Sunday, 13 December 2015

अब तो भारत में भी दौड़ेगी बुलेट ट्रेन


संदीप कुमार मिश्र : वो दिन दूर नहीं जब भारत में बुलेट ट्रेन फर्राटा भरती हुई नजर आएगी।संभावनाओं के देश भारत पर विश्व की नजरें इस कदर टिकी हुई है कि हर कोई यहां पर पूंजीनिवेश का इच्छुक नजर आ रहा है। जिसका पीएम मोदी भी भरपूर लाभ उठाने से नहीं चूक रहे हैं।इसका ताजा और बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला राजधानी में जब जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ तमाम मसौदों पर हैदराबाद हाउस में हस्ताक्षर हुए। इस बेहद खास मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी का कहना था कि बीते एक साल में दोनों (भारत-जापान)देशों के संबंध में तेजी आई है। जापान हमारा सबसे अहम सहयोगी है।

अब दोनो देशों में हुए करार पर एक नजर डालें तो-
1-      भारत में पहला बुलेट ट्रेन नेटवर्क बनाने के लिए समझौते पर हुए हस्ताक्षर
2-      भारत और जापान के बीच असैन्य परमाणु उर्जा पर MoU
3-      रक्षा उपकरणों एवं प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ
4-      पीएम मोदी ने जापानी नागरिकों के लिए 1 मार्च 2016 से आगमन पर वीजा सुविधा का ऐलान किया।


दरअसल जो सबसे महत्वपूर्ण करार दोनो देशों के बीच हुआ वो था बुलेट ट्रेन पर करार।जिसपर लगभग  97,636 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आपको बता दें कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी के लिए बुलेट ट्रेन चलाने के लिए रेलवे प्रोजेक्ट की कुल लागत 97,636 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। जापान इस लागत के एक बड़े हिस्सा जो कि तकरीबन 79,000 करोड़ रुपये की धनराशि भारत को बतौर सॉफ्ट लोन देने जा रहा है और ये साफ्ट लोन भारत को 50 साल की लंबी अवधि में चुकाना है।इसमें शुरुआत के 15 साल तक कर्ज वापसी की जरूरत नहीं होगी और इस अवधि के लिए ब्याज की दर महज 0.1 फीसदी होगी।यानी कर्ज वापसी का सिलसिला कर्ज मिलने के 15 साल बाद ही शुरू होगा।

सबसे अहम बात है जो इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है वो ये कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को 7 साल में पूरा करने की बात भी दोनों देशों के करार में कही गई है।इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए शिन्कान्सेन तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी सहमति हुई है। भारत-जापान के बीच हुए बुलेट ट्रेन के करार के मुताबिक जापान भारत को टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर भी करेगा और इस ट्रेन को चलाने के लिए जरूरी ट्रेनिंग भी मुहैया कराएगा। 

जापान के पीएम शिंजो आबे ने बिजनेस लीडर्स फोरम को संबोधित करते हुए मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि 'नीतियों को लागू करने में पीएम मोदी की रफ्तार बुलेट ट्रेन जैसी ही है।
आपको बता दें कि शिजों आबे के साथ प्रेस को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि , ‘भारत के आर्थिक सपनों को आकार देने में जापान से अधिक बड़ा मित्र कोई नहीं है।उन्होंने आबे को एक निजी दोस्त और भारत-जापान साझेदारी का महान पैरोकारबताया।साथ ही मोदी की मेक इन इंडियापहल को अपना समर्थन जाहिर करते हुए जापान ने करीब 12 अरब डॉलर का एक कोष सृजित किया है जो जापानी कंपनियों को भारत में विनिर्माण के लिए दिया जाएगा। जापान ने भारत के लिए एक ओवरसीज डेवलपमेंट असिस्टेंस के तहत पांच अरब डालर की भी प्रतिबद्धता भी जतायी है।

प्रधानमंत्री मोदी और आबे के बीच वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा में सहयोग के लिए एक व्यापक आधार वाले आपसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।यह पहला अवसर था जब जापान ने एनपीटी (परमाणु हथियार अप्रसार संधि) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देश के साथ इस प्रकार के आपसी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।इसके अलावा दोनों पक्षों ने रक्षा उपकरणों और तकनीक के हस्तांतरण और गोपनीय सैन्य सूचना के संरक्षण के सुरक्षा उपायों के संबंध में भी दो समझौतों पर दस्तखत किए।दोनों नेताओं ने भारत और जापान दृष्टिपत्र 2025 :भारत। प्रशांत क्षेत्र तथा विश्व की शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की विशेष रणनीतिक और वैश्विक भागीदारीपर एक संयुक्त बयान भी जारी किया।

विश्व पटल पर आतंकवाद इस समय चिंता का सबब बना हुआ है।इसके लिए दोनों देशों के प्रमुखों ने सभी देशों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 तथा आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने संबंधी अन्य प्रासंगिक प्रस्तावों को लागू करने का आह्वान किया। साथ ही आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाहों और ढांचे को समाप्त करने, आतंकवादी नेटवर्क तथा वित्तीय चैनलों को ध्वस्त करने तथा आतंकवादियों की सीमा के आरपार आवाजाही को रोकने का भी आह्वान किया।दोनो नेताओं ने अपने अपने भू क्षेत्र से उत्पन्न अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से प्रभावी तरीके से निपटने की जरूरत को रेखांकित किया।इसके अलावा इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद का उभरता चरित्र आतंकवाद से मुकाबले में मजबूत अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की दरकार रखता है जिसमें सूचना तथा खुफिया सूचनाओं को साझा करना भी शामिल है ।

अंतत: इन तमाम सौदों मसौदों के अलावा भी दोनो देशों में कई करार हुए।जो जनहीत में हैं,अब देखना होगा भारत और जापान की बढ़ती नजदीकियों को असर विश्व पटल पर क्या पड़ता है खासकर चीन पर।खैर कहना गलत नहीं होगा कि मैन आफ एक्शन वाली छवी में मोदी की शुरुआत तो बेहद अच्छी है लेकिन किस हद तक वो इसमें कामयाब हो पाते हैं ये आने वाला समय बताएगा।बहरहाल उम्मीद करने में कोई बुराई नहीं है,इंतजार करीए बुलेट ट्रेन में सफर करने का,जिसप्रकार देश में मेट्रो के सपने को पूर्व की बाजपेयी सरकार ने पंख लगाये बैसे ही मोदी सरकार भी बुलेट की सवारी करवाने के लिए तत्पर नजर आ रही है।लेकिन एक बात और भी कहना जरुरी है कि विदेश नीतियों के साथ आंतरीक रुप से बहुत कुछ बदलने और करने की जरुरत है,जो आम आदमी के हीत में हो जैसे महंगाई...।।