Wednesday, 13 January 2016

भारत-पाक संबंध में सुधार: मोदी-नवाज की शराफत की असर परीक्षा



संदीप कुमार मिश्र: जिस प्रकार से भारत के पीएम नरेंद्र मोदी इतिहास रचते हुए अचानक पाकिस्तान चले जाते हैं और अपने समकक्ष पाक पीएम नवाज को जन्म दिन की बधाई देते हैं,इससे विश्व समुदाय की नजरें दोनो देशों पर टिक जाती हैं।लेकिन यात्रा के ठीक एक हफ्ते के अंदर ही जैसे हमारे देश के पठानकोट में एयरबेस पर आतंकी हमला होता है तो नजरें पाकिस्तान पर टिक जाती हैं।दरअसल अब भारत और पाकिस्‍तान दोनों देश के मुखिया के लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर है।

दरअसल हम सब जानते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर को लाहौर जाकर नवाज शरीफ से मुलाकात करके एक बड़ी पहल की। दोनों पीएम शांति प्रक्रिया को नए तरीके से शुरू करने के लिए हामी भरी।वहीं दोनों के बीच शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने जैसे तमाम खतरों पर भी विमर्श हुआ।दोनों देश के मुखिया ने एक दूसरे को भरोसा दिलाया कि भारत या पाकिस्‍तान पर किसी तरह का हमला होने की स्‍थिति में वे बातचीत को पटरी से नहीं उतरने देंगे।लेकिन जैसा सोचा था, वही हुआ। लाहौर मीटिंग के कुछ दिन बाद ही पठानकोट पर हमला हुआ और इसके साथ ही दोनों प्रधानमंत्रियों का असल परीक्षा शुरू हो गई।

भारत ने कुछ पाकिस्‍तान के कुछ आतंकी संगठन को हमले का जिम्मेदार हराया, लेकिन पाक सरकार पर कोई दोष नहीं सीधे तौर पर नही मढ़ा। वहीं, पाकिस्‍तान ने न केवल पठानकोट हमले की निंदा की, बल्‍क‍ि इसे शांति प्रक्रिया के खिलाफ एक साजिश भी करार दिया।जैसा की हर बार बयानबाजी होती रही है वैसा इस बार नहीं हुआ।भारत के पीएम ने अपने समकक्ष नवाज शरीफ को फोन करके साफ साफ कहा कि वे अगले कुछ घंटों में हमले के मास्‍टरमाइंडों के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं।इस पर नवाज ने ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्‍होंने भारत सरकार की ओर से बिना किसी सबूत पाक सरकार पर दोषारोपण न करने को लेकर दिखाई गई परिपक्‍वता की भी तारीफ की।

दरअसल नवाज शरीफ इस बात को अच्‍छी तरह से जानते हैं कि अगर पठानकोट हमले के मास्‍टरमाइंड के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो मध्‍य जनवरी में दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्‍तर की बातचीत शुरू होना मुश्‍किल है। ऐसे में लगता है कि नवाज शरीफ पठानकोट हमले को खुद के लिए सीधी चुनौती के तौर पर देख रहे हैं। उन्‍होंने स्‍थानीय हालात के बारे में मालुम है, लेकिन यह भी भरोसा है कि अगर आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत मिले तो विपक्षी पार्टियां भी उनका साथ देंगी। इतिहास में झांकने की हम कोशिश करें तो जब भी इस तरह के आतंकी हमले पाकिस्तान की तरफ से हुए हे तो पाकिस्‍तान भारत के लिए हमेशा ही दुखद साबित होता रहा है।इसलिए पाकिस्‍तान के सामने बेहद अहम मौका है,कि वो कुछ ठोस कदम उठाकर भारतीय जनता का दिल जीत ले। ऐसा करने से भारत के सामने एक बार विश्‍वनीय छवि बनने के बाद नवाज शरीफ भी पीएम मोदी से कई मुद्दों पर बात कर सकते हैं।कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान के पीएम नवाज अगर शराफत दिकाते हुए पठानकोट के दोषीयों के खिलाफ कार्यवाही करते विश्व पटल पर पाक की आतंकी छवी से उबर सकते है बल्कि भारत के साथ एक मधुर संबंध बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।


क्योंकि पड़ोसी नहीं बदला जा सकता।लेकिन सोच जरुर बदली जा सकती है।पाकिस्तान को अपने देश के विकास के लिए सबसे बड़ा और जरुरी कदम है कि अपनी सरजमी पर पल रहे आतंकी संगठनो को नेस्तनाबूत करे,और मानवता की रक्षा करे।किसी भी देश का विकास तभी संभव है जब वहां की यूवा पीढ़ी के बाथ में बंदूक की बजाय कलम हो।