Friday, 1 September 2017

जाने, गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त,समय और महत्व

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5 September Ganpati-Visarjan SPECIAL  
संदीप कुमार मिश्र: हमारे देश में हर तरफ गणेश चतुर्थी की धूम मची हुई है, जगह-जगह गणपति बप्पा के पंडाल आपको जगमगाते हुए नजर आ जाएंगे।वहीं 10 दिनें बप्पा को धर में स्थापित कर बप्पा के भक्त आस्था और भक्ति में डूब जाते हैं। कहते है कि गजानन भगवान श्रीगणेश जी कैलाश पर्वत को छोड़कर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए इस समय धरती पर आते हैं।गणेश चतुर्थी से शुरु होकर गणेश महोत्सव अनंत चतुर्थी यानी 5 सितंबर तक चलेगा और फिर गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन कर उन्हें खुशी और उत्साह के साथ विदा किया जाता है।विसर्जन का भाव होता है कि भगवान गणेश अब अपने घर यानि कैलाश पर्वत को लौट जाएं लेकिन इस बादे के सात कि अगले वर्ष फिर बप्पा उमंग और उत्साह का संचार करने के लिए जरुर आएं।

आपको बता दें कि भगवान श्रीगणेश जी को कुछ लोग अपने घरों में डेढ़ दिन के लिए लाते हैं तो कुछ तीन, पांच और सात दिन के लिए भी और फिर गणेश जी को विसर्जित कर देते हैं।
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गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघडिया मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त (चार, लाभ, अमृत) - 09:32 बजे- 14:11 अपराह्न
दोपहर का मुहूर्त (शुभ) = 15: 44 बजे- 17:17 बजे
शाम का मुहूर्त(प्रयोग) = 20:17 अपराह्न - 21: 44 बजे
रात का मुहूर्त (शुभ, अमृत, चार) = 23:11 बजे
गणेश विसर्जन तिथि
4 सितंबर, 2017 को चतुर्दशी तिथि सुबह 12:14 बजे शुरू होगी
चतुर्दशी तिथि 5 सितंबर, 2017 को 12:41 बजे समाप्त हो जाएगी
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जानें क्या है गणपति विसर्जन का महत्व
दरअसल गणपति बप्पा को ज्ञान का देवता,भाग्य, सफलता और समृद्धि का अग्रदूत माना गया है।भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए कैलाश से बप्पा को बुलाते हैं और आदर और भाव सहित उनकी काल्पनिक रुप से विदाई करते हैं,क्योंकि पप्पा तो भक्तों रोम रोम में बसते हैं। विसर्जन के दिन पानी में गणपति की मूर्ति का विसर्जित करने के दौरान मंत्रोच्चार और बप्पा की आरती की जाती है। आरती के बाद गणपति बप्पा को मोदक और अन्य मिष्ठान का भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रुप में सभी में बांट दिया जाता है।
आपको बता दें कि गणपति का विसर्जन उत्तारंग पूजा से प्रारंभ होता है जिसमें पांच चीजें दीपक, गंध, नैवेद्य, धूप और पुष्प को मुख्य रूप से शामिल किया जाता है।नियमों के अनुसार विसर्जन के समय घर से निकलने से पहले कोई एक भक्त गणपति बप्पा की मूर्ति को उठाकर एक इंच आगे तक जाता है, जिसका मतलब होता है की अब भगवान को विसर्जन के लिए लेकर जाने की तैयारी शुरु हो रही है।
इसके बाद क्रमश: सभी बप्पा के भक्त उनपर अक्षत की बौंछार करते हैं साथ ही अपनी हथेली पर एक चम्मच दही लेकर प्रार्थना और बप्पा से निवेदन करते हैं कि गणपति बप्पा फिर जल्दी ही उनके घर आएं,और खाली झोली भर जाएं। पूजा विधान के अनुसार एक लाल कपड़े में गुड़ और पांच अन्य अनाज (कोरंजा) को उस कपड़े में बांधा जाता है और फिर इस कपड़े को गणेश जी के हाथ में बांध दिया जाता है।ऐसे करने के पीछे भाव होता है कि बप्पा कि यात्रा के लिए खाना तैयार है।
अन्तत: भगवान श्रीगणेश को विसर्जन के लिए भक्त ले जाते हैं और गणपति बप्पा मोरया मंत्र रास्ते भर जयकारा लगाते हैं,नाचते गाते हैं और अबीर गुलाला उड़ाते हैं।बप्पा के मंगलगय यात्रा की कामना करते हुए भक्त सिर्फ यही प्रार्थना करते हैं कि पूरे वर्ष उन पर ऋद्धि-सिद्धि के दाता गणपति बप्पा की कृपा सदैव बनी रहे।


।।गणपति बप्पा मोरया।।

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