Tuesday, 22 December 2015

दिल्ली में काम कम,ज्यादा जंग..!



संदीप कुमार मिश्र : देश की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज बीजेपी सरकार और राजधानी दिल्ली में सत्ता की चाभी थामें आप की सरकार।मतलब एक के पास देश की बागड़ोर है तो दूसरे क पास आंदोलनकारी राजधानी दिल्ली की सत्ता की कमान।जब धुरंधर दो अलग अलग पार्टीयों से हों तो अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने का संघर्ष होना स्वाभाविक है।जनहीत के कार्य रुक जाएं कोई बात नहीं,कामकाज का बंटाधार हो जाए कोई बात नहीं।मतलब सिर्फ इस बात से है कि झुकना नहीं है चाहे जो हो जाए,भले ही शब्दों की मर्यादा टूट जाए।

दरअसल दोस्तों आरोपों की राजनीति के दौर में किसी भी प्रकार की कोई लक्ष्मण रेखा निर्धारित नहीं है और ना ही बोलने का कोई पैमाना।आपको याद होगा कि किस प्रकार से केजरी बाबू और दिल्ली पुलिस में पिछले दिनो लगातार तीखी बहस होती रही है।केजरी साब की जुबान धारा प्रवाह किसी भी प्रकार का आरोप लगाने से गुरेज नहीं करती।इसका कारण शायद ये भी हो सकता है कि वो खुद को इकलौता देश का इमानदार शख्स,सीएम समझते हों।अब साब जिस प्रकार से उनकी बयानबाजी रही है उश आदार पर तो ये कहा जी जा सकता है।

लेकिन यहां पर हमें ये जरुर समझना चाहिए कि राजनेता बनने की डगर पर केजरीवाल साब की शुरुआत कैसे हुई।जी हां एक आंदोलनकारी के रुप में.ऐसे में गाहे बगाहे सत्ता तो मिल गई,केजरी साब सीएम भी बन गए लेकिन कहीं ना कहीं उनकी शैली वहीं आंदोलनकारी वाली ही है,जो उनके हावभाव से झलक जाती है।जिस प्रकार से केजरीवाल जी किसी भी तंत्र से टकरा जाते हैं और आरोपों से धिर जाते हैं उससे तो यही जाहिर होता है।

दोस्तों सबसे मजे कि बात ये है कि अरविंद केजरीवाल साब भ्रस्टाचार मुक्त भारत की कल्पना लेकर सत्ता पर काबिज हुए,लेकिन जब उनके ही एक खास अधिकारी पर आरोप लगे और CBI ने उनके खास अफ्सर के दफ्तर पर थापा मारा तो केजरी साब बिगड़ गए...और इतने बिगड़े कि शब्दों की मर्यादा भी भंग कर दी,वो भी ऐसी कि जैसे लगा ही नहीं कि सीएम हैं,वही आंदोलनकारी छवी,हावभाव,तमतमाया चेहरा,जिससे एक नेता की छवी कम और एक्टिविस्ट की छवी ज्यादा नजर आने लगी।खैर, अब ऐसा लगता है कि ये पूरी कहानी सीबीआई बनाम केजरीवाल में तब्दील हो चली है।


दोस्तों आपको याद होगा जब दिल्ली सचिवालय में CBI ने छापा मारा तो जनाब केजरीवाल ने एक के बाद एक ट्वीट की झड़ी लगा दी,और हर ट्वीट में आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर लगाया ।यहां तक कि केजरी साब ये भी नहीं चूके कि सीबीआई के ही किसी अधिकारी ने उन्हें बताया है कि जांच एजेंसी को यह निर्देश दिए गए हैं कि वो विरोधी पार्टियों को निशाने पर लें। यही नहीं जो नियंत्रण से बाहर जाने की कोशिश करें उनकी कहानी ही खत्म कर दी जाए।वाह रे केजरी साब।बड़े महान निकले आप तो।खैर इस विवादास्पद ट्वीट के बाद सीबीआई की बी भौंहे तन गई और CBI जनाब केजरीवाल से उस अधिकारी का नाम बताने को कहा,जिसका जवाब देना सायद केजरी बाबू के बस की बात नहीं थी। लेकिन इस सवाल के जवाब पर घिरते केजरी साब ही नजर आ रहे हैं।अब साब आपसे उम्मीद तो ऐसी नहीं थी लेकिन जिस प्रकार से आपने देस के पीएम पर आरोप लगाए उससे दो तें तो साप हो जाती है कि आप सियासत करने के लिए ही सियासत में आए हैं ना कि सेवा भाव से दिल्ली का विकास करने के लिए,और दूसरी आरोप लगाना आपका फैशन हो गया है अब और खास कर प्रधानमंत्री पर आरोप लगाकर आप अपनी छवी को राष्ट्रीय स्तर की सियासत पर गढ़ना चाहते हैं,जैसा कि आपने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान गढ़ी थी।ये अलग बात है कि लोकसभा के चुनाव परिणाम से आप गदगद नहीं हो पाए।

बहरहाल,देश जानता है कि किस प्रकार आपने(अरविंद केजरीवाल)पिछली बार जनलोकपाल के मुद्दे को लेकर सत्ता छोड़ दी थी,और राजनीतिक पंडित जिसे आपकी सबसे बड़ी भूल करार दे रहे थे।लेकिन आपके किस्मत के सितारे बुलंदियों पर थे और आपको दिल्ली की जनता ने एक और शानदार अवसर दे दिया।लेकिन क्या ऐसा अवसर साब आपको बार-बार मिलेगा ?


अंतत : जनाब  केजरीवाल साब आप बार-बार क्यों भ्रम पाल लेते हैं कि आप अब भी आंदोलनकारी ही है,अजी साब आप अब नेतागिरी कर रहे हैं,जहां बोलना कम और करना ज्यादा होता है।सियासत में लड़ने नही करने में यकीन किया जाता है।ऐसे भी आपकी जुबान पर किसी जमाने में सिस्टम को उखाड़ फेंकने की ही बात हुआ करती थी,और आपने सियासत भी तो इसीलिए शुरु की थी।ये पब्लिक है साब, अति प्राचीन और प्राचीन पार्टियों का क्या हश्र किया, आप तो जानते ही हैं और वो भी आप के लिए,जिसके पास ना तो अनुभव था ना ही क्षमता थी,और ना ही राजनीतिक समझ...।चुनाव में फिर जाना है या कुछ और सोच रहे हैं...या फिर एक बार फिर आंदोलन...!
(सभी फाईल फोटो,सौजन्य गुगल)