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Thursday, 31 October 2019

सूर्य उपासना का ऐसा लोक आस्था का पर्व सिर्फ भारत में ही देखने को मिल सकता है



।।जय छठी मईया।।
कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाए
#सूर्यउपासना का महापर्व #छठ जो #लोकआस्था का महापर्व है।जिसके गीत की धुन सुनते ही यकिन मानिए मन मस्तिष्क में एक अजीब सा आनंद प्रदान करने वाली सिहरन उत्पन्न हो जाती है...और मन बरबस ही गंगा घाट,सिर पर बड़ी-बड़ी फलों और खाद्य व्यंजनो से लदी हुई टोकरी लेकर जाते #आस्थावान लोग नजर आने लगते हैं....#छठपूजा के पर्व पर लोगों में गजब का उत्साह तो देखते ही बनता है... यकिनन #आधुनिकता की #चकाचौंध में अपनी #लोक #आस्था और #परंपरा को बचा कर रखना ही #छठ है...

#बिहार,#उत्तरप्रदेश और #झारखंड से बाहर निकलते हुए अब तो सिर्फ #देश भर में ही नहीं #विदेशों में भी छठ पर्व की छटा सहज ही देखने को मिल जाती है....जिसे देखकर कहना गलत नहीं होगा कि छठ हर किसी के घर में हो ना हो लेकिन हर जगह हो रहा है....सूर्य देव की उपासना के महापर्व की छटा आपको उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम हर जगह देखने को मिल जाएगी....हां इसका स्वरुप थोडा छोटा या बड़ा हो सकता है...लेकिन वही गन्ना,नारियल,ठेकुआ,केला,शरीफा आपको सूप में सजा हुआ मिल जाएगा...साथ में अन्य पारंपरिक व्यंजन और फल भी....

#सदियों से मनाया जाने वाला पवित्र त्योहार हमारे स्मरण में हो ना हो लेकिन कहानियां हमने जरुरी सूनी होगी कि किस प्रकार से सूर्य के उदय होते ही हमारी #माताएं #बहनें #परिवार और #समाज के लोग घाट की तरफ बढ़ जाते हैं...खैर अब #नदियां तो स्वच्छ रही नहीं तो पार्क में बने तालाब में जाकर भी अपनी लोक आस्था को हमने जीवित रखा है...
अपनी #संस्कृति और #लोक #आस्था से लगाव को आप इस लिहाज से भी समझ सकते हैं कि ट्रेनो,बसों में जगह कम पड़ जाती है...छठ पर्व के समय ऐसा लगते लगता है मानो शहर के शहर खाली हो रहे हैं... वास्तव में श्रद्धा और विश्वास का इस प्रकार अपार जन सैलाब आपको कहीं और देखने को नहीं मिलेगा...

चार दिनों के इस #महापर्व से #स्वच्छता का जो संदेश मिलता है वो कहीं भी किसी भी रुप में कहीं और देखने को नहीं मिलती...और सूर्य की महत्ता तो हम सब जानते ही हैं....मनुष्य की समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला त्योहार छठ वास्तव में #आस्था,#प्रेम,#लोकसंस्कृति का अद्भूत #संगम हैं...

मेरे सभी इष्ट मित्रों को #सूर्य #उपासना के #महापर्व #छठ की हार्दिक #शुभकामनाएं और #बधाई।।
#जयछठीमईया  #लोकआस्थाकामहापर्व #गंगाघाट #सूर्यउपासना #महापर्व #देशविदेश #बिहार #यूपी #अर्घ्य #स्वच्छतासंदेश

Friday, 4 October 2019

मेरी मां का सम्मान करो अपने लिए... क्योंकि कल तुम भी मां बनोगी तब समय की मार तुम झेल नहीं पाओगी !



संदीप कुमार मिश्र- वो औरत जब ब्याह कर आयी थी, तो कुछ दिनों तक तो सब ठीक भी था! लेकिन ना जाने क्यों अपनी सासू मां पर बार बार नए नए आरोप लगानो लगी...अपने दफ्तर से थका हारा आया उसका पति एक ही बात कहता अपनी पत्नी से कि भगवान के लिए ये रोज रोज की किच किच बंद करो और मेरी मां पर बेबुनियादी आरोप लगाना बंद करो...लेकिन पत्नी जी थी कि एक ही बात की रट लगाए थी कि नहीं आपकी मां ने ही मेरी सोने की चैन उठाई है जब मैं नहाने गई थी...बेचारा पति अपनी झल्लाहट को कम करता हुआ प्यार से समझाता है कि सुनो मेघा जब हमारे कमरे कमरे में मेरे और तुम्हारे अलावा कोई आता जाता ही नहीं तो कैसे तुम्हारी चैन गायब हो सकती है,ध्यान से सोचो तुम ही कहीं रख कर भूल गई होगी...पति की बात पर ध्यान ना देते हुए मेधा ने और जोर से चिख कर कहा कि नहीं मुझे पूरा विश्वास है कि आपकी मां ने ही मेरा चैन चुराया है...
मां की अवहेलना एक बेटा कैसे बर्दास्त कर सकता था...जाने अनजाने में गुस्से में उसने मेघा को एक थप्पड़ रसीद कर दिया...जिसकी कल्पना मेघा ने कभी नहीं की थी...चंद महीनो पहले हुई शादी का सारा नशा उतरे देर ना लगी और संबंधों में एक दरार आ गयी...परिणाम इतना भयानक था कि मेघा अपना बैग पैक करके घर छोड़कर जाने लगी लेकिन जाते जाते उसने अपने पति से आंखों में आंसू भरते हुए एक सवाल पूछा कि तुमको अपनी मां पर इतना यकीन और विश्वास क्यूं है..??”
खामोश खड़ा एकटक दरवाजे की तरफ निहारते हुए पति ने मेघा की बातें सुनकर जो उत्तर दिया तो उसे अपने कमरे में दरवाजे की ओट में खड़ी उम्मीदों के उजालों से भरी मां ने सुना तो उसका मन बरबस ही भर आया क्योंकि उस बेटे ने अपनी पत्नी मेघा से कहा कि "जब वो बहुत छोटा था तभी असमय उसके पिताजी गुजर गए,सभी जिम्मेदारी मां के उपर आ गयी..मां ने मोहल्लेवालों के घरों मे झाडू-पोछा लगाकर एक वक्त की रोटी इकट्ठा करती थी... मुझे याद है जब मां मुझे थाली में भोजन परोसती थी तो एक खाली डब्बे को ढक कर रख देती थी और मुस्कुराते हुए कहती थी मेरी रोटियां बेटा इस डिब्बे में है,अभी मेरी इच्छा नहीं है तू खा ले...मां की बात सुनकर मैं भी हमेशा की तरह ही आधी रोटी खाकर ही मूंह बनाकर कह देता था कि मां मेरा पेट भर गया है मुझे और नही खाना है...बस हां...इससे ज्यादा मैं नहीं खा सकता...।
मेरी मां ने मुझे मेरी छोड़ी हुई आधी रोटी खाकर बड़ी मुश्किल से मुझे पाला पोसा और बड़ा किया है...आज अगर मैं दो रोटी कमाने लायक हो पाया हूं तो ये मेरी नहीं मेरी मां की तपस्या है...अरे कैसे भूल सकता हूं कि मेरी मां ने उम्र के उस पड़ाव पर अपनी इच्छाओं को मेरी खातिर मार दिया जबकि वो अपनी सभी कामनाओं को पूरा कर सकती थी...आज वही मेरी मां अपने उम्र के अंतिम पड़ाव पर तुम्हारी सोने की चैन की भूखी हो जाएगी...ऐसे कलुषित विचार की कल्पना तो मैं सपने में भी नहीं कर सकता...
तुम चाहती हो कि तीन दशक की कठोर,घनघोर तपस्या को मैं तुम्हारे तीन महिने से मिले क्षणिक सुख के लिए भूला दूं....?ऐसा नहीं हो सकता...तुमसे बस यही कहना चाहूंगा कि मेरी मां का सम्मान करो...अपने लिए क्योंकि कल तुम भी मां बनोगी...कहीं ऐसा ना हो कि तब समय की मार को तुम झेल ना पाओ ! पति की बात सुनकर मेघा की आंखो से आंसू छलक पड़े...और दूसरी तरफ मां की आंखों से भी आँसूओं का समंदर बहने लगा...
समय ठहर सा गया...आंसूओं के सैलाब में आनंद के उदित होने का संकेत दिखने लगा...मेघा मां के पैरों मों लिपट जाती है...मां वात्सल्य से बेटा और बहू को गले लगा लेती है...
अंतत: मां अनमोल है,जितना सेवा और सम्मान कर सकते हैं करें...कहीं संदेह हो तो मेरे जैसे लोगों से पूछें कि जब मां के आंचल से लिपटने का मन करता है तो चंद आंसू बहा कर संतोष कर लेते हैं...और कर भी क्या सकते हैं....!

Tuesday, 27 August 2019

G 7 में मोदी-ट्रंप मुलाकात से पाकिस्तान में महसूस हुए झटके!इमरान खान की दिमागी हालत खराब..!




संदीप कुमार मिश्र: अनुच्छेद 370 रुपी कोढ़ को जो भारत पिछले 72 सालों से ढो रहा था...उसे युवा भारत के सशक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल शुरु होते ही एक झटके में खत्म कर दिया...जिससे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जो ISI और ARMY के रिमोट से संचालित होते हैं उनका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया...वो अचानक कोमा में आ गए...ऐसे ही बेचारे इमरान गधे-घोड़े बेचकर काम चला रहे थे...लेकिन 370 हटने से उनके आकाओं ने उन्हें और डंडा दे दिया जिससे उनके झटके बढ़ गए...

पाक के आका जिस-जिस मुल्क में कश्मीर मुद्दे को लेकर गए वहीं उल्टे पांव वापस आना पड़ा...लेकिन आदत वही बनी रही कुत्ते की पूंछ की तरह...जनाब इमरान की हालात तब और खराब हो गयी जब G7 समिट में डोनाल्ड ट्रंप गके सामने ये कह दिया कि कश्मीर हमारा आंतरिक मामला है हम सुलझा लेंगे...जिसका भरपूर समर्थन ट्रंप ने भी कर दिया...

यकिन मानिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की इस मुलाकात के झटके पाकिस्तान के रोम रोम में महसूस किए गए और इमरान खान तो ऐसे पागल हुए कि धमकी भरा बयान देने लगे कि कश्मीर पर हम किसी भी हद तक जाएंगे और अगर जंग हुई तो दोनो दोनों देशों के पास परमाणु हथियार हैं , तबाही का असर पूरी दुनिया पर होगा”…

दरअसल हम सब जानते हैं कि जब से कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा है तब से कई बार इमरान खान से लेकर उनके सरकार के कई मंत्री भारत को धमकी और चेतावनी दे चुके हैं... और पाकिस्तान से बयानों का सिलसिला जारी है क्योंकि ट्रंप के सामने मोदी के साफ रुख के बाद उनकी हालत खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली हो गई है....

काश पाकिस्तान ये समझ जाता कि कश्मीर पर चर्चा करना पत्थर पर सिर फोड़ने जैसा है...कश्मीर भारत का मस्तक है और भारत अपना मस्तक कभी झुकने नहीं देगा...


Monday, 5 August 2019

कश्मीर से 370 हटने के बाद होगा क्या ?



संदीप कुमार मिश्र- देश का मुकुट मणी है कश्मीर।अब जब संसद में 370 हटाने का प्रस्ताव देश को गृह मंत्री ने पेश कर दिया और जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया और दोनो को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया।अब आगे क्या ? इससे क्या फायदा होगा ?

दरअसल अब देश के अन्य हिस्सों से बाहरी लोग जम्मू कश्मीर में काम-धंधा कर सकेंगे।अब तक जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार सिर्फ वहां के स्थाई नागरिकों को ही था लेकिन अब दूसरे राज्यों के लोग भी यहां वोट कर सकेंगे।इतना ही नहीं 370 के हटने से चुनाव में उम्मीदवार भी बन सकते हैं।कहने का मतलब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी पा सकता है।अन्य राज्यों की तरह देश के किसी भी हिस्से का आम भारतीय नागरिक कश्मीर में जमीन खरीद सकता है मतलब वहां बस सकता है।

इसके इतर 370 हटने से देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में शिक्षा अध्ययन के लिए स्कॉलरशिप हासिल कर सकता है साथ ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी जो पहले जम्मू-कश्मीर में सीधे नहीं लागू होते थे वो अब लागू होंगे।साथ ही भारत के किसी भी हिस्से,प्रदेश का नागरिक अब कश्मीर में स्थायी तौर पर रह सकता है, अचल संपत्ति खरीद सकता है जो कि 35A की वजह से नहीं हो पा रहा था।

अब जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित राज्य बना दिया गया है।जम्मू कश्मीर की विधानसभा अब दिल्ली जैसी विधानसभा होगी। यानि राज्य का हेड गवर्नर होगा।जिसका प्रभाव होगा कि जम्मू कश्मीर की पुलिस सीएम के बजाए राज्यपाल को रिपोर्ट करेगी यानि लॉ एंड ऑर्डर केंद्र के पास होगा।
आपको जानकर हैरानी होगी कि सूचना का अधिकार कानून अब तक जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं था, लेकिन धारा 370 हटने के बाद RTI कानून लागू हो जाएगा।जम्मू कश्मीर में अब तिरंगे का अपमान करना अपराध होगा,जो कि पहले नहीं था।

370 रहने से पहले होता था कि यदि कोई कश्मीरी महिला पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी करती थी, तो उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी यानी किसी भी पाकिस्तानी को आसानी से जम्मू में रहने का अधिकार मिल जाता था लेकिन अब ये मुमकिन नहीं होगा।इतना ही नहीं जम्मू-कश्मीर की महिला यदि किसी दूसरे राज्य के स्थायी नागरिक से शादी करती हैं तो उसकी और उसके बच्चों के लिए अब कश्मीरी नागरिकता जैसे अड़चने भी नहीं होंगी और सूबे से दोहरी नागरिकता भी खत्म हो जाएगी।

जो भी कानून संसद से पारित होंगे वो अब सीधे जम्मू कश्मीर में भी लागू होंगे।जो कि  अब तक भारतीय संसद के अधिकार जम्मू कश्मीर को लेकर सीमित थे।आपको बता दें कि अब तक विदेश,डिफेंस और वित्तीय मामले को छोड़कर यदि भारतीय संसद कोई भी कानून बनाती थी तो वो वह जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होता था।इस प्रकार के कानून को लागू कराने का प्रावधान पहले था कि संसद द्वारा पारित कानून को जम्मू-कश्मीर राज्य की विधानसभा में पास होना जरूरी होता था। इस प्रकार के उल जूलूल अधिकार राज्य को 370 के तहत ही मिले हुए थे जो कि अब खत्म हो गये हैं।

370 हटने से अब भारतीय संविधान के अनुसार अल्पसंख्यकों को आरक्षण मिलेगा।पहले कश्मीर में अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता था, लेकिन धारा 370 हटने के बाद से लाभ भी मिलना शुरू हो जाएगा।शिक्षा का अधिकार और CAG का कानून भी लागू नहीं था जो अब तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा।अंतत: राज्य की विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होगा, जो पहले छह साल का था।यानि कि अब एक देश, एक संविधान, एक कानून और एक विधान.....

मोदी सरकार का अपने वादे पर बढ़ता एक और महत्वपूर्ण कदम.... यानी कि सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास....

श्रीनगर में कर्फ्यू का मतलब ?



संदीप कुमार मिश्र- भारत का स्वर्ग कहे जाने वाले श्रीनगर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कश्मीर के तकरीबन सभी नेताओं को नजरबंद कर दिया गया हैं।हमारी सेना और सुरक्षाबलों की गश्त तेज हो गई है।जिससे बेचैन होकर वहां के नेता लगातार ट्वीट कर रहे हैं- माहौल काफी गरम है। उनका कहना है कि-"कुछ बताया नहीं गया उन्हें ! ये जो हो रहा है, वो क्या है और क्यों है, पता नहीं चल रहा है."अब उन्हें कौन कहे कि आपको बताकर क्या हो जाएगा ?और यदि आपको बता ही दिया जाए तो क्या होगा ? आजादी के सात दशक बाद भी अब तक हुआ क्या ? तब तो हर बार बताया गया था न ? लेकिन हुआ क्या,आपकी लगातार धमकियां मिलती रही और पूर्व की हमारी सरकारें सत्ता मद में चूर सोती रही !

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि श्रीनगर में एक सिनेमा हॉल तक नहीं है,मॉल तो छोड़ ही दिजिए। शाम होते ही घाटी में सन्नाटा पसर जाता है,70 साल से अधिक हो गये देश को आज़ाद हुए लेकिन वहां के चंद सियासी परिवारों ने धरती के स्वर्ग को नर्क बना दिया है..और यही वजह है कि वो चाहते हैं कि कश्मीर की हालत जस की तस बनी रहे। लेकिन समय ने करवट ली और अब वहां के ज्यादातर लोग जो चाहते हैं कि माहौल बदले वो डर से कुछ कह नहीं पाते।जिस कश्मीर में किसी फौजी को कहीं घेरकर गला काट दिया जाता है, किसी इंफॉर्मर को डुबो डुबोकर मार दिया जाता है और सारा वीडियो वायरल कर दिया जाता है कि जो हिम्मत थोड़ी जुटा रहा होता है, वो डर कर बैठ जाता है – आप कह सकते हैं कि 70 साल से यही होता आया है।

कश्मीर के अलगाववादी नेता जो  भारत के पैसे पर ऐश तो करते हैं, घूमते-फिरते मौज करते हैं, लेकिन गाते पाकिस्तान की हैं।इन कश्मीरी नेताओं की औलादें तो विदेशों में पढती और रहती हैं। लेकिन कश्मीर की आम आबादी के हालात जस के तस हैं। यकिनन वहां के जो फर्जी राजनेता बने बैठे हैं, वो कश्मीर के विशेष अधिकार हनन के नाम पर भोलेभाले कश्मीरीयों में डर बनाकर हालात को खतरनाक बनाए रखने का स्वांग रचते हैं। मुमकिन है नई सरकार मोदी सरकार की अगुवाई में कश्मीर में एक नई भोर हो जिससे वहां के नौजवान को नई दिशा और दशा मिले और आनेवाली नस्ल 21वीं सदी का हिन्दुस्तान देख पाए।


Wednesday, 17 July 2019

जानिए सावन में कांवड़ का महत्व,कांवड़ यात्रा,कितने प्रकार के कांवड़ और क्या है कांवड़ के नियम



सावन में शिव भक्त कांवड़ यात्रा निकालते हैं।चारो तरफ बम-बम भोले की गूंज ही सुनाई देती है।आईए जानते हैं कितने प्रकार के होते हैं कांवड़-
1-सामान्य कांवड़
सामान्य कांवड़िये कांवड़ यात्रा के दौरान जहां चाहें वहीं रुककर आराम कर सकते हैं।आश्रम करने के लिए कई जगह पंडाल लगे होते हैं,जहां कांवडिये विश्राम करके आगे की यात्रा प्रारंभ कर सकते हैं।
2-डाक कांवड़
डाक कांवड़िया कांवड़ यात्रा की शुरुआत से शिव को जलाभिषेक तक बिना रुके लगातार चलते रहते हैं।उनके लिए अलग से रास्ता बनाया जाता है जिससे कि वो शिवलिंग तक बिना रुके चलते रहें।
3-खड़ी कांवड़
खड़ी कांवड़ उठाने वाले के साथ कोई न कोई सहयोगी जरुर चलता है।जब वो आराम करते हैं तो सहयोगी अपने कंधे पर उनकी कांवड़ को लेकर चलने के अंदाज में हिलाता रहता है।
4-दांडी कांवड़
नदी तट से लेकर शिवधाम तक की यात्रा दंड देते हुए पूरी करते हैं।दांड़ी कांवड़ में कांवड़ पथ की दूरी को अपने शरीर की लंबाई से लेटकर नापते हुए यात्रा पूरी की जाती है।ये सबसे मुश्किल यात्रा होती है इसमें एक महिने का वक्त लग जाता है।
कांवड़ के नियम
कांवड़ यात्रा करने वालों के लिए शुद्ध शाकाहार अनिवार्य है।कांवड़ को बिना स्नान के छू भी नहीं सकते।चमड़े का स्पर्श वर्जित है।वाहन,चारपाई का प्रयोग मना है।वृक्ष के नीचे कांवड़ नहीं रखना होता है।अपने सीर के उपर से कांवड़ ले जाना भी वर्जित है।
 कांवड़ यात्रा से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है
 सच्ची श्रद्धा से कांधे पर कांवड़ रखकर बोलबम का नारा लगाते हुए पैदल यात्रा करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल प्राप्त होता है।सभी पापों का अंत हो जाता है और जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।शिवभक्त को मृत्यु के बाद शिवलोक की प्राप्ती होती है
।।ऊं नम:शिवाय।।



वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...