना हो,विश्व का कल्याण हो।यही संदेश तो मानस और प्रभु श्रीराम के जीवन से जगत को मिलता है।अत: इसका विकास निरंतर होते रहना चाहिए।। 

नव वर्ष 2016 की आप सभी को हार्दिक बधाई


HAPPY NEW YEAR 2016
नव वर्ष नव उमंग का,
सुस्वागतम,
अभिनंदन, अभिनंदन,अभिनंदन,
राष्ट्र का विकास हो,
ज्ञान का प्रवाह हो,
शांति का संदेश हो,सर्वजन में विवेक हो
मानवता के दुश्मन,
आतंकवाद का नाश हो,
विश्व में भाईचारे संग, सद्बभावना का विकास हो,
मजहब के नाम पर...
फैल रहा आतंकवाद,
आतंकी सोच का विनाश हो, विनाश हो,
पड़ोसी के साथ प्यार हो,
जन-जन के पास...
रोटी कपड़ा और मकान हो,
नारी का सम्मान,अधिकार समान हो,
देश के समग्र विकास में,
हर कोई साथ चले,
आजादी हो,स्वतंत्रता हो,खुशहाल समाज हो,
जय जवान,जय किसान,
जय जय विज्ञान हो,
हर सफर आसान हो,हर मुश्किल का समाधान हो,
नव वर्ष नव उमंग का,स्वागत,आगाज हो,
पुरानी यादों से सीखें हम,
विचलित ना वर्तमान हो,
धैर्य,और ज्ञान संग,भविष्य का निर्माण हो,
श्री और राम की कृपा लिए,
सत्य का संग हो,
सत्ता और सियासत से समाज का कल्याण हो,
मंगल की कामना है,
अमंगल का नाश हो,
भाव,राग,ताल हो
भारता का निर्माण हो,
एक भारत,श्रेष्ठ भारत का सपना साकार हो,
जय हो भारत भूमि
मां भारती का ही राग हो,
नव वर्ष,नव उमंग का,स्वागत,सत्कार हो, 
2016




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