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Saturday, 14 April 2018

18 अप्रैल 2018 विशेष: सर्वार्थसिद्धि योग में मनेगी अक्षय तृतीया,जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व...

संदीप कुमार मिश्र: त्योहारों,उत्सवों का संबृद्ध देश है भारत।भारत की संपन्नता का मूल आधार भी यहां की संस्कृति,संस्कार और सर्वधर्म समभाव की भावन ही है जिससे भारत विश्व गुरु के पद पर सुशोभित है।एक त्योहार संपन्न होता है कि दूसरे की तैयारीयां हमारे देस में शुरु हो जाती है।यही विशेषता हमें औरों से भिन्न बनवाती है।

दरअसल हम सब जानते हैं कि वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है जिसे आखातीज भी कहा जाता है।धर्म ग्रंथों में ऐसा कहा गया है कि 'अक्षय' यानी- जिसका कभी क्षय ही ना हो,कहने का मतलब जो कभी नष्ट ही न हो।इसलिए अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले किसी भी प्रकार के दान-पुण्य से मनोवांछित लाभ प्राप्त होता है।इसलिए कहा जाता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत अक्षय तृतीया पर ही करनी चाहिए।

इस साल अक्षय तृतीया 18 अप्रैल2018,दिन बुधवार को पड़ रही है।हमारे हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन विवाह करने वालों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ती होती है।हिन्दू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन से ही मांगलिक कार्य, व्यापार आरंभ, मुंडन संस्कार, शुभ विवाह, गृह निर्माण, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा, जैसे सभी प्रकार के शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लगभग 11 वर्ष के बाद इस बार अक्षय तृतीया पर पूर्णकालिक यानी 24 घंटे का सर्वार्थसिद्धि योग का अतिविशेष महासंयोग बन रहा है,जो सभी प्रकार के कार्यों के लिए शुभदायक,फलदायक है।

अक्षय तृतीया का शुभ-मुहूर्त
18 अप्रैल2018
तृतीया तिथि प्रात: 4.47 बजे से प्रारंभ,समापन रात 3.03 बजे तक ।

इस दिन पूरे समय खरीदारी की जा सकती है। हम कामना करते हैं है कि सर्वार्थसिद्धि योग के इस महासंयोग में पड़ने वाली अक्षय तृतीया आपके जीवन में अनंत-अपार सुख-समृद्धि लेकर आये।।।

Thursday, 12 April 2018

उन्नाव रेप मामला,यूपी की योगी राज पर घोर कलंक !




कब मिलेगा इंसाफ ?क्या ऐसे ही बेटी बचावो बेटी पढ़ाओ का सपना होगा साकार ???
संदीप कुमार मिश्र : शर्म आती है ऐसी व्यवस्था और राज पर..जहां मानवता शून्य हो जाती है और अनाचार ,दुराचार का बोलबाला बढ़ जाता है...क्या फर्क है पूर्व की सरकारों और वर्तमान की सरकार में।व्यवस्थाएं तो जस की तस है...क्या ऐसे आएगा रामराज्य? अरे फैसला जब होगा तब होगा लेकिन अन्याय होता देख आंख पर पट्टी बांधे कैसे रह सकता है कोई...बीजेपी के वर्तमान नेताजी लोगों को एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि ये पार्टी आपके द्वारा सींची गई होती तो कब की नेस्तनाबूत हो गई होती लेकिन ये पार्टी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी के अथक परिश्रम और संघर्षों से तैयार हुई पार्टी है जिन्होंने एक मत कम पड़ जाने पर सत्ता छोड़ना स्विकार किया लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं किया...और आज ?....सत्ता के लिए कुछ भी...? ये स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं...
अरे सत्ता आती रहेगी जाती रहेगी....जनमन के विश्वास की सत्ता होती है....विश्वास खतम तो रावण के सोने की लंका की तरह सब कुछ जल कर राख और खाक हो जाएगा...जैसा कांग्रेस के साथ पूर्व में हुआ। इसलिए अभिमान को त्यागकर स्वाभिमान के साथ न्याय को सर्पोपरि रखते हुए कार्य को आगे बढ़ाना चाहिए।एक नहीं एक दर्जन विधायकों,मंत्रियों की कुर्बानी देनी पड़े तो दे दिजिए साब लेकिन जनमन के विश्वास को कम मत होने दिजिए...
और खासकर केसरिया रंग की चमक मत फिकी पड़ने दिजिए।क्योंकि यही वो रंग है जो आंखों और मन को चुभता नही सूकुन देता है।बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के पावन संकल्प को जुमला मत बनने दें।विरोधी तो तैयार ही बैठे हैं,आखिर क्यों एक के बाद एक अवसर प्रदान करते जा रहे हैं।प्रयास जहां जातिवाद,संप्रदायवाद को खत्म कर गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी से देश की जनता को निजात दिलाकर शिक्षा और स्वास्थ्य पर बल देने की है वहां एक बेटी को न्याय नहीं मिल पा रहा है,एक पिता की ऐसी हत्या ???????


#उन्नाव #रेप #न्याय #बेटी बचाओ #न्याय की गुहार #योगीराज #कलंक गाथा #एक पिता की हत्या #अंधा कानून

Wednesday, 11 April 2018

18 अप्रैल 2018 से शनि होंगे वक्री,जाने किन राशिवालों की खुलेगी किस्मत ?


संदीप कुमार मिश्र : शनी की बदलेगी चाल...होगा कैसा प्रभाव...क्या कहते हैं आपके सितारे...किन राशिवालों की खुल जाएगी किस्मत...दरअसल 18 अप्रैल से यानी बुधवार से शनि वक्री होने जा रहे है। हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 18 अप्रैल को शनी धनु राशि में वक्री होगा जो कि गुरुवार प्रात: 6 सितंबर 2018 की शाम तक वक्री रहेगा।इस प्रकार से शनि 142 दिनों के लिए वक्री होने जा रहे हैं।
आईए जानते हैं कि शनि के वक्री होने का 12 राशियों पर क्या होगा असर

:मेष राशि:
करियर रोजगार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।अत्यधिक परिश्रम की आवश्यकता है।

:वृष राशि:
वृष राशि वालों को पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।संबंधों में खटास ना आने दें,ज्यादा बोलने से बचें,वाणी पर संयम रखें।

:मिथुन राशि:
शनि के वक्री होने से मिथुन राशि वालों को लाभ मिलेगा, कार्य में सफलता भी मिलेगी। मान सम्मान बढ़ेगा और संभव है कोई शुभ समाचार अचानक मिल सकता है।

:कर्क राशि:
कर्क राशि वालों को पारिवारिक परेशानी दुखी कर सकती है। परिजनों के साथ किसी मुद्दे पर मतभेद हो सकता हैं।चुप रहना भी संबंधों को कभी कभी बेहतर बनाता है,अन्यथा ज्यादा बोलने से बचें।

:सिंह राशि:
इस साल प्रेम विवाह के प्रबल योग बन रहे हैं,कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है,पारिवारिक नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती है,सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ें।

:कन्या राशि:
कन्या राशि वालों के लिए ये समय बेहतर और लाभदायक होगा।अकस्मात धन की प्राप्ति का योग बन रहा है। इस राशि के लोगों को उनके कामों में परिवार के लोगों का पूरा सहयोग मिलेगा और सफलता कदम चूमेगी।

:तुला राशि:
दृढ़ निश्चय के साथ सफलता मिलेगी। मानसिक तनाव से बचें। छोटी या लंबी दूरी की यात्रा पर जाने की संभावना भी है।

:वृश्चिक राशि:
थोड़ा मुश्किलों भरा दौर है। पारिवारिक अशांति बढ़ सकती है। रिश्तों में दरार भी आ सकती है। संभव है परिवार से दूर भी रहना पड़े,धैर्य रखें,समय हर घाव भर देता है।

:धनु राशि:
इस समय आपको मानसिक तनाव और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि पारिवारिक जीवन में आपके भाई-बहनों को खुशियां और समृद्धि प्राप्त होगी।जिससे सुख की अनुभूति होगी।

:मकर राशि:
स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें नहीं तो परेशानी बढ़ सकती है। धन हानि हो सकती है। खर्चों में वृद्धि हो सकती है नियंत्रण रखें।एक सुखद विदेश यात्रा के योग भी बन रहे हैं। कमाई के कई नए अवसर मिलने का योग बन रहा है। यह समय आपके लिए बहुत अनकूल साबित होगा।

:कुंभ राशि:
शनि के वक्री होने से कुंभ राशि के लोगों को कहीं से धन प्राप्त हो सकता है। कुंभ राशि के लोगों को उनकी संपत्ति की वजह से भी धन लाभ का प्रबल योग बन रहा है।

:मीन राशि:
साल 2018 में आपकी आय के श्रोत में कमी आ सकती है और खर्च बढ़ सकता है। इसलिए धन की बर्बादी से बचें और संयम रखें।हां थोड़ी देरी से ही सही लेकिन सफलता मिलने के योग बन रहै हैं।
  

Friday, 6 April 2018

pm narendra modi ji/6अप्रैल/ बीजेपी स्थापना दिवस पर मोदी जी का संदेश

2 से 282 तक का सफर: अंधेरा छंटा, सूरज निकला और फिर प्रचंड कमल खिला: बीजेपी के स्थापना दिवस पर विशेष



संदीप कुमार मिश्र: 6 अप्रैल 1980 को जब भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ था तब देश में कांग्रेस के प्रचंड उदय का काल था।तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि जहां देश की आजादी के बाद से लगातार देश पर एक ही सियासी पार्टी का वर्चस्व रहा हो वहां किसी अन्य पार्टी का उदय इस रुप में होगा।क्योंकि कांग्रेस के साथ ही अनेकों पार्टीयां देश में थी लेकिन जो करिश्मा बीजेपी ने कर दिखाया वो कोई अन्य पार्टी कर नहीं पाई। बीजेपी ने 2 सीट से 282 तक का जो सफर तय किया उसका भरोसा बीजेपी के लोकप्रिय जननायक कविह्रदय राजनेता पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को था।तभी तो भाजपा की स्थापना के बाद हुए पहले पार्टी अधिवेशन में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था- भारत के पश्चिमी घाट को मंडित करने वाले महासागर के किनारे खड़े होकर मैं यह भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा। 


आज 38 वर्ष बाद भारतीय जनता पार्टी बड़े गर्व से अपना स्थापना दिवस मना रही है।यकिनन बीजेपी की ये सफलता कड़े संघर्षों और मुश्किलों का ही परिणाम है, सफलता का आनंद परिश्रम के दुर्गम रास्ते से होकर ही जाता है।तकरीबन चार दशकों के इस यात्रा में कहना गलत नहीं होगा कि बीजेपी ने देश को न सिर्फ वंशवाद से निजात दिलाई बल्कि लोकतंत्र को भी संबृद्ध किया,साथ ही जहां आम जन का विश्वास राजनीति से खत्म हो रहा था, उस भरोसे को भी कायम किया।जिसका परिणाम है कि देश में राष्ट्रवाद पर चर्चा शुरु हुई और देश की संबृद्ध संस्कृति को बल मिला।कहते हैं कि जिस देश की संस्कृति जितनी संबृद्ध होती है उसकी पहचान उतनी सबल होती है और बीजेपी ने उसी सबलता को बढ़ाने का काम किया।

आपको याद होगा 1984 का वो दौर जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी उसके बाद देश के 8वें लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने तकरीबन 409 सीटें जीती थी।एक ऐसा जनाधार कांग्रेस को मिला था जिसके आगे सभी पार्टियां चारों खाने चित हो गई थी।उस दौर में बीजेपी को महज 2 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था।ऐसे में जनसंघ जैसे मजबूत संगठन से निकली पार्टी के लिए आत्ममंथन तो करना ही था।परिणाम हुआ कि अथक परिश्रम और देशभर में हुए जनआंदोलनो  की वजह से 1989 के आम चुनाव में बीजेपी ने 85 सीट पर जीत दर्ज की।यही वो शानदार दौर था जिसे आप बीजेपी के वास्तविक सफलता का दौर कह सकते हैं।

सियासी समय का पहिया लगातार आगे बढ़ता गया और चुनाव दर चुनाव बीजेपी 1991-99 तक के आम चुनावों में लगातार अपना जनाधार बढ़ाती गई और सीटें संसद में बढ़ती गईं।बीजेपी के बढ़ते जनाधार का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 1996 के चुनाव में पहली बार बीजेपी ने कांग्रेस से ज्यादा सीटें अर्जित की।कांग्रेस जहां 140 सीटें पाई वहीं बीजेपी 161 सींटो पर विजय पताका फहराने में सफल रही।परिणामस्वरुप देश में अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी। और फिर लगातार बीजेपी ने उतार-चढ़ाव के साथ अपना विस्तार राज्य दर राज्य किया।कहना गलत नहीं होगा कि ऐसा तभी संभव हो पाता है जब नियत में राष्ट्रहित समाहित हो।राष्ट्र का हित तभी हो पाता है जब देश की आवाम के जीवन स्तर में सुधार आये और वर्तमान में देखें तो बीजेपी ने देश को न सिर्फ विकल्प की राजनीति देने का काम किया वरन समाज के वंचित, शोषित और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अंत्योदय के सिद्धांत के साथ अपने चिंतन में सहभागी बनाया।
राष्ट्रहित में बीजेपी की शानदार सोच का ही परिणाम है कि बीजेपी आज देश ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है,जिसमें 11 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं।समय और समाज के साथ निरंतर बन रहे तारतम्य का ही परिणाम है कि बीजेपी एक के बाद एक राज्य फतह करती जा रही है और विरोधी चुनाव दर चुनाव हारते जा रहे हैं।आप कह सकते हैं कि वर्तमान में मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी का ये अब तक का सर्वश्रेष्ठ दौर है।आप इसे बीजेपी का स्वर्णिम काल भी कह सकते हैं क्योंकि ऐसा कहने के कई कारण भी मौजूद हैं।लेकिन इसकी बुनियाद तो तभी रख दी गई थी जब अटल जी के नेतृत्व में एक भारत श्रेष्ठ भारत बनाने की शुरुआत कर दी गई थी।क्योंकि उन्हीं के कार्यकाल में राजनीतिक दलों, नदियों, सड़कों, वायु मार्गों, विदेशी संबंधों को जोड़ने की सार्थक कोशिश की गई।
वर्तमान में नरेंद्र मोदी सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों जैसे स्वास्थ्य बीमा, फसल बीमा योजना जन-धन योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जन-सुरक्षा योजना, , मुद्रा योजना, स्वच्छता अभियान (शौचालय निर्माण), पंडित दीनदयाल ग्राम विद्युतीकरण योजना सहित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओजैसे अति महत्वपूर्ण कार्यों की देन है कि जो विकास का पहिया रुक सा गया था वो अब दौड़ने लगा है जिससे समाज के अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति लाभान्वित हो रहा है।सोचने का विषय है कि जो किसान देश का पेट भरता है वो आजादी के 70 दशक बाद भी भुखमरी का शिकार था। जिसे नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्कुराने का अवसर दिया और किसानों को उसकी लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का साहसिक निर्णय लिया।

जब तक नीतियां लोककल्याणकारी नहीं होती तब तक उनका लाभ आम जन को नहीं मिल पाता। आज 21 राज्यों में बीजेपी व सहयोगी दलों की सरकारें हैं।ये तभी संभव हो पाया जब सरकार की नियत में सबका साथ और सबका विकास समाहित था।
बीजेपी लगातार समाज के हर वर्ग से जुड़कर, संवाद स्थापित कर सामाजिक कार्यो को करने में आगे रही और सवा सौ करोड़ भारतीयों के उत्थान के कार्यों को ही अपनी कार्यपद्धति का हिस्सा बनाई।जिसका परिणाम है कि ग्राम पंचायत से लेकर लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन तक बीजेपी अपना परचम लहरा रही है और इस कार्य को पूरा करने के लिए इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं,कुशल नेतृत्व और जन मानस की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने की क्षमता का अथक प्रयास होने से ही ऐसा संभव हो पाया।

आज हमारा पड़ोसी आंखें नहीं दिखा पा रहा है या फिर विश्व में भारत का डंका बज रहा है तो इसमें एक सशक्त नेतृत्व की विशेष भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी।

यकीन मानिए जब किसी राष्ट्र नेता के लिए देश ही सर्वोपरि होता है तभी सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, जीएसटी और काले-धन पर प्रहार जैसे कड़े फैसले लिए जा सकते हैं और तभी भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना भी साकार हो सकता है। सबका साथ-सबका विकास और एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना भी तभी साकार हो सकता है जब कड़े फैसले लेने की क्षमता वाला राष्ट्रनेता हो।नहीं तो वंशवाद और भ्रस्टाचार के कलंक को तो देश झेलता ही रहा है आजादी को कई दशकों तक।बीजेपी को उसके स्थापना दिवस की बहुत बहुत बधाई और देश को विकास की राह पर निरंतर भविष्य के दशकों तक आगे बढ़ाने के लिए शुभकामनाएं।


Thursday, 5 April 2018

नित्य करें माला से मंत्रों का जाप लेकिन माला फेरत समय क्या रखें सावधानी जाने !



संदीप कुमार मिश्र: हमारे सनातन धर्म में सदियों से ऋषी मुनियों के द्वारा मंत्र साधना की जाती रही है और अनवरत पूजा पाठ के साथ माला फेरने की परंपरा चल रही है।दरअसल मंत्र साधना से हमें सिद्धियां तो मिलती ही हैं साथ ही मन,चित्त एकाग्र भी रहता है।जिससे हमारा व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है और हममें धैर्यता,गंभीरता आती है।

मंत्र साधना के लिए हम रुद्राक्ष की माला या फिर स्फटिक और तुलसी जी की माला का प्रयोग करते हैं।हमारे द्वारा मंत्रों के जाप की संख्या को लेकर कोई त्रुटि न हो इसलिए हम माला में लगे हुये दानों का सहारा लेते हैं जिसे मनका कहा जाता है। सामान्यतः माला में 108 मनके होते हैं।

जाने कैसे करें माला से सही मंत्र जाप
सबसे पहले हमें देव स्थान पर विनम्र भाव से नतमस्तक होकर ईश्वर को प्रणाम करना चाहिए और भगवान के दर्शन के लिए अभिवादन करना चाहिए और फिर आसन ग्रहण कर परम पिता परमात्मा के समक्ष मंत्र जाप करना चाहिए।अब ये जानना भी आवश्यक है कि मंत्र जाप करते समय किन किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए –

माला फेरने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें-
मंत्र जाप प्रारंब करने से पहले जमीन पर शुद्ध ऊनी आसन ही बिछाकर बैठें। बैठने की अवस्था पद्मासन या सुखासन (पालथी लगाकर)ही होनी चाहिए।कमर से झुकें नहीं,चेहरे को भी सीधा रखें।माला दाहिने हाथ की उंगलियों पर अंगूठे के पोर से फेरें।नाखून का स्पर्श माला को न हो, इसकी पूरी सावधानी रखें। प्लास्टिक की माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए।माला फेरते समय इधर-उधर तांकझांक न करें।ध्यान केंद्रित रखें। माला नाभि से नीचे नहीं, नाक के ऊपर नहीं जानी चाहिए एवं सीने से 4 अंगुल दूर सामने रखें।जाप करते समय आंखें परमात्मा के सामने या दो भौंहों के बीच, या नाक पर रखें या फिर आंखें मूंद लें।जाप करते समय माला नीचे न गिरने दें।इस प्रकार से आस्था और विश्वास के सात माला फेरनी चाहिए।

Monday, 2 April 2018

आरक्षण रुपी “जोंक” देश को बरबाद कर के रख देगा



संदीप कुमार मिश्र:आखिर कब तक आरक्षण-आरक्षण का खेल देश में चलता रहेगा।संविधान को मोहरा बनाकर आखिर कब तक सियासत इस देश में खेली जाएगी। आज़ादी के 70 सालों बाद भी इस आरक्षण से क्या हासिल हुआ।यदि हासिल हो गया तो फिर आरक्षण क्यों?....हां आरक्षण के नाम पर सियासी दल कूकुरमुत्ते की तरह जरुर पैदा हो गए और देश जातिवाद में बंट गया।

70 सालों में आरक्षण ने सिर्फ कोंढ़ का काम किया है।जिस कोढ़ को इतने वर्षों में ठीक हो जाना चाहिए था,उसका असर ये हुआ कि शरीर रुपी समाज के और हिस्सों को प्रभावित करता गया परिणामस्वरुप आप देखेंगे कि हमारे समाज में ऊंच-नीच का भेद लगातार बढ़ता जा रहा है।हालत ऐसी हो गई है कि आरक्षण के इस जिन्न ने अब तो आरक्षणी नेता पैदा करने शुरु कर दिए हैं।और इन आरक्षणी नेताओं की दाल-रोटी और सियासत ही इस आरक्षण से चलती है।आरक्षण खत्म तो इन नेताओं की असमय मृत्यु निश्चित जानिए।

दरअसल ऐसा क्यों नहीं होता कि आरक्षण रुपी दानव को मिलकर हम सब जलाकर भस्म कर दें और जिस प्रकार रावण को जला कर हम असत्य पर सत्य की विजय की पताका फहराते हैं उसी प्रकार निरर्थकता से सार्थकता की ओर,असमानता से समानता के लिए,अयोग्य से योग्य बनने के लिए आरक्षण रुपी राक्षस को मिलकर जलाएं और सर्वधर्म समभाव की कल्पना को साकार करें।
क्योंकि गरीब (चाहे वो बौद्धिक हो,सामाजिक हो या फिर आर्थिक हो)पैदा होना आपके वश में नहीं है लेकिन अमीर (बौद्धिक तौर पर,सामाजिक तौर पर औऱ आर्थिक तौर पर) होकर मरना आपके वश में है।जिसके लिए आपको मेहनत करने की आवश्यकता है,कर्म करने की आवश्यकता है।

जहां तक रहा सवाल अमीरी और गरीबी का.....तो वो समाज के हर वर्ग विशेष में हैं।आरक्षण बहुत आवश्यक है तो सरकार को चाहिए कि चाहे वो किसी भी वर्ग का हो उसकी आवश्यकता के अनुरुप उसकी सरकारी मदद अवश्य होनी चाहिए।लेकिन हां आरक्षण नाम से नहीं।आरक्षण नाम ही समाज में भेद पैदा करने के लिए काफी है,तो सबसे पहले इस नाम पर पाबंदी लगानी चाहिए।

एक बात और जिन्हें ये लगता हो डा. भीमराव रामजी अंबेडकर साब पर उनका कापीराइट है तो उन्हें इस गफलत में नहीं रहना चाहिए।क्योंकि संविधान भारत का है,भारत के लिए है,भारत के लोगों से है तभी तो बाबा साहब ने हम भारत के लोग…” संविधान में लिखा।
तो हम भारत के लोग संविधान सम्मत आप सभी से अपील करते हैं कि देश जोड़ने के लिए,देश में समानता लाने के लिए इस आरक्षण रुपी जोंक को काट-काट के जला डालिए नहीं तो आने वाली नस्लें आपको इतना कोसेंगी कि आपको मृत्युलोक में भी चैन नहीं मिलेगा।

नोट-(किसी भी जाति धर्म सूचक शब्द का प्रयोग नहीं किया हूं क्योंकि भारतीय होने के नाते सभी मेरे भाई हैं,लेकिन आंख से पर्दा उठाने के लिए इस प्रकार से लिखना जरुरी था क्योंकि आज मैं चार घंटे जाम में फंसा रहा हूं सिर्फ इस आरक्षण के कारण,जरा सोचिए एक जाम में फंसे होनो के कारण देश में कितने आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा चाहे वो आर्थिक तौर पर हो सामाजिक तौर पर...मेरे इस लेख से किसी महानुभाव को व्यक्तिगत तौर पर कष्ट हो तो मुझे खेद है लेकिन देश के हित में आरक्षण खत्म हो,हम हमेशा यही चाहेंगे)

                          जय हिन्द जय भारत,एक भारत श्रेष्ठ भारत

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...