Monday, 22 October 2018

करवा चौथ2018: अखंड सुहाग का व्रत,जाने पूजा का देश के विभिन्न शहरों में क्या होगा शुभ मुहूर्त



संदीप कुमार मिश्र: करवा चौथ अखंड सुहाग का व्रत है जिसे हमारे भारतीय समाज में सुहागिन महिलाएं बड़ी ही निष्ठा के साथ रखती हैं। इस बार करवा चौथ का त्योहार 27 अक्‍टूबर,दिन शनिवार को है। करवा चौ‍थ पर महिलाएं अपने अखंड सुहाग के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर सौभाग्य की कामना करती हैं।इस विशेष पर्व पर महिलाएं संध्या में सोलह श्रृंगार कर चंद्रमा की पूजा करती हैं और चांद को छन्नी में देखने के बाद अपने पति परमेश्वर के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

करवा चौथ में चंद्र उदय और व्रत खोलने का शुभ मुहूर्त-
दिल्ली- रात 8 बजकर 1 मिनट,चंडीगढ़- शाम 7 बजकर 57  मिनट, देहरादून- शाम 7 बजकर 52 मिनट, पटियाला, लुधियाना- रात 8 बजे,पटना- शाम 7 बजकर 46 मिनट,लखनऊ, वाराणसी- शाम 7 बजकर 40 मिनट,कोलकाता- शाम 7 बजकर 22 मिनट, जयपुर- रात 8 बजकर 07 मिनट,जोधपुर- रात 8 बजकर 20 मिनट,मुंबई- रात  8 बजकर  31 मिनट,बेंगलुरु- रात 8 बजकर 22 मिनट,हैदराबाद- रात 8 बजकर 22 मिनट

पूजन के समय इन मंत्रों का करें जाप
पूजन के लिए ऊं शिवायै नमः से पार्वती जी का, ऊं नमः शिवाय से श्री शिव जी का, ऊं गं गणपतये नमः से गणेश जी का, ऊं हनुमते नमः से कार्तिकेय जी का, ऊं सोम सोमाया नमः से चंद्र देव का पूजन-अर्चन करें।

करवाचौथ के व्रत की सरल पूजन विधि-विधान
जो भी माताएं बहने इस व्रत को रखती हैं उन्हे प्रात: सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए और फिर संपूर्ण आहार जैसे मिठाई, फल, सेवईं, पूरी ग्रहण करके व्रत का शुभारंभ करना चाहिए।करवा चौथ पर भगवान शिव का परिवार सहित और श्रीकृष्ण की स्थापना करनी चाहिए साथ ही रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश जी को पीले फूलों की माला, लड्डू और केले का प्रसाद चढ़ाना चाहिए।

भगवान शिव और माता पार्वती को बेलपत्र और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करने के साथ ही श्रीकृष्ण कन्हैया को माखन-मिश्री और पेड़े का सप्रेम भोग लगाना चाहिए और धूप दीप जलाना चाहिए।

महिलाएं करवाचौथ पर मिटटी के कर्वे पर रोली से स्वस्तिक बनाकर, कर्वे में दूध, जल और गुलाब जल मिलाकर रखें और रात को छलनी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दें और करवा चौथ की कथा या फिर कहानी अवश्य सुने।कथा श्रवण के पश्चात अपने से बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त कर पति को प्रसाद दें और फिर भोजन कराकर स्वयं भोजन ग्रहण करें।

करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी एक ही दिन होता है।संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का विधान है । करवा चौथ के दिन मां पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्‍य का वरदान प्राप्‍त होता है। मां के साथ-साथ उनके दोनों पुत्र कार्तिक और गणेश जी की भी पूजा की जाती है।

Saturday, 20 October 2018

Kumbh Mela 2019: प्रयागराज में कुंभ मेला इस बार क्यों है खास, क्या है स्नान की तारीख जानिये


संदीप कुमार मिश्र: संगम नगरी इलाहाबाद के संगम तट पर  2019 में इस बार अर्ध कुंभ नहीं बल्कि पूर्ण कुंभ का आयोजन किया जाएगा।जिसका फैसला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यजुर्वेद के मंत्र ऊं पूर्णमद: पूर्णमिदं से प्रेरित होकर लिया है। आपको बता दें कि प्रदेश सरकार हर 6 साल में आयोजित होने वाले विशाल धार्मिक आयोजन अर्ध कुंभ को कुंभ कहने का फैसला लिया है, वहीं प्रत्येक 12 साल में होने वाले कुंभ को महाकुंभ कहा जाएगा इसका निर्णय लिया।
हिन्दू सनातन धर्म में कुंभ मेला विशेष महत्व रखता है।इस आयोजन को मेला के तौर पर नहीं, बल्कि महापर्व के रूप में देखा जाता है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इस दौरान पावन गंगा,यमुना और सरस्वती नदी के संगम स्थल में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
आपको बताते चलें कि हर 12 साल बाद कुंभ मेला आता है और दो बड़े कुंभ मेलों के मध्य एक अर्धकुंभ मेला भी लगता है। इस बार साल 2019 में आने वाला कुंभ मेला दरअसल, अर्धकुंभ ही है,लेकिन इसे यजुर्वेद के मंत्र ऊं पूर्णमद: पूर्णमिदं से प्रेरित होकर कुंभ कहा जाएगा, ऐसी सरकार ने घोषणा की है।साथ ही इस बार के इस विशाल आयोजन की तैयारियों को देखें तो अर्धकुंभ मेले जैसा नही बल्कि पूर्ण कुंभ मेला जैसे ही भव्य समारोह देखने को मिलेगा।

प्रयागराज में 2019 में लगने वाला कुंभ कई मायनो में बेहद खास होगा।इस बार आयोजित होने वाले कुंभ मेले में कई नई चीजें श्रद्धालुओं को देखने को मिलेंगी।खासकर युवाओं के लिए सेल्फी प्वाइंट से लेकर वाटर एम्बुलेंस तक की विशेष तैयारीयां की जा रही है। मेले में इस बार एक अटल कॉर्नर भी बनाया जाएगा, जो वास्तव में एक इंफॉर्मेशन डेस्क होगा।ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार कुंभ मेला में रामलीला का भी आयोजन होगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय बैले कलाकारों का एक समूह प्रस्तुत करेगा।इस विशेष रामलीला आयोजन 55 दिनों तक चलेगा।साथ ही संगम नगरी में तकरीबन 10 एकड़ जमीन पर संस्कृत ग्रामबसाया जाएगा, जहां कुंभ के महत्व और इतिहास के बारे में संपूर्ण जानकारी दी जाएगी।

आईए जानते हैं 2019 कुंभ मेले की शाही स्नान की तारीख
14-15 जनवरी 2019: मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
21 जनवरी 2019: पौष पूर्णिमा
31 जनवरी 2019: पौष एकादशी स्नान
04 फरवरी 2019: मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019: बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
16 फरवरी 2019: माघी एकादशी
19 फरवरी 2019: माघी पूर्णिमा
04 मार्च 2019: महा शिवरात्रि



Wednesday, 17 October 2018

जानिए पंचामृत का महत्व,मंत्र और बनाने की विधि



संदीप कुमार मिश्र : हमारे हिंदू सनातन धर्म में किसी भी पूजा पाठ के बाद भगवान की आरती की जाती है फिर प्रसादस्वरुप सबसे पहले भगवान का पंचामृत दिया जाता है।हमारे हिंदू धर्म में पंचामृत का विशेष महत्व है। इसे बहुत ही पवित्र माना जाता है तथा मस्तक से लगाने के बाद ही इसका सेवन किया जाता है।
पंचामृत ग्रहण करने का मंत्र भी हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है :
पंचामृत मंत्र
पंचामृत सेवन करते समय निम्र श्लोक पढऩे का विधान है :-
अकालमृत्युहरण सर्वव्याधिविनाशनम्।
विष्णुपादोदंक (पीत्वा पुनर्जन्म न) विद्यते।।
कहने का भाव है कि, भगवान विष्णु के चरणों का अमृतरूपी जल सभी तरह के पापों का नाश करने वाला है। यह औषधि के समान है। अर्थात पंचामृत अकाल मृत्यु को दूर रखता है। सभी प्रकार की बीमारियों का नाश करता है। इसके पान से पुनर्जन्म नहीं होता।

आईए जानते हैं पंचामृत बनाने की सही विधि क्या है..
पंचामृत बनाना बहुत ही सरल है, पंचामृत बनाने में आपको गाय का दूध,गाय के दूध की दही,गुड़,शहद, तुलसी दल, गंगाजल,मेवा, मखाने, चिरौंजी, किशमिश की आवश्यकता होगी।जिसे आप तांबे के किसी भी बड़े पात्र में डालकर ठीक से मिला लें,जिससे की सब मिल जाए।
पंचामृत सेवन के आधुनिक वैज्ञानिक लाभ
पंचामृत में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है जिनसे हमारी हड्डियां मज़बूत बनती हैं।
पंचामृत का सेवन दिमाग को शांत और गुस्से को कम करता है।
पंचामृत से हमारा हाज़मा ठीक रहता है और भूख न लगने की समस्या दूर होती है।

ध्यान रखने योग्य बातें -
पंचामृत आप जिस दिन बनाएं उसी दिन खत्म कर दें। अगले दिन के लिए न रखें।
पंचामृत हमेशा दाएं हाथ से ग्रहण करें, इस दौरान अपना बायां हाथ दाएं हाथ के नीचे सटा कर रखें।
पंचामृत को ग्रहण करने से पहले उसे सिर से लगाएं, फिर ग्रहण करें, फिर हाथों को सिर पर न लगाएं।
पंचामृत हमेशा तांबे के पात्र से देना चाहिए। तांबे में रखा पंचामृत इतना शुद्ध हो जाता है कि अनेकों बीमारियों को हर सकता है। इसमें मिले तुलसी के पत्ते इसकी गुणवत्ता को और बढ़ा देते हैं। ऐसा पंचामृत ग्रहण करने से बुद्धि स्मरण शक्ति बढ़ती है।
पंचामृत का सेवन करने से शरीर रोगमुक्त रहता है।
तुलसी रस से कई रोग दूर होते हैं और इसका जल मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है।
पंचामृत अमृततुल्य है। इसका नियमित सेवन शरीर को रोगमुक्त रखता है। तुलसी के पत्ते गुणकारी सर्वरोगनाशक हैं। यह संसार की एक सर्वोत्तम औषधि है।
 (संकलन)

Tuesday, 16 October 2018

48 साल के युवा राहुल गांधी की विगत कुछ वर्षों की शानदार उपलब्धियां



संदीप कुमार मिश्र: इस देश के 48 साल के युवा नेता राहुल गांधी जी ने देश के युवाओं के नेतृत्व का बीड़ा उठाया है।यकिनन राहुल जी ने अब तय कर लिया है कि कुछ कर के मानेगे।जिसकी शुरुआत उन्होने कश्मीर से कुछ साल पहले ही कर दी थी।परिणाम आपके सामने है।कश्मीर के युवा नेता कहे जाने वाले उमर अब्दुल्ला का राहुल जी ने बाकायदे राजनीतिक करियर खत्म कर दिया।उसके बाद यूपी को ये साथ पसंद है कहते हुए अखिलेश यादव को हम साथ साथ हैं कहकर लेकर आगे बढ़े।
परिणाम क्या निकला कि एक वास्तविक युवा नेता का करियर खत्म कर दिया।फिर राहुल बाबा दौड़ते हुए गुजरात पहुंचे,जहां राजनीति में उभर रहे तीन युवा नेता अल्पेश,जिग्नेश और हार्दिक इन तीनो का करियर खत्म करने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं।
ऐसे में जिस भी युवा नेता को राजनीति में टाइम पास के लिए आना है वो राहुल जी के साथ आएँ और मौके का लाभ उठाएं क्योंकि 2019 आने वाला है।देश में चुनावी सरगर्मी बढ़ चुकी है।जनेउ,धोती से लेकर रोली, मोली,और माला प्रयाप्त मात्रा में राहुल जी लेकर चल रहे हैं साथ ही कई ट्रक टोपी और पगड़ी भी मंगवा लिये हैं।समयानुसार बदलने के जो काम आएँगे।इसलिए कोई दिक्कत नहीं होगी।

Monday, 15 October 2018

जीवित्पुत्रिका व्रत( जीतिया,जिउतिया) की क्या है कथा और महत्व ?





विकास गोयल: हमारे सनातन हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत और त्यौहारों को मनाने का विशेष महत्व, उद्देश्य होता है।क्योंकि हमारे सभी तीज त्योहार सामाजिक कल्याण के साथ ही व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े होते है ।ऐसा ही एक त्योहार संतान की रक्षा के लिए माताएं रखती हैं जीतिया व्रत का कहा जाता है। आश्विन मास की कृष्ण अष्टमी तिथि को माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, सेहत और दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखती हैं।इस व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं। कुछ क्षेत्रों में यह व्रत जिउतिया व्रत भी कहा जाता है।

आइये जानते हैं क्या है जीवित्पुत्रिका व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार जीतिया व्रत का संबंध महाभारत से माना जाता है।कहते हैं कि अपने पिता की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिये अश्वत्थामा पांडवों के वंश का नाश करने के अवसर ढूंढता रहता था । ऐसे में एक दिन अवसर पाकर अश्वत्थामा पांडव समझकर सोए हुए द्रौपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी। जिसका बदला लेने के लिए अर्जुन ने अश्वत्थामा को बंदी बना लिया और उससे उसकी दिव्य मणि छीन ली।जिससे अश्वत्थामा का क्रोध और बढ़ गया और उसने उत्तरा की गर्भस्थ संतान पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिसे रोक पाना किसी के लिए भी असंभव था।

ऐसे में भगवान श्री कृष्ण ने अपने समस्त पुण्यों का फल उत्तरा को समर्पित किया। जिससे उत्तरा के गर्भ में मृत संतान को जीवन मिल पाया। मृत्योपरांत जीवनदान मिलने के कारण ही इस संतान को जीवित्पुत्रिका कहा गया।आपको बता दें कि यह संतान कोई और नहीं बल्कि राजा परीक्षित ही थे।तभी से आश्विन अष्टमी को जीवित्पुत्रिका (जीतिया, जिउतिया) व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।
ऐसी और भी कई कथाएं हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है।जिनका मूल उद्धेश्य संतान के लिए माताओं का वात्यल्य है कि मां कैसे अपनी संतान के लिए निरंतन उन्नति और तरक्की का मार्ग प्रशस्त करने लिए ईश्वर से कामना और प्रार्थना करती हैं।

Wednesday, 10 October 2018

गुजरात किसी के बाप का नहीं सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों का है



संदीप कुमार मिश्र: गुजराती इस बात को भली भांति जानता है कि अप्रवासियों का क्या महत्व है,क्योंकि विश्व के तमाम हिस्सों में गुजराती काम धंधे के लिए अप्रवासी के रुप में रह रहे हैं । काम करना और करवाना ये गुजराती बहुत ही अच्छे तरीके से जानता है।इसलिए गुजरात से किसी गैर गुजराती को पलायन के लिए मजबूर किया जाए और खासकर उस कामगार बिरादरी को जिनसे अर्थव्यवस्था और गुजरात संबृद्ध होता है।ऐसा कतई नहीं हो सकता।

मतलब साफ है राजनीति।सत्ता की छटपटाहट क्या होती है ये बात देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस से बेहतर कौन जान सकता है।सत्ता पाने की यही तड़प देश को एक फिर एक ऐसी आग में झोंकने का काम करने की दिशा में आगे बढ़ रही जैसे 1984 में देश झेल चुका है,इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है।एक बार फिर कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

फूट डालो राज करो की नीति पर एक बार फिर काम शुरु हो चुका है और इसके खिलाड़ी और माता पिता कौन रहे हैं देश भलीभांति जानता है।नहीं तो क्या कारण है कि गुजरात जैसे शानदार,शांतिप्रिय राज्य में ऐसी घटना हो जहां से खुद गुजरातीयों का भारी भरकम नुकसान हो।

मेरे परिवार के और मेरे तमाम रिश्तेदार गुजरात में बड़े ही शान से रहते हैं।शानदार काम करते हैं और यहां तक कहते हैं कि भई यहां से तो घर लौटना अब मुश्किल है क्योंकि काम धंधे और रोजगार के लिए गुजरात से बढ़िया देश ही नही विश्व में कोई जगह नहीं है।अहमदाबाद रह रहे मेरे एक भाई ने कहा कि ये सब जो हो रहा है वो कांग्रेस प्रायोजित है,वहीं वापी में रहने वाले एक बड़े भाई ने स्पस्ट कहा कि ये सिवाय राजनीति के कुछ नहीं और यही कांग्रेस की DNA है वरना क्या कारण है कि जो इतने सालों में नही हुआ वो अचानक हो रहा है।एक अन्य बड़े बुद्धिजीवि भले मानुस ने यहां तक कह दिया कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है,संभव है कि 2019 आते-आते कांग्रेस देश के गली-गली में बैमनष्यता का भाव पैदा कर देगी।।

नहीं तो क्या कारण है है कि कांग्रेस का पाला हुआ गुर्गा विधायक अल्पेश ठाकोर खुलेआम बिहारी कामगारों और यूपी के कामगारों को धमकी देता है कि एक हफ्ते में गुजरात छोड़कर चले जाओ नहीं तो घर से निकालकर मारेंगे ।उसे मालुम नहीं कि उत्तर भारतीय अपने पर आ गए तो तुम्हें तुम्हारी जमी पर ही ऐसे उखाड़ देंगे जैसे देस भर से कांग्रेस को उखाड़ कर फेंक दिए।अफसोस तो तब और होता है जब कांग्रेस के तथाकथित युवा अध्यक्ष श्रीमान राहुल गांधी जी अल्पेश ठाकोर को बर्खास्त करने की बजाय बिहार का प्रभारी बना दिया।मतलब साफ है कि एक तरफ भगाओ और दूसरी तरफ सहलाकर सहानुभूति पाओ और सत्ता हासिल करो।शर्म आनी चाहिए ऐसी राजनीति पर।

खैर बीजेपी भी इससे अछूती नहीं हैं। नहीं तो क्या कारण है कि गुजरात की सरकार अल्पेश ठाकोर और ठाकोर सेना के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं करते।अल्पेश ठाकोर क्यों अभी तक सलाखों के पीछे नहीं हैं।आखिर देश को बांटने वाले ऐसे खुलेआम कैसे घूम रहे हैं औऱ नफरत का बीज बो रहे हैं।
कान खोलकर सुन लें वो लोग जो देश को बांटने का काम कर रहे हैं कि हिन्दुस्तान सवा सौ करोड़ भारतीयों लोगों का है,किसी अल्पेश ठाकोर के बाप का नहीं है,हम इस देश के किसी भी हिस्से में स्वतंत्र रुप से डंके की चोट पर रहेंगे।किसी की हिम्मत नहीं है कि कोई रोक दे।क्योंकि ये देश संविधान से चलेगा किसी की गुंडई से नहीं।    
       

Saturday, 6 October 2018

शारदीय नवरात्रि 2018:मां दुर्गा के सिद्ध नवार्ण मंत्र से होगी आपकी सभी मनोकामना पूरी, जाने कैसे ?



संदीप कुमार मिश्र: मां दुर्गा की आराधना साधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र।कहते हैं कि शारदीय नवरात्र जनसामान्य को मनोवांछित फल देने वाला है।ऐसे में आईए जानते हैं कि माता शेरावाली के एक ऐसे अचूक मंत्र के बारे में जो आपकी सर्वमनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है।
माता शेरावाली की नवरात्रि में साधना करने वाले साधक को नित्य नवार्ण मंत्र का जाप 3 माला अवश्य करना चाहिए।
=:नवार्ण मंत्र:=
'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'
कहते हैं कि नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध मां दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। ग्रहों दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में शक्ति की आराधना की जाती है और इन ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवार्ण मंत्र किसी संजिवनी से कम नहीं है।

आइए जानते हैं मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र और उनसे संचालित ग्रह  
1 नवार्ण मंत्र के नौ अक्षरों में पहला अक्षर ऐं है, जो सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। ऐं का संबंध मां दुर्गा की पहली शक्ति शैलपुत्री से है, जिसकी उपासना 'प्रथम नवरात्र' को की जाती है।
 
2 दूसरा अक्षर ह्रीं है, जो चंद्रमा ग्रह को नियंत्रित करता है। इसका संबंध मां दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी से है, जिसकी पूजा दूसरे नवरात्रि को की जाती है।

3 तीसरा अक्षर क्लीं है, चौथा अक्षर चा, पांचवां अक्षर मुं, छठा अक्षर डा, सातवां अक्षर यै, आठवां अक्षर वि तथा नौवा अक्षर चै है। जो क्रमशः मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु तथा केतु ग्रहों को नियंत्रित करता है।  

इन अक्षरों से संबंधित दुर्गा की शक्तियां क्रमशः चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी तथा सिद्धिदात्री हैं, जिनकी आराधना क्रमश: तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, आठवें तथा नौवें नवरात्रि को की जाती है। 

इस नवार्ण मंत्र के तीन देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं तथा इसकी तीन देवियां महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती हैं,मां दुर्गा की यह नौ शक्तियां साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों की प्राप्ति में सहायक होती हैं।
  
हम सब जानते हैं कि नवरात्रि का पर्व नौ शक्ति रुपी देवियों के पूजा के लिए है। यह सभी देवी रूप अपने आप में अतुल्य शक्ति और भक्ति के भंडार है।इस चराचर जगत में अच्छाई के लिए माँ का कल्याणकारी रूप सिद्धिदात्री , महागौरी आदि है, और इसी के साथ संसार में उत्पन्न हो रही बुराई के लिए माँ कालरात्रि , चन्द्रघंटा रूप धारण कर लेती है।


अब जाने वे बीज मंत्र जो इन नौ देवियों को प्रसन्न करते है।
नौ देवीयों का पृथक बीज मंत्र

1. शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:
2. ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
3. चन्द्रघंटा : ऐं श्रीं शक्तयै नम:
4. कूष्मांडा ऐं ह्री देव्यै नम:
5. स्कंदमाता : ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
6. कात्यायनी : क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:
7. कालरात्रि : क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:
8. महागौरी : श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
9. सिद्धिदात्री : ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

।।जय माता दी।।