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Wednesday, 6 June 2018

जानिए भारत के प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिर : जहां होती है भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी



संदीप कुमार मिश्र: इस कलियुग में हनुमान जी महाराज एक ऐसे देव हैं जिनकी पूजा सर्वत्र की जाती है।जिनके संबंध में कहा जाता है कि जहां कहीं भी सत्संग,किर्तन,प्रभु श्रीराम का गुणगान और वंदन होता है वहां हनुमान जी महाराज कथा श्रवण के लिए आते है।ऐसे में आईए जानते हैं हनुमान जी कुछ प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जिनकी मान्यता विश्वविख्यात है-

01.प्रयागराज में स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर(इलाहाबाद,उत्तर प्रदेश)-संगम नगरी प्रयागराज में इलाहाबाद किले से सटे हुए हनुमान मंदिर में लेटे हुए हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है।ये एक छोटा लेकिन प्राचीन मंदिर है।हमारे देश का ये इकलौता मंदिर है जहां हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में विराजते हैं। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा २० फीट लम्बी है। जब वर्षा के दिनों में गंगा जी में बाढ़ आती है और यह सारा स्थान जलमग्न हो जाता है, तब हनुमानजी की इस मूर्ति को कहीं ओर ले जाकर सुरक्षित रखा जाता है और जैसे ही बाढ़ का जलस्तर कम हो जाता है तो हनुमान जी की प्रतिमा को पुन: यहीं पर स्थापित किया जाता है।
02. हनुमानगढ़ी मंदिर(अयोध्या धाम,उत्तर प्रदेश):कहते हैं कि अवधधाम धामाधिपति,धामादिपति श्रीरामकहने का भाव है कि सभी धामों में सर्वोत्म धाम अयोध्या है और अयोध्या के राजा राम जी सभी धामो के पति है। अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है।जहां राम जी रहेंगे वहां हनुमान जी तो रहेंगे ही।अयोध्या का सबसे प्रमुख श्रीहनुमान मंदिर हनुमानगढ़ी के नाम से विश्वविख्यात है। हनुमान जी का ये मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है। इसमें "६०" सीढिय़ां चढऩे के बाद श्री हनुमान जी महाराज का मंदिर आता है। यह मंदिर बड़ा और भव्य है। मंदिर के चारों ओर साधु-संत के लिए निवास योग्य स्थान बने हैं।आपको बता दें कि हनुमानगढ़ी के दक्षिण में सुग्रीव टीला और अंगद टीला नामक स्थान भी हैं।कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना लगभग "३००" साल पहले श्रद्धेय स्वामी अभया रामदास जी महाराज ने की थी।
03. सालासर बालाजी हनुमान मंदिर(सालासर,राजस्थान): ज्ञानियों में अग्रगण्य हनुमानजी महाराज  का यह प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है। जिस गांव में हनुमान जी महाराज का ये मंदिर स्थित है उस गांव का नाम सालासर है, इसलिए सालासर वाले बालाजी के नाम से यह मंदिर प्रसिद्ध है। हनुमानजी महाराज की यह प्रतिमा दाड़ी और मूंछ से सुशोभित है।सालासर में स्थित हनुमान जी का मंदिर बड़ा ही भव्य और रमणीक है।यहां पर मंदिर के चारों तरफ श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हुई हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और बालाजी महाराज से मनचाहा वरदान पाते हैं। इस मंदिर के संस्थापक श्री मोहनदासजी बचपन से श्री हनुमान जी के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे।कहा जाता है कि हनुमान जी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी, जिसे बाद में सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया। यहाँ हर वर्ष "भाद्रपद, आश्विन, चैत्र एवं वैशाख की पूर्णिमा" के दिन विशाल मेला लगता है जो विश्व प्रसिद्ध है।
04.हनुमान धारा मंदिर(चित्रकूट,उत्तर प्रदेश): देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के समीप यह हनुमान मंदिर स्थापित है। सीतापुर से हनुमान धारा की दूरी तीन मील है। यह स्थान पर्वतमाला के मध्यभाग में स्थित है। पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर पर दो जल के कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। इस धारा का जल हनुमानजी को स्पर्श करता हुआ बहता है। इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं।धारा का जल पहाड़ में ही विलीन हो जाता है। उसे लोग प्रभाती नदी या पातालगंगा कहते हैं। इस स्थान के बारे में एक बेहद रोचक कथा प्रसिद्ध है:-
कहते हैं कि प्रभु श्री राम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमानजी ने भगवान श्रीरामचंद्र जी महाराज से कहा कि- हे प्रभु करुणानिधान मुझे कोई ऐसा स्थान बताएं, जहां लंका दहन से उत्पन्न मेरे शरीर का ताप मिट सके। तब भगवान श्रीराम ने हनुमानजी को यह स्थान बताया था।
05.श्री संकटमोचन मंदिर(वाराणसी,उत्तर प्रदेश):भगवान भोलेनाथ के त्रिशुल पर बसी विश्व की सबसे प्राचीन नगरी काशी यानी वाराणसी।जहां पर स्थित है श्री संकटमोचन मंदिर। इस मंदिर के चारों ओर एक छोटा सा वन क्षेत्र है। यहां का वातावरण एकांत, शांत एवं उपासकों के लिए दिव्य साधना स्थली से कम नहीं है। मंदिर के प्रांगण में श्री हनुमानजी महाराज की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। श्री संकटमोचन हनुमान मंदिर के पास में ही भगवान श्रीनृसिंह का मंदिर भी स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है। इस मूर्ति में हनुमानजी दाएं हाथ से भक्तों को अभयदान कर रहे हैं एवं बायां हाथ उनके ह्रदय पर स्थित है।इस मंदिर में प्रत्येक कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमानजी की सूर्योदय के समय विशेष आरती एवं पूजन समारोह संपन्न होता है। उसी प्रकार चैत्र पूर्णिमा के दिन यहां "श्री हनुमान जयंती" महोत्सव का भव्य आयोजन होता है। इस अवसर पर श्रीहनुमानजी की बैठक की झांकी होती है और चार दिन तक रामायण सम्मेलन महोत्सव एवं संगीत सम्मेलन होता है।जहां देश के कोने कोने से कलाकार आकर भाव राग ताल से आयोजन को सफल बनाते है।
06. हनुमान दंडी मंदिर(बेट द्वारका,गुजरात):गुजरात के बेट द्वारका से चार मील की दूरी पर मकरध्वज के साथ में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। कहते हैं कि पहले मकरध्वज की मूर्ति छोटी थी लेकिन अब दोनों मूर्तियां एक सी ऊंची हो गई हैं।कहा जाता है कि अहिरावण ने भगवान श्री राम और भैया लक्ष्मण को इसी स्थान पर छिपा कर रखा था।जब हनुमानजी श्री राम-लक्ष्मण को लेने के लिए इस स्थान पर आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। अंत में हनुमानजी ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया। उनकी स्मृति में यह मूर्ति स्थापित है। कुछ धर्म ग्रंथों में मकरध्वज को हनुमानजी का ही पुत्र बताया गया है, जिसका जन्म हनुमानजी के पसीने द्वारा एक मछली से हुआ था।
7. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर(मेहंदीपुर,राजस्थान): राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाडिय़ों के बीच बसा हुआ है मेहंदीपुर नामक स्थान।जिसके संबंध में कहा जाता है कि दो पहाडिय़ों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर भी कहते हैं।ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर करीब 1 हजार साल पुराना है। यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमान जी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी। जिसे श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है।मंदिर में स्थित बालाजी के चरणों में छोटी सी कुण्डी है, जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता। यह मंदिर तथा यहाँ के हनुमान जी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है। कहा जाता है कि मुगल साम्राज्य में इस मंदिर को तोडऩे के अनेक प्रयास हुए लेकिन चमत्कारी रूप से इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ।इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए आने वालों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर की सीमा में प्रवेश करते ही ऊपरी हवा से पीडि़त व्यक्ति स्वयं ही झूमने लगते हैं और लोहे की सांकलों से स्वयं को ही मारने लगते हैं। मार से तंग आकर भूत प्रेतादि स्वत: ही बालाजी के चरणों में आत्मसमर्पण कर देते हैं और भाग जाते हैं।मनोकामना पूर्ति के लिए बारहो महीने श्रद्धालुओं का यहां आना जाना लगा ही रहता है।
8. डुल्या मारुति मंदिर(पूना,महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के पूना के गणेशपेठ में स्थित यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। श्रीडुल्या मारुति का मंदिर संभवत: 350 वर्ष पुराना है। संपूर्ण मंदिर पत्थर का बना हुआ है,जो देखने में बेहद आकर्षक और भव्य नजर आता है। मूल रूप से डुल्या मारुति की मूर्ति एक काले पत्थर पर अंकित की गई है। यह मूर्ति पांच फुट ऊंची तथा ढाई से तीन फुट चौड़ी अत्यंत भव्य एवं पश्चिम मुख है। हनुमानजी की इस मूर्ति की दाईं ओर भगवान श्री गणेश की एक छोटी सी मूर्ति स्थापित है। इस मूर्ति की स्थापना श्रीसमर्थ रामदास स्वामी जी महाराज ने की थी।             
                                                                        9.कष्टभंजन हनुमान मंदिर(सारंगपुर,गुजरात): सौराष्ट्र यानी गुजरात की राजधानी अहमदाबाद-भावनगर रेलवे लाइन पर स्थित बोटाद जंक्शन से सारंगपुर लगभग १२ मील दूर है। यहां एक प्रसिद्ध मारुति प्रतिमा है। महायोगिराज गोपालानंद स्वामी ने इस शिला मूर्ति की प्रतिष्ठा विक्रम संवत् १९०५ आश्विन कृष्ण पंचमी के दिन की थी। ऐसा कहा जाता है कि प्रतिष्ठा के समय मूर्ति में श्री हनुमान जी का आवेश हुआ और यह हिलने लगी। तभी से इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर स्वामीनारायण सम्प्रदाय का एकमात्र हनुमान मंदिर है।

                                                  
10. यंत्रोद्धारक हनुमान मंदिर(हंपी,कर्नाटक): कर्नाटक राज्य के बेल्लारी जिले के हंपी नामक नगर में एक हनुमान मंदिर स्थापित है। इस मंदिर में प्रतिष्ठित हनुमानजी को यंत्रोद्धारक हनुमान जी कहा जाता है। विद्वजनों का ऐसा कहना है कि यह क्षेत्र प्राचीन किष्किंधानगरी है।जिसका वर्णन वाल्मीकि रामायण के साथ ही श्रीरामचरित मानस में भी मिलता है। जिससे अनुमान लगाया जाता है कि इसी स्थान पर किसी समय वानरों का विशाल साम्राज्य रहा होगा। आज भी यहां अनेक गुफाएं हैं। इस मंदिर में श्रीराम नवमी के दिन से लेकर तीन दिन तक विशाल उत्सव मनाया जाता है।
11. गिरजाबंध हनुमान मंदिर (रतनपुर,छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में एक स्थान है रतनपुर। जिसे महामाया नगरी भी कहते हैं। यह देवस्थान पूरे भारत में सबसे अलग है। इसकी मुख्य वजह मां महामाया देवी और गिरजाबंध में स्थित श्रीहनुमानजी महाराज का मंदिर है। खास बात यह है कि विश्व में हनुमान जी का यह अकेला ऐसा मंदिर है जहां हनुमान नारी स्वरूप में हैं। कहते हैं कि इस दरबार से कोई निराश नहीं लौटता। यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती है।
12. उलटे हनुमानजी का मंदिर(साँवरे, इंदौर,मध्यप्रदेश): भारत की धार्मिक नगरी उज्जैन से केवल 30 किमी दूर स्थित है यह धार्मिक स्थान। जहाँ अंजनी के लाल हनुमान जी महाराज की उल्टे रूप में पूजा की जाती है। यह मंदिर साँवरे नामक स्थान पर स्थापित है इस मंदिर को कई लोग रामायण काल के समय का बताते हैं। मंदिर में भगवान हनुमान जी की उलटे मुख वाली सिंदूर से सजी मूर्ति विराजमान है। सांवेर का हनुमान मंदिर हनुमान भक्तों का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ आकर भक्त भगवान के अटूट भक्ति में लीन होकर सभी चिंताओं से मुक्त हो जाते हैं। यह स्थान ऐसे भक्त का रूप है जो भक्त से भक्ति योग्य हो गया।जहां भक्त और भगवान एक रुप हो जाते हैं औसा ही पवित्र पावन स्थान है इंदौर के सांवरे में स्थित उलटे हनुमानजी का मंदिर।
उलटे हनुमान की कथा :भगवान हनुमान के सभी मंदिरों में से अलग यह मंदिर अपनी विशेषता के कारण ही सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। साँवेर के हनुमान जी के विषय में एक कथा बहुत लोकप्रिय है। कहा जाता है कि जब रामायण काल में भगवान *श्री राम* व रावण का युद्ध हो रहा था, तब अहिरावण ने एक चाल चली. उसने रूप बदल कर अपने को राम की सेना में शामिल कर लिया और जब रात्रि समय सभी लोग सो रहे थे,तब अहिरावण ने अपनी जादुई शक्ति से *श्री राम एवं लक्ष्मण जी* को मूर्छित कर उनका अपहरण कर लिया। वह उन्हें अपने साथ पाताल लोक में ले जाता है। जब वानर सेना को इस बात का पता चलता है तो चारों ओर हडकंप मच जाता है। सभी इस बात से विचलित हो जाते हैं। इस पर हनुमान जी भगवान *श्री राम व लक्ष्मण जी* की खोज में पाताल लोक पहुँच जाते हैं और वहां पर अहिरावण से युद्ध करके उसका वध कर देते हैं तथा *श्री राम एवं लक्ष्मण जी* के प्राँणों की रक्षा करते हैं। उन्हें पाताल से निकाल कर सुरक्षित बाहर ले आते हैं। मान्यता है की यही वह स्थान था जहाँ से हनुमान जी पाताल लोक की और गए थे। उस समय हनुमान जी के पाँव आकाश की ओर तथा सर धरती की ओर था जिस कारण उनके उल्टे रूप की पूजा की जाती है।

13. प्राचीन हनुमान मंदिर (कनॉट प्लेस,नई दिल्ली): यहां महाभारत कालीन श्री हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है। यहाँ पर उपस्थित हनुमान जी स्वंयम्भू हैं। बालचन्द्र अंकित शिखर वाला यह मंदिर आस्था का महान केंद्र है।प्राचीन काल में दिल्ली का ऐतिहासिक नाम इंद्रप्रस्थ शहर है, जो यमुना नदी के तट पर पांडवों द्वारा महाभारत-काल में बसाया गया था। तब पांडव इंद्रप्रस्थ पर और कौरव हस्तिनापुर पर राज्य करते थे। ये दोनों ही कुरु वंश से निकले थे। हिन्दू मान्यता के अनुसार पांडवों में द्वितीय भीम को हनुमान जी का भाई माना जाता है। दोनों ही वायु-पुत्र कहे जाते हैं। इंद्रप्रस्थ की स्थापना के समय पांडवों ने इस शहर में पांच हनुमान मंदिरों की स्थापना की थी। ये मंदिर उन्हीं पांच में से एक है।
14 श्री बाल हनुमान मंदिर(जामनगर,गुजरात): सन् १५४० में जामनगर की स्थापना के साथ ही स्थापित यह हनुमान मंदिर, गुजरात के गौरव का प्रतीक है। यहाँ पर सन् १९६४ से श्री राम धुनीका जाप लगातार चलता आ रहा है, जिस कारण इस मंदिर का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।

15.महावीर हनुमान मंदिर(पटना,बिहार): पटना जंक्शन के ठीक सामने महावीर मंदिर के नाम से श्री हनुमान जी का मंदिर है।* उत्तर भारत में माँ वैष्णों देवी मंदिर के बाद यहाँ ही सबसे ज्यादा चढ़ावा आता है। इस मंदिर के अन्तर्गत महावीर कैंसर संस्थान, महावीर वात्सल्य हॉस्पिटल, महावीर आरोग्य हॉस्पिटल तथा अन्य बहुत से अनाथालय एवं अस्पताल चल रहे हैं। यहाँ श्री हनुमान जी संकटमोचन रूप में विराजमान हैं।
16. श्री पंचमुख आंजनेयर हनुमान( तमिलनाडू): तमिलनाडू के कुम्बकोनम नामक स्थान पर श्री पंचमुखी आंजनेयर स्वामी जी (श्री हनुमान जी) का बहुत ही मनभावन मठ है। यहाँ पर श्री हनुमान जी की पंचमुख रूपमें विग्रह स्थापित है, जो अत्यंत भव्य एवं दर्शनीय है।
यहाँ पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री राम जी को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था, तब प्रभु श्री राम को ढूँढ़ने के लिए हनुमान जी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारम्भ की थी। और फिर इसी रूप में उन्होंने उन अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था। यहाँ पर हनुमान जी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सारे दुस्तर संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है..ll
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ll ऊं ll 

Monday, 4 June 2018

2019 का संग्राम और मोदी की चुनौती,एकजुट विपक्ष से पार पाएगी मोदी सरकार



 संदीप कुमार मिश्र: राजनीति में ना तो कोई स्थाई दोस्त होता है और ना ही कोई स्थायी दुश्मन।बनते बिगड़ते समीकरण सबसे बड़ी पार्टी होने पर भी विपक्ष में बैठने को मजबूर कर देती है और तीसरे नंबर की पार्टी होने पर भी सत्ता पर आसीन कर देती कर देती है।कर्नाटक इसका वर्तमान उदाहरण है।जहां 104 सीट पाकर भी बीजेपी विपक्ष में बैठी है और 37 सीट पाकर कांग्रेस के समर्थन से जेडीएस सत्ता सुख भोग रही है।

अब आप इसे लोकतंत्र की खूबसूरती कहेंगे या विडंबना...ये तो यक्ष प्रश्न है ?


बहरहाल मुद्दा 2019 का आम चुनाव है,जिसकी चर्चा और शोर शुरु हो चुका है...कहना गलत नहीं होगा कि हमारे देश की व्यवस्था कुछ इस प्रकार की है राज्य दर राज्य देश हमेशा चुनावी मूड में ही रहता है,क्योंकि किसी ना किसी राज्य में विधान सभा चुनाव का बिगुल बजा ही रहता है...

ऐसे में एकतरफ जहां तमाम क्षेत्रिय दलों के साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को हराकर बीजेपी राज्य दर राज्य जीत दर्ज करती जा रही है वहीं देश में हो रहे उपचुनावों में हार का सामना भी कर रही है।खासकर कुछ ऐसी महत्वपूर्ण सीट पर बीजेपी की हार हो रही है,जिसकी कल्पना बीजेपी का हाईकमान भी नहीं कर सकता था...ऐसी ही सीट थी गोरखपुर,फुलपुर और कैराना की सीट...जिसे 2019 के सेमीफाइनल के तौर पर विपक्ष देखने लगा और जीत से उत्साहित हो रहा है...

सवाल उठता है कि क्या सच में मोदी सरकार के लिए उपचुनाव के परिणाम खतरे की घंटी है। यदी ऐसा है तो राज्यों में हो रहे चुनाव और लगातार हो रही बीजेपी की जीत को क्या कहेंगे। जिस प्रकार से विपक्ष लगातार बीजेपी के खिलाफ राज्य दर राज्य घेराबंदी कर रहा है उसे देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि बीजेपी की मुश्किलें बढ़नी तय है।

लेकिन 2019 में जब जनता देश के प्रधानमंत्री का चयन करने के लिए EVM पर अपने मत का प्रयोग करने जाएगी तो कुछ प्रश्न उसके मन में अपश्य खड़े होंगे...मसलन

1-      क्या विपक्ष में कोई सर्वमान्य नेता है,जिसकी सुझबुझ और समझ इतनी बेहतर है जिसे देश की बागड़ोर सौंपी जा सके?
2-      क्या राहुल गांधी इतने परिपक्व हो चुके हैं जिन्हें प्रधानमंत्री के रुप में देश पचा पाएगा?
3-      क्या विपक्ष में कोई नेता या पार्टी ऐसी भी जिसपर भ्रस्टाचार के दाग नहीं लगे हैं?
4-      क्या मायावती,मुलायम,तेजस्वी,अजीत सिंह,शरद पवार,देवगौड़ा,चंद्रबाबू जैसे तमाम नेता उस योग्य हैं जिन्हें देश की कमान सौंपी जा सकती है?
5-      क्या जिस वंशवाद से देश परेशान हो चुका था फिर एक बार उसी वंशवाद को देश स्विकार कर पाएगा?
6-      क्या किसी नेता में वो माद्दा है कि देश की छवी विश्व स्तर पर जो आज हर भारतीय देख पा रहा है उसे वो आगे बढ़ा पाएगा ?
7-      विकास की जिस रफ्तार को वर्तमान सरकार निरंतर आगे बढ़ा रही है क्या उसकी गति बरकरार रखने में कोई और सक्षम है,खासकर तब जब सभी विपक्षी नेताओं की अपनी महत्वकांक्षा है,क्योंकि हर कोई खुद को प्रधानमंत्री के रुप में ही देखना चाहता है?

इस प्रकार के ना जाने कितने सवाल,संशय और दुविधाएं देश की जनता के बीच होंगे जब वो अपने मतदान का प्रयोग करेगी।

हां आप ये कह सकते हैं कि मोदी सरकार से उम्मीदें बहुत थी और निश्चित तौर पर उन उम्मीदों पर सरकार पूरी तरह से खरी नहीं उतरी,लेकिन उस दिशा में आगे अवश्य बढ़ रही है,जहां दशकों की बिगड़ी हुई व्यवस्थां थी,उसे दुरुस्त करने में थोड़ा वक्त तो जरुर लगता है,कड़े फैसले भी लेने पड़ते हैं,कुछ कदम ऐसे भी उठाने पड़ते हैं जिससे तत्काल तो परेशाना बढ़ती है लेकिन भविष्य बेहतर होने के संकेत मिलते हैं। एक बात और जो जरुरी है...मोदी सरकार को रोजगारपरक कार्यक्रम को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और देश के अन्नदाता यानी किसानो की समस्याओं को युद्ध स्तर पर बेहतर करना होगा....नहीं तो जनता तो जनार्दन है...फैसला लेने में तनिक भी लेटलतीफी नहीं करती है...

एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरुरी है सरकार का हर फैसला जनमत के हित में हो,जनमत के लिए हो और जनमत के साथ हो।

अंतत: जीत और हार सियासत में लगा रहती है,अर्श से फर्श और फर्श से अर्श पर आने में समय नहीं लगता है।देखना दिलचस्प होगा कि 2019 में बीजेपी बनाम अन्य की लड़ाई में कौन किस पर भारी पड़ता है।एनडीए जिसके सर्वमान्य प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरैंद्र मेदी हैं या फिर यूपीए जिसमें दर्जनो प्रधानमंत्री पद का ख्वाब पाले बैठे हैं...?
(आप इसके इतर सोचने के लिए स्वतंत्र हैं,ये मेरे स्वत: के विचार हैं)

Friday, 27 April 2018

28 April 2018 Special : जानिए नरसिंह जयंती की पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व



संदीप कुमार  मिश्र:  आस्था और विश्वास के देश भारत में नरसिंह जयंती, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।ऐसा धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान नरसिंहविष्णु भगवान के चौथे अवतार थे।जिनके द्वारा महान दैत्य हिरण्याकश्यपू का अंत हुआ था। कहते हैं कि इसी दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार (आधा मनुष्य और आधा शेर) धारण किया था।

नरसिंह जयंती का शुभ मुहूर्त
मध्याह्न संकल्प का शुभ मुहूर्त = 11:00 से 13:37
नरसिंह जयंती में सायंकाल पूजन का समय = 16:13 to 18:50
पूजा की अवधि = 2 घंटा 36 मिनट
29th अप्रैल 2018,
रविवार को नरसिंह जयंती व्रत के पारण का समय = प्रातः 06:37 बजे के बाद।
29th अप्रैल 2018 को चतुर्दशी तिथि के समापन का समय = 06:37
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 28th अप्रैल 2018, शनिवार 07:12 बजे होगा।
जिसका समापन 29th अप्रैल 2018, रविवार 06:37 पर होगा।

नरसिंह जयंती पर व्रत महिमा :-
इस बार 28 अप्रैल 2018 को पड़ने वाली नरसिंह जयंती स्वाति नक्षत्र और शनिवार के दिन पड़ने से वैशाख के शुक्ल की चतुर्दशी व्रत के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है। इस व्रत को करने के लिए खास नियमों का पालन किया जाता है। इस दिन व्रती नरसिंह जयंती से एक दिन  केवल एक बार भोजन करते हैं और व्रत के दौरान वे किसी भी तरह के अन्न का सेवन नहीं कर सकते। व्रत का पारण अगले दिन उचित मुहूर्त देखकर ही करने का विधान होता है।
नरसिंह जयंती के दिन लोग मध्याह्न में संकल्प लेकर संध्या में भगवान नरसिंह का पूजन करते है।क्योंकि कहते हैं भगवान नरसिंह सूर्यास्त के समय ही चतुर्दशी तिथि प्रबल होने पर ही अवतरित हुए थे ।

Friday, 20 April 2018

जानिए क्या है महाभियोग,क्या है इसकी पूरी प्रक्रिया ? क्यों लाया जा रहा है CJI के खिलाफ महाभियोग



संदीप कुमार मिश्र: किसी राष्ट्र के संवैधानिक पद की गरीमा बनी रहे और पद का दुरुपयोग ना हो इसलिहाज से मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति को ही हटाने के लिए महाभियोग लाया जा सकता है।आईए जानते हैं कि देश में अचानक कैसे महाभियोग की चर्चा होने लगी।

दरअसल हमारे देश के मुख्य न्यायाधीश है श्री दीपक मिश्रा जी। जिनके खिलाफ विपक्ष जिसमें कई पार्टियां शामिल हैं मुख्य तौर पर कांग्रेस की अगुवाई में महाभियोग प्रस्ताव लाने की चैयारी में है।जिसके लिए कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू से मिलकर एक प्रस्ताव सौंपा है। यहां ये जानना जरुरी है कि महाभियोग की जो प्रक्रिया है वो काफी जटिल और लंबी।जैसा कि देखने में भी आ रहा है कि पूरा विपक्ष भी कहीं ना कहीं इसके खिलाफ फिलहाल एकमत होता नजर नहीं आ रहा है,लेकिन हां देश में सियासत जरुर गर्म हो गई है।

एक बात तो मानना पड़ेगा कि हमारे देस के सियासदां अपनी राजनीति चमकाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं....चलिए फिलहाल जानते हैं कि महाभियोग की क्या है पूरा प्रक्रिया- 

आखिर क्‍या है महाभियोग ?
हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को हटाने के लिए महाभियोग लाया जाता है।  इसी प्रावधान के जरिये देश के राष्‍ट्रपति को भी हटाया जा सकता है। महाभियोग का जटिल  प्रस्‍ताव ऐसे समय में लाया जाता है जब लगता है कि शीर्ष पदों पर बैठे लोग संविधान के दायरे में रहकर काम नहीं कर रहे हैं या फिर उसका उल्‍लघंन कर रहे हों। ऐसा करने या होने पर महाभियोग का प्रस्‍ताव संसद के दोने सदनो में से किसी भी सदन में लाने का प्रावधान है।आपको बता दें कि महाभियोग का जिक्र संविधान के अनुच्‍छेद 62, 124 (4), (5), 217 और 218 में स्पष्टतौर पर किया गया है।

जाने महाभियोग की क्या है प्रक्रिया
वास्तव में महाभियोग प्रस्‍ताव की प्रकिया बेहद जटिल मानी जाती है।यदि लोकसभा में इस प्रस्‍ताव को लाना हो तो 100 सांसदों के हस्‍ताक्षर होने चाहिए और यदि राज्‍यसभा में इसे लाना हो तो 50 सांसदों के हस्‍ताक्षर चाहिए होते हैं।जब इसे सदन में पेश किया जाता है तो इस पर सदन के अध्यक्ष फैसला लेते हैं वो चाहें तो इसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं और खारिज भी कर सकते हैं।
ऐसे में यदि सदन के अध्‍यक्ष महाभि‍योग के प्रस्‍ताव को स्‍वीकार लेते हैं तो तीन सदस्‍यों की एक कमेटी उन आरोपों की जांच करती है जो जजों पर लगायी गई है। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक जज, हाई कोर्ट के एक चीफ जस्‍ट‍िस और कोई एक अन्‍य व्‍यक्‍ति को शामिल किया जाता है।

जब जांच कमेटी आरोपों को सही पाती है तो ही महाभियोग प्रस्ताव पर संसद में गर्मागर्म बहस होती है।और फिर संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से प्रस्‍ताव का पारित होना जरूरी हो जाता है।जब दोनों सदनों में ये प्रस्ताव पारित हो जाता है तो इसे अंत में राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए भेजा जाता है।ये जानना भी बेहद दिलचस्प है कि किसी भी जज को हटाने का निर्णय, अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास ही सुरक्षित है।

इस प्रकार से हम देखते हैं कि महाभियोग की प्रक्रिया बेहद जटिल है जिसका परिणाम है कि आज तक महाभियोग से देश में कोई भी जज आज तक हटाए नहीं गए हैं।

Saturday, 14 April 2018

जाने अक्षय तृतीया पर राशि के अनुसार क्या करें खरीदारी और नवग्रहों की शांति के लिए क्या करें दान

संदीप कुमार मिश्र: अक्षय तृतीया पर किसी प्रकार की खरीदारी विना कोई मुहूर्त देके कर सकते हैं।आईए जानते हैं कि अपनी राशि के अनुसार क्या करें खरीदारी :

मेष राशि- मसूर दाल, वृषभ राशि- चावल, बाजरा,मिथुन राशि- मूंग, धनिया और वस्त्र,कर्क राशि- दूध, चावल,सिंह राशि- लाल फल, तांबा,कन्या राशि- मूंग दाल,तुला राशि-शक्कर,चावल, वृश्चिक राशि- जल, गुड़,धनु राशि- केला, पीले चावल,मकर राशि- काली दाल, उड़द, दही,कुंभ राशि - काला तिल, वस्त्र,मीन राशि- हल्दी, चना दाल।

ये तो रहा राशि के अनुसार क्या दान करें।आईए अब ये भी जानना जरुरी है कि 9 ग्रहों की शांति और शुभता के लिए हमें क्या करना चाहिए विशेष दान

हमारे सनातन धर्म में दान का विशेष महत्व बताया गया है खासकर अक्षय तृतीया पर किसी भी प्रकार के दान का अतिविशेष महत्व होता है।ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में स्थित होते हैं।जिस वजह से इस दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है।दरअसल सूर्य और चंद्रमा दोनों ही महत्वपूर्ण ग्रह हैं। चंद्रमा जहां मन का स्वामी माना जाता है और सभी प्रकार के परिणामों को सीधे प्रभावित करता हैं, वहीं सूर्य नक्षत्र मंडल के स्वामी माने जाते हैं और केंद्र बिन्दु हैं।


आज के दिन मंगल की शुभता और कर्ज से मुक्ति के लिए सत्तू, लाल चंदन, गुड़, लाल वस्त्र, ताम्रपात्र तथा फल-फूल का दान मंदिर में करना चाहिए।चंद्र की शुभता और मन की शांति के लिए चावल, घी, चीनी, मोती, शंख, कपूर का दान करें।सूर्य की शांति के लिए जौ का सत्तू, गेहूं, मसूर, घी, गुड़, शहद, मूंगा आदि का दान करें।बुध की अनुकूलता के लिए हरा वस्त्र, मूंग दाल, हरे फल तथा सब्जी का दान करें।गुरु की प्रसन्नता के लिए केले के पेड़ में हल्दी मिश्रित जल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं। केला, आम, पपीता का दान करें।शुक्र शांति के लिए सुहागिनों को वस्त्र एवं शृंगार सामग्री देकर सम्मानित करें। सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, दूध, दही, मिश्री का दान करें।शनि-राहु के लिए एक नारियल को मोती में लपेटकर सात बादाम के साथ दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।केतु अनिष्टकारक हो तो सप्त धान्य, पंखे, खड़ाऊ, छाता, लहसुनिया और नमक का दान करें।

इस प्रकार से दान का महत्व हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है खासकर अक्षय तृतीया पर।हम सभी कामना करते हैं कि अक्षय तृतीया आपके जीवन में उन्नति,तरक्की और खुशहाली लेकर आए।

18 अप्रैल 2018 विशेष: अक्षय तृतीया पर करें दान-पुण्य : मिलेगा अनंत फल

संदीप कुमार मिश्र: अटल सौभाग्य का पवित्र पावन त्योहार है अक्षय तृतीया।इसीलिए वैवाहिक जीवन के शुभारंभ के लिए सबसे पवित्र दिन माना जाता है अक्षय तृतीया।कहते हैं कि दान-पुण्य करने से अक्षय फल की मिलता है। अक्षय तृतीया के दिन गुड़, चांदी, नमक, शहद, गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, और कन्या दान करने का महत्व बताया गया है।कहा जाता है कि इस दिन आप जो कुछ भी जान करते हैं उसका चार गुना फल आपको मिलता है।

मित्रों वैसे तो प्रत्येक माह में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की तृतीया शुभ होती है लेकिन धर्म ग्रंथों में वैशाख माह की तृतीया स्वयंसिद्ध मुहूर्त मानी गई है। इसलिए इस दिन बिना पंचांग देखे शुभ व मांगलिक कार्य किए जाते हैं।इसलिए ही ज्यादातर शुभ कार्यों का आरंभ भी इसी दिन होता है।
अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। अक्षय अर्थात जिसका कभी क्षय नहीं हो। माना जाता है कि इस दिन जो भी पुण्य अर्जित किए जाते हैं उनका कभी क्षय नहीं होता है। इस दिन आरंभ किए गए कार्य भी शुभ फल प्रदान करते हैं। अक्षय तृतीया के दिन हिन्दू धर्म के मानने वाले श्रद्धा भाव के साथ गंगा स्नान भी करते हैं और पूजन अर्चन भी करते हैं।
आभूषण खरीदने के लिए अक्षय तृतीया का दिन शुभ माना जाता है।कहते हैं कि इस दिन खरीदा गया सोना अखंड सौभाग्य प्रदान करता है।इतना ही नहीं यदि आप किसी काम को आज के दिन शुरु करना चाहते हैं तो आपका कारोबार दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ता है और फलता-फूलता है।

अक्षय तृतीया पर क्यों किया जाता है दान : 14 प्रकार के दान का अत्यधिक महत्व

अक्षय तृतीया के दिन 14 प्रकार के दानों को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। 1. गौ, 2. भूमि, 3 . तिल, 4. स्वर्ण, 5 . घी, 6. वस्त्र, 7. धान्य, 8. गुड़, 9. चांदी, 10. नमक, 11. शहद, 12. मटकी, 13 खरबूजा और 14. कन्या।

अक्षय तृतीया पर सुख समृद्धि और सौभाग्य की कामना करने वाले भगवान शिव-पार्वती और नर नारायण की पूजा करते हैं।जैसा कि हम जानते हैं तृतीया मां गौरी की तिथि है। इस दिन गृहस्थ जीवन में सुख-शांति की कामना से की गई पूजा-अर्चना और प्रार्थना तुरंत स्वीकार की जाती है।

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...