Saturday, 12 December 2015

हिमांशु कालिया एक रीयल हीरो


संदीप कुमार मिश्र : कुछ ऐसा करके दिका कि लोग तुझे याद रखें,कल खेल में हम हों ना हों गर्दिश में तारे रहेंगे सदा।दोस्तों कहने को तो ये चंद लाइने हैं लेकिन जिंदगी को मंजिल देती कड़वी हकीकत हैं ये।ऐसे तो मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर देश में राजनीतिक दलों की उठापटक की गवाह लगातार बनती रही है दिल्ली औऱ दिल्ली के लोग।यहां तक कि दुर्घटना से घायल होकर सड़क पर ज़िंदग़ी औऱ मौत से जूझते औऱ उसे घेर कर खड़े तमाशबीनों की भीड़ भी यहां आम बात है।लेकिन इन सबसे अलग दिल्ली में ऐसे लोग भी हैं जो मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करने के लिए 24घंटे लगे रहते हैं। वह भी खुद अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर।अपने अमन-चैन तक को दांव पर लगा देते हैं ऐसे लोग। ऐसे ही एक शख्स हैं हिमांशु कालिया।

दरअसल दिल्ली के प्रतापनगर के वासुदेव नगर की गली नंबर दस में अपने कार्यालय से हिमांशु मौत से जूझ रहे गरीब लोगों को जीवन देने काम करते हैं।हिमांशु कालिया अपने संगठन सोसायटी फॉर शहीद भगत सिंह हेल्प एंड केअर के जरिए मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करते हैं वह भी मुफ्त। बड़ा सवाल उठता है कि आखिर अपनी कमाई को दूसरों की जान बचाने के लिए खर्च करने की बात हिमांशु के मन में कहां से आई।आखिर कौन सा था वो लम्हा जिसने बदल दिया हिमांशु का नजरिया।मित्रों हिमांशु की सोसायटी लोगों को खून,उन्हें एंबुलेंस औऱ घायलों को अस्पताल तथा मृतकों को अस्पताल से उनके घर तक पहुंचाने जैसी सेवाएं देती है।यह सिलसिला पिछले 17 सालों से लगातार जारी है।हालांकि 1997 में पहले वह लोगों की मदद करने के लिए निजी एंबुलेंस की सेवाएं लेते थे।लेकिन शादी के बाद से एक एंबुलेंस से शुरू की गई उनकी यह सेवा चार एंबुलेंस तक पहुंच गई है।इसके लिए उन्होंने लोगों के लिए बाकायदा हेल्प लाइन नंबर-09871031313,09212411006 और 01164731313 दिए हुए हैं।जनसेवा के लिए हिमांशु समय-समय पर रक्तदान शिविर भी लगाते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर जरूरतमंदों की मदद की जा सके
हिमांशु की इमानदारी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब लोगों की सहायता के लिए अन्य संस्थाओं और सरकारी तंत्र की मदद लेने की बात उनसे की जाती है तो उनका साफ कहना होता है कि आर्थिक सहायता देने के नाम पर सरकारी अधिकारी जो अपेक्षा और समझौते उनसे करवाना चाहते हैं,वह ऐसे किसी भी समझौते को करने के लिए तैयार नहीं। फिलहाल हिमांशु और उनकी पत्नी अधिक से अधिक लोगों का इंश्योरेंस करके अपनी इस संस्था जो जिलाए रखने में लगे हैं यहां तक कि उन्होंने टी.वी.सीरियलों और फिल्मों में काम करके अपनी आमदनी बढ़ाकर गरीब औऱ मौत से जूझ रहे लोगों को नया जीवन देने में पूरी शिद्दत के साथ जुटे हुए हैं।

कहते हैं घर में सुकून हो तो किसी की भी जिंदगी नर्क होते देर नहीं लगती।इस मामले में हिमांशु कालिया खुद को भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उनके परिवार ने कदम-कदम पर अपना प्यार और सहयोग दिया है।यहां तक खुद उनकी पत्नी जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस की चालक बनकर उनके काम में साथ निभाती हैं। हिमाशु की मां अमिता भी अपने बेटे के दूसरों की जान बचाने के जज़्बे को सलाम करती हैं।बेटे की यह समाज सेवा उनकी सारी परेशानियों और चिंताओं को दूर कर देती है।

वहीं हर पिता की चाहत होती है कि उनका बेटा बड़ा होकर उनके बुढ़ापे का सहारा बने लेकिन अनूप की ऐसी कोई इच्छा नहीं है हालांकि वह भी पर्व औऱ त्यौहार के मौके पर अपने बेटे को मिस करते हैं लेकिन यह सोच कर वह दिल को तसल्ली देते हैं कि लोगों का जीवन बचाना कहीं अधिक जरूरी है उनके बेटे के लिए लिहाजा उसकी कमी उन्हें ज्यादा देर तक नहीं सालती। यह घर-परिवार का असीम प्यार और निस्वार्थ सहयोग ही है जो हिमांशु औऱ उनकी सोसायटी को  उनका मकसद को पूरा करने में अपने कदम नहीं रुकने दे रहा है और वह बेफिक्र होकर अपनी सेवा को अंजाम दे पा रहे हैं।
यदि आप लोगों की सेवा करने के जज़्बे के साथ कोई काम करते हैं तो आपको उससे जुड़कर बिना किसी निजी लाभ की परवाह किए ऐसे ही लोगों मिल ही जाते हैंकम से कम शहीद भगत सिंह हेल्प एंड केअर में पिछले कई सालों से काम कर रहे लोगों को देखकर ऐसा ही लगता है।हिमांशु की इस सोसायटी में काम कर रहे लोगों का बस यही कहना है कि चाहे जैसे भी हो मानव सेवा सबसे जरुरी है,जिसके लिए यह सोसायटी लगातार पिछले 14 सालों से बिना किसी रूकावट के लोगों की सेवा करती रही है।अपने ही मोहल्ले से 24 घंटे चलने वाली एंबुलेंस आपातकालीन सेवा के चलते भले ही गहमागहमी बनी रहती हो। लेकिन लोगों को इससे परेशानी नहीं बल्कि कालिया परिवार के इस काम से गर्व ही महसूस होता है।
मरीजों और घायलों के लिए जाने वाली आपातकालीन एंबुलेंस का हूटर और आवाजाही दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी लगी रहती है।क्योंकि वासुदेव नगर की गली नंबर दस के मकान नंबर 79 से ही सोसायटी फॉर शहीद भगत सिंह हेल्प एंड केअर की मुसीबतज़दा गरीब लोगों की सेवा का कामकाज चलता है। हालांकि इससे वक्त बेवक्त लोगों की और मोहल्ले की शांति में जरूर खलल पड़ता है। लेकिन लोगों को इससे परेशानी की जगह सहूलियत ही अधिक मिलती है। लोगों को हिमांशु कालिया के इस सेवा भाव को लेकर गर्व महसूस होता है वह उनकी औऱ उनकी संस्था की तारीफ करते नहीं थकते।क्योंकि उन्हें लगता है कि जब भी कभी एंबुलेंस यहां से रात में निकलती हैं तो जरूर किसी गरीब को जीवनदान ही देने की कोशिश करेगी।
अंतत: हालांकि दिल्ली जैसे शहर में निस्वार्थ भाव से जरूरत मंदों और घायलों की सेवा करने का बीड़ा उठाए सोसायटी फॉर शहीद भगत सिंह हेल्प एण्ड केयर के मुखिया अपना सबकुछ न्यौछावर करके अपने मकसद में लगे हुए हैं लेकिन आय के सीमित संसाधनों और सीमित ढांचे की मजबूरी उन्हें कब तक अपने पथ पर चलाने में सफल रहेगी नहीं कहा जा सकता।खैर दोस्तों हिमांशु कालिया ने जो मानव सेवा का बीड़ा उठाया है उसे सलाम।

ये जरुरू नहीं कि सजदें हों, और होठों पर कोई नाम आए।
जिंदगी खुद एक इबादत है, बशर्ते किसी के काम आए।।