Monday, 4 January 2016

पाकिस्तान से शराफत की उम्मीद, बेमानी है साब...इतिहास गवाह है



संदीप कुमार मिश्र:  बार-बार उम्मीद करना,वो भी ऐसे मुल्क से जिसका ना तो कोई इमान हो ना ही कोई धर्म।जिसका मानवता से सरोकार कम,और इन्सानियत के दुश्मन के रुप में ज्यादा हो।ऐसा ही मुल्क है हमारा पड़ोसी पाकिस्तान।जिसे हम चाहकर भी नहीं बदल सकते।

पंजाब के पठानकोट वायुसेना बेस पर यूनाइटेड जेहाद काउंसिल (UJC) ने हमला किया।आपको बता दें कि आतंकी संगठनो का ये एक समुह है, जिसने हमले की जिम्मेदारी ली है।जैसा कि पहले अंदेशा लगाया जा रहा था कि जैश ए मोहम्मद के आतंकवादियों के हमला किया है।लेकिन इस हमले ने ने एक बार फिर भारत पाकिस्तान के बीच बन रहे रिश्तो में कड़वाहट तो जरुर पैदा कर दी है।जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर में रुक कर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई और नवासी के निकाह में शामिल होकर दुनिया को चौंका दिया था। एक बार तो ऐसा लगा कि दोनों देशो के संबंधो में अच्छे दिन की आस बढ़ गयी थी।

लेकिन पठानकोट में हुए आतंकी हमले ने ये बता दिया कि नापाक पड़ोसी से रिश्ते तब तक  नहीं बेहतर हो सकते जब तक पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार,अपनी सेना और कुख्यात खुफिया विभाग ISI आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करती।तब तक भारत से संबंधों में बेहतरी की उम्मीद करना बेमानी ही होगी क्योंकि इतिहास तो यही कहता है।

अब बात 1999 में हुए कारगिल युद्ध की हो,या फिर 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों की हो, या 2008 के अहमदाबाद और सूरत में हुए आतंकी हमले की हो , जयपुर, बैंगलौर, दिल्ली, 26/11 मुंबई, जर्मन बेकरी (पुणे), झावेरी बाज़ार, गुरदासपुर, उधमपुर, नियंत्रण रेखा पर गोली बारीकी हो।इन आतंकियों के रिश्ते और तार तो पाकिस्तान से ही जुड़े हैं।कितने सबूत दिए गए,जिंदा और मुर्दा,प्रमाणित भी किया गया,लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।

हाफिज़ सईद से लेकर मसूद अज़हर,दाउद इब्राहिम ऐसे ना जाने कितने दरिंदे बेखौफ होकर पाक की नापाक सरजमीं पर रह रहे हैं।जिसपर एक नहीं एक हाजार सबूत देने के बाद भी पाकिस्तान खामोश बैठा है।

दोस्तों आपको याद होगा लोकसभा चुनाव से पहले का अपने लोकप्रिय प्रधानमंत्री जी का वो बयान।जिसमें उन्होने कहा था कि,गोलीबारी के बीच बातचीत सुनाई नहीं देती। वो पाकिस्तान को भली भांति समझते हैं और इसीलिए पाकिस्तान समझ जाए कि आतंकवाद नहीं चल सकता।यकिनन देश की सत्ता पर काबिज होने के बाद पीएम ने इस बात के साफ संकेत भी दिए।आपको याद होगा जब पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की थी तो भारत ने न केवल नियंत्रण रेखा पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी इंट का जवाब पत्थर से दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान हिल गया और नियंत्रण रेखा शांत हुई।ये संदेश था कि अब गोली का जवाब गोली से ही देंगे।वरना शांती बनाए रखने में सहयोग दो।

लेकिन अपनी हरकतों से बाज ना आने वाला पाकिस्तान और उसके पाले हुए आतंकवादियों नें  हमले तेज कर दिए।जिसके बाद  गुरदासपुर, उधमपुर, उत्तर कश्मीर के शहरो और कस्बो पर आतंकी हमले हुए।जिसमें कई सेना के जवान शहीद हुए।बावजूद इसके भारत की तरफ से पाकिस्तान को कोई करारा जवाब नहीं दिया गया।

इतना ही नहीं पाक की खुफिया एजेंसी ISI लगातार महिलाओं के जरिए हमारी सेना की जानकारी लेने की कोशिश कर रही है। आतंकवादी एक के बाद एक कई हमले कर रहे हैं और हम सिर्फ कड़ी कार्यवाही,मुंहतोड़ जवाब देने की बात कर रहे हैं।

दरअसल मुंहतोड़ जवाब का मतलब क्या है ? इस बात में कोई शक नहीं कि भारत युद्ध नहीं चाहता और पाकिस्तान युद्ध करने में सक्षम नहीं है।आपको ये भी बता दें कि पाकिस्तान की सेना अपने पश्चिमी सीमा पर आतंकियों से लड़ रही है। पाकिस्तान के पास अभी हथियारो की, गोला बारूद की कमी भी है। उसके विमान और युद्धपोत, युद्ध के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं है। जिसकी वजह से कहीं ना कहीं आतंकियो के द्वारा भारत में दहशतगर्दी फैलाना पाकिस्तान की कारगर रणनीति हो सकती है।क्योंकि पाकिस्तान खुद से ज्यादा हमारी ताकत और साहस को जानता है।हमारे जवानो के सामने उसके हौंसले पस्त हो जाते हैं,तभी तो छद्म युद्ध का सहारा लेकर आकंतियों को भारत में भेजता है पाक।

इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता,और हमें मान भी लेना चाहिए कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी(ISI)और सेना हमें अपना दुश्मन मानती है औ मानती आयी है।ऐसे में मित्रता की बात जरुर नवाज शरीफ करते हैं,शांती चाहते हैं लेकिन उनकी सेना हर संभव यही प्रयास करती है कि दोनो देशों के संबंध मधुर ना हो पाएं।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक यूं ही हमारे जवान शहीद होते रहेंगे,यूं ही हम मातम मनाते रहेंगे।क्या कोई कारगर और ठोस रणनीति नहीं बन सकती जिससे आतंकियों को समुल रुप से नष्य किया जा सके।क्या अब ऐसा नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी को ये तय करना जरुरी हो गया है कि उन्हे पाकिस्तान से मधुर संबंध रखने है या फिर सुरक्षित भारत को।

ये उम्मीद भी हम पीएम मोदी से ही कर सकते हैं क्योंकि उनमें निर्णय लेने की क्षमता है।नहीं चाहिए किसी दूसरे देश की वाहवाही हमे।हमें तो अपना सुरक्षित भारत चाहिए।जिसके लिए पाकिस्तान को स्पस्ट और दो टूक कहना होगा कि ठोस सबूतो के आधार पर या तो पाकिस्तान कार्रवाई करे या फिर दोस्ती का दिखावा छोड़ दे।क्योंकि भारत अब आतंकवाद बर्दास्त नहीं करेगा।


अंतत: दोस्तों अब तो हमें एक बात जरुर समझ लेनी चाहिए कि पाकिस्तानी सेना और ISI भारत को अपना दुश्मन मानती हैं और रहेंगी।पाकिस्तानी सेना बार-बार पीठ में खंजर भोंक रही है। इसलिए आतंक के खिलाफ कदम भारत को ही उठाने होंगे और ये कार्य हर सूरतेहाल करना ही होगा,मानवता की रक्षा के लिए।