Popular Posts

Wednesday, 19 July 2017

सूर्य देव बचाएंगे आपकी तनख्वाह,नहीं होगी आर्थिक तंगी

संदीप कुमार मिश्र : महंगाई के इस दौर में हर इंसान की शिकायत रहती है कि उसकी आमदनी अठन्नी है और खर्चा रुपैया है...।ऐसे में आखिर कैसे बचेगी आपकी तनख्वाह या सैलरी।क्योंकि खर्च है कि रुकने का नाम नहीं ले रहा और कमाई है कि बढञ नहीं रही है,कभी जरुरत से खर्चा तो कभी अनगिनत फिजूलखर्ची।महिना पूरा हुआ भी नहीं और आप की तनख्वाह खत्म।
दरअसल फिजूलखर्ची हमारी आम जींदगी से किसी ना किसी रुप में जुड़ा हुआ है,जिसके संबंध में ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि ये हमारे कमजोर ग्रहों की वजह से होता है जो हमें निरंतर परिश्रम करने के बाद भी आर्थिक परेशानियां देते रहचते हैं।जिसका समाधान और निदान भी ज्योतिष शास्त्र में बताएं गए हैं।
भगवान भास्कर यानि सूर्य का प्रभाव
धरती पर प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य को प्रसिद्धि और सम्मान दिलाने वाला ग्रह माना जाता है।ऐसा हमारे ज्योतिष शास्त्र का मानना है। सूर्य ग्रह ही हमें हमारे कार्यों में सफलता और सम्मान दिलाते हैं।चाहे बिजनस हो,नौकरी हो...किसी भी क्षेत्र में आपकी सफलता का राज आपकी राशि में सूर्य ग्रह की दशा पर निर्भर करता है। आपकी कुंडली में यदि सूर्य की स्थिति खराब या कमजोर है तो यकिनन रोजगार व्यापार कि स्थिति बेहतर नहीं होगी और हानि का सामना करना पड़ेगा।साथ ही अगर सूर्य की स्थिति अच्छी होगी तो हर तरफ लाभ ही लाभ नजर आएगा।
करें सूर्य की साधना,बचेगी सेलरी बनेंगे काम
आपकी सेलरी नहीं बचती है,महिना खत्म होते ही आप हो जाते हैं परेशान तो आपको करनी चाहिए सूर्य देव की पूजा।सूर्य देव की पूजा और कुछ विशेष उपाय से तत्काल आप की आर्थिक स्थिति बेहतर होने लगेगी।
सूर्य साधना के विशेष उपाय
आर्थिक स्थिति मजबूत करने और अपनी तनख्वाह को नियंत्रण में खर्च करने के साथ ही भविष्य के लिए बचत और समाज में मान मर्यादा और प्रतिष्ठा पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को रविवार की रात में सोने से ठीक पहले किसी ग्लास में दूध भरकर अपने सिरहाने रखना चाहिए।दूसरे यानि अगले दिन प्रातःकाल में सूर्योदय से पहले उठकर नित्यकर्म और स्नान आदि से निवृत होकर सूर्योदय के समय किसी भी बबूल के पेड़ की जड़ में रात को ग्लास में रखे दूध को चढ़ा देना चाहिए।इस कार्य को करते समय आपका मुंह पूरब दिशा ओर यानि जिस तरफ से सूर्योदय होता है उस तरफ रखना चाहिए। प्रत्येक रविवार को ये उपाय करने से शिघ्र ही आपको धन लाभ होगा और परेशानियों से निजात मिलेगी।
मित्रों इस उपाय नित्य प्रत्येक रविवार को करना चाहिए,यकिन मानिए आपकी सभी आर्थिक परेशानियां शनै: शनै: दूर हो जाएंगी।साथ ही आप को अच्छे ज्योतिर्विद के द्वारा अपने कुटुंब यानि घर में सूर्य यन्त्र स्थापित करवाना चाहिए।सर्व शक्तिमान प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर आपका कल्याण करेंगे।

।।ऊं सूर्याय नम:।।

Wednesday, 12 July 2017

सावन के हर सोमवार को करें शिव जी की विशेष पूजा : 50 साल बाद बन रहा विशेष योग

संदीप कुमार मिश्र: भगवान भोलेनाथ की महिमा निराली है। सावन में शिव भक्तों का शिवालयों में श्रद्धा भाव से शिवलिंग पर जलाभिषेक करते देखते ही बनता है।सावन भगवान शिव के प्रेम के साथ ही प्रकृति से प्रेम का भी माह है इस बार भगवान शिव का प्रिय मास सावन में 50 साल बाद विशेष संयोग लेकर आया है। सबसे अच्छी बात है कि सावन की शुरुआत और समापन दोनो शिव के प्रिय दिन सोमवार से हो रहा है।
इस बार सावन की सबसे अच्छी बात है कि वैधृति योग के साथ सावन की शुरुआत और आयुष्मान योग के साथ सावन मास की समाप्ति हो रही है। सोमवार, सावन मास, वैधृति योग व आयुष्मान योग सभी के मालिक स्वत: शिव ही हैं। इस लिए इस बार का सावन खास है। पुराणों के अनुसार सावन में भोले शंकर की पूजा, अभिषेक, शिव स्तुति, मंत्र जाप का खास महत्व है। खासकर सोमवारी के दिन महादेव की आराधना से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं।इनकी कृपा से दैविक, दैहिक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। निर्धन को धन और नि:संतान को संतान की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। बाबा भोले की पूजा से भाग्य पलट सकता है। सावन में प्रत्येक सोमवार को शिव जी की कैसे करें पूजा...आईए जानते हैं-
प्रथम सोमवार : महामायाधारी की पूजा
10 जुलाई
सावन के पहले सोमवार को महामायाधारी भगवान शिव की आराधना की जाती है।पूजा क्रिया के बाद शिव भक्तों को ‘ऊं लक्ष्मी प्रदाय ह्री ऋण मोचने श्री देहि-देहि शिवाय नम: मंत्र का 11 माला जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से लक्ष्मी की प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और ऋण से मुक्ति मिलती है।


द्वितीय सोमवार: महाकालेश्वर की पूजा
(17 जुलाई)
सावन के दूसरे सोमवार को महाकालेश्वर शिव की विशेष पूजा करने का विधान हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है। शिव के साधकों को ‘ऊं महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नम: मंत्र का रुद्राक्ष की माला से कम से कम 11 माला जाप करना चाहिए। महाकालेश्वर महादेव की पूजा से गृहस्थ जीवन सुखमय होता है, पारिवारिक कलह से मुक्ति, पितृ दोष व हर प्रकार के दोष से मुक्ति मिलती है।


 तृतीय सोमवार:अर्द्धनारीश्वर महादेव की पूजा
(24 जुलाई)
शिव के पवित्र माह सावन के तृतीय सोमवार को महादेव के अर्द्धनारीश्वर स्वरुप का पूजन किया जाता है।महादेव के अर्द्धनारीश्वर स्वरुप की आराधना करने के लिए ‘ऊं  महादेवाय सर्व कार्य सिद्धि देहि-देहि कामेश्वराय नम: मंत्र का 11 माला जाप करना श्रेष्ठ बताया गया है। अर्द्धनारीश्वर शिव की विशेष पूजन से अखंड सौभाग्य, पूर्ण आयु, संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा, कन्या विवाह, अकाल मृत्यु निवारण व आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है।ऐसा हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है।


चतुर्थ(चौथा)सोमवार: तंत्रेश्वर शिव की पूजा
(31 जुलाई)
सावन के चौथे सोमवार को तंत्रेश्वर शिव की आराधना की जाती है।चौथे सोमवार के दिन कुश के आसन पर साधक को बैठकर ‘ऊं रुद्राय शत्रु संहाराय क्लीं कार्य सिद्धये महादेवाय फट् मंत्र का जाप 11 माला करनी चाहिए। तंत्रेश्वर शिव की कृपा से शिवभक्तों की समस्त बाधाओं का नाश होने के साथ ही अकाल मृत्यु से रक्षा, रोग से मुक्ति व सुख-समृद्धि की प्राप्ति सहज ही हो जाती है।

पंचम सोमवार : शिव स्वरूप भोले की पूजा
(07 अगस्त)
शिव के सावन का पांचवां सोमवार जो अति विशेष है।इसदिन श्री त्रयम्बकेश्वर शिव की पूजा की जाती है। विशेषतौर पर जो शिवभक्त सावन में किसी कारणवश अन्य चार सोमवार को शिव जी की पूजा नहीं कर पाते हैं तो उन्हें पांचवें सोमवार को शिव की आराधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसमें रुद्राभिषेक, लघु रुद्री, मृत्युंजय या लघु मृत्युंजय का जाप करना चाहिए।

शिव पूजन विधि
भगवान शिव बड़े सरल और सुलभ है,शिव की पूजा भी बड़ी ही सरलता से की जाती है। शि पूजा में गंजा जल, दूध, शहद, घी, शर्करा व पंचामृत से शिव जी का अभिषेक करके भोलेभंडारी को वस्त्र, यज्ञो पवित्र, श्वेत और रक्त चंदन भस्म, श्वेत मदार, कनेर, बेला, गुलाब पुष्प, बिल्वपत्र, धतुरा, बेल फल, भांग आदि चढ़ायें।ततपश्चात घी का दीप उत्तर दिशा में जलाएं और अंत में पूजा करने के बाद आरती कर क्षमा याचना करनी चाहिए।

भगनान शिव की पूजा,आराधना से शिव भक्तों को रोगों से मुक्ति, शरीर में अद्भूत ऊर्जा की अनुभूति, शक्ति में बढ़ोतरी, मनोवांछित फल की प्राप्ति, अकाल मृत्यु और भय से मुक्ति, कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर की प्राप्ति, नवीन कार्य की पूर्ति, ग्रहों से शांति, संतान सुख की प्राप्ति, आरोग्यता, नौकरी की प्राप्ति, समस्ता बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

Monday, 10 July 2017

सावन में शिव पूजा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

संदीप कुमार मिश्र: भगवान भोलेनाथ सभी देवों में सबसे सरल और सुलभ देव हैं।महादेव अपने भक्तों से बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।महादेव के प्रिय माह सावन की शुरुआत हो चुकी है। सावन का आज प्रथम सोमवार है।मंदिरों में भक्तों का शिव के जलाभिषेक के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ता है और विधि विधान से शिव की पूजा की जाती है।
सावन में महादेव अपनी पूजा से जितना भक्तों से प्रसन्न होते हैं,उतने ही कई ऐसा काम है जिनसे भोले नाराज हो जाते है।आईए जानते है कि सावन में शिव पूजा के समय कौन कौन सी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।
परिवार में किसी भी प्रकार का क्लेश,झगड़े न करें-
हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि जहां सुमति तहं सम्पति नाना,जहां कुमति तहं विपति निधाना।।कहने का मतलब है कि जहां सुमति होती है प्रेम होता है वहीं भगवान निवास करते हैं।सावन का पवित्र माह सदाशिव और गौरी के परिवार को समर्पित है। इसलिए कुटुंब में किसी भी प्रकार के कलेह से बचें।साथ ही अपने जीवन साथी को कटु वचन ना बोलें,क्योंकि ऐसा करने से शिव नाराज हो जाते है।सावन का पवित्र माह दांम्पत्य जीवन में खुशियां लाता है,प्रेम बढ़ाता है।
सावन में दूध और दूध से बनी चीजों का त्याग करें-
हिन्दू धर्म में ऐसा कहा गया है कि सावन के महिने में दूध, दही, छाछ आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।इसके पीछे करण है कि भोलेनाथ तो भक्तों की रक्षा के लिए विषपान भी कर चुके हैं, इसलिए सावन में जो चीज आपके लिए हानिकारक है,उसे शिव पर चढ़ाया जाता है। सावन में शिव का दूध से अभिषेक करने से शिव प्रसन्न होते हैं।वहीं सावन दूध ना सेवन करने का वैज्ञानिक कारण है कि इस महीने में हमारी पाचन क्रिया बिगड़ जाती है ऐसे में तो दूध और इससे बनी कोई भी चीज वजन होने की वजह से पच नहीं पाती है। जिससे पेट संबंधी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

शाकाहारी भोजन ग्रहण करें-
सावन में शाकाहार का सेवन जरुरी है.क्योंकि मांसाहार मन और चित्त को अशांत करता है,जिससे कोई भी कार्य ठीक से नहीं हो पाता।
सुबह सवेरे करें शिव की पूजा और ध्यान -
शिव की साधना और भक्ति प्रात: काल में ही करें।शिव का अभिषेक करें,ध्यान करें क्योंकि सुबह का समय किसी भी प्रकार की साधना के लिए सर्वोत्तम होता है।दिन में कोशिश करें कि ना सोएं,रात्रि में भी कम सोने का प्रयास करना चाहिए।सावन भगवान शिव का निरंतर ध्यान करना चहिए।
गरीबों की सहायता करें-
भगवान शिव अपनी साधना से तो प्रसन्न होते हैं साथ ही जो व्यक्ति गरीब, वृद्ध, दुर्बल जन का सहयोग और सेवा करता है,भोलेनाथ उससे अत्यधिक प्रसन्न होते हैं।
शिव का अभिषेक ताजा दूध से करें-

हमारे ज्योतिष शास्त्र में दूध का संबंध चंद्र ग्रह से माना गया है क्योंकि दोनों की प्रकृति शीतलता प्रदान करने वाली होती है। चंद्र ग्रह से संबंधित समस्त दोषों का निवारण करने के लिए सोमवार को महादेव पर दूध अर्पित करना चाहिए। समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध ही अर्पित करना चाहिए ना कि पैकेट वाला दूध।।ऊं नम: शिवाय।।

Friday, 7 July 2017

यूपी की शिक्षा व्यवस्था त्राहिमाम त्राहिमाम ! कैसे कहें स्कूल चलें हम...?

संदीप कुमार मिश्र :  किसी भी सभ्य समाज की पहचान का सबसे बड़ा आधार वहां के शिक्षित लोग होते हैं वहां की शिक्षा व्यवस्था होती है।राष्ट्र निर्माण की पहली इकाई ही हमारी शिक्षा व्यवस्था है...क्योंकि निंव की मजबूती से इमारत के भविष्य की कल्पना की जाती है।
हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में अनगिनत कमियां आप को देखने को मिल जाएगी...खासकर सरकारी विद्यालयों की...एक आम नागरीक बड़ी मजबूरी में ही अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में भेजता है...अन्यथा उसका प्रयास यही रहता है कि वो अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में भेजे...।
दरअसल इसके पीछे की सच्चाई बड़ी डरावनी और भयानक है...किसी भी सभ्य समाज और राष्ट्र के लिए अभिशाप है ऐसी सिक्षा व्यवस्था...हम जानते हैं कि केंद्र सरकार सर्व शिक्षा अभियान के तहत हारों हजार करोड़ रुपये शिक्षा व्यवस्था के लिए आवंटित करती है...लेकिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पर आई CAG की रिपोर्ट अति दयनिय और भयानक है।
इस CAG रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में, साल 2011 से 2016 के बीच 8वीं कक्षा तक जाते जाते1 करोड़ 21 लाख 29 हज़ार 657 बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया।
आपको यकिन कर पाना मुश्किल होगा कि पिछले 6 वर्षों में प्रदेश की पूर्व सरकारें 6 लाख बच्चों को किताबें उपलब्ध करवाने तक में नाकाम रही हैं इतना ही नहीं पिछले 6 वर्षों में तकरीबन 97 लाख बच्चों को स्कूल की यूनिफॉर्म तक उपलब्ध नहीं करवाई गई।
इस खोखली शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती CAG रिपोर्ट ये भी लिखा है कि उत्तर प्रदेश के 57 हज़ार 107 स्कूलों की अब तक बाउंड्री भी नहीं हुई है जो कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए अति आवश्यक है।वहीं 50 हज़ार 849 स्कूलों के पास अपने खेल के मैदान तक नहीं है ना ही 35 हज़ार 995 स्कूलों में अपनी लाइब्रेरी।हद तो तब हो जाती है जब रिपोर्ट में ये कहा जाता है कि 2 हज़ार 978 स्कूलों में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है...।

जरा कल्पना किजिए हम कैसे भारत का निर्माण कर रहे हैं...?

केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद देशभर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनाने की मुहिम चल रही है,बावजूद इसके उत्तर प्रदेश के 1 हज़ार 191 स्कूलों में लड़कों के लिए और 543 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय की सुविधा अब तक नहीं है।
ऐसे में कैसे स्कूल चलें हम..काहें अपने बच्चे को स्कूल भेजे हम...वो भी सरकारी स्कूल में...जहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।शायद यही वजह है कि 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को देखकर कहा था कि यूपी के अधिकारियों, नेताओं और जजों के बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए ताकि सरकारी शिक्षा पद्धति में सुधार लाया जा सके।अपनी सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट नें यहां तक कहा कि जो सरकारी कर्मचारी इस आदेश का पालन नहीं करता उसके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई भी की जाए।
लेकिन ये बेशर्म सिस्टम और व्यवस्थाएं कहां सुधरने वाली है...जब तक सियासत में सत्ता का मोह बना रहेगा तक शिक्षा,समाज का भला कैसे होगा कोई नहीं जानता...ना जाने कब हम जात धर्म सम्प्रदाय की भावना से उपर उठकर सोचेंगे।
बहरहाल प्रदेश में योगी सरकार को बने अभी कुछ ही महिने हुए जिनपर सवाल उठाना उचित नहीं होगा लेकिन खोखली हो चुकी यूपी की शिक्षा व्यवस्था की एक भारी जिम्मेदारी उनके कंधे पर जरुर होगी...जिसे पूरा करने की नैतिक जिम्मेदारी योगी जी और उनकी सरकार की अवश्य होगी। 

Saturday, 1 July 2017

GST का दांव : 2019 में मोदी होंगे पास या फेल ?

संदीप कुमार मिश्र: विश्व के सबसे यूवा लोकतंत्र में किसी भी निर्णय का आंकलन राजनीतिक नफा-नुकसान को नजर में रखकर देखा जाता है।क्योंकि सत्ता पर बने रहने की चाह किसे नहीं होती।पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के बाद एक बार फिर जीएसटी के तौर पर अपने राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा दांव लगा दिया है।ये एसा दांव है जो सफल हुआ और जनसमर्थन मिला तो अच्छे अच्छे सूरमा भी धूल फांकने लगेंगे नहीं तो मोदी जी के लिए ये दांव किसी भस्मासुर से कम नहीं होगा।

दरअसल जीएसटी का एक गलत निर्णय 2019 में मोदी सरकार का खेल बिगाड़ कर रख देखा। साथ ही देश की अर्थव्यवस्था और जनमत दोनो के लिए जीएसटी, भविष्य में बीजेपी की दिशा और दशा दोनो तय करेगी,क्योंकि 2019 का चुनावी शंखनाद होने में तकरिबन 20 महिने शेष बचें हैं, ऐसा में इस प्रकार के क्रांतिकारी निर्णय लेने की क्षमता हर किसी में नहीं होती।हां ये अलग बात है कि पीएम मोदी इसी प्रकार का निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं।। 
  
एक बात तो तय है कि अगर जीएसटी कामयाब होता है तो मोदी जी की छवी सर्वमान्य नेता के तौर पर और ज्यादा मजबूत होगी।
नोटबंदी का निर्णय आपको याद होगा...ये एक ऐसा निर्णय था,जिसे लाख परेशानियों के बाद भी अपार जनसमर्थन मिला।आलोचना भी मिली, लेकिन समर्थन ज्यादा मिला।इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता कि 2014 लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक बहुमत हासिल होने से पीएम मोदी ने देश को एक स्थिर शुरुआत दी।परिणाम चाहे जो हो, लेकिन निर्णय लेने की उनकी क्षमता का हर कोई कायल हो गया।मोदी सरकार को तीन साल होने को है, इस दौरान मोदी सरकार ने कुछ सख्त और बोल्ड कदम भी उठाए...मसलन आतंकी लॉन्च पैड्स के खिलाफ पाकिस्तान में घुसकर हमारी सेना द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक इसके बाद नोटबंदी जैसा साहसिक फैसला अहम रहा।

मोदी जी को करीब से जानने वालों का कहना है कि जीएसटी को हर स्तर पर कामयाब बनाने के लिए मोदी सरकार कमर कस चुकी है।पीएम लगातार जीएसटी की बारीकियों को समझने के साथ ही लगातार इस मुद्दे पर अधिकारियों से ब्रीफिंग भी ले रहे हैं और ऐसा ही उन्होंने नोटबंदी के दौरान भी किया था। पहले नोटबंदी और अब जीएसटी....देश की इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए मोदी हर संभव प्रयास कर रहे हैं।यकिनन पीएम मोदी जानते हैं कि जीएसटी के सहारे उन्होंने देश की आवाम से एक बार फिर बड़ा वादा किया है, जिसे निभाना बहुत आसान नहीं होगा।


बहरहाल अब देखना दिलचस्प होगा कि जीएटी से देश की अर्थव्यवस्था को कितना बल मिलता है,आम जनमानस को इससे कितना लाभ होता है, इंतजार करिए...क्योंकि 2019 के आम चुनाव में मोदी सरकार की राह कठीन या फिर आसान बनाने में जीएसटी के निर्णय का फैसला बेहद अहम होगा और 2019 में पता चल जाएगा कि मोदी जी के लिए जीएसटी का दांव उन्हें पास करता है या फेल ।

Friday, 30 June 2017

हनुमान जी महाराज के 12 नामों की महिमा अपरंपार


संदीप कुमार मिश्र- मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का सबसे उत्तम दिन माना गया है, वहीं बजरंगबली के नामों का भी विशेष महत्व है। इन नामों को यदि समयानुसार लिया जाए तो बजरंगबली जल्दी प्रसन्न होकर अपनी कृपा प्रदान करते हैं।
बजरंगबली के नामों की महिमा :-
राम भक्त, महाबल, बजरंग बली, महावीर हनुमान, शंकर सुमन, केसरी नंदन, अंजनी पुत्र, पवन सुत, अमित विक्रम, समेष्ट, लक्ष्मण, प्राण दाता प्रातःकाल उठते ही जिस अवस्था में हैं, इन बारह नामों को ग्यारह बार लेने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है।



लाल स्याही से मंगलवार को भोज पत्र पर ये बारह नाम लिखकर मंगलवार के ही दिन ताबीज बांधने से कभी सिरदर्द नहीं होगा। गले या बाजू में तांबे का ताबीज ज्यादा उत्तम है।
नित्य नियम से बजरंगबली का नाम लेने वाले व्यक्ति को हमेशा पारिवारिक सुख मिलता रहता है।
रात को सोते समय बजरंगबली का नाम लेने वाला व्यक्ति अपने शत्रु को हराकर विजय प्राप्त करता  है।
इन बारह नामों का निरंतर जाप करने वाले व्यक्ति की बजरंगबली दसों दिशाओं से एवं आकाश-पाताल से रक्षा करते हैं।

यात्रा के समय एवं न्यायालय में पड़े विवाद के लिए इन बारह नामों को लेने से सभी बाधाऐं और विघ्न दूर होते हैं।

हनुमानजी की आराधना से मन को मिलेगी शांति


संदीप कुमार मिश्र- जो व्यक्ति रोज हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करते है उन भक्तों को हनुमानजी सभी सुख मिलते हैं और धन की प्राप्ति होती है। ऐसे लोगों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है।

आपको बता दे की सुंदरकांड श्रीरामचरितमानस का चौथा अध्याय का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला भाग है क्योंकि इसमें हनुमान जी के बल, बुद्धि, पराक्रम व शौर्य का वर्णन किया गया है। सुंदरकांड के पाठ को पढ़ने व सुनने से मन में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है। सुंदरकांड के हर दोहा, चौपाई व शब्द में गहन अध्यात्म छुपा है, जिससे मनुष्य जीवन की हर समस्या का सामना कर सकता है।


जिस तरह विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी भगवान श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। इसलिए मंगलवार या शनिवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर उन्हें सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें। आपकी मनोकामनाएं जरूर पूरीं होगीं और जीवन में सुख-शांति बानी रहेगी।

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...