Tuesday, 12 April 2016

चैत्र रामनवमी महात्म्य


नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता |
मध्य दिवस अति सीत न धामा , पावन काल लोक विश्रामा ||
संदीप कुमार मिश्र: पवित्र चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जगत के उद्धार के प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतार इस धराधाम पर हुआ।भगवान राम के  जन्मदिन के सुअवसर पर ही चैत्र शुक्ल मास के नवमी तिथि को रामनवमी का विशेष पर्व देस भर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। 

हमारा देश भारतवर्ष पर्वों,त्होहारों का देश है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को रामनवमी का त्यौहार देशभर में नवमी रुप में मनाया जाता है।रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। हिंदु धर्म शास्त्रों के अनुसार इस शुभ तिथि को आस्थावान लोग रामनवमी के रुप में मनाते हैं।यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।नवमी के पावन अवसर पर लोग पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य के भागीदार होते है।

चैत रामनवमी के सुअवसर पर हमें पूजन शुद्ध और सात्विक रुप से करना चाहिए।हमें इस दिन प्रात:काल नित्यकर्म,स्नान से निवृत होकर भगवान राम का स्मरण करते हुए व्रत एवं उपवास का पालन करना चाहिए।देशभर में साधकों का मंदिरों में तांता लगा रहता है।भगवान राम का संपूर्ण जीवन ही लोक कल्याण को समर्पित रहा है।आज के दिन राम जी कथा कहने और सुनने से भी मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है। जे सकाम नर सुनहीं जे गावही,सुख संपत्ती नाना विधि पावहिं।

श्रीराम चन्द्र जी महाराज का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी तिथि के दिन ही चक्रवर्ती नरेश राजा दशरथ जी महाराज के घर में हुआ था।जिसके बाद संपुर्ण वातावरण राममय हो गया था।रोगशोक का नाश हो गया था,संपूर्ण सृष्टि आनंदित  उठी थी। 
चहुंओर वातावरण में आनंद छा गया था,प्रकृति भी मानो प्रभु श्री राम का स्वागत करने मे ललायित हो रही थी।रधुकुल नंदन मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने इस धराधाम से राक्षसो का संहार कर रामराज्य की स्थापना की थी।

रामनवमी के त्यौहार का महत्व हिंदु धर्म सभ्यता में विशेष महत्व रखता है। इस पर्व के साथ ही मां दुर्गा के नवरात्रों का समापन भी होता है।पौराणीक मान्यता है कि भगवान श्रीराम जी ने भी शक्ति की उपासना की थी और उनके द्वारा कि गई शक्ति पूजा से ही धर्म युद्ध में विजय की प्राप्ति की थी। इस प्रकार इन नवरात्र और नवमी का महत्व और भी अधिक बढ जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस की रचना का आरंभ भी किया था। रामनवमी का व्रत मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करने वाला और शुभ फल प्रदान करने वाला है।