Wednesday, 6 January 2016

पठानकोट आतंकी हमले के चश्मदीद राकेश कुमार की जुबानी



संदीप कुमार मिश्र : आखिरकार आतंकियों के मनसूबों को हमारे जाबांज जवानो ने नाकाम कर दिया।जिसमें हमारे सात जवान शहीद हो गए।उन्हें देश नमन करता है,उनकी शहादत को सलाम करता है।लेकिन इस हमले में एक शख्स ऐसा भी था,जो चश्मदीद है आतंक के इस गुनाह का। वो दर्द में है,पीड़ा से कराह रहा है,लेकिन उसकी आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है।आखिर कैसे आए आतंकी पठानकोट..?सब कुछ राकेश कुमार जानता है..।

दरअसल पठानकोट में आतंकियों ने हमले से पहले एयरबेस पर सबसे पहले पंजाब के एसपी सलविंदर सिंह की कार छीन लिया था।आपको बता दें कि एसपी सलविंदर सिंह के साथ उनकी कार में ही बैठा था एसपी का दोस्त राकेश कुमार ।जिसके साथ आतंकियों ने सबसे पहले उसके गले पर चाकू से वार कर मरा समझकर खेत में फेंक दिया था।

राजेश कुमार का कहना है कि गाड़ी वही ड्राइव चला रहा था। जब गाड़ी कोलियां गांव के पास पहुंची तो आर्मी की वर्दी पहने चार आतंकियों ने उन्हें रुकने के लिए हाथ दिया। आर्मी की वर्दी देखकर उसने यह सोचते हुए ब्रेक लगा दिया कि शायद चैकिंग के लिए रोका जा रहा है।लेकिन जैसे ही उसने खिड़की का शीशा नीचे किया, आंतकियों ने उसकी कनपटी पर गन लगा दी, और जबरन अंदर दाखिल हो गए।और आतंकियों ने एसपी सलविंदर सिंह का हाथ बांधकर उन्हें पिछली सीट पर बैठे उनके रसोइए मदनलाल के साथ पिछली सीट पर बैठा दिया।जिसके बाद राकेश और दहशत में आ गया।

वहीं राजेश कुमार का कहना था कि गाड़ी में बैठने के बाद आतंकी आपस में पंजाबी में बात करने लगे कि पहले जिसकी कार छीनी थी, उसे तो मार दिया। अब इनलोगों का क्या करें। आतंकियों का ये भी कहना था कि वह अपने टारगेट तक पहुंचने में पहले ही एक दिन लेट हो गए हैं,लेकिन अब वो ज्यादा समय नहीं गंवा सकते।खैर,राजेश का कहना था कि आतंकियो ने  जब सलविंदर सिंह और उनके रसोईए मदन लाल को गाड़ी से नीचे फेंक दिया फिर आतंकियों ने राजेश से पूछा कि यह बंदा कौन था तो उसने कहा कि यह गुरदासपुर के पूर्व एसपी व पीएपी के असिस्टेंट कमांडेंट सलविंदर सिंह थे।

ये जानने के बाद आतंकियों ने राजेश से पूछा कि, "एसपी कौन होता है? जिसके जवाब में राजेश ने कहा कि एसपी पुलिस का बड़ा अफसर होता है तो चारों आतंकी हैरान रह गए। इसके बाद उन आतंकियों में से एक ने पाकिस्तान में किसी को फोन किया और बताया कि जो गाड़ी उन्होने छीनी थी, वह बड़े पुलिस अफसर की थी। इस पर दूसरी तरफ से उन्हें सलविंदर सिंह को मारने के निर्देश दिए गए।"ये बातें राजेश बड़े ध्यान से सुन रहा था।

"फोन पर मिले निर्देशों के बाद आतंकियों ने गाड़ी वापस मुड़वाई और उस जगह पर फिर पहुंचे जहां सलविंदर सिंह को फेंका गया था। वहां जब ढूंढऩे पर सलविंदर सिंह नहीं मिले तो आतंकी गुस्से से झल्ला गए और वापस गाड़ी में बैठकर राजेश को गाड़ी अकालगढ़ की ओर मोड़ने को कहा।और फिर अकालगढ़ पहुंचकर आतंकियों ने गाड़ी खेतों में रुकवा दी,जिसके बाद राजेश के  गले पर चाकू से जानलेवा वार किया।

राजेश कुमार का कहना था कि आतंकियों ने उसे मरा हुआ समझकर एयरफोर्स की बाउंड्री वाल की ओर भाग निकले।आतंकियों के भाग जाने के थोड़ी देर बाद राजेश ने आंखें खोली और हिम्मत जुटाकर हाथ खोले। और किसी तरह गुरुद्वारे जा रहे एक आदमी को रोककर उसके फोन से अपने जीजा राजकुमार को कॉल की। उसके बाद राजकुमार ने इस वारदात की सूचना पुलिस को दी।


अंतत: राजेश कुमार की जान तो बच गयी,लेकिन तमाम ऐसे सवाल हैं जिनकी तह तक जाना अब भी बाकी है,कि आखिर आतंकियों ने एसपी को क्यों छोड़ा।इसके साथ ही अनगिनत सवाल सवाल लोगों के जहन में है,जिनका जवाब हर हाल में चाहिए..कि क्या कोई देश का गद्दार भी इस हमले में शामिल था...या फिर हुई कोई भारी चूक...?इन्तजार हैं इन सभी सवालों का,क्योंकि तभी पठानकोट में हुए शहीदों को मिल पाएगी सच्ची श्रद्धांजलि...।