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Saturday, 5 December 2015

आम आदमी पार्टी से हो रहा मोहभंग...!


संदीप कुमार मिश्र : देश में शायद ही कोई ऐसी पार्टी होगी जिससे मोहभंग शुरुआती दिनों से ही मन में होने लगे,लेकिन उम्मीद और विश्वास के दीपक ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी ('आप") को वोट देने के लिए  प्रेरीत किया और दिल्ली में इतिहास रच दिया।प्रचंड बहुमत से आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में बना दी और विपक्ष को कहीं का नहीं छोड़ा। राजनीति में भी उम्मीद करना बेमानी नहीं है,ये आस आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता को दिखाई।

दरअसल रालेगन के सीधे-साधे इमानदार देशभक्त अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की जब शुरुआत की,तो भ्रस्टाचार का तो पता नहीं लेकिन आंदोलन के गर्भ से एक पार्टी का जन्म जरुर हुआ,जिसे दिल्ली के भोले भाले आम जनमानस ने बड़े स्नेह से गले लगाया और आस लगायी कि अब उनकी उम्मीदों को जरुर पंख लगेंगे।लेकिन अफसोस की उम्मीदें,आशाएं,अपेक्षाएं,सपने जो टूटने के लिए ही होते हैं एक बार फिर टूट गए।क्योंकि जन-आकांक्षाओं के साथ केजरीवाल सरकार लगातार एक के बाद एक खिलवाड़ करती जा रही है, इसकी बानगी तकरिबन रोज ही देखने को मिल जाती है।कभी खुद इमानदारी का गोल्ड मैडल लिए केजरीवाल साब के द्वारा तो कभी सिल्वर,ब्रांज धारी उनके विधायकों और नेताओ के द्वारा।

अब आप के विधायकों की कुंडली को दरकिनार भी कर दें तो लगातार एक के बाद एक तुगलकी फरमान जारी हो रहे हैं।अब लोकपाल को ही लें जिसपर उंगलियां उठनी शुरु हो गयी हैं और जनलोकपाल को जोकपाल कहा जाने लगा,जबकि शिक्षा के मुद्दे पर विवाद अभी थमा  नहीं था।अब तो लगता है जैसे दिल्ली की सरकार सत्ता पर इसलिए ही काबिज हुई थी कि जितना विवाद कर सकते हो करो।हम तो ऐसे ही हैं जी।विवादों की फेहरिस्त में आगे बढ़ते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने विधायकों की तनख्वाह व सुविधाओं में चार गुना बढ़ोतरी कर दी।आप को सोचकर भी हैरानी होगी कि अब दिल्ली के विधायकों की सेलरी प्रधानमंत्री की सेलरी से भी ज्यादा होगी।साथ ही दिल्ली के विधायकों को किसी भी अन्य राज्य के विधायक से ज्यादा सेलरी मिलेगी। दिल्ली की जनता को झटका देते हुए केजरीवाल साब ने एक ही झटके में विधायकों की सेलरी 88,000 रुपए से बढ़ाकर 2 लाख 36 हजार रुपए कर दी और नए साल का गिफ्ट दे दिया।

दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है,जहां के विधानसभा में विधायकों की संख्या 70 है जिसमें 67 विधायक आम आदमी पार्टी के हैं।वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव भारी बुमत और सर्वसम्मति से विधानसभा में पास हुआ,जिसका लाभ किसे मिलेगा,ये शायद आपको बताने की जरुरत नहीं है।मजे की बात ये है कि इस फैसले को केजरीवाल साब ने ही पास किया जिसने कुछ दिन पहले ही दिल्ली के विधानसभा में एक ऐसा संशोधन पास किया था जिसमें प्राइवेट स्कूलों के लिए अपने शिक्षकों को सरकारी स्कूलों के बराबर वेतन देने की जरुरत नहीं रह गई।दिल्ली स्कूली शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा 10(1) को अब हटा दी गई है। जबकि इस धारा में ऐसा प्रावधान था कि मान्यता-प्राप्त निजी स्कूलों के कर्मचारियों को अपने समकक्ष सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों के बराबर वेतन एवं सुविधाएं देनी होंगी।अब जरा सोचिए क्या केजरीवाल साब शिक्षकों के साथ न्याय कर रहे हैं या फिर दोहरा नजरिया अपना रहे हैं...?

इस प्रस्ताव पर केजराल सरकार कितनी हास्यास्पद दलील दे रही है वो भी आप जान लें।दरअसल केजरीवाल सरकार का कहना है कि इस फैसले से निजी क्षेत्र में स्कूल खुलेंगे और शिक्षकों को रखना आसान होगा।अफसोस होता है कि जहां प्राइवेट स्कुलों पर मनमाने ढंग से नियमों को लागू करने पर सरकार को पाबंदी लगानी चाहिए तो इसकी जगह पर केजरीवाल सरकार अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए तरसते शिक्षकों पर ही शिकंजा कस दिया। लेकिन दोस्तों केजरीवाल साब को इस बात की चिंता जरुर थी कि जनसेवा के नाम पर सियासत में आए उनके संगी-साथियों की मौज-मस्ती में कोई कमी न रहे,जिसके लिए उन्होंने यात्रा भत्ता 2 लाख रुपये कर दी।

विवादों में एक कदम और आगे बढ़ते हुए केजरीवाल सरकार नें एक और ताजातरीन फैसला प्रदुषण को देखते हुए लिया।दरअसल केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया।जिससे 1 जनवरी से दिल्ली में आप अपनी गाड़ी को महिने में सिर्फ 15 दिन ही सड़कों पर चला सकेंगे ।यानी अगर आपकी गाड़ी का आखिरी नंबर ऑड यानी विषम है तो वो एक दिन और इवेन यानी सम नंबर है तो एक दिन चलाई जा सकेंगी। मतलब 1 जनवरी 2016 से एक दिन ऑड नंबर गाड़ी चलेगी तो दूसरे दिन इवेन नंबर की गाड़ी चलेगी।यानी अगर आपकी गाड़ी का आखिरी नंबर 1 3 5 7 9 है तो वो ऑड नंबर है, और वो एक दिन चलेगी तो दूसरे दिन 2 4 6 8 0 आखिरी नंबर वाली गाड़ी यानी इवेन नंबर वाली गाड़ी चलेगी।जबकि ये नियम बसें, टैक्सी और ऑटो रिक्शा पर लागू नहीं होगा।इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने दिल्ली के बदरपुर पावर प्लांट को बंद करने का एलान भी किया।
अब साब सोचना लाजमी है कि जिसकी आदत गाड़ी से जाने की होगी क्या वो बस या टैक्सी से सफर करेगा क्या..?क्या वो किस्त पर दो प्रकार की गाड़ी नहीं खरीद लेगा..? इसी बहाने दुसरी गाड़ी भी हो जाएगी।खैर इस फैसले से जनता में कहीं खुशी है तो कहीं गम,वहीं वेतनवृद्धि पर भी आपसरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। 

अंतत: विड़ंबना ये है कि केजरीवाल साब को कोई समझाए भी तो वे कह देंगे कि सब चोर हैं जी...आपस में मिले हुए हैं जी...मैं इमानदार जी...मेरी पार्टी और मेरे विधायक इमानदार जी....बाकी सब बेइमान...। अब साब कैसे कोई उन्हें सलाह दे सकता है,किसे बेइमान बनना है...दरअसल यही वो नारा भी था जिसका प्रचार प्रसार करके केजरीवाल साब ने सत्ता की ऐसी छलांग लगाई कि राजनीति के सभी सुरमा ढ़ेर हो गए।बहरहाल हम तो यही कहेंगे माननिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी कि ये दिल्ली की जनता है सब जानती है।पांच साल केजरीवाल का नारा बदलते देर नहीं लगाती है...।।

Friday, 4 December 2015

अखिलेश यादव का सपना : राहुल डिप्टी,पीएम मुलायम अपना


संदीप कुमार मिश्र : दोस्तों उत्तर प्रदेश के मुखिया अखिलेश यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर मुलायम सिंह यादव हों और उपप्रधानमंत्री राहुल गांधी बने। दरअसल ये बातें यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में एक सवाल के जवाब में कुछ उसी तरह से दिया जवाब।जबकि इस समिट में राहुल गांधी भी शिरकत कर रहे थे,लेकिन दर्शक दीर्घा में बैठे राहुल गांधी ने इस बात पर मुस्कुराते हुए किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

अब भाई सोचने और सपने देखने का अधिकार हर किसी को है। चाहे वो राजा हो या फिर रंक।  हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में जब अखिलेश यादव से ये पूछा गया कि क्या उनकी समाजवादी पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से हाथ मिलाने के बारे में सोच सकती है। इस बात पर 42 साल के अखिलेश यादव ने कहा कि 'अगर मुलायम सिंहजी(नेता जी) को प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को उप प्रधानमंत्री बनाया जाए, तो मैं अभी के अभी गठबंधन के लिए हां कहता हूं।'

इस बात पर दर्शकों ने जमकर तालियों के साथ अखिलेश यादव का अभिवादन किया। आपको बता दें कि एचटी समिट में इस वाक्ये के ठीक पहले देश के सबसे युवा सीएम अखिलेश यादव ने कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को अपना दोस्त बताया था।इतना ही नहीं अखिलेश ने कहा कि राहुल यहां मौजूद हैं, आप उन्हीं से पूछ सकते हैं कि वो मेरे पुराने मित्र हैं या नहीं।' जबकि इस पर राहुल गांधी ने किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

इतना ही नहीं अपने पिता और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की शिकायतों को वैचारिक मतभेद बताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि 'मां-बाप से कौन डांट नहीं खाता। अपने पिता की शिकायतों से किसी को बुरा नहीं लगना चाहिए। हमारे बीच अधिकारों की लड़ाई नहीं है।'बातों ही बातों में अखिलेश ने कहा कि विवादों के बारे में कहा कि उनकी सरकार के बारे में मीडिया में हमेशा गलत ही दिखाया जाता रहा है और अपनी बात को चालु रखते हुए उन्होने कहा कि 'मुलायम सिंहजी के जन्मदिन पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। कुछ लोग बंद दरवाज़ों में जन्मदिन मनाते हैं, हमने खुलेआम मनाया। अखिलेश ने ये भी कहा कि नेताजी के जन्मदिन पर किसी भी रुप से सरकारी पैसा खर्च नहीं किया गया।'

अपनी हर बात को बेबाकी से कहते हुए अखिलेश ने मोदी सरकार पर भी व्यंग किया,और कहा कि 'कहां चले गए अच्छे दिनकहते हुए अखिलेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य के विकास को गती देने के लिए और फंड की मांग करते हुए चिट्ठी में लिखा था कि 'पीएम बनने के लिए आप यूपी आए थे, आपको तो मदद करनी पड़ेगी।'

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने समिट में अपनी बात रखते हुए दादरी में अकलाक हत्याकांड पर कहा कि 'मैंने कभी नहीं कहा था कि इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में लेकर जाएंगे। लोग इसे बहुत बड़ा मुद्दा बनाना चाहते थे,लेकिन पुलिस ने अपना काम वक्त पर किया। सांप्रदायिक मतभेद पर यादव ने कहा कि ऐसी लड़ाई से समाजवादियों को कभी कोई फायदा नहीं हुआ है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश ने कहा कि सांप्रदायिक होना आसान है, धर्मनिरपेक्ष होना मुश्किल।

अंतत: 2017 में उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव का सामना अखिलेश यादव को करना है।2019 तो अभी दूर है। आने वाले समय में देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि 2017 में अखिलेश यादव की जीत का आधार क्या होगा..? भ्रस्टाचार,विकास,बेरोजगारी,महिला सुरक्षा,या फिर ला एण्ड आर्डर।क्या अखिलेश के शासन में प्रदेश में शांति व्यवस्था कायम हो पाई है...क्योंकि ऐसे ही कुछ मुद्दे 2019 में देश की दिशा तय करेंगे।


केजरीवाल का तोहफा : दिल्ली विधायकों की सेलरी 235000



संदीप कुमार मिश्र : अच्छे दिन...अच्छे दिन...अच्छे दिन.......किसके आए..? जानते हैं दोस्तों...नहीं तो जान लिजिए..देश के अच्छे दिन आए ना आए लेकिन दिल्ली के विधायक जी के अच्छे दिन आ गए।जी हां अरविंद केजरीवाल जी ने दिल्ली के विधायको की सेलरी तकरीबन तीन गुना बढ़ाने का प्रस्ताव विधान सभा में पास किया है।अब लगता है कि मौज है गुरु नेतागीरी में।बस नेता जी अरविंद केजरीवाल जैसा हो।क्योंकि इमानदारी का तमगा उन्हीं के पास है।

दरअसल राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने विधायकों के वेतन में भारी बढ़ोतरी वाले बिल को विधानसभा में पास किया है।विधानसभा में पास होने के बाद इस बिल को अब केंद्र सरकार के पास वाया उपराज्यपाल के माध्यम से भेजा पास जाएगा ।वेतन बढ़ोतरी बिल को केंद्र सरकार अगर मंजूरी दे देती है तो विधायक जी का वेतन और भत्ता कुल मिलाकर 2,35000 रुपया हो जाएगा जो अभी 88000 रुपये है। कई महिनों से विधायक वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे।जिसके लिए शानदार दलिलें दी जा रही थी कि लोगों को चाय पिलानी पड़ती है,वहीं  बिजली और टेलीफोन बिल भी ज्यादा आता है। विधानसभा क्षेत्र में शादीयों में भ जाना पड़ता है,और उपहार भी देना पड़ता है।आपको बता दे कि दिल्ली के विधायकों का वेतन बढ़ने के बाद मासिक वेतन जो पहले 12 हज़ार था वो अब बढ़कर 50 हज़ार हो जाएगा। वहीं विधानसभा में उपस्थित रहने के लिए जहां प्रतिदिन 1000 रुपये मिलते थे वो अब बढ़कर 2000 रुपये  हो जाएगा। सूसे मजे की बात है कि यात्रा भत्ता जो पहले 50 हज़ार था,उसे अब बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की पैरवी की गई है ।
इतना ही नहीं अब तो विधायक जी विदेश दौरा भी जमकर कर सकेंगे।साथ ही विधायकों को लैपटॉप, मोबाइल, प्रिंटर आदि के लिए पूरे कार्यकाल में एक लाख रुपया, अपने विधानसभा क्षेत्र में ऑफिस किराए पर लेने के लिए 25 हज़ार रुपया महीना, ऑफिस स्टाफ के वेतन के लिए 70 हज़ार रुपया महीने की बात कही गई है।दिल्ली में विधायकों के बढ़े बिल में यात्रा भत्ता भी 6 हज़ार से बढ़ाकर 30 हज़ार रुपये कर दिया गया है और टेलीफोन बिल जो पहले 8 हज़ार था उसे अब 10 हज़ार कर दिया गया है। अब तो दोस्तों दिल्ली के विधायक जी छोटी गाड़ी नहीं बल्कि बड़ी गाड़ियों में दौरा करते नजर आएंगे।क्योंकि गाड़ी खरीदने के लिए 4 लाख रुपये की जगह अब 12 लाख रुपये का लोन दिए जाने की सिफारिश नए बिल में की गई है।

अब साब महंगाई की मार तो विधायक जी पर भी है ना और ये बात केजरीवाल साब जानते हैं,भई परिवार उनका भी है...दाल और प्याज की जरुरत तो उन्हें भी है ना।लोगों की मदद करना,आपिस का खर्चा,चाय पानी,आदि...आदि..आदि।अब भ्रस्टातार को दूर करने के लिए सेलरी तो च्छी चाहिए ही...क्यों..? फिर भी जनाब सवाल तो उठेंगे ही कि आकिर इतनी सेलरी बढ़ानी जरुरी थी क्या ?  सबसे बड़ा सवाल तो इसी बात पर उठेंगे कि गाड़ी खरीदने आप जी ने चार लाख की बजाय 12 लाख तक लोन की बढ़ोतरी की सिफारिश की है।अरे भई जरुरी है बड़ी क्या..? छोटी गाड़ी से भी तो काम चल सकता है। भुल गए क्या जनाब उन दिनो को जब आप कुछ और ही कहा करते थे।दिल्ली की जनता को सब याद है अरविंद केजरीवाल जी कि जब आप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए रामलीला मैदान मेट्रो से गए थे तो एक बार ये चर्चा होने लगी थी कि आप ना तो सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करेंगे ना ही बंगला और ना ही अन्य सरकारी सुविधाएं।लेकिन साब आप तो आम आदमी है सो आम आदमी पार्टी के विधायक को महंगी गाड़ी की जरूरत क्यों आन पड़ी ?साब अचंभा तो तब होता है कि आपने  विधायकों की यात्रा के लिए 200000 रुपया की सिफारिश की।सवाल तो उठेंगे ही,कि ऐसी कौन सी यात्रा करनी है जो 2 लाख से कम में नहीं होगी...।

दोस्तों आपको सन 2012 की अरविंद केजरीवाल साब की एक बात याद दिलाना चाहता हूं जब जनलोकपाल नहीं पास हो पाया था तो केजरीवाल साब बहुत दुखी थे और कहा था कि राजनेताओं की आनाकानी से 44 सालों में लोकपाल नहीं पास हो पाया लेकिन अगर वेतन में बढ़ोतरी की बात होगी तो पांच मिनट में सर्वसम्मति बन जाएगी। दोस्तों ये बातें अरविंद केजरीवाल साब ने किसी जमाने में कही थी जब सत्ता नहीं थी।उनकी आम आदमी वाली छवी पर सवाल यह उठता है कि इस प्रकार का डबल स्टैण्डर्ड क्यों?

अंतत: दोस्तों समय ने ऐसी करवट ली कि केजरीवाल साब खांटी राजनेता बन गए।अब तो ऐसा लगने लगा है कि कोई भी बात कह कर मुकरने के वो एक्स्पर्ट हो गए हैं। तभी तो जहां वो दूसरी पार्टीयों पर जनलोकपाल बिल पेश ना करने का आरोप मढ़ते थे और सेलरी पर सर्वसम्मति की बात करते थे,वही जनाब अरविंद केजरीवाल जी ने जनलोकपाल बिल सिर्फ पेश किया जो अभी पास भी नहीं हुआ है, उससे पहले ही मात्र पांच मिनट में ही वेतन बढ़ोतरी का बिल विधानसभा में पास कर दिया।मुख्यमंत्री जी जनता तो पूछेगी ही...क्योंकि असल आम आदमी तो वही है,और आपने जिस मतलब से जनलोकपाल का सहारा लिया था मतलब नेता बनने का...अब वो मसकद तो पूरा हो ही गया ना..।।अब कहना गलत नहीं होगा कि मौज है गुरु नेतागीरी में...।

  


Thursday, 3 December 2015

बटुक भैरव : दिल्ली के कोतवाल


संदीप कुमार मिश्र : साल 2016 के स्वागत को लोग अलग अलग अंद़ाज में मनाते है।कुछ पार्टी में जाकर,कुछ भगवान के दरबार में जाकर तो कुछ घर पर रह कर नये साल का स्वागत करते है।हम आपको आज ऐसे दरबार के बारे में बताते हैं जहां लोग नए साल में श्रद्धा भाव से ओतप्रोत भक्ती भाव में रमें हुए नजर आते हैं जी हां बटुक भैरव जिन्हें दिल्ली का कोतवाल कहा जाता है। दिल्ली के नेहरू पार्क में स्थित बटुक भैरव का मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केन्द्र है।यहां आने वाले भक्त दिल्ली के कोतवाल के दरबार में अर्जी लगाना नहीं भुलते।

यहां बटुकभैरव का विधिवत श्रृंगार किया जाता है,सजाया संवारा जाता है।ये मंदिर हर तरह से खास है।इस दरबार में आया हर श्रद्धालु बाबा के दर पर बड़े ही श्रद्धा भाव से सिर झुकाता है।बटुकभैरव के इस दरबार में हजारों की तादात में हर मंगलवार और रविवार को भक्तों का तांता लगा रहता है।खास अवसरों पर श्रद्धालु यहां इकट्ठा होते हैं और एक साथ बैठकर बटुक भैरव की पूजा अर्चना करते हैं।मंत्रोच्चार के साथ बाबा को भोग लगाया जाता है। भैरव का अर्थ होता है भय का हरण कर जगत का भरण करने वाला।ऐसा भी कहा जाता है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित है।भैरव शिव के गण और पार्वती के अनुचर माने जाते हैं।पुराणों में कहा गया है कि शिव के रूधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई,बाद में उक्त रूधिर के दो भाग हो गए- पहला बटुक भैरव और दूसरा काल भैरव ।भगवान भैरव को असितांग, रुद्र, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहार नाम से भी जाना जाता है।भगवान शिव के पांचवें अवतार भैरव को भैरवनाथ भी कहा जाता है।नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व है।

'बटुकाख्यस्य देवस्य भैरवस्य महात्मन: ।
ब्रह्मा विष्णु, महेशाधैर्वन्दित दयानिधे ।।'

अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेशादि देवों द्वारा वंदित बटुक नाम से प्रसिद्ध इन भैरव देव की उपासना कल्पवृक्ष के समान फलदायी है...बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है...इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं....इस स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी है...यह कार्य में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है...इस आराधना के लिए मंत्र है-

।।ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाचतु य कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।।

भैरव आराधना की आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है... आराधना का दिन रविवार और मंगलवार नियुक्त है... पुराणों के अनुसार भाद्रपद माह को भैरव पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है।आराधना से पूर्व जान लें कि कुत्ते को कभी दुत्कारे नहीं बल्कि उसे भरपेट भोजन कराएं।पवित्र होकर ही सात्विक आराधना करें।इस मंदिर में श्रद्धालू,पूजा हवन में शामिल होकर बड़े ही सादगी से बाबा की पूजा करते हैं।श्रद्धा और विश्वास के प्रतिक बटुकभैरव मंदिर की प्राचीनता और मनोंकामनापूर्ती करनें की मान्यता नें इसे और भी खास बना दिया है।

भैरव तीन अक्षरों का प्यारा नाम
जिसका अर्थ है
"भ " यानि विश्व का भरण करने वाले
"र "यानि विश्व में रमण करनें वाले
और
"व " से वमन अर्थात सृष्टि का पालन पोषण करने वाले ।

बाबा अपनें भक्तों की सभी मनोंकामना पूरी करते हैं,तभी तो इन्हें भैरव बाबा के नाम से जाना जाता है। भैरव को शिव का अवतार माना गया है।इसलिए वे शिव-स्वरूप ही हैं-

भैरव: पूर्णरूपोहि शंकरस्यपरात्मन:।
मूढास्तेवैन जानन्तिमोहिता: शिवमायया ॥

तंत्रशास्त्र में अष्ट भैरव का उल्लेख भी मिलता है जो इस प्रकार है -

1-असितांग भैरव, 2-रूरू भैरव, 3-चंद्र भैरव, 4-क्रोध भैरव, 5-उन्मत भैरव,6- कपाल भैरव,7- भीषण भैरव और 8-संहार भैरव



भैरव आपत्तिविनाशक और मनोकामना पूर्ति के देवता हैं।भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति में भी भैरव उपासना फलदायी होती है।कलयुग में भैरव की लोकप्रियता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि हर गांव के पूर्व में स्थित देवी-मंदिर में स्थापित सात पीडियों के पास आठवीं पिड़ी भैरव-पिंडी भी अवश्य होती है।नगरों के देवी-मंदिरों में भी भैरव विराजमान रहते हैं।देवी प्रसन्न होने पर भैरव को आदेश देकर ही भक्तों की कार्यसिद्धि करा देती हैं।ऐसी प्रचलीत मान्यता हमारे समाज और गांव दिहात में पुरानें जमानें से चली आ रही है।


नई दिल्ली के विनय मार्ग पर नेहरू पार्क में बटुकभैरव का पांडवकालीन मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है।कहते हैं यह सर्वकामना पूरक सर्व आपदानाशक है।यह प्राचीन मूर्ति इस तरह ऊर्जावान है कि भक्तों की यहां हर सम्भव इच्छा पूर्ण होती है।इस मंदिर में बटुक भैरव की मूर्ति की एक विशेषता है कि यह एक कुएं के ऊपर स्थापित है।न जाने कब से, एक क्षिद्र के माध्यम से पूजा-पाठ और भैरव स्नान का सारा जल कुएं में जाता रहा है पर कुंआ अभी तक नहीं भरा।पुराणों के अनुसार भैरव की मिट्टी की मूर्ति बनाकर भी किसी कुएं के पास उसकी पूजा की जाय तो वह बहुत फलदायी होती है।यही कारण है कि कुएं पर स्थापित यह भैरव इतने ऊर्जावान हैं।

भगवान भैरव की साधना वशीकरण, उच्चाटन, सम्मोहन, स्तंभन, आकर्षण और मारण जैसी तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव को नष्ट करने के लिए भैरव साधना की जाती है...इनकी साधना करने से सभी प्रकार की तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव से व्यवसाय, धंधे में आशानुरूप प्रगति नहीं होती,दिया हुआ रूपया नहीं लौटता,रोग या विघ्न बाधाओं से पीड़ा अथवा बेकार की मुकदमेबाजी में धन की बर्बादी हो सकती है।इस प्रकार की शत्रु बाधा निवारण के लिए भैरव साधना फलदायी है।भैरव भगवान शिव के बारहवें अवतार हैं।भैरव की साधना में ध्यान का अधिक महत्व है।इसी को ध्यान में रखकर सात्विक, राजसिक और तामसिक स्वरूपों का ध्यान किया जाता है।ध्यान के बाद इस मंत्र का जप करने का विधान है-

।।ऊं ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।।



ऎसा कहा जाता हैं मुकदमे या कारागार से मुक्ति के लिए भी इस मंत्र की साधना करने से लाभ होता है।भगवान बटुक भैरव के सात्विक स्वरूप का ध्यान करने से आयु में वृद्धि और रोग-व्याधि से भी मुक्ति मिलती है।इनके राजस स्वरूप का ध्यान करने से सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति संभव हो जाती है।इनके तामस स्वरूप का ध्यान करने से शत्रु नाश, सम्मोहन, वशीकरणादि का प्रभाव समाप्त होता है।व्याधि से मुक्ति के लिए और भैरव के तामस स्वरूप की साधना करना हितकर है।
।।कंकाल: कालशमन:कला काष्ठातनु:कवि:।।
।। त्रिनेत्रोबहुनेत्रश्च तथा पिङ्गललोचन:।।
।। शूलपाणि:खड्गपाणि:कंकाली धू्म्रलोचन:।।
।।अभीरुर्भैरवोनाथो भूतयो योगिनी पति:।।

भैरव के इस स्तुति को गाकर भक्त उन्हें खुश करते हैं और अपनी कामनापूर्ती करते है।

 हमारे देश के हर प्रांत में भैरव बाबा की पूजा बड़े ही विधि विधान से की जाती है।हम तो यही कामना करते हैं कि भगवान बटुक भैरव आपकी सभी मनोंकामना पूर्ण करें।


।। संकटमोचन हनुमानाष्टक ।।


मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ।।


बाल समय रबि भक्षि लियो तब,तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सो त्रास भयो जग को,यह संकट काहुँ सो जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब,छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग मे कपि,संकट मोचन नाम तिहारो॥१॥
अर्थ- हे हनुमान जी! आप बालक थे तब आपने सूर्य को अपने मूख मे रख लिया जिससे तीनो लोकों मे अँधेरा हो गया। इससे संसार भर मे विपति छा गई,और उस संकत को कोई भी दूर नही कर सका।देवताओं ने आकर आपकी विनती की और आपने सूर्य को मुक्त कर दिया।इस प्रकार संकट दूर हुआ।हे हनुमान जी,संसार में ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नहीं जानता।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,जात महा प्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,चाहिए कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रुप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकट मोचन नाम तिहारो॥२॥

अर्थ- बालि के डर से सुग्रीव पर्वत पर रहते थे।उन्होनें श्री रामचन्द्र को आते देखा,उन्होनें आपको पता लगा के लिए भेजा।आपने अपना ब्राह्मण का रुप धर कर के श्री रामचन्द्र जी से भेंट की और उनको अपने साथ लिवा लाये,जिससे आपने सुग्रीव के शोक का निवारण किया।हे हनुमान जी,संसार मे ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नहीं जानता।

अंगद के संग लेन गए सिय,खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत न बचिहौ हम सों जु,बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब,लाए सिया सुधि प्रान उबारो।
को नही जानत है,जग मे कपि संकट मोचन नाम तिहारो॥३॥

अर्थ- सुग्रीव ने अंगद के साथ सीता जी की खोज के लिए अपनी सेना को भेजते समय कह दिया था कि यदि सीता जी का पता लगाकर नही लाए तो हम तुम सब को मार डालेंगे।सब ढ़ूँढ़ ढ़ूँढ़कर हार गये।तब आप समुद्र के तट से कूद कर सीता जी का पता लगाकर लाये,जिससे सबके प्राण बचे।हे हनुमान जी!संसार मे ऐेसा कौन है,जो आपका संकट मोचन नाम नही जानता।

रावण त्रास दई सिय को सब,राक्षसि सो कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,जाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सिय अशोक सों आगि सु,दै प्रभु मुद्रिका शोक निवारो।
को नहीं जानत हैं,जग मे कपि संकट मोचन नाम तिहारो॥४॥
अर्थ- जब रावण ने श्री सीता जी को भय दिखाया और कष्ट दिया और सब राक्षसियों से कहा कि सीता जी को मनावें,हे महावीर हनुमान जी,उस समय आपने पहुँच कर महान राक्षसों को मारा।सीता जी ने अशोक वृक्ष से अग्नि माँगी परन्तु आपने उसी वृक्ष पर से श्री रामचन्द्र जी कि अँगूठी डाल दी जिससे सीता जी कि चिन्ता दूर हुई।हे हनुमान जी,संसार मे
ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नही जानता।
बान ल्गयो उर लक्षिमण के तब,प्राण तजे सुत रावन मारो।
लै गृह वैद्य सुषेन समेत,तबै गृह द्रोन सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दई तब,लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहिं जानत हैं जग मे कपि संकट मोचन नाम तिहारो॥५॥

अर्थ- रावन के पुत्र मेघनाद ने बान मारा जो लक्ष्मण जी की छाती पर लगा और उससे उनके प्राण संकट मे पड़ गए।तब आपही सुषेन वैद्य को घर सहित उठा लाए और द्रोणाचल पर्वत सहित संजीवनी बूटी ले आये जिससे लक्ष्मण जी के प्राण बच गये।हे हनुमान जी,संसार मे ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नही जानता।

रावन जुद्ध अजान कियो तब,नाग की फाँस सबै सिर डारो।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल,मोह भयो यह संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जु,बन्धन काटि सुत्रास निवारो।
को नहि जानत है जग मे कपि,संकट मोचन नाम तिहारो॥६॥

अर्थ- रावण ने घोर युद्ध करते हुए सबको नागपाश मे बाँध लिया तब श्री रघुनाथ सहित सारे दल मे यह मोह छा गया की यह तो बहुत भारी संकट है।उस समय,हे हनुमान जी आपने गरुड़ जी को लाकर बँधन को कटवा दिया जिससे संकट दूर हुआ।हे हनुमान जी,संसार मे ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नही जानता।

बधु समेत जबै अहिरावण,लै रघुनाथ पाताल सिधारो।
देविहिं पूजि भली विधि सों बलि,देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब ही,अहिरावन सैन्य समेत संहारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,संकट मोचन नाम तिहारो॥७॥
अर्थ- अब अहिरावन श्री रघुनाथ जी को लक्षमण सहित पाताल को ले गया,और भलिभांति देवि जी की पूजा करके सबके परामर्श से यह निशचय किया कि इन दोनों भाइयों की बलि दूंगा,उसी समय आपने वहाँ पहुंच कर अहिरावन को उसकी सेना समेत मार डाला। हे हनुमान जी,संसार मे ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नहीं जानता॥

काज किए बड़ देवन के तुम,बीर महाप्रभु बेखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,जो तुमसो नहिं जात है टारो।
बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु,जो कछु संकट होय हमारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥
अर्थ- हे महाबीर! आपने बड़े बड़े देवों के कार्य संवारे है।अब आप देखिये और सोचीए कि मुझ दीन हीन का ऐसा कौन सा संकट है जिसको आप दुर नहीं कर सकते। हे महाबीर हनुमान जी,हमारा जो कुछ भी संकट हो आप उसे शीघ्र ही दूर कर दीजीए।हे हनुमान जी,संसार में ऐसा कौन है जो आपका संकट मोचन नाम नहीं जानता।
॥दोहा॥
लाल देह लाली लसे,अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन,जय,जय जय कपि सूर॥

अर्थ- आपका शरीर लाल है,आपकी पूँछ लाल है और आपने लाल सिंदूर धारण कर रखा है,आपके वस्त्र भी लाल है।आपका शरीर बज्र है,और आप दुष्टों का नाश कर देते है।हे हनुमान जी!आपकी जय हो,जय हो,जय हो॥

Tuesday, 1 December 2015

जनलोकपाल बिल या महा-जोकपाल बिल...?


संदीप कुमार मिश्र :  दोस्तों जरा अतीत में चलते हैं और उन दिनो को याद करते हैं,जब देश के हर यूवा की जुबान पर पर वन्दे मातरम और भारत माता की जय का उदघोष देश के कोने कोने में सुनाई पड़ रहा था।जन जन में आसा उम्मीद की लहर दौड़ पड़ी थी,कि अंग्रेजों से आजादी मिले तो छह दशक से भी ज्यादा का वक्त बीत गया लेकिन एक आजादी और चाहिए थी,जिसके लिए जनमानस आज सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठा रहा है।अतीत की वो लड़ाई थी भ्रस्टाचार के खिलाफ,महंगाई के खिलाफ,घूसखोरी के खिलाफ,दलाली के खिलाफ,हक की लड़ाई के लिए,स्वाभिमान पाने के लिए।जी हां दोस्तों ये लड़ाई थी जनलोकपाल के लिए...।

इस लड़ाई का शुभारंभ किया था अन्ना हजारे ने..जो जनलोकपाल की अलख जगाते गए और कारवां आगे बढ़ता गया...आपको याद होगा कि जिस प्रकार 1857 की आजादी का पहला शंखनाद हुआ और मंगल पाण्डे की अगुवाई में देश के अन्य हिस्सों के साथ ही मेरठ छावनी से दिल्ली चलो की आवाज उठी थी...ठीक कुछ ऐसा ही कुछ हुआ जब एक सशक्त जनलोकपाल की मांग को लेकर यूपीए की गलत नीतियो के खिलाफ लोग सड़क पर उतरे र देस की राजधानी दिल्ली आंदोलनकारियों से भर गयी।तमाम विश्लेषकों ने तो यहां तक कह दिया कि अन्ना की अगुवाई में किया जा रहा ये आंदोलन इतिहास में ले जाने को मजबूर करता है,क्योंकि गांधी जी जिस प्रकार अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा का सहारा लेकर आंदोलन करते थे,कुछ ऐसा ही नजारा दिल्ली की सड़कों पर देखने को मिल रहा था।

अब इस आंदोलन में अनेको लोग जुड़े...कुछ नेक नियती से तो कुछ स्वार्थ से,जिसका परिणाम निकला की आंदोलन के समय जनलोकपाल तो नहीं आया लेकिन एक शानदार राजनीतिक पार्टी का उदय अवश्य हो गया।बड़े ही कम समय में पार्टी ही नहीं बनी दिल्ली की सत्ता पर काबीज भी हो गई।उम्मीद ही नहीं जनता को विश्वास भी था कि नई पार्टी जनलोकपाल के मुद्दे को लेकर सत्ता पर काबीज हुई है तो ये जनलोकपाल जरुर आएगा।पार्टी तो आप समझ ही गए होंगे...जी हां आप...यानि आम आदमी पार्टी....अरविंद केजरिवाल की पार्टी...।अब साब मैं इमानदार,मेरी पार्टी इमानदार,मेरे लोग इमानदार का नारा देने वाले अरविंद केजरिवाल की पार्टी से कुछ ऐसे लोग पार्टी से निकल गए जो पार्टी के संस्थापक थे,और जनलोकपाल का वास्तविक रुप रेका तैयार किए थे,निस्चित तौर पर प्रशांत भूषण जी,योगेंद्र यादव,आनंद कुमार जैसे प्रकांड बुद्धीजिवियों के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता।लेकिन आप जानते हैं कि इनके साथ आम आदमी पार्टी में क्या हुआ।

अब जबकि दिल्ली के इतिहास में अरविंद केजरिवाल की पार्टी आप ने इतिहास रच कर प्रचंड जनादेश हासिल किया तो जनलोकपाल विधान सभा में लेकर आई...विपक्ष तो शुन्य ही था लेकिन कभी पार्टी के खास रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जो एक साल पहले तक जनलोकपाल पर सहयोगी की भूमिका में थे वो अब विरोधी हो गए हैं।आप जानते हैं कि पहले ये चेहरे कांग्रेस और बीजेपी का विरोध करते थे लेकिन घर फूटा तो विरोध आपस में ही घर से सड़कों पर आ गया।

दरअसल योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और विधायक पंकज पुष्कर जनलोकपाल एक्ट 2015 का विरोध दिल्ली विधानसभा के बाहर करते हुए कहा कि ये बिल जनलोकपाल नही बल्कि महा-जोकपाल बिल है।स्वराज अभियान के प्रशांत भूषण का कहना है था कि दिसंबर 2013 में केंद्र का लोकपाल आया था, तब अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि इससे मंत्री तो क्या चूहा भी जेल नहीं जाएगा।लेकिन अब केजरीवाल ने जनता के साथ धोखा किया है।इतना ही नहीं प्रशांत भूषण ने तो अरविंद केजरीवाल को खुले मंच पर जनलोकपाल को लेकर बहस की चुनौती भी दी। क्योंकि भूषण का कहना था कि जनलोकपाल बिल का मसौदा विधानसभा में रखे जाने से पहले उसे आप की वेबसाइट पर नहीं डाला गया और ना ही लोगों से सुझाव मांगे गए।

लेकिन दोस्तों अतिउत्साह में आकर आम आदमी पार्टी के समर्थक विधान सभा में ढोल पीटते नजर आए। लेकिन विपक्ष ने जो सवाल उठाए उन पर भी गौर करना लाजमी है,जैसे कि आम आदमी पार्टी जो कानून बनाएगी उसमें पारदर्शीता बरतेगी।जनलोकपाल के ड्राफ्ट को वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला गया।क्यों सीधे विधानसभा में रखा गया ? सवाल उठता है कि क्या जनलोकपाल लोकसेवकों के साथ ही मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों की भी जांच करेगा..?

मतलब साफ है कि जब प्रशांत भूषण ने दिल्ली सरकार के जनलोकपाल विधेयक को महा- जोकपालकहा तो बौखलाई आम आदमी पार्टी (आप) ने शांति भूषण और प्रशांत भूषण को भाजपा में शामिल हो जाने की सलाह दे दी। वहीं आप ने ये दावा किया कि यह विधेयक दिल्ली में आप की सत्ता के पहले दौर यानि 49 दिनों के दौर में पेश किए गए विधेयक के समान ही है।

अंतत: दिल्ली की राजनीति में आप पार्टी का आगमन जनलोकपाल को लेकर ही हुआ था,आम आदमी के हक की लड़ाई के लिए हुआ था,लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी  सत्ता पाते ही आम से खास हो गए।अब तो मोटर,बंगला सब कुछ चाहिए जो किसी जमाने में अछुत हुआ करता था।खैर समय की मांग और जनता की जरुरत है कि जनलोकपाल पूरी इमानदारी से पास हो और वही पास हो जिसकी वजह से आम आदमी पार्टी पैदा हुई।

मोदी-शरीफ मुलाकात : संयोग या कूटनीति...?


संदीप कुमार मिश्र : कहते हैं दिल मिले ना मिले हाथ मिलाते रहिए।दुश्मन से भी मौके बेमौके हाथ मिलाने में भी कोई हर्ज नहीं है। वो इसलिए कि शायद पड़ोसी में भी मानवता जाग जाए और इंसानियत और मानवता के दुश्मनो को समूल नष्ट करने के लिए एक साथ कदम से कदम मिलाकर एक नई मिसाल पेश करें।खैर हम बात मोदी और शरीफ मुलाकात की कर रहे हैं।खासकर इस मुलाकात का पेरिस में होना भी खास महत्वपूर्ण है, क्योंकि पेरिस अभी-अभी आतंकवाद का शिकार हुआ है।जबकि इससे पहले मोदी साब और जनाब शरीफ की मुलाकात जुलाई में ऊफा में हुई थी, फिर न्यूर्याक में दोनों ने केवल हाथ हिलाकर ही एक-दूसरे का अभिवादन किया था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल सही है कि क्या इससे भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जमी हुई बर्फ पिघलेगी ?
अब साब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब विदेश दौरे पर हैं तो इसकी हर दृष्टीकोण से पड़ताल भी जारी है। होनी भी चाहिए जो कि स्वाभाविक है। पेरिस दौरे में मोदी से नवाज शरीफ की मुलाकात कितना अहम है, इस पर एक गंभीर परख की जरूरत है।मोदी शरीफ मुलाकात बेहद छोटी रही लेकिन इसके मायने विस्व के सभी अकबारों की सुर्खीयां बनी,पहल अच्छी थी,बात होनी भी चाहिए,यहां तक की यूएन प्रमुख बान की मून ने भी मोदी की तारीफ की और पाकिस्तानी मीडिया ने इस खबर को कास तवज्जो दी..।
लेकिन यक्ष प्रश्न अब भी वही है कि नवाज शरीफ की मुस्कान का क्या मतलब निकाला जाए..? क्योंकि पेरिस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नवाज शरीफ की गर्मजोशी से हुई मुलाकात के अर्थ तो निकाले ही जाएंगे। दरअसल न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनो नेता एक ही होटल में ठहरने के बावजूद अनौपचारिक रुप से भी नहीं मिले थे ।वहीं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दूर से ही हाथ हिलाकर एक दूसरे का अभिवादन किया था।इस मुलाकात में नवाज की शराफत पर इसलिए भी यकीन करना संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि जब उफा में तय पांच सूत्रीय समझौते के तहत दोनों देशों के बीच NSA स्तर की बातचीत होनी सुनिश्चित हुई । लेकिन पाकिस्तानी NSA  ने तीसरे पक्ष यानि हुर्रियत को भी इस वार्ता में शामिल करने की पेशकश कर सिर्फ आतंकवाद पर बात करने से इनकार कर दिया और आतंकवाद पर बातचीत पाकिस्तान की तरफ से नकार दी गई।
लेकिन पेरिस में अचानक और अकेले में हुई छोटी मुलाकात से दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक नया संदेश देने की कोशिश तो जरुर ही की है।इस मुलाकात के मायनो को थोड़ा आगे बढ़कर भविष्य की तरफ लेकर चलते हैं जब 2016 यानि अगले साल पाकिस्तान में सार्क समिट होने हैं,और इस समिट में स्वाभाविक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की शिरकत पर सबकी निगाहें होंगी। कहीं ना कहीं दोनो देश ये चाहते भी होंगे कि पाकिस्तान में होने वाली मुलाकात से पहले दोनों देश आपसी भरोसा बहाली की दिशा में कुछ कदम आगे बढ़ाएं।क्योंकि अगर इसी तरह सीमा पर लगातार सीज़ फायर का उल्लंघन और आतंकी वारदातों पर लगाम नहीं लगी तो पिश्तों में फैली कड़वाहट कम होने की बजाय बढ़ सकती है।
आप को याद हो तो इस मुलाकात से चंद दिनों पहले ही नवाज शरीफ ने कहा था कि शांति और बेहतर रिश्ते के लिए पाकिस्तान...भारत के साथ बिना शर्त बातचीत करने के लिए तैयार हैं।कहना गलत नहीं होता कि प्रधानमंत्री मोदी, पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।जिसकी सराहना होनी ही चाहिए।लेकिन लोकतंत्र में विरोध भी होते हैं और होने भी चाहिए,हमारे देश में कोई उचीत कदम बता रहा है तो कोई आलोचना कर रहा है।अब साब तर्क और कुतर्क की चर्चा नहीं करुंगा,लेकिन हां प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से इस शानदार पहल पर कुतर्क करने वालों को वास्तविकता की जानकारी तो होनी ही चाहिए।ये भी समझना होगा कि हमारे देश भारत के लिए संबंधों की कड़वाहत को कम करने से क्या फायदा और नुकसान है,क्या लभ और हानि है।जल्दबाजी में किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया करना शायद थोड़ी जल्दबाजी होगी।जरा कल्पना किजिए कितना बेहतर होगा कि जो कार्य पिछले साठ सालों में नहीं हुआ वो नरेंद्र मोदी ने कर दिखाया,क्या आप और हम दोनो देशों के बेहतर रिश्ते बनाने  में मोदी की बड़ी भूमिका को नकारा पाएंगे...?
इतिहास साक्षी है कि हमारा पड़ोसी किसी भी सूरत में भरोसे लायक नहीं है लेकिन नरेंद्र मोदी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि चाहे हालात कैसे भी हो पड़ोसी तो वही रहता है उसे कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता।चाहे जैसे भी हो संबंदों को बेहतर बनाने के प्रयास तो जारी रहने ही चाहिए क्योंकि यही भारतीय संस्कृति और धर्म है।

अंतत: निश्चिततौर पर हमें धैर्य रखना होगा क्योंकि नरेन्द्र मोदी की इस प्रकार की  कूटनीतियों से भारत के पुराने हो चुके सिद्धांतों को भी शक्ति मिलेगी। विश्व पटल पर भारत पश्चिम के मुकाबले पूरब को खड़ा करने में बड़ी कामयाबी मिलेगी।खैर इंतजार करना होगा और देखना होगा कि इस मुलाकात के क्या परिणाम निकलते हैं और क्या अर्थ लगाए जाते हैं...।।


वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...