Thursday, 5 May 2016

अक्षय तृतीया महात्म्य

न क्षय: इति अक्षय:’ कहने का भाव है कि-जिसका क्षय नही होता वही अक्षय है।

संदीप कुमार मिश्र: कहते हैं कि अक्षय तृतीया का कभी क्षय नहीं होता और इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता पार्वती हैं।यानि कि इस पावन अवसर पर जो भी नर-नारी सुख शांति और सफलता की कामना करता है उसे माता का व्रत रखना चाहिए और ध्यान करना चाहिए।
दरअसल अक्षय तृतीया के इस महान पर्व को हमारे देश में अनेकानेक नामों से जाना जाता है। अखतीज और वैशाख तीज के नाम से भी देश के कई प्रांतो में इसे मनाया जाता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर स्नान-ध्यान, दान,पूजा-पाठ का विधान हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है।कहा जाता है कि ऐसा करने से धनधान्य की देवी की कृपा हम पर सदैव बनी रहती है।
कहते हैं कि धर्म की रक्षा हेतु भगवान श्री विष्णु के तीन शुभ रुपों का अवतरण भी इस धराधाम पर अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन के संबंध में मान्यता है कि हर प्रकार के अटके हुए काम, या फिर व्यापार में निरंतर हो रहा घाटा या फिर किसी कार्य के लिए कोई शुभ मुहुर्त नहीं मिल पा रह हो तो उनके लिए कोई भी नई शुरुआत करने के लिए अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ है।वहीं अक्षय तृतीया में सोने के आभूषण खरीदना भी बहुत शुभ माना गया है।
पौराणिकता और अक्षय तृतीया का महत्व
अक्षय तृतिया के संबंध में कहा जाता है महाभारत के दौरान पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण से अक्षय पात्र लिया था।वहीं इसी दिन सुदामा और कुलेचा भगवान श्री कृष्ण के पास मुट्ठी - भर भुने चावल प्राप्त करते हैं।इस तिथि में भगवान के नर-नारायण, परशुराम, हयग्रीव रुप में अवतरित हुए थे।इसी कारण अक्षय तृतीया के दिन इन अवतारों की जयन्तियां भी मनायी जाती है।कहा ये भी जाता है कि त्रेता युग की शुरुआत भी इसी दिन से हुई थी। इसी कारण से यह तिथि युग तिथि भी कही जाती है।इसी दिन प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनारायण के कपाट भी खुलते हैं।वहीं  मथुरा-वृन्दावन में श्री बांके बिहारी जी के मंदिर में केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं।
अक्षय तृतीया को दान पुण्य विशेष फलदायी
अक्षय तृतीया में पूजा, जप-तप, दान स्नानादि शुभ कार्यों का विशेष महत्व रहता है। आज के दिन माता पार्वती जी का पूजन भी साधक को करना चाहिए।इस पावन अवसर पर पतित पावनी गंगा में स्नान करने से विशेष फल की प्राप्ती होती है।अक्षय तृ्तिया के दिन गर्मी की ऋतु में खाने-पीने, पहनने आदि के काम आने वाली और गर्मी को शान्त करने वाली सभी वस्तुओं का दान करना शुभकारी माना गया है। साथ ही इस दिन जौ, गेहूं, चने, दही, चावल, खिचडी, ईश (गन्ना) का रस, ठण्डाई व दूध से बने हुए पदार्थ, सोना, कपडे, जल का पात्र आदि दान करना चाहिए।


अक्षत तृतीया पर व्रत एवं पूजा विधान
अक्षय तृ्तीया के खास अवसर पर व्रत साधक को अवस्य करना चाहिए। इस दिन को व्रत-उत्सव और त्योहार तीनों ही श्रेणी में शामिल किया जाता है। इसलिए इस दिन जो भी धर्म के कार्य किए जाते हैं उनका लाभ अवश्य प्राप्त होता है।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान इत्यादि नित्य कर्मों से निवृत होकर व्रत या उपवास करना चाहिए और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र पूजा घर में स्थापित कर पूजन करना चाहिए।और भगवान विष्णु के सस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।सुख शांति तथा सौभाग्य समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन भी अवश्य करना चाहिए।
अंतत: अक्षय तृतीया पर पर परम पिता की कृपा आप पर बनी रहे और ये महान पर्व,उत्सव आपके जीवन में उन्नती और तरक्की लेकर आए।हम तो यही कामना करते हैं।।सनातन धर्म की जय हो।।