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Thursday, 8 June 2017

जानें केसै होंगे भगवान श्रीहरि विष्‍णु प्रसन्न:किस मंत्र का जाप करने से होगी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी


संदीप कुमार मिश्र: भगवान विष्णु की आराधना से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम।आईए जानते हैं कि आखिर भगवान श्रीहरि कैसे होंगे प्रसन्न और कैसे होगी आपके घर परिवार में बरक्कत...कैसे होगी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी...और कैसे आपके घर परिवार में होगा माता लक्ष्मी का वास....

मनोकामना पूर्ति के लिए साधक को गुरुवार के दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है।हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान विष्णु जगत के पालनहार हैं...उनका स्वरूप शांत और आनंदमयी है...अब आपको बताते हैं भगवान श्रीहरि विष्‍णु को प्रसन्न के कुछ खास मंत्र.. जिनके जाप और शक्ति से आपका घर धन-वैभव एवं संपन्नता से भर जाएगा- 

                               लक्ष्मी विनायक मंत्र - 
                   दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

भगवान श्रीहरि विष्णु के पंचरूप मंत्र
ॐ अं वासुदेवाय नम:,ॐ आं संकर्षणाय नम:,ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:,ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:,ॐ नारायणाय नम:,
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।

सबसे सरल उपाय- ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।।

धन-वैभव एवं संपन्नता पाने का विशेष मंत्र
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।

शीघ्र फलदायी मंत्र-- 
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
- ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।


।। ॐ विष्णवे नम:।।

जाने सूर्य उपासना से कैसे होगी मनोकामना पूर्ति...


संदीप कुमार मिश्र: भगवान भास्कर प्रत्यक्ष देव हैं...जिनकी कृपा से समस्त संसार में प्रकाश होता है...ऐसे में आईए जानते है कि भगवान यूर्य देव कैसे होंगे प्रसन्न और कैसे बरसेगी सूर्य देव की कृपा...दरअसल रविवार का दिन सूर्य देव की पूजा स्तुति और वंदना को समर्पित है। सारी इच्छाएं और मनोकामनाएं की पूर्ती के लिए रविवार का व्रत हमें करना चाहिए।भगवान सूर्य देव का व्रत सबसे श्रेष्ठ होता है क्योंकि सूर्य देव के व्रत से सुख और शांति मिलती है।

कैसे दें सूर्य को अर्घ्य

हमारे पौराणिक हिन्दू धर्म ग्रंथों में भगवान सूर्य के अर्घ्यदान की विशेष महत्ता बताई गई है। नित्य प्रात:काल में तांबे के लोटे में जल लेकर और उसमें लाल फूल, चावल डालकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देनी चाहिए।इस अर्घ्यदान से भगवान ‍सूर्य प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, धन, धान्य, पुत्र, मित्र, तेज, यश, विद्या, वैभव और सौभाग्य को प्रदान करते हैं।

                                ।।ऊं सूर्याय नम:।।

जाने महाबली हनुमानजी के 5 सगे भाई कौन थे...


!! अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि !!
संदीप कुमार मिश्र:  हम सब हनुमान जी महाराज के बारे में जानते हैं...प्रभु श्रीराम जी के अनन्य भक्त हनुमान जी की कीर्ति रामचरितमानस में भरपूर गाई गई है लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे धर्म पुराणों में हनुमानजी के 5 सगे भाईयों की भी चर्चा की गई है जो कि विवाहित थे।


दरअसल 'ब्रह्मांडपुराण' में वानरों की वंशावली के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसी पुराण में हनुमानजी के सगे भाइयों के बारे में भी वर्णन मिलता है।अपने भाइयों के बीच हनुमानजी सबसे बड़े थे।।आईए जानते हैं उनके 5 सगे भाईयों के क्या नाम थे- मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान।हनुमान जी महाराज को छोड़कर उनके अन्य सभी भाई विवाहित थे और सभी संतानयुक्त थे।

YOU KNOW: सुंदरकांड का पाठ क्यों है अति विशेष फलदायी...?


संदीप कुमार मिश्र: सुंदरकांड का पाठ अति विशेष फलदायी है...सभी परेशानियों को नष्ट करता है सुंदरकांड का पाठ..मनुष्य में आत्मविश्वास बढ़ाता है सुंदरकांड का पाठ...मनुष्य की सभी समस्याओं का समाधान है सुंदरकांड।

गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है. संपूर्ण श्रीरामचरितमानस में सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो प्रभु श्रीराम  भक्त हनुमान जी की विजय का कांड है।जिसका पाठ करने से आत्मविश्वास,इच्छाशक्ति,मनुष्य की को बल मिलता है।
दरअसल हनुमानजी समुद्र लांघकर लंका पहुंचे थे और माता सीता की खोज की थी और फिर लंका को जला कर माता सीता का संदेश लेकर प्रभु श्रीराम के पास लौटे थे।इस प्रकार सुंदरकांड एक भक्त की जीत का कांड है, जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है। सुंदरकांड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं। इसलिए पूरी रामायण में सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसी वजह से सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

हनुमानजी के पूजन में शास्त्रों के अनुसार विशेष ध्यान देने योग्य बातें-
- हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है। भक्तों को हनुमान जी की तीन परिक्रमा ही करनी चाहिए।
- दोपहर के समय महाबली हनुमान जी महाराज को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित करना चाहिए।
- अंजनी के लाल महावीर हनुमानजी को शाम के समय भक्तों को फल जैसे- आम, केले, अमरूद, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए।
-भक्तों को  सुंदरकांड का पाठ करते समय हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल और अन्य पूजन सामग्री भी अर्पित करना चाहिए।


        ।।प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान जी महाराज आप सभी का कल्याण करें।।

YOU KNOW : गायत्री मंत्र में छि‍पा है हर परेशानी का समाधान


संदीप कुमार मिश्र: चारों वेदों से मिलकर बने गायत्री मंत्र का उच्‍चारण करने से व्‍यक्ति के जीवन में खुशियों का संचार होता है. इस मंत्र का जाप करने से शरीर निरोग बनता है और इंसान को यश, प्रसिद्धि और धन की प्राप्ति भी होती है।
गायत्री मंत्र
।।ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।
भावार्थ- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

गायत्री मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या
गायत्री मंत्र के पहले नौ शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं...
ॐ = प्रणव,भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला,भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला,स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला,तत = वह, सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल,वरेण्यं = सबसे उत्तम,भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला,देवस्य = प्रभु,धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान),धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी,प्रचोदयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)

कब करें गायत्री मंत्र का जाप: वेद माता गायत्री के इस बेहद सरल मंत्र को कभी भी पढ़ा जा सकता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसका दिन में तीन बार जप करना चाहिए- प्रात:काल सूर्योदय से पहले और सूर्योदय के पश्चात तक,फिर दोबारा दोपहर को।और फिर शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले जप शुरू करना चाहिए।

गायत्री मंत्र के फायदे: हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र की विशेष मान्यता है। गायत्री मंत्र जाप के कई फायदे बताए गए हैं जैसे : मानसिक शांति, चेहरे पर चमक, खुशी की प्राप्ति, चेहरे में चमक, इन्द्रियां बेहतर होती हैं, गुस्सा कम आता है और बुद्धि तेज होती है।।जय माता गायत्री।।

Monday, 10 April 2017

जानें शिव जी की कैसे करें पूजा जिससे दूर हो ग्रह बाधा

शिव जी की पूजा से दूर होगी ग्रह बाधा /ग्रह बाधा दूर करने के लिए करें शिव की पूजा
महादेव,आदिदेव शिव की आराधना दूर करेगी आपकी सभी ग्रह बाधाएं...9 ग्रहों की की शांति के लिए जानें कैसे करनी चाहिए शिव जी की पूजा-
हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि श्रावण मास में शिव जी की पूजा करने से हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ देव हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है।
सूर्य से संबंधित बाधा दूर करने के लिए विधिवत या पंचोपचार के बाद लाल आक के पुष्प एवं पत्तों से शिव की पूजा करनी चाहिए।
चंद्रमा से किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। साथ ही सोमवार का व्रत भी करें।
मंगल ग्रह से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से शिव जी का अभिषेक करना लाभप्रद रहेगा
बुध से संबंधित परेशानी दूर करने के लिए विधारा की जड़ी के रस से शिव जी का अभिषेक करना चाहिए।
बृहस्पति देव करें परेशान तो प्रत्येक बृहस्पतिवार को हल्दी मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।
यदि आप शुक्र ग्रह को अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो पंचामृत एवं घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।
शनि देव पहुंचाएं कष्ट तो गन्ने के रस एवं छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें।
राहु-केतु से मुक्ति के लिए कुश और दूर्वा को जल में मिलाकर शिव का अभिषेक करने से लाभ होगा।

Saturday, 8 April 2017

ईश्वर की साधना का सर्वोत्तम और सुगम मार्ग क्या है...?

संदीप कुमार मिश्र- भजन-किर्तन भक्ति का सर्वोत्तम और सुगम मार्ग है,जिससे परम पिता परमात्मा की भक्ति में मन सहज ही रम जाता है और मनुष्य को होती है आनंद की एक ऐसी अनुभुति जिससे मन मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है।हिन्दू धर्म शास्त्रों में भक्ति के अनेकानेक मार्ग बताए गए हैं।जिसमें कथा,सत्संग,भजन,किर्तन प्रमुख हैं।प्रभु का नाम संकिर्तन करने मनुष्य भवसागर से पार पा हो जाता है।
आस्था और भक्ति के परिपूर्ण देश है भारत।ऐसे में प्रश्न उठता है कि भक्ति वास्तव में है क्या  ? इसका सबसे सरल उत्तर है भगवान की प्राप्ति का साधन है भक्ति। हमारे मन में जब भक्ति की भावना बहती है तो हमें ईश्वर की उदारता और उसकी शक्ति का एहसास होता है।मनुष्य को अपनी लघुता और उसकी महानता और विशालता का बोध होता है, जिससे कि मनुष्य अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण कर पाता है और धरती पर अन्य समस्त जीवों के प्रति अपने मन में प्रेम भाव पैदा करता है। 
हमारे धर्म शास्त्रों में भक्ति कैसे की जाती है,इस संबंध में भी बताया गया है।सनातन संस्कृति और हिन्दू धर्म  शास्त्रों में अनेक प्रकार के ईश्वर भक्ति का मार्ग बताया गया है। प्रभु भक्ति के 9 सुगम रास्ते बताए गए हैं।भजन,किर्तन,श्रवण, स्मरण, पादसेवन, अर्चन व सत्संग,दास्य भाव आदि। श्री चैतन्य चरितामृत में भगवान के ही श्रीमुख से कहलाया गया है कि मैं पाँच तरह से बहुत प्रसन्न होता हूँ। ये हैं साधु संतों का संग , नाम संकीर्तन , भगवत्-श्रवण , तीर्थ वास और श्रद्धा के साथ श्रीमूर्ति सेवा। इस प्रकार से जो भी साधक भगवत भक्ति करता है उससे भगवान सहज ही प्रसन्न होकर मनवांछित फल देते हैं।
भक्ति के सभी मार्गों में श्रेष्ठ और सरल भक्ति मार्ग केवल नामामहिमा का है। कहने का भाव है कि निश्छल मन से, भाव से हरिनाम संकीर्तन किया जाए तो प्रभु की कृपा प्राप्त हो जाती है। यकिनन नाम संकीर्तन करना ही भगवत भक्ति प्राप्त करने का, प्रसन्न करने का सर्वोत्तम तरीका है , यही सर्वोत्तम भजन है।इस कलिकाल में,आज की भागदौड़ भरी जींदगी में भवसागर से पार जाने का सर्वोत्कृष्ट उपाय नाम संकिर्तन ही है।

                    कलियुग समजुग आन नहीं , जो नर कर विश्वास।

गाई राम गुण गन विमल , भव तर बिनहिं प्रयास।।

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...