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Wednesday, 17 April 2019

सियासत, समीकरण और सम्मान



संदीप कुमार मिश्र- लोकतंत्र में चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होता है। सम्मानित जनतंत्र अपना प्रधान सेवक अपने मत के द्वारा चुनती है जिससे कि लोकतंत्र मजबूत हो,उसका और देश का सम्मान बना रहे। 
लेकिन सियासत में पार्टीयां समीकरण के आधार पर चुनाव लड़ती हैं मसलन किस लोकसभा / विधान सभा में किस बिरादरी का कितना प्रतिशत प्रभाव है,किसे प्रत्याशी बनाने से फलां वर्ग का वोट मिलेगा,किसका कितना रसूख है. .जैसे तमाम बातों पर गौर करके... !
सियासत का ये समीकरण जीत के लिहाज से ठीक भी है क्योंकि हारने के लिए कोई लड़ता तो है नहीं..जनता जनार्दन भी अपने हिसाब से बढ़चढ़ कर वोट की चोट करती है।खासकर जातीय बाहुल्यता के आधार पर(आज के राजनीति के हिसाब से तो 100% कह ही सकते हैं) हिन्दीभाषी राज्यों में विशेषकर...
मुद्दे चाहे कैसे भी हों मसलन, -रोज़गार,शिक्षा,स्वास्थ्य, सड़क,बिजली,पानी,राष्ट्र,सुरक्षा...कुछ भी हो, ये सब कुछ उस वक्त लुप्तप्राय हो जाते हैं जब बात जातिवाद और समीकरण की हो जाती है। 
ऐसे में आंकड़ों के इस गणित में मानवीयता, सम्मान, भावनाओं की अहमियत खत्म सी प्रतीत होने लगती है...शायद यही वजह है कि स्थानीय के स्थान पर बाहरी प्रत्याशी का चलन अब ज्यादा बढ़ चला है। खासकर प्रत्याशी में थोड़ी चमक दमक हो तो और भी। 
समीकरण बैठाते-बैठाते पार्टियों के मुखिया ये भूल कर बैठते हैं कि जो कार्यकर्ता अपना जीवन सेवा और समर्पित कार्यकर्ता के रुप में बिता चुका है उसके सम्मान को कितनी ठेस पहुंचती होगी..यही भावना जब प्रबल हो जाती है तो हार होते देर नहीं लगती...क्योंकि बात जब सम्मान की हो तो समझौता कम ही हो पाता है...। 
फूट डालकर राज करने की परंपरा आज भी जारी है थोड़ा कम या ज़्यादा हो सकता है लेकिन सियासत में इस परंपरा के पुरोधा आज भी विद्यमान हैं। किसी दल का नाम लेना ठीक नहीं है लेकिन इस देश की सम्मानित जनता सब जानती है कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है.. ! 
21वीं सदी का भारत विश्व में अपनी सशक्त पहचान बनाये, अपना सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करे इसके लिए  जरुरी है कि बुनियाद मजबूत हो, और वो बुनियाद है सवा सौ करोड़ भारतीयों का सशक्त होना। ये तभी संभव हो पाएगा जब समीकरण से उपर उठाकर हमारे राजनेता विचार करना प्रारंभ करेंगे। 
यकीनन ऐसा संभव है लेकिन तब, जब नेता का सरोकार जनहित से,जनहित के लिए हो...नेता पांच साल में एक बार अपने लोकसभा/ विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ वोट मांगने ना जाकर बार-बार जाएं,हर बार जाए..क्योंकि लोकतंत्र तब तक मजबूत नहीं हो सकता जब तक उसका जनतंत्र मजबूत ना हो और जनतंत्र तभी मजबूत होगा जब लोकतंत्र के रक्षक(नेता)जन के मध्य रहेंगे,उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करेंगे।ना कि अपने फार्म हाउस बनाने,स्विस बैंक में धन जमा करने,कोठी अटारी और बैंक बैलेंस के लिए काम करें,....
अंतत: लोकतंत्र के इस महाउत्सव में आप सभी भागीदार बने,बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें,अपने लिए मजबूत सरकार का चयन करें,ना कि मजबूर सरकार का....एक संविधान,एक प्रधान,एक विधान का चयन करें और हम सब भारतीय हैं.... कह कर स्वयं पर गर्व करें...।
!!भारत माता की जय!!
!!प्रणाम!!
संदीप कुमार मिश्र-

Wednesday, 10 April 2019

ये लोकतंत्र किसका है...?चलो वोट करें...!


संदीप कुमार मिश्र- जिस लोकतंत्र में हम जी रहे हैं...उस पर विचार करें तो ये सोचना स्वाभाविक सा है कि हमारा लोकतंत्र लोक-सुख का लोकतंत्र है...या लोक-दुख का...।हम जो स्वतंत्रता भोग रहे हैं...वह नैतिक स्वतंत्रता है...या अराजक...!
लोकतंत्र में कहते हैं कि बैलेट, बुलेट से ज्यादा ताकतवर होता है...लेकिन कई लोकतांत्रिक देशों में बुलेट ही ज्यादा ताकतवर रहा है जैसे हमारे पड़ोसी मुल्क में...
खैर भारत भी उसका अपवाद नहीं रहा है...ये सच है कि लोकतंत्र में मत या मतदाता नहीं...संख्या जीतती है...ये सही है कि लोकतंत्र अपने आदर्श रूप में जनता...और सत्ता के बीच संवाद की स्थापना करता है...लेकिन सही मायने में ये तभी संभव है जब सत्ता में बैठे लोग... लोकतांत्रिक मर्यादा में रहते हुए जनता जनार्दन से बेहतर संवाद स्थापित करें...
अब सवाल ये उठता है कि ...क्या लोकतंत्र जन और सत्ता के बीच संवाद है...स्वभाविक उत्तर होगा हां...क्योंकि संसद और विधानसभाओं में यह संवाद जनता की तरफ से जन-प्रतिनिधि करते हैं...अब प्रश्न है कि...यह संवाद जनता के हित...लाभ या सुख से जुड़ा है...या जनता के कष्ट और दुख से...?
तंत्र कोई भी हो...विडंबना ये है कि सत्ता सर्वप्रथम अपना ही सुख सुरक्षित रखती है...। सत्तासीन लोगों को न गैस का संकट...न उसकी कीमत बढ़ने-घटने का डर...उनके लिए न आधार कार्ड के लिए कतार में खड़े होकर कार्ड बनवाने का संकट...न राशन कार्ड...मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, आईडी कार्ड, पासपोर्ट बनवाने  का संकट...लोकतंत्र का लोक...चाहे युवा हो या वरिष्ठ नागरिक...उस पर व्यवस्था की कोई दया नहीं...संवेदना नहीं...बदलाव के इस दौर में आज भी एक वृद्ध स्त्री या पुरुष अपनी वरिष्ठता का झुर्रीदार चेहरा लिए याचक की तरह खड़े नजर आ जाएंगे...रेलवे की टिकट खिड़कियों पर...आधार कार्ड की लाइन में...बैंक में पेंशन काउंटर पर या आयकर के दफ्तरों के सामने...जिन लोगों के साथ रात-दिन काम करके एक सामान्य लोकसेवक रिटायर होता है...उसके साथी उसकी पेंशन और भविष्यनिधि से हिस्सा मांगते हैं...इन भ्रष्टाचार की ही देन है पूर्व में हुए अनेकानेक घोटाले...कहना गलत नहीं होगा कि आम नागरिक छोटे-छोटे भ्रष्टाचारों से त्रस्त है...तो खास आदमी बड़े-बड़े भ्रष्टाचारों से भी मुक्त हैं...।
दरअसल हमने शायद आचरण की पवित्रता के बजाय कदाचरण की कालिमा का लोकतंत्र बना रखा है...हमने अपने धनतंत्र से जनतंत्र को बंदी बना रखा है...कानून तो गरीबों के दलन या दमन के लिए है...अमीर तो कानून पर भी राज करते हैं...और सात समंदर पार जाकर मौज करते हैं...
आज़ादी के सात दशक बाद भी भारत जैसे विशाल देश में मकड़ी के जाले की तरह तने कानूनों में उलझता कौन आ रहा है...? केवल गरीब...समाज का दबा कुचला शोषित वंचित जन सामान्य...!
क्योंकि सवाल ये है कि ...जिस लोकतंत्र में हम जी रहे हैं...उसकी संसद यानी व्यवस्थापिका-विधायिका क्या हमारे सुख की रचना की व्यवस्था या विधान बनाती है...? कहा तो जाता है कि...कानून सत्ता और जनता के बीच एक प्रकार का अनुबंध है...लेकिन क्या सत्ता इस अनुबंध का पालन करती है...सत्ता में बैठने वाले चाहे बैलेट से जाएं या बुलेट से...वे तो अपने को जन...जनतंत्र और विधान- संविधान सबसे ऊपर ही मानते रहे हैं...
पुलिस का एक सिपाही या पटवारी रिश्वत लेते जिस तत्परता से पकड़ा जाता है...वैसी तत्परता से क्या कोई नेता...नौकरशाह या सत्ताधारी कभी पकड़ा गया...
यही वजह है कि हाल के वर्षों में लोकतंत्र के इस दुखद पहलू को युवाशक्ति ने समझा है...युवा जब सड़क से संसद तक और जनपथ से राजपथ तक पहुंचा तो...सरकारों को लगने लगा कि...एक ऐसी जनशक्ति का उदय होने लगा है...जो बूढ़े गिद्धों,वंशवादीयों को लोकतंत्र का मांस नोंचने नहीं देगी...
लोकतंत्र में विवाद...संवाद जैसे शब्द कुछ पढ़े-लिखे शब्दखोरों के लिए हैं...क्योंकि किसान बहस नहीं करता...सिर्फ काम करता है...मजदूर बहस करता भी है तो...काम के पैसों की...मगर काम पैसों से ज्यादा करता है...सांसद, विधायक, दफ्तरों में बैठे नौकरशाह बहस ही करते हैं...मीटिंग, सेमिनार, इन सबसे फुर्सत ही नहीं... इसलिए वे सिर्फ बहस करते हैं...काम नहीं...बहस उनका सुख है...जनता का दुख...नियम-कानून बनाना उनका सुख है...जनता का दुख...यह कैसा लोक- कल्याणकारी गणतंत्र है...जहां सत्ता के गणपति तो लंबोदर हो रहे हैं...और जनता चूहों की तरह अनाज के सड़े दानों के लिए भी मोहताज है...?
*अगर हमारे सात दशक से अधिक बड़े गणतंत्र में आज भी आम आदमी मजबूर है तो...यह मजबूरी किसने पैदा की...
*हमने देखा है अमीरों के लिए तो विश्व बैंक के कर्ज-कपाट खुले हैं...लेकिन कर्ज का धन जन के फर्ज पर कितना लगाया जा रहा है...
आज सत्ता के सिंहासन पर बैठना चुनौती भरा अवश्य है....विकास का मंत्र भी आकर्षक है...लेकिन सबसे बड़ा विकास तभी संभव है...जब जनता खुश रहे...सुखी रहे और लगे कि यह जनता के सुख का लोकतंत्र है...।
बहरहाल आज़ादी के सात दशक से अधिक बड़े गणतंत्र में *आज भी देश का आम आदमी मजबूर है तो सवाल ये है कि...यह मजबूरी किसने पैदा की...?
*अमीरों के लिए बैंक के दरवाजे खोल कर रखे गए जिससे वो आम आदमी की गाढ़ी कमाई लेकर भाग सके तो ये हालात किसने पैदा किए...?
*21वीं सदी के भारत में आज भी घोषणा पत्र में गरीबी दूर करने की बात हो रही है तो कमी कहां रह गयी. .? *बेरोजगारी सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है तो जिम्मेदार कौन है. .?
*आज भी भ्रष्टाचार पर लगाम क्यों नहीं लग पा रहा है,जिम्मेदारी किसकी है. ..?
*देश के अन्नदाता की हालत जस की तस बनी हुई है. कैसे सुधरेंगे उनके हालात. .?
*विश्वबैंक या फिर टैक्स के धन का जन के फर्ज पर कितना लगाया जा रहा है...?
आईए लोकतंत्र को शक्ति प्रदान करने के लिए सही नेतृत्व का चुनाव करें, और एक मजबूत सरकार के लिए वोट करें ना कि मजबूर सरकार के लिए..।क्योंकि भारत सशक्त होगा तो हम भी समृद्ध होंगे...जय हिन्द

Wednesday, 13 March 2019

होली 2019: जानिए कब है होली,क्या है होलिका दहन का शुभ मूहूर्त



संदीप कुमार मिश्र: रंगो का त्योहार होली...सनातन धर्म प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है होली।विशेष तौर पर इस पावन दिन पर रंगो के साथ विशेष पकवान बनाए जाते हैं,हर घर में होली की तैयारीयां पहले से ही शुरु हो जाती है । घरों और बाजारों की रौनक देखते ही बनती है। सभी प्रकार गले शिकवे दूर करके एक दूसरे को रंग लगाते हैं लोग होली पर इतना ही नही होली से एक दिन पहले होलिका की पवित्र आग में जनसामान्य जौ की बाल और शरीर पर लगाए गए सरसों के उबटन को डालते हैं।कहते हैं कि ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है।

दरअसल होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आईए जानते हैं इस बार होली कब मनाई जाएगी और क्या है शुभ मूहर्त-

साल 2019 होलिका दहन 20 मार्च को होगा और 21 मार्च को देश भर में होली मनाई जाएगी। अक्सर होलिका दहन के समय को लेकर उहापोह की स्थिति बनी रहती है ऐसे में आपको बता दें कि इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 20:57 से 00:28 मिनट तक है।

होलिका दहन के पीछे की पौराणिक कथा को हम सब जानते हैं। आपको बता दें कि होली का त्योहार फाल्गुन माह में होलिका दहन से शुरू होता है। जबकि ब्रज धाम में होली महिनो पहले शुरु हो जाती है।

रंगो के इस पवित्र त्योहार होली में आपके जीवन में शांती और खुशहाली आए,हम यही कामना करते हैं।

जानिए कब से लग रहा होलाष्टक, क्यों नहीं होते हैं होलाष्टक में शुभ कार्य,कब से शुरु होंगे शुभ कार्य



संदीप कुमार मिश्र: आज बिरज में होरी रे रसिया...प्रेम और सौहार्द का त्योहार होली...होली को लेकर तमाम सवाल आपके मन में होंगे..चलिए आपको बताते हैं कि हमारे पंचांग और ज्योतिष क्या कहते हैं-
दरअसल ज्योतिष शास्त्र का कहना है कि होली से पहले गुरुवार से ही किसी भी सुभ कार्य पर विराम लग जाता है।आपको बता दें कि 14 मार्च से होलाष्टक लग रहा है।आपको बताते चले कि होलाष्टक होलिका दहन के दिन तक ही रहेगा लेकिन बाद में भी भद्रा लग जाने के कारण किसी भी शुभ कार्य को नहीं करने की सलाह दी गई है।
इस लिहाज से देखें तो चैत्र कृष्ण पक्ष के नवरात्र से ही किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत होगी । नवरात्र से ही शुभ मुहूर्त शुरु होंगे और नव वर्ष चैत्र मास की शुरुआत के साथ 6 अप्रैल इसकी शुरुआत हो जाएगी।हम सब जानते हैं कि नवरात्र में मां दुर् के नौ रुपों की आराधना की जाती है।
कहते हैं कि होलाष्टक में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य फलदायी नहीं होते हैं।शुभ विवाह के मुहूर्त भी 15 अप्रैल से होंगे। 
इस वर्ष 14 मार्च से 20 मार्च तक होलाष्टक का स्पस्ट प्रभाव रहेगा।जिसमें किसी भी प्रकार का मंगल पूजन नहीं किया जाता है। वहीं होलाष्टक खत्म होने के बाद भी भद्रा होने के कारण आगे भी नवरात्र से पहले कोई शुभ कार्य नहीं होंगे।

Friday, 8 March 2019

आतंकिस्तान पर एयर स्ट्राइक का आम चुनाव पर असर !क्या फिर 2019 में मोदी सरकार !!!



संदीप कुमार मिश्र : देश का माहौल एक तरफ अपने वीर जवानो को खोकर गमजदा भी है तो दूसरी तरफ आतंक के माई बाप पाकिस्तान पर धमाकेदार एयर स्ट्राइक कर गर्व भी कर रहा है।130 करोड़ भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा भी हो रहा है।ये तो भारत की सैन्य ताकत है, वहीं कुटनीतिक लिहाज से देखें तो भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की 50 घंटे में ही पाकिस्तान से सकुशल घर वापसी राजनैतिक इच्छाशक्ति और ताकत भी दिखाता है।

ऐसे में सभी सियासी पार्टियां कमर कसकर चुनावी रैलियां करने में जुट गए हैं।साथ ही आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरु हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तो अपनी चुनावी रैलियों में जिस तरह से राष्ट्रवाद के नारे लगवा रहे हैं उससे साफ हो गया है कि वर्तमान की मोदी सरकार 2019 के चुनावी समर में राष्ट्रवाद के मुद्दे के साथ ही उतरेगी।

अब देश के मिजाज की बात करें तो जनता जनार्दन को लगने लगा है कि देश की रक्षा मोदी सरकार में ही संभव है जिस वजह से कांग्रेस फिलहाल बैक फुट पर नजर आ रही है क्योंकि जिस प्रकार से कांग्रेसी नेताओं के बयान आ रहे हैं उनके द्वारा लगातार एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाए जा रहे हैं उससे बीजेपी का लाभ होता ही नजर आ रहा है।लेकिन फिर भी कांग्रेस को लग रहा है कि कुछ दिनों बाद जब सीमा पर तनाव कम हो जाएगा फिर मोदी सरकार को किसान,रोजगार जैसे अन्य मुद्दों पर घेर लिया जाएगा।

अब छोटे दलों की बात करें तो उन्हें गठबंधन और महागठबंधन पर भरोसा है लेकिन बीजेपी के थिंक टैंकों को अच्छी तरह से इस बात का विश्वास है कि इस बार राष्ट्रवाद देशभक्ति के मुद्दे...जातिवाद पर हावी होकर 2019 में एक बार फिर केंद्र की सत्ता पर मोदी सरकार की वापसी करवाएंगे। कमोबेश इस बात की तस्दीक सभी मीडिया चैनल्स और समाचार पत्र भी कर रहे हैं।

दरअसल कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले का जिस प्रकार से हमारी भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर हमला किया, उसके बाद से देश में चुनावी मौसम पूरी तरह से बदल गया है।आज देश भर की एक ही आवाज है पाकिस्तान को करारा जवाब दो। देशवासीयों का यकीन है कि मोदी सरकार ही पाकिस्तान को घुटने पर ला सकती है और झुका सकती है,लोगों को लगने लगा है कि मोदी सरकार ने सेना को जिस प्रकार से खुली छूट दी और सार्थक कुटनीतिक प्रयासों से पाकिस्तान को  दबा दिया है,उसे टमाटर खाने से महरुम करने के साथ ही  उसका दाना पानी तक बंद कर दिया है।इस वजह से पाकिस्तान आगे से भारत में आतंकवादी भेजने से पहले हजार बार सोचेगा।लेकिन कौन कहे कि पाकिस्तान है कुत्ते की पूंछ....खैर,

2019 के चुनावी समर की बात करें तो मोदी सरकार किसानों के खाते में छह हजार रुपये सालाना भेजना और सामान्य वर्ग को दस फीसद आरक्षण देने के साथ मुद्रा, उज्जवला, सौभाग्य, आवास योजना जैसी तमाम अन्य योजनाओं के साथ उतरने वाली थी।मोदी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष भी पूरी तैयारी में था।क्योंकि किसानो के मुद्दे,रोजगार,राफेल और राम मंदिर जैसे तमाम मुद्दों पर बीजेपी बैकफुट पर आ गयी थी।कहा जाने लगा था कि यदि बहुमत नहीं आता है तो मोदी की जगह गडकरी को प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है।इस प्रकार की चर्चा सियासी गलियारों में शुरु हो गई थी।
लेकिन 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद सभी समीकरण बदल गए। पुलवामा में आतंकी हमले को लेकर जिस प्रकार से मोदी सरकार ने कड़ा एक्शन लिया उससे सरकार के प्रति जनता में संतोष भी देखने को मिला और  विपक्ष के माथे पर बल भी। यही वजह है कि विपक्ष लगातार अपनी रणनीति बदलता नजर आ रहा है।

अंतत: इसमें कोई शक नहीं है कि बीजेपी के खेमें में येदियुरप्पा और जूता मार जैसे नेताओं के कड़वे बोल,आचरण बंद रहे तो विपक्ष के वी.के.हरिप्रसाद,सिद्दू,कपिल सिब्बल,और दिग्विजय सिंह जैसे दुर्घटना वाले नेता कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे 2019 में मोदी सरकार बनवाने में.....!!!

Wednesday, 23 January 2019

हम सब भारतीय अस्मिता के रक्षक-महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि

संदीप कुमार मिश्र - तीर्थराज प्रयागराज में कुंभ के पावन अवसर पर संतों और भक्तों का महासंगम हो रहा है। एक तरफ जहां आस्था की डुबकी लग रही है तो वहीं विचारों की त्रिवेणी भी बह रही है। हर तरफ संत भगवंत हरिनाम संकीर्तन भी कर रहे हैं। आस्था के इस महापर्व की हर बात निराली है।

इतिहास गवाह है कि जब जब देश की अस्मिता,और अखंडता की बात सीने आयी तो संतो ने शास्त्र छोड़कर शस्त्र भी धारण किए और भारत के स्वाभिमान की रक्षा की।
कुंभ में पधारे महायोगी पायलट बाबा के परम शिष्य महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि जी महाराज ने सहज भाव से देशभक्ति की सिर्फ अपनी ही भावनाओं को व्यक्त नहीं किया वरन समस्त महामंडलेश्वर गण की भावनाओ को व्यक्त करते हुए कहा कि-
हम सब भारतीय अस्मिता के रक्षक-महामंडलेश्वर गण 
प्रयागराज
हमारी मातृभूमि हमारे लिये पहले है तत्पश्चात समस्त क्रियाविधि।यदि हम मंत्र ध्यान में हो उस समय भारत की सीमा रक्षा में डटे सैनिको को हमारी जरुरत होगी तो हम सन्त भी युद्ध के सदैव सज्ज रहेंगे ।
महायोगी पायलट बाबा के शिष्य महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंदगिरि महाराज ने कहा कि सनातन धर्म व भारत वर्ष पर्याय है विश्व शान्ती का।किन्तु राष्ट्र के खिलाफ किसी भी राजनैतिक,समाजिक ,आर्थिक व विशेषकर सामरिक चेष्ठा का सामना करने के लिए सन्त मानस भी तैय्यार है।इसकी प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति के लिए  महायोगी पायलट बाबा के निर्देश पर वे  महामंडलेश्वर चेतना गिरि माता,महामंडलेश्वर योगमाता श्रद्धा गिरि, महामंडलेश्वर आनन्द लीला,महामंडलेश्वर संजय गिरि,महंत प्रेनानंद,व अनेकानेक अखाडा साधू व भक्त 24जनवरी को प्रयागराज के pvr सिनेमा में हाल ही में सर्जिकल आक्रमण पर आधारित देश भक्ति की फिल्म उसी अटैक देखने जायेंगे।

उल्लेखनीय है कि महायोगी पायलट बाबा जी स्वयं भारतीय वायू सेना के फाइटर पायलट रह कर तीन-तीन युद्ध लड़ चुके है व अन्तिम युद्ध क दौरान ही ईश्वरीय अनुभव के चलते साधू बन गये थे ।

फिल्म यूरि के अभिनेता मोहित रैना भी महायोगी के करीबी है।साथ ही सनातन धर्म के महादेव की भुमिका मे टीवी शृँखला देवो के देव महादेव मे करोडो लोगो को प्रशंसक बना चुके है।आम जनता सीमा के तनाव व गतिविधियो के बारे मे कम जान पाती है किन्तु मोहित के किरदार ने पुन: दर्शको को देशभक्ति के जज्बातो से रुबरु करवाया है।इस प्रतीकात्मक सिने यात्रा व दर्शन से सन्त गण राष्ट्रीय भक्ति को भी पुरजोर अभिव्यक्त करेंगे।
समस्त सन्तो ने नागरिको को इस प्रकार के सैनिको को प्रोत्साहित करने का आव्हान किया है।
सादर 
स्वामी शैलेशानंद गिरि
महामंदलेश्वर श्री पंचदशनाम जूना अखाडा 
परम शिष्य महायोगी पायलट बाबा

Friday, 4 January 2019

वार्षिक राशिफल 2019 मीन राशि



मीन राशि विशेष: जनवरी और मई के महीने में मीन राशिवालों की लव लाइफ में थोड़ी दिक्कत रहेगी। 15 अप्रैल  के बाद यही प्रेम प्रसंग विवाह में बदल सकता है।
मीन राशि का स्वामी गुरु है।मीन राशि के जातक विद्वान होते हैं। गुरु विद्या तथा आत्मबल प्रदान करता है। इस राशि के लोग प्रशासन की उच्च सेवा में होते हैं। इस राशि के लोग शिक्षा में बहुत बड़े पदों को सुशोभित करते हैं। पॉलिटिक्स और पॉलिटिक्स  की ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं। इसके अलावा ये बहुत अच्छे डाक्टर और वकील होते हैं। कर्क, सिंह,मेष तथा वृश्चिक  राशियां इसकी मित्र राशियां हैं।इस राशि का शुभ रत्न पुखराज है।
मीन राशि वार्षिक स्वास्थ्य फल
इस साल आपको स्वास्थ्य सुख मिलेगा। आंख और सांस संबंधी रोगी सहित हृदय के रोगी सावधानी बरतें। 15 मार्च से मई तक का समय बहुत बेहतर नहीं है ।
मीन राशि वार्षिक करियर फल
राजनीति, शिक्षा और प्रशासन से सम्बद्ध लोगों के लिए यह साल अच्छा होगा।नौकरी में उन्नति होगी। 15 मई  के बाद का समय बहुत बेहतर है। अगस्त से नवंबर तक नौकरी परिवर्तन या प्रमोशन के अवसर प्राप्त होंगे।
मीन राशि वार्षिक लव लाइफ तथा दाम्पत्य जीवन फल
जनवरी और मई के महीने में लव लाइफ में थोड़ी परेशानी रहेगी। दाम्पत्य जीवन में 15 मार्च तक थोड़ा तनाव रहेगा फिर सब ठीक हो जाएगा। फिर भी लव लाइफ अपनी सफलता तक इस वर्ष पहुंचेगी।
मीन राशि वार्षिक आर्थिक स्थिति फल
आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष बहुत अच्छा रहेगा। यह वर्ष बहुत आर्थिक लाभ देगा। पूरे साल आपकी आर्थिक स्थिति बहुत ही शानदार रहेगी। इस वर्ष अचल संपत्ति क्रय करने का संयोग बनेगा।
शुभ समय-15 अप्रैल  से सितंबर तक का समय शानदार है। मई से जून तथा फिर नवंबर और दिसंबर का समय आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहेगा। उपाय-भगवान विष्णु जी को प्रसन्न करें ।श्री विष्णु जी की कृपा प्राप्त करें।प्रत्येक गुरुवार को  विष्णुसहस्त्रनाम  का पाठ करें।प्रतिदिन श्री रामचरितमानस  का पाठ करें।प्रत्येक गुरुवार को चने की दाल का दान करें तथा गाय को केला खिलाएं।

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...