Thursday, 17 August 2017

सड़क पर नमाज सही तो थाने में जन्माष्टमी और कांवड़ पर डीजे क्यों नहीं ?- योगीराज

संदीप कुमार मिश्र: सड़क पर नमाज भी अदा होगी और डमरू भी बजेगा, माइक भी लगेगा और बगड़ बम बम का जयकारा भी लगेगा।मंदिर में जन्माष्टमी भी मनेगी जनाब।कन्हैया का जन्मोत्सव भी खूब धूमधाम से मनेगा....।कांहे लगेगी रोक....बताइए!
दरअसल उत्तर प्रदेश के थानों में जन्माष्टमी उत्सव को लेकर ये बात कही सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने ।योगी जी का कहना था कि अगर वो सड़कों पर ईद के दिन नमाज पढ़ने पर रोक नहीं लगा सकते, तो थानों में जन्माष्टमी का उत्सव कैसे रोक सकते हैं।अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा का जिक्र करते हुए भी कहा कि कांवड़ यात्रा में बाजे नहीं बजेंगे, डमरू नहीं बजेगा, माइक नहीं बजेगा, तो कांवड़ यात्रा कैसे होगी ? यह कांवड़ यात्रा है, कोई शव यात्रा नहीं, जो बाजे नहीं बजेंगे।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए योगी जी ने कहा कि उन्होनें अधिकारियों से सभी धार्मिक स्थलों पर माइक बैन करने का आदेश पारित करने को कहा था।जिसे लागू करना संभव नहीं था,इसपर उनका कहना था कि ऐसे में कांवड़ यात्रा में भी माइक पर बैन कैसे लगाया जा सकता है।ये यात्रा तो ऐसे ही चलेगी।बल्कि उन्होनें ये भी कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान हेलिकाप्टर से पुष्प वर्षा भी होनी चाहिए...ना जाने किस भेष में भोले घूम रहे हों...।सही बात है भई...ना जानें किस रुप में महादेव की कृपा बरस जाए।बस ध्यान रहे तो इतना किसी भी शोर में कोई आह,क्रंदन दब ना जाए।
खैर सवाल उठता है कि धार्मिक सद्भावना को बनाए रखने के लिए क्या जरुरी नहीं कि धार्मिक स्वतंत्रता का दूरुपयोग ना हो...और किसी भी प्रकार के अतिउत्साह से बचा जाए।कृष्ण का जन्मोत्सव भी जरुरी है,ईद की नमाज भी और बम बम का जयघोष भी...प्रभातफेरी भी जरुरी है,जिजस को याद करना भी...धर्मनिरपेक्ष देश में सभी को समान स्वतंत्रता का अधिकार है...बशर्ते किसी अन्य को आपके अभिव्यक्ति से कोई हानी ना पहुंचे।

सियासत का आनंद तो तब है जनाब जब सियासत में धर्म का सम्मान हो ना कि धर्म पर हो सियासत।हिन्द का सुंदर स्वरुप तब साकार होगा,जब सबके दिल में प्यार बसे,जिस धरा पर हर कोई सुखी हो।जात-पात का भेद समाप्त हो जाए,भूख और गरीबी से कोई ना परेशान हो।जहां शांति से खुदा की इबादत मस्जिद में हो और मंदिर में भगवान की आरती।तभी तो भाव राग और ताल के साथ भारत का निर्माण हो सकेगा।
हम तो नव भारत के निर्माण की बात करते है,ऐसे में क्या जरुरी नहीं कि नव भारत का स्वरुप उस उपवन की तरह हो जहां पर हर रुप रंग और आकार के पुष्प हों।आईए मिलकर बनाएं एक ऐसा ही उपवन।भारत माता की जय।।