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Monday, 22 January 2018

बसंत पंचमी पर करें माता सरस्वती की पूजा: कटु वाणी से मिलेगी मुक्ति,पढ़ाई में सफलता


संदीप कुमार मिश्र: सोमवार  दि॰ 22.01.18 को माघ शुक्ल पंचमी पर गुप्त नवरात्र के अंतर्गत वसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा का विधान है। इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन मानते हैं जिसमें विष्णु व कामदेव का पूजन किया जाता है। पौराणिक मतानुसार ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़क कर चतुर्भुजी सुंदर स्त्री को प्रकट किया था, जिसके हाथ में वीणा, वर मुद्रा, पुस्तक व माला थी। जिनकी वीणा के मधुरनाद से संसार के समस्त जीवों को वाणी प्राप्त हुई। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, शारदा, वीणावादनी व वाग्देवी के नामों से पूजा जाता है। ये विद्या व बुद्धि प्रदाता हैं। विष्णु-धर्मोत्तर पुराण में वाग्देवी को आभूषणों से युक्त चतुर्भुजी कहा है। स्कंद पुराण में सरस्वती जटा-जुटयुक्त, अर्धचन्द्र मस्तक पर धारण किए, कमलासन पर सुशोभित, नील ग्रीवा वाली त्रीनेत्री हैं। सरस्वती ने अपने चातुर्य से देवों को राक्षसराज कुंभकर्ण से बचाया था। संगीत की देवी सरस्वती का जन्मोत्सव वसंत पंचमी पर मनाया जाता है। वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती के विशेष पूजन से कटु वाणी से मुक्ति मिलती है, अध्ययन में सफलता मिलती है व असाध्य कार्य पूरे होते हैं।

विशेष पूजन: घर की उत्तर दिशा में पीला वस्त्र बिछाकर सरस्वती का चित्र स्थापित पर उसका विधिवत पूजन करें। हल्दी मिले गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, पीले कनेर के फूल चढ़ाएं, पीत चंदन से तिलक करें, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें। इसके बाद भोग किसी गरीब को बांट दें।

विशेष मंत्र: ऐं सरस्वत्यै नमः॥
विशेष मुहूर्त: प्रातः 10:00 से प्रातः 11:00 तक।

आज का शुभाशुभ
आज का अभिजीत मुहूर्त: दिन 12:11 से दिन 12:53 तक।
आज का अमृत काल: प्रातः 03:08 से प्रातः 04:48 तक।
आज का राहु काल: प्रातः 08:36 से प्रातः 09:55 तक।
आज का गुलिक काल: दिन 13:51 से दिन 15:10 तक।
आज का यमगंड काल: प्रातः 11:14 से दिन 12:32 तक।

यात्रा मुहूर्त: आज दिशाशूल पूर्व व राहुकाल वास वायव्य में है। अतः पूर्व व वायव्य दिशा की यात्रा टालें।
आज का गुडलक कलर: सफ़ेद।
विशेष मंत्र: ॐ ऐन्द्रायै नमः॥
आज का शुभ समय : शाम 19:30 से रात 20:30 तक।

विद्यार्थी करें उपाय : अध्ययन में सफलता हेतु देवी सरस्वती पर चढ़ी हल्दी से पुस्तक पर "ऐं" लिखें।

टोटका: असाध्य कार्य पूरा करने हेतु देवी सरस्वती पर चढ़ा मोरपंख तिजोरी में छुपाकर रखें।(संकलन)
जय माँ सरस्वती 

Friday, 19 January 2018

'ॐ नम: शिवाय' महामंत्र की महामहिमा



संदीप कुमार मिश्र: महादेव की महिमा का बखान वेद पुराण गाते हैं..सदाशिव महादेव भक्तों के प्रिय तो हैं ही,समस्त देवी-देवताओं के भी प्रिय हैं।सरल और सुलभ देव हैं महादेव।भोले की भक्ति से मनुष्य की संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।आदिदेव महादेव शिव जी का षडाक्षर मंत्र है...''ॐ नम: शिवाय''...जो प्रणव मंत्र '' के साथ 'नम: शिवाय' (पंचाक्षर मंत्र) के साथ बना है और जप करने पर यह षडाक्षर बन जाता है।

जैसा कि हमारे ऋषी-मनिषीयों के अनुसार पुराणों में षड़ाक्षर मंत्र की महिमा का बखान किया गया है। शिव महापुराण में तो कहा गया है कि इस मंत्र के महात्‍म्य का विस्‍तार से वर्णन तो आनादि अनादि काल तक नहीं किया जा सकता । यकिनन महादेव का यह मंत्र शिवभक्‍तों, साधको के साथ ही जगत के कल्याण के लिए सर्वमनोकामना पूर्ण करने वाला है।

'ॐ नम : शिवाय'
भगवान शिव के षड़ाक्षर मंत्र को वेदों का सारतत्‍व भी कहा गया है।क्योंकि षड़ाक्षर मंत्र मोक्षदायी, शिवस्‍वरूप तथा स्‍वयं शिव की आज्ञा से सिद्ध और संदेहशून्‍य माना गया है।सभी प्रकार की सिद्धियों से युक्‍त और दिव्‍य है षड़ाक्षर मंत्र।

सर्वव्यापी भगवान शिव ने दिया महामंत्र 'ॐ नम : शिवाय'
'ॐ नम: शिवाय' (षडक्षर मंत्र) या 'नम: शिवाय' (पंचाक्षर) मंत्र का प्रतिपादन स्‍वयं सर्वव्यापी भगवान शिव ने संपूर्ण देहधारियों के नाना प्रकार के मनोरथों की सिद्धि के लिए किया है। 'ॐ नम : शिवाय' मंत्र सभी विद्याओं का बीज मंत्र है। जैसे वट (बरगद) के बीज में विशाल वृक्ष मौजूद है, ठीक उसी प्रकार अत्‍यंत सूक्ष्म होने पर भी ये मंत्र सिद्ध और पूर्ण है।

मंत्र है वाचक, शिव हैं वाच्‍य
हमारे धर्म पुराणों में कहा गया है कि शिव 'अप्रमेय' यानी अनुमान से परे है। इसलिए अप्रमेय होने के कारण भगवान शिव वाच्‍य (ध्‍वनि) हैं तो वहीं यह मंत्र 'ॐ नम: शिवाय' उनका 'वाचक' माना गया है। शिव और मंत्र का ये वाच्‍य-वाचक भाव अनादिकाल से निरंतर चला आ रहा है और चलता रहेगा।
शिव पुराण में ऐसा कहा गया है कि यदि सृष्‍टि में भगवान शिव का तत्व ना होता तो यह जगत् यानी संसार अंधकारमय हो जाता, क्‍योंकि प्रकृति जड़ है और जीवात्‍मा अज्ञानी। प्रकृति से लेकर परमाणु तक जो कुछ भी जड़रूप तत्‍व है, वह किसी बुद्धिमान (चेतन) कारण के बिना स्‍वयं 'कर्ता' नहीं है। विद्वान इस मंत्र को शिव का अभिधान (वाचक) और शिव को अभिधेय (वाच्‍य) मानते हैं। इस युग्‍म के कारण ही परमशिव स्‍वरूप यह मंत्र 'सिद्ध' माना गया है। यह शिव का विधि वाक्‍य है। यह उन्‍हीं शिव का स्‍वरूप है जो सर्वज्ञ, परिपूर्ण और स्‍वभाव से निर्मल हैं।

'ॐ नम : शिवाय' के समान दूसरा कोई मंत्र नहीं  
ऐसा शिव महापुराण में कहा गया है कि संपूर्ण सनातन साहित्‍य और दर्शन में मंत्रों की अत्‍यधिक संख्‍या (सात करोड़ मंत्र और अनेकानेक उपमंत्र) होने के बावजूद इस भगवान शिव द्वारा रचित षडक्षर मंत्र के समान कहीं कोई दूसरा मंत्र नहीं है। षडक्षर मंत्र में छह अंगों सहित संपूर्ण वेद और शास्‍त्र विद्यमान हैं। शिवपुराण के अनुसार जितने भी शिवज्ञान हैं और जो-जो विद्यास्‍थान हैं, वे सब षड़ाक्षर मंत्र रूपी सूत्र के संक्षिप्‍त भाष्‍य हैं। यही नहीं जिसके हृदय में 'ॐ नम: शिवाय' यह षड़ाक्षर मंत्र प्रतिष्‍ठित है उसे अन्‍य बहुसंख्‍यक मंत्रों और विस्‍तृत शास्‍त्रों से क्‍या प्रायोजन है।

  कहने का भाव है कि इस संसार में जिस भी साधक या जनसामान्य ने भक्ति भाव और श्रद्दा से 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जप दृढ़तापूर्वक कर लिया समझ लो उसने सम्‍पूर्ण शास्‍त्र पढ़ लिया है और समस्‍त शुभ अनुष्‍ठानों को पूरा कर लिया है। शिव पुराण के अध्‍याय 12 में यहां तक कहा गया है कि 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र के जप में लगा हुआ पुरुष यदि पंडित, मूर्ख, अन्‍त्‍यज अथवा अधम भी हो तो वह पाप कर्मों से मुक्‍त हो जाता है।धन्य हैं भगवान भोलेनाथ और धन्य है उनकी महिमा।जिनके स्मरण मात्र से भी मूर्ख ज्ञानवान बन जाता है,निर्धन मालामाल हो जाता है और 'ॐ नम : शिवाय' के जाप से रोग,शोक,कष्ट और सभी प्रकार की बाधाओं से मनुष्य मुक्त हो जाता है और शिव मय हो जाता है।             


           
।।'ॐ नम : शिवाय'।।
(संकलन)


Tuesday, 9 January 2018

भाव राग ताल का संगम बना सेवा महोत्सव

संदीप कुमार मिश्र- श्री गोपालभट्ट प्राकट्य स्वयंभू श्रीराधारमण लाल जी की असीम अनुकम्पा से से विगत 456 वर्षो से चली आ रही परंपरा सेवा महोत्सवकला, संस्कृति,सद्भाव के संग भाव और भक्ति के माध्यम से बड़े ही सहज भाव के संग परम श्रद्धेय श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी ने श्रीराधारमण लाल जू की सेवा करते हुए सेवा महोत्सव को महामहोत्सव में बदल दिया।इस महामहोत्सव में आए हुए देशी विदेशी भक्तों ने भक्तिरस मनें डुबकर खुब आनंद के गोते लगाए।
वृंदावन के सप्त देवालयों में अपनी अलग पहचान बना चुके श्रीराधारमण मंदिर में सेवा और समर्पण की निराली और अद्भूत परंपरा अपनाई जाती है। सेवा महोत्सव में सिर्फ पूजन-अर्चन ही नहीं होता बल्कि गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी का भी समावेश किया जाता है।
दरअसल श्रीधाम की छटा ही इतनी निराली है की यहां आने वाला यहीं का होकर रह जाता है।कहते हैं कि-
प्रेममयी श्री राधिका,प्रेम सिंधु गोपाल।
प्रेमभूमि वृंदाविपिन,प्रेम रुप ब्रज बाल।
कहने का भाव है कि वृन्दावन में सर्वत्र श्रीराधिका का ही पूर्ण राज्य है।  वह वृन्दावनेश्वरी कहलाती हैं। भुक्ति-मुक्ति की यहां तनिक भी नहीं चलती। धर्म-कर्म भी यहां जेवरी बंटतेअस्तित्वहीन नजर आते हैं। यहां के मनुष्य ही नहीं; वृक्षों के डाल-डाल और पात-पात पर भी सदा राधे-राधेका शब्द गुंजायमान रहता है।

श्रीराधारमण मंदिर की भव्यता सेवा महोत्सव के दौरान देखते ही बनती है।आपको बतातें चलें कि सात दिनों तक चलने वाले इस सेवा महोत्सव में प्रतिदिन श्रीराधारमण जी का भिन्न भिन्न प्रकार से श्रृंगार किया जाता है,अलग असल प्रकार के मिष्ठान का भोग और साथ छप्पन भोग भी लगाया है जो अद्वितिय है।
ठाकुर जी की बालस्वरूप में सेवा होने के कारण यहां की सभी सेवाओं में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि हर सेवा ठाकुर जी के मन के भावों के अनुसार ही हो। यही कारण है कि राग, संगीत और भोग सेवा श्रीराधारमण मंदिर का कोई सानी नहीं है।

श्रीराधारमण मंदिर में प्रतिदिन प्रातः से सायंकाल तक हर दर्शन में गायन के माध्यम से वातावरण में जहां भक्ति रस का स्पन्दन दिखाई पड़ता है वहीं मंदिर के कीर्तनिया तरूण दास एवं कृष्णगोपाल शर्मा द्वारा गायन एवं पखावज वादन कर समयानुकूल पद-पदावली का गायन शास्त्रीय शैली में किया जाता है।

श्रीराधारमण जू की मनमोहक छवि यहां आने हर भक्त अपनी आंखों में बसा लेना चाहता है।हर साधक के मन में यही भाव होता है कि ठाकुर जी की कृपा उन पर सदैव बनी रहे और ऐसे भी श्रीराधारमणऩ लाल जू इतने दयालू हैं कि वो अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते और अपने भक्तों की झोली खुशियों और धन धान्य संपन्नता से भर देते हैं।

यहां पर ये बताना भी आपको बेहद नितांत आवश्यक है कि इस बार सेवा महोत्सव में सेवा का विशेष अवसर देश विदेश में ज्ञान, भक्ति,धर्म संकिर्तन,सनातन संस्कृति के संवाहक के रुप में पहुंचाने वाले श्रीराधारमण लाल जू के अनन्य भक्त, जन के मन को प्रिय श्रद्धेय पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज के द्वारा किया गया था।जो कि बाल्यावस्था से ही अपना मनमीत ठाकुर जी को बना लिया.जिस उम्र में कोई बालक अपने मित्रों संह हंसी ठिठोली करता है उस उम्र में श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी विश्व पटल पर श्रीमद्भागवत के माध्यम में भक्ति और वैराग्य का पाठ पढ़ाने लगे थे।शब्दों पर जितनी पकड़ आप श्री की हिन्दी में है,उतनी ही संस्कृत में है और संसार के सामने मजबूती से वेद,पुराण का प्रतिनिधित्व करने के लिए अंग्रेजी में भी आपकी उतनी ही मजबूत पकड़ है।जिसका परिणाम है कि जितने प्रेमी चाहने वाले उनते भारतीय हैं उतने ही विदेशी भी हैं।







प्रेम से बोलिए श्रीराधारमण लाल जू की जय


अगले लेख में और विस्तृत चर्चा क्रमश जारी रहेगी...जैसी श्रीराधारमण लाल जू की कृपा रहेगी दास पर...!

                              (सभी फोटो महाराज श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी के एफबी पेज से साभार)

Tuesday, 2 January 2018

जानिए वर्ष 2018 के व्रत, पर्व और त्योहार


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*🕉 वर्ष  2018 के व्रत , पर्व व त्यौहार*🕉
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*🌹जनवरी 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽2 जनवरी 2018 – मंगलवार, पौष पूर्णिमा व्रत*
*👉🏽5 जनवरी 2018 – शुक्रवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽12 जनवरी 2018 – शुक्रवार, षटतिला एकादशी*
*👉🏽14 जनवरी 2018 – रविवार, मकर संक्रांति , पोंगल , उत्तरायण , प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽15 जनवरी 2018 – सोमवार, मासिक शिवरात्रि*
*16 जनवरी 2018 – मंगलवार, पौष अमावस्या*
*👉🏽22 जनवरी 2018 – सोमवार, सरस्वती पूजा , बसंत पंचमी*
*👉🏽28 जनवरी 2018 – रविवार, जया एकादशी*
*👉🏽29 जनवरी 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽31 जनवरी 2018 – बुधवार, माघ पूर्णिमा व्रत*
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*🌹फरवरी 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽3 फरवरी 2018 – शनिवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽11 फरवरी 2018 – रविवार, विजया एकादशी*
*👉🏽13 फरवरी 2018 – मंगलवार, कुम्भ संक्रांति , मासिक शिवरात्रि , महाशिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽15 फरवरी 2018 – गुरुवार, माघ अमावस्या*
*👉🏽26 फरवरी 2018 – सोमवार, आमलकी एकादशी*
*👉🏽27 फरवरी 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
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*🌹मार्च 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽1 मार्च 2018 – गुरुवार, होलिका दहन , फाल्गुन पूर्णिमा व्रत*
*👉🏽2 मार्च 2018 – शुक्रवार, होली*
*👉🏽5 मार्च 2018 – सोमवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽13 मार्च 2018 – मंगलवार, पापमोचिनी एकादशी*
*👉🏽14 मार्च 2018 – बुधवार, मीन संक्रांति , प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽15 मार्च 2018 – गुरुवार, मासिक शिवरात्रि*
*👉🏽17 मार्च 2018 – शनिवार, फाल्गुन अमावस्या*
*👉🏽18 मार्च 2018 – रविवार, चैत्र नवरात्रि , उगाडी , गुड़ी पड़वा , घटस्थापना*
*👉🏽19 मार्च 2018 – सोमवार, चेटी चंड*
*👉🏽25 मार्च 2018 – रविवार, राम नवमी*
*👉🏽26 मार्च 2018 – सोमवार, चैत्र नवरात्रि पारणा*
*👉🏽27 मार्च 2018 – मंगलवार, कामदा एकादशी*
*👉🏽29 मार्च 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽31 मार्च 2018 – शनिवार, हनुमान जयंती , चैत्र पूर्णिमा व्रत*
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*🌹अप्रैल 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽3 अप्रैल 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽12 अप्रैल 2018 – गुरुवार, बरूथिनी एकादशी*
*👉🏽13 अप्रैल 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽14 अप्रैल 2018 – शनिवार, मासिक शिवरात्रि , मेष संक्रांति*
*👉🏽16 अप्रैल 2018 – सोमवार, चैत्र अमावस्या*
*👉🏽18 अप्रैल 2018 – बुधवार, अक्षय तृतीया*
*👉🏽26 अप्रैल 2018 – गुरुवार, मोहिनी एकादशी*
*👉🏽27 अप्रैल 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽30 अप्रैल 2018 – सोमवार, वैशाख पूर्णिमा व्रत*
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*🌹मई 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽3 मई 2018 – गुरुवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽11 मई 2018 – शुक्रवार, अपरा एकादशी*
*👉🏽13 मई 2018 – रविवार, मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽15 मई 2018 – मंगलवार, वृष संक्रांति , वैशाख अमावस्या*
*👉🏽25 मई 2018 – शुक्रवार, पद्मिनी एकादशी*
*👉🏽26 मई 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽29 मई 2018 – मंगलवार, पूर्णिमा व्रत*
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*🌹जून 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽2 जून 2018 – शनिवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽10 जून 2018 – रविवार, परम एकादशी*
*👉🏽11 जून 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽12 जून 2018 – मंगलवार, मासिक शिवरात्रि*
*👉🏽13 जून 2018 – बुधवार, अमावस्या*
*👉🏽15 जून 2018 – शुक्रवार, मिथुन संक्रांति*
*👉🏽23 जून 2018 – शनिवार, निर्जला एकादशी*
*👉🏽25 जून 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽28 जून 2018 – गुरुवार, ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत*
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*🌹जुलाई 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽1 जुलाई 2018 – रविवार, संकष्टी चतुर्थी*
*👉🏽9 जुलाई 2018 – सोमवार, योगिनी एकादशी*
*👉🏽10 जुलाई 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽11 जुलाई 2018 – बुधवार, मासिक शिवरात्रि*
*👉🏽13 जुलाई 2018 – शुक्रवार, ज्येष्ठ अमावस्या*
*👉🏽14 जुलाई 2018 – शनिवार, जगन्नाथ रथ यात्रा*
*👉🏽16 जुलाई 2018 – सोमवार, कर्क संक्रांति*
*👉🏽23 जुलाई 2018 – सोमवार, अषाढ़ी एकादशी , देवशयनी एकादशी*
*👉🏽24 जुलाई 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽27 जुलाई 2018 – शुक्रवार, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत , गुरु-पूर्णिमा*
*👉🏽31 जुलाई 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी*
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*🌹अगस्त 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽7 अगस्त 2018 – मंगलवार, कामिका एकादशी*
*👉🏽9 अगस्त 2018 – गुरुवार, मासिक शिवरात्रि , प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽11 अगस्त 2018 – शनिवार, आषाढ़ अमावस्या*
*👉🏽13 अगस्त 2018 – सोमवार, हरियाली तीज*
*👉🏽15 अगस्त 2018 – बुधवार, नाग पंचमी*
*👉🏽17 अगस्त 2018 – शुक्रवार, सिंह संक्रांति*
*👉🏽21 अगस्त 2018 – मंगलवार, श्रावण पुत्रदा एकादशी*
*👉🏽23 अगस्त 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽25 अगस्त 2018 – शनिवार, ओणम/थिरुवोणम*
*👉🏽26 अगस्त 2018 – रविवार, श्रावण पूर्णिमा व्रत , रक्षा बंधन*
*👉🏽29 अगस्त 2018 – बुधवार, कजरी तीज*
*👉🏽30 अगस्त 2018 – गुरुवार, संकष्टी चतुर्थी*
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*🌹सितंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽2 सितंबर 2018 – रविवार, जन्माष्टमी*
*👉🏽6 सितंबर 2018 – गुरुवार, अजा एकादशी*
*👉🏽7 सितंबर 2018 – शुक्रवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽8 सितंबर 2018 – शनिवार, मासिक शिवरात्रि*
*👉🏽9 सितंबर 2018 – रविवार, श्रावण अमावस्या*
*👉🏽12 सितंबर 2018 – बुधवार, हरतालिका तीज*
*👉🏽13 सितंबर 2018 – गुरुवार, गणेश चतुर्थी*
*👉🏽17 सितंबर 2018 – सोमवार, कन्या संक्रांति*
*👉🏽20 सितंबर 2018 – गुरुवार, परिवर्तिनीएकादशी*
*👉🏽22 सितंबर 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽23 सितंबर 2018 – रविवार, अनंत चतुर्दशी*
*👉🏽25 सितंबर 2018 – मंगलवार, भाद्रपद पूर्णिमा व्रत*
*👉🏽28 सितंबर 2018 – शुक्रवार, संकष्टी चतुर्थी*
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*🌹अक्टूबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽5 अक्टूबर 2018 – शुक्रवार, इन्दिरा एकादशी*
*👉🏽6 अक्टूबर 2018 – शनिवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽7 अक्टूबर 2018 – रविवार, मासिक शिवरात्रि*
*👉🏽9 अक्टूबर 2018 – मंगलवार, भाद्रपद अमावस्या*
*👉🏽10 अक्टूबर 2018 – बुधवार, शरद नवरात्रि , घटस्थापना*
*👉🏽15 अक्टूबर 2018 – सोमवार, दुर्गा पूजा की तिथियाँ , कल्परम्भ*
*👉🏽16 अक्टूबर 2018 – मंगलवार, नवपत्रिका पूजा*
*👉🏽17 अक्टूबर 2018 – बुधवार, दुर्गा महा अष्टमी पूजा , तुला संक्रांति , दुर्गा महा नवमी पूजा*
*👉🏽18 अक्टूबर 2018 – गुरुवार, शरद नवरात्रि पारणा*
*👉🏽19 अक्टूबर 2018 – शुक्रवार, दशहरा , दुर्गा विसर्जन*
*👉🏽20 अक्टूबर 2018 – शनिवार, पापांकुशा एकादशी*
*👉🏽22 अक्टूबर 2018 – सोमवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽24 अक्टूबर 2018 – बुधवार, अश्विन पूर्णिमा व्रत*
*👉🏽27 अक्टूबर 2018 – शनिवार, करवा चौथ , संकष्टी चतुर्थी*
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*🌹नवंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽3 नवंबर 2018 – शनिवार, रमा एकादशी*
*👉🏽5 नवंबर 2018 – सोमवार, मासिक शिवरात्रि , धनतेरस , दिवाली पूजा की तिथियाँ , प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽6 नवंबर 2018 – मंगलवार, नरक चतुर्दशी*
*👉🏽7 नवंबर 2018 – बुधवार, दिवाली , अश्विन अमावस्या*
*👉🏽8 नवंबर 2018 – गुरुवार, गोवर्धन पूजा*
*👉🏽9 नवंबर 2018 – शुक्रवार, भाई दूज*
*👉🏽16 नवंबर 2018 – शुक्रवार, वृश्चिक संक्रांति*
*👉🏽19 नवंबर 2018 – सोमवार, देवुत्थान एकादशी*
*👉🏽20 नवंबर 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽23 नवंबर 2018 – शुक्रवार, कार्तिक पूर्णिमा व्रत*
*👉🏽26 नवंबर 2018 – सोमवार, संकष्टी चतुर्थी*
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*🌹दिसंबर 2018 त्यौहार, व्रत और तिथि*🌹
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*👉🏽3 दिसंबर 2018 – सोमवार, उत्पन्ना एकादशी*
*👉🏽4 दिसंबर 2018 – मंगलवार, प्रदोष व्रत (कृष्ण)*
*👉🏽5 दिसंबर 2018 – बुधवार, मासिक शिवरात्रि*
*👉🏽7 दिसंबर 2018 – शुक्रवार, कार्तिक अमावस्या*
*👉🏽16 दिसंबर 2018 – रविवार, धनु संक्रांति*
*👉🏽19 दिसंबर 2018 – बुधवार, मोक्षदा एकादशी*
*👉🏽20 दिसंबर 2018 – गुरुवार, प्रदोष व्रत (शुक्ल)*
*👉🏽22 दिसंबर 2018 – शनिवार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत*
*👉🏽25 दिसंबर 2018 – मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी*
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Friday, 29 December 2017

जाने क्यों है:भगवान श्री हरि के चरणों में माता लक्ष्मी का निवास


संदीप कुमार मिश्र: जगत के पालनहाल भगवान श्री हरि विष्णु।जिनकी महिमा अनंत है,अपरंपार है,और भगवान श्री हरि के चरणों में निवास करती हैं माता लक्ष्मी।जिनकी कृपा से हम सांसारिक मोहमाया प्राप्त कर पाते हैं।जिनके पास रहने पर हम धनवान बन जाते हैं और अगल हमारे पास लक्ष्मी नहीं है तो हम रंक बन जाते हैं।हमारे जीवन में धन की बड़ी महत्ता है,क्योंकि धन के बगैर कुछ भी संभव नहीं है,सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति धन से ही संभव है जिसके लिए जरुरी है हम पर माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहे।हमारे कर्म इतने नेक हो कि धन प्राप्ति के मार्ग सदैव बने रहे।क्योंकि कर्म प्रधान लोगों के पास ही धन सम्पदा रहती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी हमेशा ही भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणों में ही क्यों रहती है,श्रीहरि की सेवा में ही क्यों लगी रहती है?

दरअसल हमारे धर्म शास्त्रों में जहां कहीं भी वर्णन है वहां भगवान विष्णु के चरण दबाते हुए माता लक्ष्मी की चर्चा की गई है।जिसका मूल में है कि भगवान श्री हरि ने माता लक्ष्मी को अपने पुरुषार्थ के बल पर ही वश में कर रखा है।इसलिए इस बात को जान लीजिए कि माता लक्ष्मी उन्हीं के वश में रहती है जो हमेशा कर्म पर विश्वास रखते हैं और सर्वे भवंतु सुखिना का भाव मन में रखते हैं।यही वजह कि इस चरपाचर जगत में आवश्यकता के अनुसार श्रगवान ने अनेकों अवतार लिए और संसार का कल्याण किया।भगवान विष्णु मोह-माया से परे है। वे तो स्वयं दूसरों को मोह में डालने वाले हैं।

जिसका प्रमाण समुद्र मंथन के समय सहज ही देखने को मिल जाता है।हम सब जानते हैं कि भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृत पान कराने के लिए असुरों को मोहिनी रूप धारण करके अपने सौंदर्य जाल में फंसाकर मोह में डाल दिया।उसी समय माता लक्ष्मी मंथन से प्रकट हुई।जिन्हें प्राप्त करने के लिए देवता और असुरों में घनधोर,घमासान युद्ध हुआ।लेकिन माता लक्ष्मी ने जगत के पालनहार भगवान विष्णु का वरण किया।

ऐसे तो लक्ष्मी का स्वभाव विशुद्ध रुप से चंचल है, उन्हें एक जगह पर रोक पाना असंभव है।लेकिन फिर भी वे भगवान विष्णु के चरणों में ही रहती है।यहीं पर मनुष्य के धैर्य की परीक्षा होती है क्योंकि जो भी जन सामान्य लक्ष्मी या माया की चंचलता और मोह में फंस जाता है,लक्ष्मी उससे उतनी ही दूर हो जाती है ।कहने का भाव है कि भाग्य के भरोसे बैठ जाने से लक्ष्मी का दूर होना स्वाभाविक है,इसलिए कर्म करते रहने में तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिए।भाग्य एक बार लक्ष्मी की प्रप्ति करवा सकता है लेकिन उसे बनाए रखने के लिए कर्म करना ही पड़ेगा।

अंतत:भगवान श्रीहरि के चरणों माता लक्ष्मी इसीलिए निवास करती है क्योंकि भगवान विष्णु लक्ष्मी का सही सदुपयोग जानते हैं उन्हें वश में रखना जानते हैं।इसलिए मित्रों सरलता और सजगता से नेकी की राह पर चलते हुए कर्म करते जाइए माया (लक्ष्मी)कभी आपसे दूर नहीं होगी।

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि।हरि प्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दया निधे ।।
पद्मालये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं च सर्वदे।सर्व भूत हितार्थाय, वसु सृष्टिं सदा कुरुं ।।

माता महालक्ष्मी धन और वैभव की अधिष्टात्री देवी हैं. ऊपर दिए गए मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से मनुष्य मात्र की सभी अभिलाषाएं पूरी हो जाती हैं।

मोदी सरकार का बेईमान अमीरों पर करारा हमला, खुद को दिवालिया घोषित करना हु...

मोदी सरकार का देश के घोटाले घपलेबाजों पर करारा प्रहार।वित्त मंत्री अरुण जेटली का कांग्रेस शासन पर पोलखोल।जरुरी है विकास के लिए पारदर्शिता और यकिनन मोदी सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

Thursday, 28 December 2017

कुलभूषण जाधव मामले पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का राज्यसभा में बयान

बेशर्म पाकिस्तान को भारतीय संसद से शानदार और करारा जवाब दिया गया।जिस बेशर्म पाकिस्तान नें एक मां को बेटे से...एक पत्नी को उसके पती से जी भर कर मिलने नहीं दिया,ऐसे नापाक देश का कैसा इमान और कैसा धर्म।माननिय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी ने पाकिस्तान की पूरी सच्चाई संसद में बयां कर दी,
लेकिन अब समय आ गया है कि सिर्फ कड़ी निंदा से काम नहीं चलेगा...अब तो भारत मांग रहा है कुलभूषण जाधव और वो भी ससम्मान...जय हिन्द।।।

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...