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Thursday, 29 October 2015

गिरफ्त में छोटा राजन।दाउद कब...?


संदीप कुमार मिश्र: आखिरकार आतंक का पर्याय रहा छोटा राजन पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया।किसी ने सच ही कहा है कि कानुन से कोई भाग तो सकता है लेकिन बच नहीं सकता,और छोटा राजन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।बड़ा सवाल ये उठता है कि मुंबई की संकरी गलियों में पैदा हुआ एक साधारण बालक,मजदूर का बेटा डान बना कैसे..?कहते हैं अंत भला तो सब भला,खैर इंडोनेशिया से पुलिस की गिरफ्त में आए छोटा राजन से अब उम्मीद की जा सकती है कि गुनाह की दुनिया के उन तमाम काले चेहरों से नकाब हटाने में मदद मिलेगी जिनकी सिक्का मायानगरी पर चलता है।

दरअसल किस्मत भी कब तक गुनहगार का साथ देती। कुछ ऐसा ही हुआ राजेंद्र सदाशिव निखलांजे उर्फ छोटा राजन उर्फ मोहन कुमार के साथ। मुंबई के चेंबूर में तिलक नगर में पैदा हुआ राजन बदलते समय के साथ कब छोटा रजन बन गया पता ही नहीं चला,और जब पता चला तब तककाफी देर हो चुकी थी ।मुंबई उसके आतंक से पांप रही थी,कत्लेआम और धन उगाही का अड्डा बन चुकी थी माया नगरी।मुंबई के सिनेमाघरों में राजेंद्र सदाशिव टिकटों की कालाबाजारी करता था।लेकिन आगे बढ़ने की कमीनी चाहत ने धिरे धिरे शराब का काला कारोबार भी सिखा दिया। ऐसे छोटे मोटे काम से भी वो मकाम हासिल नही होना था सो सदाशिव उस समय के जान में शुमार राजन नायर उर्फ बड़ा राजन के संपर्क में आया और कम समय में ही उसका विश्वासपात्र बन गया। एक गैंगवार में नायर की हत्या के बाद उसके सभी काले कारोबार को छोटा राजन नें बखुबी संभाला और बड़े राजन के हत्यारे को मौत के घाट उतारा।

इस प्रकार से सदाशिव बन गया छोटा राजन।अब छोटा राजन और उसके गुर्गों का सिक्का मुंबई पर चलने लगा था।लेकिन गुनाह की दलदल ऐसी थी की किससे निकलना उतना ही मुश्किल है जितना घुसना आसान।एक तर छोटा राजन तो दुसरी तरफ एक और गैंग बड़ी ताकत के रुप में अस्सी के दशक में अपने पांव पसार चुका था,हर गुनाह में उसका बड़ा हिस्सा था।तस्करी से लेकर गैर कानुनी वसूली,मर्डर करना उसके गैंग के लिए बड़ा ही आसान था।जी हां दाउद इब्राहीम।ये वही शख्स है जिसके उपर ना जाने कितने मुकद्दमे हैं,ना जाने कितने बेगुनाहों के खुन से जिसका दामन दागदार है।अमन चान और शांती के मुल्क का ये दुश्मन अस्सी के दशक में अपने काले मंसूबों को लगातार फैलाता जा रहा था। दाउद अपने चोटे छोटे कामों को छोटा राजन को देने लगा।समय का फेर देखिए कि दाउद और राजन इतने करीब आ गए कि मुंबई में इनका एकाधिपत्य राज हो गया।

जब दाऊद दुबई फरार हुआ तब मुंबई पर राजन की तूती बोलने लगी।यही कारण था कि राजन मुंबई पुलिस की आंखों की किरकिरी बन गया। शायद यही कारण था कि 1990 के आस पास पुलिस का शिकंजा बदमासों पर बढ़ने लगा।कुछ का इनकाउंटर हुआ तो कुछ अंडरग्राउंड हो गए। आकिरकार छोटा राजन भी मुंबई को अलविदा कह कर दुबई रवाना हो गया,और हम सब जानते हैं कि दुबई से मुफीद जगह भाईलोगों के लिए कहीं नहीं है।इस दौरान सबसे दिलचस्प बात जो रही वो ये कि दुबई से ही भाईगिरी बखूबी चलने लगी,और दाउद और राजन के गुर्गे मुंबई में काम को अंजाम देने लगे।लेकिन हकिकत तो ये है कि पैसे से बड़ी जरुरत भी नहीं होती और दुश्मन भी नहीं होता।कुछ ऐसा ही हुआ दाउद और राजन के बीच भी।दोनो गैंग के लोग एक दूसरे के खास लोगों पर हमला करने लगे।छोटे गुंडे दाउद का खास होने में दिलचस्पी लेने लगे।

कहते हैं तभी दाउद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में आया।जिसका परिणाम इतना भयानक होगा,जिसकी कल्पना भर से रुह कांप जाती है।आईएसआई और दाउद ने मिलकर 1993 में मुंबई में बम धमाके करवाए और तभी से छोटा राजन और दाउद के संबंधों में खटास आ गयी,जिसका परिणाम हुआ की दोनो में दूरियां बढ़ गई। शार्प शूटर छोटा शकील दाउद का खास हो गया,जिस वजह से राजन ने अपना ठिकाना बदल कर मलेशिया की सरजमीं पर कदम रखा और वहीं से अपने काम को अंजाम देने लगा।राजन के निशाने पर खासतौर पर दाउद के गुर्गे थे,जिन्हें राजन नें ठोंकना शुरु किया। 
  
दोनो गैंग में खुब लड़ाईंया होने लगी,मुंबई से लेकर दुबई,मलेशिया और फिर नेपाल तक गैंगवार चलता रहा और सन2000 में दाउद के गुर्गों ने राजन पर जानलेवा हमला किया,जिसमें वो बाल बाल बच निकला। और अब वो और खतरनाक हो गया। एक तरफ तो दाउद ने अपना ठिकान दुबई से बदलकर पाकिस्तान की गोद में जा बैठा।जहां पाकिस्तानी आकाओं ने उसे पूरी सुरक्षा मुहैया करा दी वहीं छोटा राजन पर अब मनी लांड्रिंग और हथियारों की तस्करी का आरोप लगा।कहते हैं गुजरात में साल 2005 में पकड़े गए बब्बर खालसा के आतंकियों को हथियार बेचने के मामले में छोटा राजन के खिलाफ दो केस दर्ज हुए। 

साल 2012 में मुंबई पुलिस ने यह अनुमान लगाया कि छोटा राजन हजारों करोड़ का मालिक है। उसके गैर-कानूनी पैसे भवन-निर्माण और जमीनों में भी लगे हुए हैं। उसकी पत्नी सुजाता ने मुंबई में जो खुशी डेवलपर्स नाम की कंपनी खड़ी की है, उसमें भी उसके पैसे लगे हैं। खुशी छोटा राजन की सबसे छोटी बेटी का नाम है। यह कंपनी मुंबई और पुणे में भवन-निर्माण व भूमि विकास का काम करती है।  2005 में मकोका के तहत एक केस दर्ज हुआ और राजन का भाई और उसके दो सहयोगी दबोचे गए। तलाशी अभियान से 37 बैंक खातों का पता चला। सलीम कुर्ला, मोहम्मद जिंदरान, मनीष लाला की हत्याओं के पीछे भी राजन का हाथ बताया जाता है।इस तरह से छोटा राजन पर तकरीबन 65-70 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे।छोटा राजन के रसुख का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि साल 2014 में उसकी मां का जब देहांत हुआ तक उनकी अंत्येष्टि में राजनीतिक जगत से लेकर मायानगरी और कारोबारी भी शामिल हुए थे।  


अब एक तरफ जहां अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की गिरफ्तारी से हमारी सरकार उत्साहित है।तो वहीं सवाल उठता है की डी कंपनी का मुखिया दाउद इब्राहिम गिरफ्त में कब। इस सवाल पर सरकार अपनी प्रतिबद्धता तो जताती है लेकिन कब ये नहीं पता। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रिजिजू ने तो साफ इशारा किया कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भी जल्द ही भारत की गिरफ्त में होगा और दाऊद को पकड़ने के लिए भारत सरकार ने अमरीका की सुरक्षा एजेंसियों से जानकारी भी साझा की है।दरअसल रविवार को ऑस्ट्रेलियाई और इंडोनेशियाई पुलिस की एक संयुक्त टीम ने बाली शहर में छोटा राजन को गिरफ्तार कर लिया था। 55 वर्षीय राजेंद्र सदाशिव निकालजे उर्फ ​​मोहन कुमार उर्फ ​​छोटा राजन को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था,जब वह सिडनी से इंडोनेशियाई के शहर बाली पहुंचा था।

बहरहाल अब इंतजार है तो खौफ के उस चेहरे का जिसके आतंक ने कभी मुंबई की आबोहवा में बारुद की गंध धोल दी थी।जिसका असर आज भी देखने को मिलता है।सरकार की असल कामयाबी और प्रतिबद्धता तो तब देखने को मिलेगी जब आतंक की फैक्ट्री से जबरन दाउद को निकालकर लाया जाएगा और 1993 के बम धमाकों में मारे लोगों के परिजनों के घावों पर मरहम लगेगा।हम जानते हैं कि ये इतना आसान नहीं है लेकिन निजाम बदला है और नियत भी बदली है,ऐसे में उम्मीद तो कर ही सकते हैं....।

Wednesday, 28 October 2015

गोवर्धन पूजा:प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल


संदीप कुमार मिश्र: दोस्तों जगमगाते दीओं की रात क्या आती है साथ लेकर आती है ढेर सारी खुशियां और उत्साह।हर कोई इस रोशनी के त्यौहार से लबरेज नज़र आता है।हर किसी की यही चाहत रहती है,कि ये त्यौहार हम रोज मनाते रहें।दीपावली के दूसरे दिन ही होती है गोवर्धन पूजा।जिसे देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। दीवाली के दूसरे दिन भी दिए जलाए जाते हैं,और घर का हर कोना रोशन हुआ नज़र आता है।इस दिन होती है घऱों में गोवर्धन पूजा।इस दिन गोवर्धन पूजा के साथ साथ अन्नकूट की भी  पूजा होती है। गोवर्धन पूजा के साथ ही अन्नकूट का भी बड़ा ही महत्व है हमारे जीवन में।हमारे देश में हर एक त्यौहार अपने साथ लेकर आता है ढेर सारी खुशियां।परिवार,समाज, देश और दुनियां में ये खुशियां बरकरार रहे।इसके लिए भी कामनाएं की जाती हैं।दीवाली के दूसरे दिन की जाती है गोवर्धन पूजा।गोवर्धन पूजा का ये पर्व भी जुड़ा है हमारी धार्मिक आस्था और सर्वजनहिताय  की कामना के लिए।कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पर्व मनाया जाता है।इसी दिन बलि पूजा, अन्नकूट और मार्गपाली उत्सव मनाए जाते हैं।अन्नकूट और गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से आरम्भ हुई।इस दिन गाय ,बैल पशुओं को स्नान कराके उनकी पूजा की जाती है और हाथ से मिठाईयां खिलाई जाती हैं।और फिर इनकी आरती भी उतारी जाती है।पूजा करने के लिए एक नियम यह भी है कि गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है।जल,मौली, रोली चावल , दही और तेल का दीपक जलाकर इनकी पूजा और अराधना की जाती है और इसके बाद की जाती है गोबर के बनाए गए पर्वत की परिक्रमा।कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को भगवान श्री कृष्ण को नैवेद्य और भोग लगाया जाता है।अन्न से बने कच्चे और पक्के भोग ,मिठाईंयां  भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित की जाती हैं।अन्नकूट जिसका मतलब है अन्न का ढेर । भागवत पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति इस दिन पूजा को पूरे परिवार ,मित्रों के साथ मिलकर करता है।उसका घर हमेशा अन्न और धन से भरा रहता है।उस घर में कोई कमी नहीं आती।

हमारे भारतीय लोक जीवन में इस त्यौहार की अहम भमीका हैं।गोवर्धन जो कि नाम से ही स्पष्ट है गो धन।गाय वो धन है जो हमे मीठा दूध तो देती ही हैं साथ ही इसके दूध से बनाए जाते है स्वादिष्ट  मीठे पकवान। हम गाय को मां का दर्जा देते हैं।गाय को देवी लक्ष्मी मां का रूप माना गया है।जैसे देवी लक्ष्मी मां हम सबको सुख समृद्धि प्रदान करती है,उसी तरह गौ मात भी अपने दूध से हमें स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती है।गौ के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करने के लिए गोवर्धन पूजा की जाती है।ब्रज में तो दूध का अर्घ्य देने का भी नियम है।अन्नकूट या गोवर्धन पूजा का ये पर्व है तो बड़ा ही प्राचीन,लेकिन जब श्रीकृष्ण ने अवतार धारण किया तब से इसका महत्व और बढ़ गया।भगवान श्रीकृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा शुरू की।ब्रजवासी तो इस त्यौहार को बडी ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।इस त्यौहार का धार्मिक महत्व तो है ही,साथ ही ये त्यौहार हमारी प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है।गोवर्धन पूजा हमें संदेश देती है कि हमें अपनी प्रकृति को कैसे संभाल कर रखना चाहिए।क्योंकि इससे ही हमारा भरण पोषण होता है।प्राकृतिक संसाधनों को संभाल कर रखें और इनकी देवताओं के सामान पूजा करें।तभी प्रकृती का संतुलन बना रहेगा।

कहते हैं भगवान हमें जिस हाल में रखे हमें उसी हाल में रहना चाहिए और खुशी खुशी जीवन यापन करना चाहिए।हमें निरतंर काम करते जाना और फल की इच्छा नहीं रखनी है जो कर्तव्य हमें भगवान ने सौंपा है उसे पूरी शिद्धत से निभाना चाहिए।इन्द्र को इस बात का अहंकार हो गया था कि वो बारिश करवाते हैं।तभी भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्रदेव को  एहसास करवाया कि वो ऐसा करके कोई कृपा नहीं करते।ये तो उनका कर्तव्य है जो भगवान ने उन्हें सौंपा है और प्रकृती का संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।इन्द्रदेवता के अहंकार को भगवान कृष्ण ने तोड़ा और इन्द्र की पूजा को बंद करके उसके स्थान पर गोवर्धन की पूजा का प्रारम्भ किया।श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों के इस भ्रम को दुर किया कि  गोवर्धन पूजा के दिन इन्द्रदेवता की पूजा  पर ही  हमारी खेती निर्भर है और इन्द्र देवता ही वर्षा करके उनके खेतों में अन्न पैदा करते है।जिससे उनके पशुओं को चारा मिलता है।श्रीकृष्ण ने गोवर्धन रूप धारण कर ये पूजा स्वयं ग्रहण की ,जिससे इन्द्रदेव कुपित हो गए और मुसलाधार वर्षा की।तब नंद के लाल श्रीकृष्ण ने सभी ब्रजवासीयों,गोप गोपियों, पशु पक्षियों  को बचाने के लिए,उनके प्राणों की रक्षा के लिए जगत के पालनहार श्रीकृष्ण ने अपनी सबसे छोटी ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया और लोगों को इस मुसलाधार वर्षा से निजात दिलवाई।साथ ही इन्द्र के अहंकार को तोड़ा।श्रीकृष्ण के स्मरण के लिए गोवर्धन पूजा का ये दिन खास होता है।सभी ब्रजवासी सात दिन तक गोवर्धन पूजा करते हैं और उनकी शरण में रहतें हैं।ब्रजवासियों पर एक बूंद तक नहीं गिरी थी,भगवान की इस लिला से इन्द्र बड़े लज्जित हुए और श्री कृष्ण से क्षमा याचना मांगी।श्री कृष्ण ने सातवे दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखकर ब्रजवासियों से कहा कि वो हर वर्ष गोवर्धन पर्व को मनाएं और अन्नकूट का ये पर्व मनाने से आपका घर धन धान्य से परिपूर्ण रहेगा। तभी से लेकर आज तक इस धार्मिक पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है।

अन्नकूट जो नाम से ही स्पष्ट है,अन्न का ढेर। हर साल मनाए जाने वाले अन्नकूट पर्व की वल्लभ कुल के सम्प्रयायों के मंदिरों में बड़ी धूम रहती है।इस सम्प्रदाय में तो मंदिरों में बड़े बड़े आयोजन किए जाते हैं और इसकी शुरूआत दशहरे से ही हो जाती है।इन 21दिनों में अलग अलग तरह के पकवान बनाए जाते हैं।हर दिन भगवान को भोग लगाकर सभी को बांट दिया जाता है।अन्नकूट का ये आयोजन गोवर्धन पूजा के लिए ही किया जाता है।भगवान श्री कृष्ण ने  गोवर्धन भक्ति , शक्ति , रहस्य , चमत्कार का ये पर्व शुरू किया था।माना जाता है कि इस दिन कृष्ण के साक्षात् दर्शन होते हैं।गोवर्धन में दीपावाली के दूसरे दिन श्रद्धालु कन्हैया के रंग में रंगने के लिए ब्रज जाते हैं।ये पर्व हमें प्रकृति की रक्षा करने का भी संदेश देता है।श्री कृष्ण प्रकृति प्रेमी थे।इन्द्र के अहंकार तोड़ने के पीछे यही मकसद था कि ब्रजवासी प्रकृति से प्रेम करें और अपने पर्यावरण को बचाएं।उसकी रक्षा करें,तभी जीव और जीवन दोनो की रक्षा हो सकेगी।

एक तरफ जहां ब्रज में गोवर्धन पूजा की धूम मची रहती है, वहीं आज के दिन ब्रज में दूध का अर्घ्य  दिया जाता है।गोवर्धन पूजा का नियम है कि इस दिन गोवर्धन पूजा जरूर करनी चाहिए। जिस भी तरह से आप पूजा करें ,श्री कृष्ण खुश हो जाते हैं।भगवान श्री कृष्ण खुद कर आपकी अराधना पूजा को स्वीकार करते हैं।लोग अपने गोधन की पूजा करते हैं और गोवंश की सुरक्षा करने का प्रण लेते हैं।मंदिरों में गोवर्धन का प्रतिक्रमा बनाकर पूजा तो की ही जाती है साथ ही परिक्रमा लगाई जाती है।सब्जियों और अन्न को मिलाकर अन्नकूट बनाया जाता है।भगवान को भोग लगाकर सभी को प्रसाद बांटा जाता है।इस पर्व को मनाने से गाय का तो कल्याण होता ही है।इससे पुत्र , पौत्रादि की सुख प्राप्ति होती भी होती है।कहते हैं कार्तिक महीने में जप..तप...होम ..अर्चना करने का विशेष महत्व है।


मित्रों कहते हैं कि जो गोवर्धन पूजा के दिन खुश रहता है,वो पूरे साल खुश रहता है,गोवर्धन , अन्नकूट से आपके घर भरे रहें।आप खुशहाल जीवन जियें और श्रीकृष्ण जी आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।इसी हार्दिक शुभकामना के साथ...संदीप कुमार मिश्र..।

वैश्विक बदलावों के बीच भारत: सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आधुनिकता का समन्वय

 आज का भारत एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ वह अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को छोड़े बिना आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम महाशक्ति बनने की ओर अ...