Monday, 18 January 2016

स्याही से सत्ता तक, केजरी स्टाईल है जी...!


संदीप कुमार मिश्र: हमारे देश में सियासत का हर दौर में तौर तरीका बदलता रहा है।जैसा कि इस देश की जरुरत रही है..कांग्रेस की स्टाइल शायद सबसे प्रभावी रही,तभी वो भारत में साठ दशक तक राज करती रही। जनता जागरुक हुई,कांग्रेस से ऊबकर सत्ता की चाभी जनता ने बीजेपी को थमा दी।यहां गौर करने वाली बात ये है कि समय बदल,21 वीं सदी का हाईटेक चुनाव प्रचार प्रभावी कारगर साबीत हुआ और घोटाले, भ्रस्टाचार, महंगाई से मुक्ति की आस में जनता नें केंद्र की चाभी बीजेपी को सौंप दी...लेकिन वहीं आंदोलन से निकली एक और पार्टी.. जिसे आप,हम सब...आम आदमी पार्टी के नाम से जानते हैं...जो शायद इतने कम समय में ऐसा शानदार मकाम सियासत में पाने वाली इकलौती पार्टी है...।

दरअसल आम आदमी पार्टी की सियासत का स्टाइल बीजेपी से भी अलग था...अलग कई मायनो में....एक तो इस पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं था और पाने के लिए सब कुछ...। इसलिए इस पार्टी ने सबसे पहले सत्ता पाने की शुरुआत आंदोलन से की और मोहरा बनाया अन्ना हजारे को...और देश तो नहीं कहूंगा...लेकिन दिल्ली के लोगों के जहन में ये बात जरुर भर दी की इस देश के इकलौते 24 कैरेट इमानदार,शरीफ वही हैं।जब इस बात को साबित करने में कामयाब हो गए तब जाकर पार्टी बनाई आम आदमी पार्टी जिसमें देश के चुनिंदा बुद्धिजीवियों को शामिल किया गया...जिससे अपनी साफगोई दिखाई जा सके...और विपक्षीयों पर आरोप लगाया जा सके...।और हुआ भी यही...।दिल्ली चुनाव में अर्ध सत्ता हासिल कर ही ली आम आदमी पार्टी ने।लेकिन अधूरी सत्ता पार्टी को मंजूर नहीं थी।इसलिए आरोप लगाने का सिलसिला और तेज किया गया।

केंद्र की सत्ता बदल चुकी थी...अब मोदी सरकार का उदय देशभर में हो चुका था..।जिस लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी हार कर भी जीत गई थी।क्योंकि लोकसभा का चुनाव पूरे देश में लड़ने का मतलब इस पार्टी का सिर्फ यही था कि हर कोई इस पार्टी और इसके कुछ भी बोलने वाले मुखिया अरविंद केजरीवाल को ठीक से जान जाए...शायद इसी रणनीति का हिस्सा था दिल्ली में शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ना।खैर लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली के चुनाव में प्रचार-प्रसार,रणनीति,कुटनीति जोरों पर थी....एक से बढ़कर एक बयान...इमानदारी की मिसालें...देश भर से वालेंटियर से लेकर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा...इस पार्टी ने दिल्ली में किया..।

यहीं से शुरु हुआ स्याही कांड...थप्पड़ कांड...और भी ना जाने कैसे कैसे कांड...।मीडिया को भी टीआरपी बटोरने का नया चेहरा मिल गया था जिसका नाम था...अरविंद केजरीवाल..जिसपर विपक्ष के आरोप तो कुछ नहीं कर पाए...लेकिन केजरी प्रहार से कोई नहीं बच पाया...एक के बाद एक कई शब्दों के नीचले स्तर पर पहुंचकर केजरी ने दिल्ली की सियासत में इतिहास रच दिया,और प्रचंड बहुमत की सरकार बनायी....प्रचंड इस मायने में की देश की दो बड़ी पार्टीयों को कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा...।

केजरी साब के हाथ में दिल्ली की सत्ता तो मिल गई,लेकिन चुनौती थी इसे चलाना...क्योंकि किसी भी जिम्मेदारी से भागने और सिर्फ आंदोलन करने का पुराना इतिहास पीछा नहीं छोड़ रहा था...और अब उनकी पार्टी में उनकी तानाशाही शुरु हो गयी थी...जिससे आजिज आकर तमाम बड़े लोगों ने पार्टी छोड़ दी...उन लोगों के नाम तो आप जानते हीं होगें..।अब साब दिल्ली की सत्ता चलाना आसान तो था नहीं,क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते दिल्ली की निर्भरता ज्यादातर केंर पर ही बनी है,इसलिए फिर एक बार वही तकनीक आरोप लगाओ...और खुब शब्दों की मर्यादा भंग करो...सो किसी और काम का तो पता नही लेकिन कुछ भी बोलने का रिकार्ड बना चुकी इस पार्टी ने वही किया...जबकि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा जरुर होनी चाहिए।

अब साब कहते हैं कि महत्वकांक्षा तो ठीक है, लेकिन अतिमहत्वकांक्षी होना शायद नहीं है।लेकिन सत्ता का नशा ही कुछ ऐसा है जनाब...जो खाए बौराय जो ना खाए बौराए...सो दिल्ली के बाद पार्टी को अन्य राज्यों में भी विस्तार देने के लिए पार्टी ने काम शुरु कर दिया...ऐसे में पार्टी ने टारगेट किया पंजाब को...जहां से पार्टी के चार सांसद भी हैं...।इसलिए विस्तार की संभावनाएं वहीं ज्यादा थी...।

तो अपनी शानदार जमीन तैयार करने और अकाली-बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए केजरी वार फिर तैयार...।ऐसे भी पंजाब कहीं ना कहीं नशे की गिरफ्त में जकड़ा हुआ है...और तमाम मुद्दे हैं वहां,जिसे लपकने के लिए केजरी साब तैयार बैठे हैं...लेकिन जमीन तो दिल्ली से ही तैयार करनी थी...रणनीति यहीं बननी थी...इसलिए पहले पंजाब में रैली और फिर दिल्ली वापसी में आरोप की रणनीति के तहत हजारों झूठे आरोपों का पुलिंदा तैयार था...जिसे अमलीजामा आखिरकार पहनाया गया....स्याही कांड के रुप मे.....स्याही कांड हुआ नहीं कि आरोप लगाने के लिए, साजिश बताने के लिए, आम आदमी पार्टी के तमाम प्रवक्ता तैयार बैठे थे,और मीडिया भी।शाम होते-होते संडे होते हुए भी प्राइम टाइम जैसी गहमा गहमी शुरु हो चुकी थी..यानि आम आदमी पार्टी की पहली रणनीति कामयाब रही...।इस स्याही कांड की चमक और धमक पंजाब तक पहुंच चुकी थी...।

अंतत: दोस्तों तैयार रहें आप पंजाब में दिलचस्प चुनाव देखने के लिए...क्योंकि इस स्याही और थप्पड़ में बड़ा दम है....स्याही आप ने देख ली...थप्पड़ अभी बाकी है....यानि पंजाब की सत्ता का एक्जिट पोल तैयार करने की भूमिका बन चुकी है..।अब बस मीडिया को दिखाने की देर है...। यानि सत्ता का केजरी स्टाइल फिट है बास...!