Friday, 25 December 2015

अफगानिस्तान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन


संदीप कुमार मिश्र : मित्रों एक बात तो तय है कि आने वाले समय में देश के इतिहास में ही विदेशी सरजमीं पर सबसे ज्यादा सकारात्मक यात्रा करने का रिकार्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम रहेगा। जरा कल्पना किजिए विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद पीएम मोदी एक के बाद एक लगातार,धुंआदार विदेश की यात्राएं कर रहे हैं,और भारत की छवी को विश्व पटल पर नए ढ़ंग से गढ़ रहे हैं।भारत की शक्ति और सामर्थ्य का एहसास सबको करा हैं।

दरअसल रुस की यात्रा से लौटते वक्त अपने एक दिन के छोटे दौरे पर अफगानिस्तान पहुंचे पीएम मोदी ने अफगानिस्तान के नये संसद भवन का उद्घाटन किया।ये जानना बी आपके लिए बड़ा दिलचस्प होगा कि अपगानिस्तान के इस संसद भवन का निर्माण भारत ने ही करवाया है और इसमें एक ब्लॉक भारत के पूर्व सर्वप्रिय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा गया है।अफगान संसद की इस नई इमारत का निर्माण नौ करोड अमेरिकी डॉलर की लागत लगी है।

एक बड़े ही खुशनुमा माहौल में पीएम मोदी ने फीता काटकर अफगान संसद की नई इमारत का उद्घाटन किया,और फिर यहां के संसद को संबोधित करते हुए जलालुद्दीन रुमी का जिक्र किया और कहा कि यह अफगानिस्तान के सूफी शायर जलालउद्दीन रूमी की धरती है। उन्होंने कहा था कि 'अपने शब्दों को उठाओ', 'अपनी आवाज नहीं.' यह इस महान भूमि का ज्ञान है। वहीं अपनी आवाज बुलंद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बैलेट से बुलेट को हराना चाहिए। यही लोकतंत्र का मूलमंत्र है। यह परिसर भारत-अफगान दोस्ती का मिशाल है। यह संसद लोगों की उम्मीद पर खरा उतरेगी।

अफगान संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी की यादों अटल जी थे,उन्होंने कहा कि हमारे देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का आज जन्म दिन है।आपने उनके नाम पर संसद के एक ब्लॉक का नाम रखकर हमारा दिल जीत लिया है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान भारत का दोस्त है।हमारी साझेदारी से ग्रामीण समुदायों की महिलाओं और बच्चों को लाभ मिलेगा। दोनों देशों के आपसी सहयोग से स्कूलों, लघु सिंचाई, स्वास्थ्य केन्द्रों और अन्य कल्याणकारी कार्यो को आगे बढाया जाएगा।आपको बता दें कि भारत की मदद से अफगानिस्तान में सड़कों का निर्माण किया जा रहा है ।


पीएम मोदी वाकपटुता के धनी हैं,ये बात हर कोई जानता है।उन्होने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मोदी ने अफगान शहीदों के बच्चों को स्कॉलरशिप देने का एलान किया।मोदी ने कहा कि भारत ही अफगानिस्तान का सच्चा हमदर्द और दोस्त है लेकिन कुछ लोग हमारी दोस्ती से जलते हैं।ये कहने के पीछे निशाना किस देश पर था आप समझ सकते हैं।खैर अमिताभ बच्चन की फिल्‍म जंजीर में शेर खान यानी प्राण पर फिल्माये गए गाने 'यारी है ईमान मेरा...' का मोदी ने जिक्र किया और भारत-अफगान की दोस्ती को और प्रगाढ किया।निश्चित तौर पर मोदी की इस यात्रा से विश्व पटल पर बेहद शानदार और सकारात्मक छवी उभरकर सामने निकलकर आएगी।

मित्रों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अपनी अफगान यात्रा पर काबुल पहुंचे तो वहां के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मोदी का अपनी सरजमीं पर बड़े ही गर्मजोशी से स्वागत किया।जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल ने दिलकोशा पैलेस में नाश्ते के दौरान तमाम तरह की वार्ता की।

दोस्तों लगातार युद्ध से लड़ रहे अफगानिस्तान में भारत की मित्रता की मिसाल के तौर पर बनने वाली संसद का काम सन 2007 में शुरू हुआ था। इस इमारत को भारत की ओर से अफगानिस्तान को लोकतंत्र की प्रतीकात्मक भेंट भी करार दिया जा रहा है।दरअसल नवंबर 2011 में ही अफगानी संसद को बनकर तैयार होना था, लेकिन इसकी तिथि दो बार बढ़ानी पड़ी।आपको बता दें कि इसका डिजाइन मुगल और आधुनिक कला पर आधारित है।पीएम की यह यात्रा अफगानिस्तान को तीन रूसी हेलीकॉप्टर एमआई 25 गनशिप पहुंचाने के दो दिन बाद हो रही है। ये हेलीकॉप्टर मशीन गन, रॉकेट और ग्रेनेड लॉन्चरों से लैस हैं। देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की यह पहली काबुल यात्रा है, और मोदी से पहले 2011 में मनमोहन सिंह ने काबुल का दौरा किया था।

अंतत: शांति दूत भारत की छवी को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार प्रयास कर रहे है,जो काबिलेतारीफ है।उनकी विदेश नीति का स्वागत करना चाहिए,और उम्मीद करनी चाहिए कि आने वाले समय में देस बाह्य और आंतरीक दोनो रुप से सशक्त होगा।